Connect with us

Hi, what are you looking for?

Local News Community

महाराष्ट्र

पुणे में महिला पत्रकार पर जानलेवा हमला, मुख्य आरोपी अब भी फरार; प्रेस क्लब ने की कड़ी निंदा

पुणे – महाराष्ट्र के पुणे जिले के मंचर स्थित निगोटवाड़ी गांव में पत्रकार स्नेहा बर्वे पर हुए हमले को लेकर अब तक मुख्य आरोपी पुलिस की गिरफ्त से बाहर है। घटना को 10 दिन बीत चुके हैं, लेकिन पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर उठ रहे सवालों के बीच आरोपी पांडुरंग मोराडे का खुलेआम घूमना कानून व्यवस्था की गंभीर नाकामी को उजागर कर रहा है।

29 वर्षीय स्नेहा बर्वे, जो स्वतंत्र डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘समर्थ भारत परिवार’ की संस्थापक और संपादक हैं, अवैध निर्माण पर रिपोर्टिंग के दौरान हमले का शिकार हुईं। नदी किनारे हो रहे अतिक्रमण पर जब वे रिपोर्ट कर रही थीं, तभी कुछ लोगों ने उन पर डंडों से हमला कर दिया। वीडियो में साफ देखा गया कि उन्हें तब तक पीटा गया जब तक वे बेहोश नहीं हो गईं। तीन दिन तक उन्हें अस्पताल में भर्ती रहना पड़ा।

मेडिकल रिपोर्ट के अनुसार, स्नेहा को सिर और पीठ में गंभीर चोटें आई हैं। रिपोर्ट में आंतरिक रक्तस्राव और बार-बार दौरे पड़ने का भी जिक्र है। वे फिलहाल बोल पाने की स्थिति में नहीं हैं और डॉक्टरों ने उन्हें पूर्ण विश्राम की सलाह दी है।

हमले में शामिल लोगों में से अब तक पांच की गिरफ्तारी हो चुकी है, जिसमें मुख्य आरोपी मोराडे के दोनों बेटे भी शामिल हैं। लेकिन पांडुरंग मोराडे, जो इलाके का कुख्यात हिस्ट्रीशीटर बताया जा रहा है, अब भी फरार है। मोराडे के खिलाफ हत्या, अतिक्रमण और अन्य आपराधिक मामलों के साथ-साथ राजनीतिक संबंध भी रहे हैं।

पुलिस की कार्रवाई और सवाल
मंचर थाने के पुलिस इंस्पेक्टर श्रीकांत कंकाल ने बताया कि भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है और शेष आरोपियों की गिरफ्तारी जल्द की जाएगी। हालांकि, बर्वे ने सवाल उठाया कि इतने गंभीर हमले के बावजूद पांडुरंग के खिलाफ हत्या के प्रयास जैसी गंभीर धाराएं क्यों नहीं लगाई गईं।

पहले भी मिल चुकी हैं धमकियां
यह पहला मौका नहीं है जब स्नेहा बर्वे को पत्रकारिता के चलते प्रताड़ना झेलनी पड़ी हो। फरवरी 2025 में जब उन्होंने चस-नरोड़ी गांव में खराब सड़कों पर रिपोर्ट की थी, तब भी उन्हें कार्यालय के बाहर अपमानित किया गया था। वहीं, जुलाई 2024 में पूर्व सांसद शिवाजीराव अधालराव पाटिल द्वारा कथित धमकी मिलने का मामला भी सामने आया था। इस संबंध में भी उन्होंने मंचर थाने में शिकायत दर्ज कराई थी।

स्नेहा की हिम्मत बरकरार
चोटिल होने के बावजूद स्नेहा ने अपने जज्बे को बरकरार रखा है। उन्होंने कहा, “मैं चुप बैठने वालों में नहीं हूं। जैसे ही बेहतर महसूस करूंगी, फिर से रिपोर्टिंग शुरू करूंगी। स्थानीय मुद्दों को उठाना मेरा कर्तव्य है और मैं इससे पीछे नहीं हटूंगी।”

पूर्व सांसद का बयान
पूर्व सांसद पाटिल ने इन आरोपों से इंकार किया है। उन्होंने कहा कि उन्होंने सिर्फ अपनी आपत्ति दर्ज कराने के लिए पत्रकार को फोन किया था, धमकी देने का कोई इरादा नहीं था। उन्होंने रिपोर्ट को एकतरफा और भ्रामक बताया।

प्रेस क्लब की निंदा
इस हमले की प्रेस क्लब ऑफ इंडिया ने तीव्र निंदा की है। क्लब ने कहा, “पत्रकारों पर हमले लोकतंत्र पर हमला है। महाराष्ट्र सरकार को तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि दोषियों को सख्त सजा मिले।”

Pahad Ki Dada: Hill Mail Uttarakhand
CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

भड़ास लीगल टीम : Bhadas Legal Team

भड़ास मेल: [email protected]

Latest 100 भड़ास

विज्ञापन