नई दिल्ली/भिंड। मध्य प्रदेश के भिंड जिले में दो पत्रकारों के साथ कथित पुलिस बर्बरता के मामले ने तूल पकड़ लिया है। अब राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग (NHRC) ने इस मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (DGP) को नोटिस जारी किया है और दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। आयोग ने इस संबंध में शुक्रवार को एक प्रेस विज्ञप्ति जारी की।
एनएचआरसी की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि आयोग ने प्रेस क्लब ऑफ इंडिया, नई दिल्ली द्वारा जारी एक प्रेस विज्ञप्ति का संज्ञान लिया, जिसमें आरोप लगाया गया है कि भिंड जिले में 1 मई, 2025 को पुलिस अधीक्षक की निगरानी में दो पत्रकारों के साथ क्रूरतापूर्वक मारपीट की गई।
बयान के अनुसार, “यदि इन आरोपों में सच्चाई है तो यह पीड़ित पत्रकारों के मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन है। इसी आधार पर आयोग ने राज्य के डीजीपी को नोटिस जारी कर मामले की समग्र रिपोर्ट दो सप्ताह के भीतर देने को कहा है।”
क्या है मामला?

भिंड के पत्रकार शशिकांत गोयल, प्रीतम सिंह और अमरकांत चौहान से जुड़ा है, जिन्होंने चंबल नदी में जारी अवैध रेत खनन का खुलासा किया था। आरोप है कि इस खनन में स्थानीय पुलिस की मिलीभगत है। इसी क्रम में दोनों पत्रकारों को कथित रूप से 1 मई को ‘चाय पर बुलाने’ के बहाने एसपी असित यादव के दफ्तर बुलाया गया, जहां उन्हें पीटा गया।
सुप्रीम कोर्ट का रुख
पिटाई की शिकायत के बाद पत्रकारों ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया, लेकिन शीर्ष अदालत ने गिरफ्तारी पर रोक लगाने से इनकार करते हुए कहा कि जब तक दर्ज मामलों की प्रकृति स्पष्ट नहीं होती, तब तक कोई अंतरिम राहत नहीं दी जा सकती।
पत्रकार संगठनों की नाराजगी
इस घटना को लेकर प्रेस क्लब ऑफ इंडिया, इंडियन वीमेन प्रेस कॉर्प्स और दिल्ली यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स ने संयुक्त रूप से बयान जारी कर दोषी पुलिस अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है। संगठनों ने इसे प्रेस की आज़ादी पर सीधा हमला बताया है।
अब जब मामला एनएचआरसी के पास पहुंच चुका है, उम्मीद जताई जा रही है कि इस प्रकरण की निष्पक्ष जांच हो सकेगी और दोषियों पर कार्रवाई होगी।
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