पुष्प रंजन-
समझ में नहीं आता, इंदौर वाले “घंटा” किसे बोलते हैं?
कुछ दिन पहले एनडीटीवी का पत्रकार एक माननीय मंत्री द्वारा घंटा बोलने पर बिदक गया. ऑन कैमरा उसकी आपत्ति, और मंत्री को हाथ के हाथ बजा देने की अदा मुझे भी पसंद आई. मुझे लगा मीडिया में अब भी चंद रीढ़ वाले लोग बचे हैं. चुनांचे, प्रेस सॉलिडरिटी के जोश में आकर प्रशंसा के दो शब्द मैंने फेसबुक पर अर्पित कर दिये. बहुत सारे लोगों ने सोशल मीडिया पर उस पत्रकार को शाबासी दी.
मामला और वायरल हुआ, तो उस मुंहफट मंत्री को लोगों ने शब्दों से वैसे ही धोया, जैसे चोर-पॉकेटमार पकड़े जाने पर राह चलते लोग धोते हैं. मंत्रीजी के वास्ते जो मीम्स नुमायां हुए, वो मंदिर में बजने वाला घंटा ही था.
देर रात दारु सेवन के दौरान मैं चिंतन करने लगा, जो घंटा मंदिर में बजता है, वो यदि किसी मंत्री के मुँह से निकलता है, तो इसमें बुरा क्या है? उसे देख-सुन के आगे बढ़ जाने में हमारे-आपके सनातन धर्म का नुकसान तो नहीं होता. अस्तु, मैंने तय कर लिया, कि कोई सामने आकर “घंटा” बोले, तो राष्ट्र हित और सनातन धर्म का सम्मान करते हुए, बुरा नहीं मानना है.
और शायद ऐसा ही कुछ देवास में हुआ. मंत्री जी से प्रेरणा पाकर देवास के एसडीएम अमित मालवीय ने “घंटा” शब्द का इस्तेमाल किया. सोशल मीडिया पर घंटा वाला आदेश वायरल होते ही सियासी बवाल मच गया, और मामला मंत्री स्तर तक पहुंच गया. “घंटा” शब्द को प्रशासनिक भाषा और नियमों के विरुद्ध मानकर संभाग आयुक्त ने तड़ातड़ी एसडीएम आनंद मालवीय को सस्पेंड कर दिया. . समझ में नहीं आया, ऐसा हुआ क्यों? बेचारे ने एक सरकारी आदेश में मंत्रीजी की कॉपी कर केवल ‘घंटा’ शब्द का ही तो इस्तेमाल किया था.
आखिर, “घंटा” विवादित शब्द कैसे बन गया? मैंने अपने मालवा वाले एक मित्र को फोन लगाया। पूछा – मंत्री जी घंटा बोलने पर सस्पेंड नहीं हुए, इस बेचारे अधिकारी को क्यों सस्पेंड कर दिया? हमारे मालवाइट मित्र की समझाइश थी, “ये वाला घंटा वो है, जो सांड की दोनों टांगों के बीच लटका रहता है.”
बताइये, हिंदी में कितने द्विअर्थी संवाद हैं. किसी ग़ैर हिन्दीभाषी को घंटा के हवाले से उत्पन्न दोनों निहितार्थों को समझाना होगा. मेरे कुछ पत्रकार मित्र चुनाव आयोग कवर करते हैं. उन्होंने बताया, ‘ये जो मोटा भाई का साला है, पीसी में बात-बात पर पत्रकारों को झिड़कते हुए “घंटा” शब्द का इस्तेमाल करता है।’
काशिफ ककवी-
इंदौर की घटना पर कांग्रेस को प्रदर्शन की अनुमती देने पर देवास SDM सस्पेंड! SDM आनंद मालवीय ने आदेश में लिखा था- “इंदौर में भाजपा शासित नगर निगम द्वारा सप्लाई किए गए मल मूत्र युक्त गंदा पानी पीने से 14 लोगों की मौत हो गई और 2,800 व्यत्ति उपचारत है।
“इस संवेदनशील मुद्दे पर प्रदेश सरकार के मंत्री कैलाश विजयवगीय द्वारा पत्रकार के प्रश्ने के जवाब में अशोभनीय टिप्पशी ‘घंटा’ का उपयोग करना निरंकुशता की निशानी है।”
“प्रदेश अध्यक्ष माननीय श्री जीतू पटवारी जी के निर्देशनूसार निर्णय लिया गया है की इस अमानवीय व्यवहार के विरोप में भाजपा के सांसद एवं विधायकों के निवास के सामने ‘घंटा’ बजाकर विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।”


अतः उक्त अवसर पर कानून एवं व्यवर्था को दृष्टिगत रखते हुए कानून एवं व्यवस्था को बनाये रखने के लिए निम्नानुसार तहसीलदार एवं कार्यपीलिक दण्डाधिकारी, राजस्य निरीक्षाक / पटवारियों की इयूटी दिनांक 04.01.2026 समय दोपहर 12.00 बजे से कार्य समाप्ति तक के लिए लगाई जाती है।”
आदेश देने के कुछ ही घंटो बाद SDM साहब सस्पेंड कर दिए गए।



