एचटी और नईदुनिया जैसे बड़े अखबार भोपाल की प्राइम लोकेशन पर बंगला कबाड़े हुए हैं!

मध्यप्रदेश की साहसिक महिला राजपत्रित अधिकारी ने बरसों धीरज रखने के बाद अपने दाम्पत्य जीवन के कृष्ण पक्ष को सकुचाते हुए सार्वजनिक किया है. इससे संबंधित पोस्ट में जहाँ साहित्यिक गतिविधियों से जुड़े पति के भटकने का सच है वहीं अनजाने ही पत्रकार कोटे के सरकारी मकानों का काला सच एक बार फिर सामने आ गया है. मैं इस काले सच को हाईकोर्ट में जनहित याचिका के मार्फ़त उजागर कर चुका हूं.

धन्ना सेठ बिड़ला का अखबार हिन्दुस्तान टाइम्स और यूपी के मीडिया मुग़ल जागरण ग्रुप का अख़बार नईदुनिया ऑफिस के नाम पर भोपाल की प्राइम लोकेशन पर बंगला कबाड़े हुए हैं. जागरण ग्रुप ने यह अख़बार अभय छजलानी से खरीदा है तो मान लीजिए की सरकारी बँगला भी इस सौदे का हिस्सा रहा होगा. इस मामले में बेशर्मी की सारी हदें राष्ट्रीय न्यूज़ एजेंसी यूएनआई ने पार की हैं. इसका ऑफिस पचास सालों से सरकारी बंगले में लग रहा है. एजेंसी ने खुद के ऑफिस के लिए सरकार से प्रेस काम्प्लेक्स में कौड़ियों के भाव जमीन कबाड़ी और कई मंजिल बिल्डिंग भी तान दी. फिर एजेंसी ने यह बिल्डिंग बेच खाई और ऑफिस शान के साथ सरकारी बंगले में लग रहा है. वैसे प्रेस कोटे के मकानों का ऑफिस के लिए आवंटन समझ से परे है.

अब सरकारों से उम्मीद मत करिएगा की वह इस गोरखधंधे का खात्मा करेगी. इसके उलट वे तो प्रेस पूल की आड़ लेकर पार्टी की संस्थाओं और अपने कृपापात्र नेताओं को बंगले एलाट करती रही हैं और रहेंगी. कांग्रेस के दिग्गज नेता स्वर्गीय ललित श्रीवास्तव,महेंद्रसिंह चौहान,किशन पंत और भाजपा के कद्दावर नेता कैलाश सारंग को बाहैसियत पत्रकार सरकारी बंगले मिलते रहे हैं.तीन साल पहले मेरी याचिका पर दी गई जानकारी के मुताबिक ललित श्रीवास्तव के नाम तब भी बँगला एलाट था जबकि उनका निधन सात आठ बरस पहले हो चुका है..? सब दूर आनंद ही आनंद है.

xxx

एक पत्रकार महोदय को सरकारी आवास आवंटित है जो अन्यत्र रहते हैं और सरकारी आवास को इन्होंने एक महिला को किराये पर दे रखा है. यह महिला इस एफ टाइप के बड़े आवास में मजे से अकेले रहती है और शासकीय कार्यालयों में सामान सप्लाई का बिजनेस करती है. इसके पहले ये एक साहित्यिक संस्थान को आवंटित आवास में निवास करती थी. फिर इन्होने संस्थान के निदेशक के सहयोग से अपना बिजनेस शुरू किया. इस संस्थान के निदेशक ने इस महिला के चक्कर में पड़कर न केवल संस्थान की प्रगति और विकास पर ध्यान देना बंद कर दिया बल्कि अपने परिवार, पत्नी और बच्चों को अपमानित, प्रताड़ित करना आरंभ कर दिया पत्नी और परिवार के सभी सदस्यों के समझाने पर इन्होंने अपने परिवार से संबंध खत्म कर लिये जबकि इस महिला से संबंध यथावत हैं.

भोपाल के पत्रकार श्रीप्रकाश दीक्षित की रिपोर्ट.

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

गाजियाबाद में निजी फ्लैट पर टाइम्स ऑफ इंडिया का जबरन कब्जा, मालिक का अपहरण कराया, पीएम से गुहार

गाजियाबाद (उ.प्र.) : बड़े अखबार घराने भी अब किस तरह माफिया तत्वों की तरह अपराध जगत में घुस चुके हैं, इसका एक ताजा वाकया संज्ञान में आया है। टाइम्स ऑफ इंडिया ने राजेंद्रनगर (साहिबाबाद) सेक्टर-2 में एस के ठाकुर पुत्र जे एन ठाकुर के आरएच-47 एचआईजी डुपलेक्स फ्लैट पर कब्जा कर लिया है। ठाकुर ने अपना फ्लैट खाली कराने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से गुहार लगाई है। 

सबसे उपर भड़ास को लिखा गया पत्र. नीचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखे गए प्रार्थनापत्र की छाया-प्रति

पीएम को लिखे प्रार्थना पत्र में ठाकुर ने बताया है कि उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा सरकारी नीलामी के तहत वर्ष 1992 में साहिबाबाद के इंडस्ट्रियल स्टेट स्थित 13/2 साइट-4 की एक बंद (sick) यूनिट को खरीदा था। उन्होंने 17 जुलाई 1992 को उसकी अपने नाम रजिस्ट्री करा ली थी। वह संपत्ति आज भी उनके नाम से रजिस्टर्ड है। पूरी सरकारी-प्रशासनिक कार्यवाही पूरी करते हुए उन्हें उस संपत्ति पर कब्जा भी दे दिया गया। कुछ समय बाद पड़ोस की यूनिट के कब्जाधारी टाइम्स ऑफ इंडिया प्रबंधन के मालिक विनीत जैन, समीर जैन और इंदु जैन ने गैरकानूनी तरीके से जबरन ठाकुर की संपत्ति पर कब्जा कर लिया। 

ठाकुर ने पीएम को लिखी चिट्ठी में आगे बताया है कि कब्जा करने के बाद टाइम्स ऑफ इंडिया प्रबंधन उसे बेचने के लिए उन पर दबाव डालने लगा। बेचने से इनकार कर देने पर वह अपराधी तत्वों से उनका उत्पीड़न कराने लगा। कुछ दिन बाद उनका अपहरण करा लिया और सारे कागजात जबरन उनसे ले लिए गए। टाइम्स आफ इंडिया के गुंडे ठाकुर से उनके विजया बैंक, विज्ञान विहार के चेक भी छीन ले गए। उसके बाद गुंडे उनकी हत्या करने की कोशिश करने लगे। संयोग से किसी तरह उनकी और उनके परिवार वालो की जान बच गई। गुंडे उन्हें चेतावनी दे गए कि आइंदा उस मौके पर कभी दिखे तो तुम्हारे समेत तेरे परिवार का सफाया कर दिया जाएगा। 

ठाकुर के मुताबिक वह पिछले 22 वर्षों से अपने हक के लिए लड़ रहे हैं। जब उन्होंने अब फिर से अपनी आवाज सार्वजनिक की है तो उन्हें वे गुंडे फिर जान लेने की धमकियां देने लगे हैं। जब वह स्थानीय पुलिस के पास सुरक्षा की गुहार लगा जाने जाते हैं तो उल्टे उन्हें ही फटकार कर भगा दिया जाता है। ठाकुर ने बताया है कि पूरे घटनाक्रम से उन्होंने सीबीआई को भी अवगत करा रखा है, जो डायरी नंबर-3580-सी, दिनांक 05.11.14, सीबीआई हेडक्वार्टर में दर्ज है।  

ठाकुर ने पीएम से गुहार लगाई है कि कब्जाधारी टाइम्स ऑफ इंडिया प्रबंधन के मालिक विनीत जैन, समीर जैन और इंदु जैन के गुंडों से उनकी रक्षा करते हुए उनकी संपत्ति को कब्जा-मुक्त कराया जाए। ठाकुर ने लिखा है कि टाइम्स ऑफ इंडिया ग्रुप (बीनेट एंड कोलमेन कंपनी लिमिटेड) की माफियागिरी के वे शिकार हैं। उन्हें लगातार धमकियां मिल रही हैं कि समझौता कर लो और जमीन पर अपना हक छोड़ दो। उन्हें तीन पर अगवा कराया जा चुका है। संपत्ति के सारे जरूरी कागजात उनके पास हैं। उन्हें डर है कि टाइम्स ऑफ इंडिया प्रबंधन जाली कागजातों के माध्य से उनकी संपत्ति पर मालिकाना हक न प्राप्त कर ले। 

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

ऋण अदा न करने पर नागार्जुन के अन्नपूर्णा स्टूडियोज़ पर बैंकों का कब्जा

मुंबई : तेलुगू अभिनेता नागार्जुन और उनके परिवार के स्वामित्व वाले अन्नपूर्णा स्टूडियोज़ को सार्वजनिक क्षेत्र की दो बैंकों ने अपने कब्ज़े में ले लिया है। स्टार इंडिया, प्रसारण कंपनी मा टीवी के अधिग्रहण के लिए सहमत हो गया है। 

मीडिया सूत्रों का कहना है कि अन्नपूर्णा स्टूडियोज़ को आंध्रा बैंक और इंडियन बैंक को 62 करोड़ रुपए अदा करने थे। कर्ज नहीं चुकाने के कारण दोनों बैंकों ने इमारतों और अन्य भूमि सहित अन्नपूर्णा स्टूडियोज़ की पूरी संपत्ति पर कब्ज़ा कर लिया है। बैंकों को ऋण वसूली न्यायाधिकरण से अनुकूल फैसला मिला है। बैंकों ने 20 मार्च को अन्नपूर्णा स्टूडियोज़ की 7.25 एकड़ जमीन पर कब्ज़ा कर लिया। 

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

यूपी में जंगलराज : MBSC ग्रुप के बिल्डर को अपनी जमीन औने-पौने दाम में नहीं बेचने पर जान के लाले

अमिताभ ठाकुर


(आईपीएस अफसर अमिताभ ठाकुर ने अपनी जनपक्षधरता और जनसक्रियता से उत्तर प्रदेश पुलिस विभाग में एक क्रांति ला दी है. आमतौर पर यूपी पुलिस विभाग के अफसर सत्ता के दबाव और सत्ता के इशारे पर संचालित होते हैं. लेकिन अमिताभ ठाकुर किसी भी जेनुइन मामले को बिना भय उठाते हैं भले ही उससे सीधे सीधे सत्ता के आका लोग निशाने पर आते हों. ऐसे ही एक मामले में आज अमिताभ ठाकुर ने पीड़ित व्यक्ति को न्याय दिलाने के लिए मुहिम शुरू की. पढ़िए इस नए प्रकरण की कहानी उन्हीं की जुबानी.  -एडिटर, भड़ास4मीडिया)


आज मैंने एसएसपी, लखनऊ यशस्वी यादव से मुलाकात कर मिर्जापुर, थाना गोसाईंगंज में एमबीएससी ग्रुप के लोगों के आपराधिक कृत्यों तथा उस गांव के पोसलाल पुत्र परीदीन की जमीन को जबरदस्ती खरीदने के प्रयास के बारे में शिकायत दिया. एसएसपी ने एसओ गोसाईंगंज को तत्काल मामले में एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए. शिकायत के अनुसार एमबीएससी ग्रुप ने बीएससी होम्स नाम से लगभग 170 लोगों से बुकिंग के नाम पर करोड़ो रूपये ले भी लिए हैं जबकि अभी उसके पास न तो आवश्यक जमीन है और न ही उसका नक्शा एलडीए से स्वीकृत है.

इस कंपनी के चेयरमैन अखण्ड प्रताप सिंह, उनके भाई ग्रुप डायरेक्टर विष्णु सिंह ने अन्य लोगों के साथ दूसरों की जमीनों पर जबरिया बोर्ड लगा लिया है और गुंडई के बल पर गरीब लोगों की जमीन बहुत कम दाम में खरीदने की कोशिश कर रहे हैं. इन लोगों ने पोसलाल को अपनी 5 बीघा पुश्तैनी जमीन बहुत ही कम दाम में बेचने का दबाव डाला और मना करने पर 12 दिसंबर 2014 को उन्हें जबरन पकड़कर  रजिस्ट्री कराने मोहनलालगंज तहसील ले गये जहां से वे किसी तरह निकल पाए.

पुनः 16 दिसंबर को दिन के 12 बजे ये पोसलाल को गोंसाईगंज कस्बे से हथियारों के बल पर अगवा कर अर्जुनगंज में अखण्ड प्रताप सिंह के घर ले आये जहां उसे यातनायें दी गयी. जब बात फ़ैल गयी तो पुलिस हरकत में आई और वे अपने घर आ सके. रात में भी उनके घर के अन्दर और बाहर पहरा रहा जहां से वे मेरे मित्र अमेरिका में रहने वाले अजय मिश्रा की मदद से निकल सके. पोसलाल का आरोप है कि अहमामऊ चौकी के कुछ पुलिसवाले भी इसमें शामिल हैं. इन लोगों ने 17 दिसंबर को गोसाईगंज थाने में तहरीर दी पर कोई कार्यवाही नहीं हुई. आज हमने एसएसपी आवास जा कर एफआईआर दर्ज कराने और इनकी सुरक्षा करने के लिए प्रार्थनापत्र दिया है जिसपर उन्होंने तत्काल कार्यवाही के निर्देश दिए हैं.

ये है एसएसपी लखनऊ को दिया गया प्रार्थनापत्र…

सेवा में,
एसएसपी,
लखनऊ

विषय- ग्राम मिर्जापुर, पो-अहमामऊ, थाना गोसाईंगंज,  लखनऊ में एमबीएससी ग्रुप और और उसके पदाधिकारियों द्वारा किये जा रहे भारी आपराधिक अनियमितता तथा श्री पोसलाल, पुत्र परीदीन, निवासी-ग्राम-मिर्जापुर के अपहरण, उनकी जमीन पर जबरदस्ती कब्जा करने और उन्हें जान-माल की धमकी देने के सम्बन्ध में एफआईआर दर्ज कर कठोर विधिक कार्यवाही किये जाने विषयक

महोदय,

निवेदन है कि मेरे एक मित्र श्री अजय मिश्रा पुत्र श्री आरके मिश्रा, निवासी-बी-2/52, जानकीपुरम्, सेक्टर-एफ, लखनऊ, जो आमतौर पर अमेरिका में रहते हैं और वर्तमान में अपने माता-पिता से मिलने लखनऊ आये हैं, ने कल दिनांक 01/01/2015 को श्री पोसलाल, पुत्र परीदीन, निवासी-ग्राम-मिर्जापुर, थाना गोसाईंगंज के साथ मुझसे मिलकर एक बहुत ही गंभीर प्रकरण के सम्बन्ध में बताया. श्री मिश्रा ने बताया कि एमबीएससी ग्रुप/बीएससी होम्स नामक एक कथित कंपनी के द्वारा ग्राम मिर्जापुर और उसके आस-पास के इलाके में भारी आपराधिक अनियमितता की जा रही है.

अभिलेखों के अनुसार इसका ग्रुप कॉर्पोरेट ऑफिस निकट निर्वाण प्रोजेक्ट ऑफिस, निर्वाण सिटी, सेक्टर 49-50, गुडगाँव 122002, हरियाणा तथा रीजनल ऑफिस ए–3/113, साईं वाटिका काम्प्लेक्स, विभूति खंड, गोमतीनगर, लखनऊ है. साथ ही टेलीफैक्स नंबर +91 124 4271405, कस्टमर केयर नंबर  +91 522 3199595, ईमेल info@mbscgroup.in, अन्य संपर्क नंबर 9336759595, 9336659595 हैं.

श्री मिश्रा ने बताया कि इस कंपनी के चेयरमैन श्री अखण्ड प्रताप सिंह, उनके भाई श्री विष्णु सिंह, ग्रुप डायरेक्टर, पुत्रगण श्री विमल सिंह तथा अन्य कई सारे लोग जैसे श्री राजन सिंह, राजन शुक्ला, कमलेश यादव, शिवनाम पुत्र राजाराम आदि द्वारा स्वयं को एक हाउसिंग कम्पनी बताते हुए ग्राम मिर्जापुर और आसपास में बिना कोई जमीन खरीदे ही दूसरों की जमीनों पर जबरिया हथियारों के बल पर कब्जा करके अपना बोर्ड जबरदस्ती लगाकर तमाम लोगों को प्लाट/मकान/फ्लैट देने के नाम पर खुले आम धांधली कर रहे हैं.

श्री मिश्रा के अनुसार इन लोगों ने बिना कोई जमीन अपने पास हुए ही दूसरे की जमीनों पर अपना बोर्ड लगा कर स्वयं को बिल्डर घोषित कर लोगों को फ्लैट/प्लाट आदि के लिए फंसाना शुरू कर दिया है. इसके लिए इन लोगों ने अपना एक वेबसाइट (www.mbscgroup.in) भी खोल रखा है. इसके अलावा इन्होंने पूरे शहर में बड़े बड़े चकाचैंध वाले बोर्ड लगा रखे हैं. इन्होंने कथित रूप से इस योजना की शुरूआत बताने के नाम पर होटल ताज में एक भारी भरकम पार्टी भी की. सारांशतः यह लोग हर प्रकार से लोगों को बरगला कर और लुभाकर बिना जमीन हुए ही उन्हें प्लाट/फ्लैट्स आदि बेच दे रहे हैं. बताया गया कि इन लोगों ने अपने काफी भव्य बुकलेट/पम्फलेट भी बना रखे हैं जिसमें अनगिनत फर्जी और झूठे तथ्य लिखे हुए हैं. इसमें खासकर बिना जमीन हुए जमीन का मालिक बताने के अलावा बिना लखनऊ विकास प्राधिकरण से नक्शा स्वीकृत कराये ही कई प्रकार के भविष्य में बनाये जाने वाले बिल्डिंगों के नक्शे भी लगाये गये हैं जबकि बिना एलडीए के नक्शा स्वीकृत हुए इन्हें यह अधिकार नहीं था कि वे इस प्रकार से बिल्डिंग के नक्शे दिखाकर लोगों को बरगलायें और बिना नक्शा और प्रोजेक्ट स्वीकृत हुए तमाम लोगों से बिल्डिंग/फ्लैट/प्लाट के लिये लोगों से बुकिंग लें.

श्री मिश्रा के अनुसार इन लोगों ने अब तक लगभग 170 लोगों से बुकिंग के नाम पर करोड़ो रूपये ले लिये हैं जिन्हें न मालूम कब कोई भी सम्पत्ति मिलेगी क्योंकि इन लोगों के पास न तो जमीन है और न ही एलडीए द्वारा उस पर निर्माण की स्वीकृति. 

उन्होंने बताया कि इन लोगों ने ग्राम मिर्जापुर में अनुसूचित जाति के तमाम गरीब लोगों की जमीनों पर हथियारों और दबंगई के बल पर भौतिक कब्जा कर अपनी कम्पनी का बोर्ड लगा दिया है और उस इलाके में अपने तमाम हथियार बंद लोगों को भी छोड़ रखा है जो जमीन के असली मालिक गरीब लोगों को डरा धमका कर रखते हैं और ये लोग इन्हीं बोर्डों और इन्ही जमीनों को गलत तरीके से अपना बताकर देश विदेश के लोगों को प्लाट/फ्लैट्स के नाम पर आये दिन ठग रहे हैं.

श्री मिश्रा के साथ आये श्री पोसलाल पुत्र श्री परिदीन, जो अनुसूचित जाति के हैं, पढ़े-लिखे तक नहीं हैं और देखने से ही अत्यंत ही निर्धन दिख जाते हैं, ने श्री अखंड प्रताप सिंह तथा अन्य व्यक्तियों द्वारा उनके साथ किये जा रहे आपराधिक कृत्यों का विस्तार से विवरण बताया. उन्होंने बताया कि उनके और उनके भाईयों की पुश्तैनी जमीन खसरा सं0-929, 939, 940 कुल रकबा 5 बीघा है. इस जमीन पर श्री अखण्ड प्रताप सिंह आदि द्वारा जबरन कब्जा करने तथा उसका बैनाम करने हेतु प्रार्थी व उसके परिवार को जान से मारने की धमकी दी जा रही है.

उन्होंने बताया कि यह जमीन समय के साथ सड़क पर आ जाने के कारण काफी महत्वपूर्ण हो गयी है लेकिन उनकी जमीन पर एमबीएससी ग्रुप्स/बीएससी होम्स वालों ने बिना उन लोगों की अनुमति लिये उनकी इच्छा के खिलाफ जबरिया बलपूर्वक अपना बोर्ड लगा लिया है. साथ ही श्री अखण्ड प्रताप सिंह, श्री विष्णु सिंह पुत्रगण श्री विमल सिंह तथा उनके साथी श्री कमलेश यादव (पुत्र श्री हरीप्रसाद), श्री शिवनाम (पुत्र श्री राजाराम), श्री राजन सिंह, श्री राजन शुक्ला समेत कुछ लोग उनसे लगातार यह जमीन बेचने का दबाव डालते रहे हैं. चूंकि एक तो इन लोगों की शोहरत अच्छी नहीं है और दूसरे इन लोगों ने बहुत ही कम पैसा देने की बात कही थी और श्री पोसलाल को यह भी भरोसा नहीं है कि जितना पैसा वे कह रहे हैं उतना भी यह देंगे या नहीं देंगे इसलिये उन्होंने लगातार इन्हें अपनी जमीन देने से मना किया है.

श्री पोसलाल के मना करने के बाद भी ये लोग लगातार दबाव डालते रहे हैं कि उन्हें जमीन बेच दें अथवा उनकी हत्या कर दी जायेगी.  कई बार लोग मेरे घर पर हथियार के साथ आयें हैं और उन्होंने इस प्रकार की धमकी दी है. अत्यंत कष्ट का विषय है कि श्री पोसलाल के अनुसार श्री अखंड प्रताप सिंह आदि के इन कार्यों में स्थानीय पुलिस चौकी और गोसाईंगंज थाने के कुछ लोग भी खुल कर उनका समर्थन और सहयोग कर रहे हैं जो न सिर्फ कई बार स्वयं इन हथियारबंद लोगों के साथ श्री पोसलाल को धमकी देने आये बल्कि श्री पोसलाल के बार-बार गुहार लगाने के बाद भी कोई कार्यवाही नहीं कर रहे हैं जिसमे पुलिस चौकी अहमामऊ के श्री तिवारी का नाम विशेष रूप से बताया गया है.

श्री पोसलाल के अनुसार दिनांक 12/12/ 2014 को उन्हें जबरन पकड़कर वे लोग हथियारबंद लोगों की सहायता से कचहरी, मोहनलालगंज ले गये और वहीं के वहीं बिना पैसा दिये बैनामा कराने के लिये दबाव डालने लगे किन्तु वे बड़ी मुश्किल से किसी तरह से वहां से भागने में सफल रहे. पुनः दिनांक 16/12/2014 को दिन के 12 बजे श्री अखण्ड प्रताप सिंह के लोगों ने श्री पोसलाल को गोंसाईगंज कस्बे से हथियारों के बल पर अगवा कर लिया और एक चार पहिया गाड़ी में डालकर श्री अखण्ड प्रताप सिंह के घर ले आये.  प्रार्थी को अर्जुनगंज में श्री अखण्ड प्रताप सिंह के घर ले जाकर यातनायें दी गयी और बैनामा करने हेतु बुरी तरह डराया धमकाया गया, उन्हें रात दस बजे तक बंधक बनाकर रखा गया. इसी बीच जब बात चारों ओर फ़ैल गयी तो पुलिस हरकत में आई और तब जाकर वे अपने घर आ सके.

श्री पोसलाल ने मुझे बताया कि घर पर भी रात्रि में चारों तरफ और घर के अंदर हथियारबंद लोगों का पहरा लगाया गया था और उन्हें यह कहा गया था कि सुबह होते ही वे जाकर तहसील में रजिस्ट्री कर दें, बैनामा न करने पर जान से मारने की धमकी दी गई. वे किसी तरह श्री मिश्रा की मदद से वहां से जान बचा कर भाग सके. उनकी बहन सुश्री गीता रावत और बहनोई श्री सुखदेव रावत को भी प्रताडि़त किया गया और धमकाया गया.

श्री पोसलाल इस घटना की शिकायत करने दिनांक 17/12/2014 को गोसाईगंज थाने गए. उन्होंने अपने प्रार्थनापत्र में पुलिसवालों की भूमिका का भी उल्लेख किया था जिसमे ख़ास कर श्री तिवारी का जिक्र था. थाना इंचार्ज श्री विनोद यादव ने पुलिस वालों का नाम काट कर दुबारा तहरीर लिखवाया और आवश्वासन दिया कि उनका एफआईआर दर्ज हो जाएगा पर फिर भी अब तक कोई एफआईआर दर्ज नहीं हुआ है. आज स्थिति यह है कि श्री अखण्ड प्रताप सिंह को जमीन बेचने से मना करने के कारण न सिर्फ दो बार श्री पोसलाल को अगवा किया जा चुका है बल्कि इस समय भी उन्हें अपनी जान का भारी खतरा बना हुए है. वर्तमान में वे श्री अजय मिश्र के आवास पर अपनी स्वेच्छा से रह रहे हैं पर उन्हें भारी आशंका है कि जैसे ही वे गाँव आयेंगे उनकी हत्या कर दी जायेगी.

अतः आपसे अनुरोध है कि इस अत्यंत गंभीर प्रकरण में एफआईआर दर्ज करने तथा अगवा कर धमकी देने वाले लोगों के विरूद्ध कार्यवाही करने तथा श्री अजय मिश्रा और श्री पोसलाल के जान माल की सुरक्षा करने हेतु कठोर आवश्यक कार्यवाही करने का कष्ट करें. 

पत्र संख्या-AT/Complaint/46                                                               
दिनांक- 02/01/2015
भवदीय,                                                                                                           
(अमिताभ ठाकुर)
5/426, विराम खंड,
गोमती नगर, लखनऊ
# 94155-34526
amitabhthakurlko@gmail.com

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

और मीडियाकर्मियों ने अपने हिस्से की स्क्रीन पर कब्जा जमा लिया….

Vineet Kumar : p7 न्यूज चैनल बंद हो गया. ये वही न्यूज चैनल है जिसने लांचिंग में अपने एंकरों से रैम्प पर नुमाईश करवायी, शोपीस एंकरिंग को बढ़ावा दिया. पिछले दिनों इसी ग्रुप की पत्रिका बिंदिया और शुक्रवार के बंद हो जाने पर बेहद जरूर सरोकारी मंच के खत्म होने का स्यापा आपने देखा था. पत्रिका सहित ये चैनल क्यों बंद हो गया, ये बार-बार बताने की जरूरत इसलिए पड़ती है कि एक वेंचर बंद होने के वाबजूद दूसरे के बने रहने के दावे मैनेजमेंट की तरफ से ताल ठोंककर दिए जाते हैं..लेकिन सच आपसे और हमसे छिपा नहीं है.

दरअसल ये पूरी कंपनी ही फर्जीवाड़े मामले में बुरी तरह फंसी हुई है. लेकिन इन सबके बीच सबसे दिलचस्प और सराहनीय पहलू है कि इसी चैनल के मीडियाकर्मी ने अंदरखाने की वो खबर चला दी जो आप और हम सिर्फ टेक्सट की शक्ल में जान पाते, स्क्रीन की खबर की शक्ल में नहीं..अभी हम हरियाणा में मीडियाकर्मियों पर हुए हमले को लेकर उसकी हालत पर बात कर ही रहे हैं कि ये खबर थोड़ी राहत देती है कि कुछ नहीं तो उन मीडियाकर्मियों ने एक रास्ता तो निकाल ही लिया है कि जब नौकरी जानी ही है तो जाए लेकिन अपने हिस्से की स्क्रीन लेकर जाएंगे, खुद से जुड़ी खबर तो चलाएंगे ही..बेहद जरूरी है ऐसा करना.

युवा मीडिया विश्लेषक विनीत कुमार के फेसबुक वॉल से.

मूल खबर…

‘पी7 न्यूज’ के निदेशक केसर सिंह को हड़ताली कर्मियों ने बंधक बनाया, चैनल पर चला दी सेलरी संकट की खबर

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

हिन्दी दैनिक जन माध्यम के मुख्य सम्पादक और पूर्व आईपीएस मंजूर अहमद का फर्जीवाड़ा

: जन माध्यम के तीन संस्करण चलाते हैं मंजूर अहमद : दूसरे की जमीन को अपने गुर्गे के जरिए बेचा, खुद बने गवाह : ताला तोड़कर अपने पुत्र के मकान पर भी कराया कब्जा, पुलिस नहीं कर रही मुकदमा दर्ज : लखनऊ, पटना व मेरठ से प्रकाशित होने वाले हिन्दी दैनिक समाचार पत्र जन माध्यम मुख्य सम्पादक, 1967 बैच के सेवानिवृत्त आई0पी0एस0 अधिकारी एवं लखनऊ के पूर्व मेयर एवं विधायक प्रत्याशी प्रो0 मंजूर अहमद पर अपने गुर्गे के जरिए दूसरे की जमीन को बेचने व खुद गवाह बनने का सनसनीखेज मामला प्रकाश में आया है। प्रो0 मंजूर अहमद के इस फर्जीवाड़े का खुलासा खुद उनके पुत्र जमाल अहमद ने किया।

जमाल अहमद ने बताया कि अपनी नौकरी के दौरान मंजूर अहमद ने अरबों रूपयों की नामी-बेनामी सम्पत्ति बनाई है। लखनऊ के नजदीक जनपद बाराबंकी, कुर्सी रोड के ग्राम गुग्गौर में मंजूर अहमद ने अपने सगे भांजे मों0 निजामुद्दीन पुत्र एनुलहक निवासी खालिसपुर जिला सीवान बिहार, जो ड्रग्स बेचने का धंधा करते थे, कई साल तिहाड़ जेल में बंद रहे, के नाम ग्राम गुग्गौर में गाटा सं0 385 क्षेत्रफल 1.481 हेक्टेयर भूमि खरीदी। मों0 निजामुद्दीन का लोकल पता सी-189, इन्दिरानगर लखनऊ यानि मंजूर अहमद के अपने घर का पता लिखाया। इसी बेशकीमती करोड़ों-अरबों  की जमीन पर अब प्लाटिंग की जा रही है। इस जमीन को दिनांक 27.08.2013 को बही सं0 1, जिल्द सं0 3099, पृष्ठ सं0 347 से 400 क्रमांक 5881 पर रजिस्टर्ड किया गया है।

श्री मंजूर अहमद ने इस जमीन को धोखे से बेचा है एवं जालसाजी की है, जिस व्यक्ति को मंजूर अहमद ने मों0 निजामुद्दीन निवासी बिहार बताया है, वह कोई बहुरूपीया है एवं मंजूर अहमद का गुर्गा है, क्योंकि रजिस्ट्री में गवाह मंजूर अहमद स्वयं हैं। मों0 निजामुद्दीन ने स्वयं रजिस्ट्री नहीं की है, बल्कि उनके नाम से किसी फर्जी आदमी को खड़ा करके रजिस्ट्री की गई है। उप निबंधक कार्यालय में इस फर्जी निजामुद्दीन की डिजिटल फोटो व डिजिटल अंगूठे के निशान मौजूद हैं।  जमाल अहमद ने बताया कि उनके पिता ने तीन शादियां की एवं तीनों पत्नियां जीवित हैं, वह उनकी पहली पत्नी के पुत्र हैं। जमाल ने बताया कि उनके सगे नाना स्व0 खुर्शीद मुस्तफा जुबैरी बिहार कैडर के 1953 बैच के आई0ए0एस0 अधिकारी थे, उनकी मौत एक किराए के मकान में हुई थी, आज भी उनकी नानी, मां एवं उनकी अविवाहित बहन किराए के मकान (गौतम कालोनी, आशियाना नगर फेस-2, पटना) में ही रहते हैं।

जमाल ने बताया कि मंजूर अहमद अपनी हवस के चलते गैंग बनाकर आदतन अपराध करते हैं। दूसरे की सम्पत्ति पर कब्जा करना, व्यवधान डालना इनकी आदत है। जमाल ने बताया कि उनके मकान 1/140 विश्वास खण्ड, गोमती नगर, लखनऊ पर भी मंजूर अहमद की नीयत खराब है। मकान का ताला तोड़कर श्री मंजूर अहमद, श्री यूसुफ अयूब व अन्य लोगों ने कब्जा कर लिया, जिसके खिलाफ वह लगातार दिनांक 14.05.2014 से एफ़0आई0आर0 दर्ज कराने का प्रयास कर रहा है।

इसी क्रम में उन्होंने दिनांक 28.10.2014 को महामहिम राज्यपाल महोदय, से मिलकर न्याय की गुहार लगाई थी। महामहिम जी ने अपने ए0डी0सी0 श्री गौरव सिंह, आई0पी0एस0 के माध्यम से एस0एस0पी0 लखनऊ को फोन कराकर जमाल के साथ न्याय करने के लिए कहा था। एस0एस0पी0 लखनऊ ने दिनांक 31.10.2014 को थानाध्यक्ष गोमती नगर, जहीर खान को फोन पर निर्देश दिए कि प्रकरण में एफ़0आई0आर0 दर्ज की जाए। थानाध्यक्ष गोमतीनगर ने उनके प्रार्थना पत्र को देखते ही कहा कि मंजूर साहब तो अच्छे अधिकारी रहे हैं, एफ़0आई0आर0 दर्ज होने से साहब की बड़ी बदनामी हो जाएगी। थानाध्यक्ष ने कहा कि वह एस0एस0पी0 साहब से बात कर लेंगे। एफ़0आई0आर0 दर्ज नहीं होने पर ही जमाल ने दिनांक 03.11.2014 को मुख्य सचिव उ0प्र0 से मुलाकात की, जिस पर उन्होंने प्रमुख सचिव गृह को कार्यवाही के निर्देश दिए। प्रकरण पर प्रमुख सचिव गृह ने स्वयं दिनांक 03.11.2014 को ही एस0एस0पी0 लखनऊ से वार्ता कर उनको न्याय देने की बात कही।

जमाल ने बताया कि अभी तक एफ0आई0आर0 इसलिए दर्ज नहीं हो सकी क्योंकि  उनके पिता मंजूर अहमद, आई0पी0एस0, ए0डी0जी0 उ0प्र0 के पद से रिटायर अधिकारी हैं, मंजूर अहमद लखनऊ से मेयर एवं विधायक का चुनाव लड़ चुके हैं, कई विश्व विद्यालयों के कुलपति रह चुके हैं एवं वर्तमान में शुभार्ती वि0वि0 मेरठ के कुलपति हैं। उनके पिता के खास गुर्गे यूसुफ थाना क्षेत्र गोमतीनगर लखनऊ में ही जीरो डिग्री बार, रेस्टोरेन्ट व डिस्कोथेक चलाते है। इनकी दबंग छवि व बार आदि के चलते स्थानीय पुलिस से उनके अच्छे संबंध जगजाहिर हैं।

मंजूर अहमद किस हद तक सम्पत्ति के भूखे हैं, इसका अंदाजा इसी से होता है कि इन्होंने अपनी एक कोठी शेरवानी नगर, मडि़यांव, लखनऊ से ठीक सटे एक प्लाट दस हजार वर्ग फीट पर लिखा दिया कि प्लाट बिकाऊ नहीं है, ताकि लोग विवादित समझकर प्लाट न खरीदें। इनके पास एक मकान बी-102, वसुन्धरा इन्क्लेव दिल्ली में है। सी-189, इन्दिरा नगर, लखनऊ में मकान है, इसके अलावा कई सम्पत्तियां हैं। मंजूर अहमद के खास गुर्गे यूसुफ के पास लखनऊ में ही करोड़ों रुपये की अपनी सम्पत्ति है। यूसुफ का लखनऊ में ही नाका क्षेत्र में जस्ट 9 इन नाम का होटल, गोमतीनगर, लखनऊ में जीरो डिग्री बार व रेस्टोरेन्ट है, अपना स्वयं का मकान 107 गुरू गोविन्द सिंह मार्ग, लालकुआं, लखनऊ के साथ ही और भी कई सम्पत्तियां हैं। साथ ही यूसुफ लगभग पांच कम्पनियों के मालिक भी हैं।   जमाल ने बताया कि वह पुनः दिनांक 08.11.2014 को एस0एस0पी0 से मिले तो एस0एस0पी0 ने पूरे मामले को समझने के बावजूद कहा कि प्रकरण सिविल नेचर का है, वह जांच करवा लेंगे, जबकि सबको पता है कि ताला तोड़कर जबरन कब्जा किया गया है।  जमाल के अधिवक्ता विनोद कुमार ने एस0एस0पी0 से मांग की है कि तत्काल एफ0आई0आर0 दर्ज करके जमाल के साथ न्यायोचित कार्यवाही की जाए।

दिनांक 15.11.2014

(जमाल अहमद)
पुत्र श्री मंजूर अहमद
निवासी- 1/140, विश्वास खण्ड,
गोमतीनगर, लखनऊ
09654871990 (मो0)

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें: