अभिषेक उपाध्याय-
लखनऊ में सुदर्शन न्यूज़ के पत्रकार सुशील अवस्थी राजन को बुरी तरह मारा पीटा गया है। जानकारी के मुताबिक़ उन्हें घर से बुलाकर गाड़ी में बिठाया गया और फिर पीट पीटकर मरणासन्न कर दिया गया। वे अस्पताल में हैं। और स्वनाम धन्य बड़े पत्रकार संगठन कोमा में हैं! कहीं से कोई आवाज़ नहीं है!!
बताया जा रहा है कि सुशील अवस्थी लगातार किसी बड़े नेता और उसके बेटे के बारे में लिख रहे थे। मारपीट की घटना का क्या इस लेखन से भी रिश्ता है? पुलिस निष्पक्ष जांच करे, तो संभवत: सत्य सामने आए। मगर जो सत्य सामने है, वो और भी बड़ा है।

सुदर्शन न्यूज़ जो दिन रात भाजपा और योगी के समर्थन में ज़मीन-आसमान एक किए रहता है, और उसके पत्रकार को प्रदेश की राजधानी में सरेआम गुंडागर्दी का शिकार होना पड़ा है! इसीलिए कानून की अंधेरगर्दी के दौर में आवाज़ उठाना बेहद ज़रूरी है।
अनिल सिंह-
उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था अपराधियों के ठेंगे पर है. उत्तर प्रदेश की समूची पुलिस केवल धनोपार्जन के उपाय तलाशने में मशगूल है और अपराधी बेखौफ होकर लोगों की हत्या कर रहे हैं, लोगों को अधमरा कर रहे हैं. उत्तर प्रदेश पुलिस पीडि़त के पक्ष में खड़े होने की बजाय प्रताडि़त करने वाले लोगों के साथ मिलकर काम कर रही है. पीडि़त जहर खाने, आत्म हत्या करने को मजबूर हो रहे हैं. कुछ पुलिसकर्मी रिश्वत से आगे बढ़कर रेप भी करने लगे हैं.
कल मुगलसराय एवं लखनऊ में हुई दो अलग-अलग घटनाएं कम से कम यही बता रही हैं कि उत्तर प्रदेश पुलिस लोगों की सुरक्षा करने में असफल है.
मुगलसराय में कल रात दवा व्यवसायी एवं मेरे सहपाठी रहे रोहिताश पाल उर्फ रोमी Rohitash Pal की गोली मारकर अपराधियों ने हत्या कर दी. दुकान बंद करते समय भीड़ भाड़ वाले बाजार में गोली मारने के बाद अपराधी पैदल ही भाग निकले. बेहद मिलनसार, हंसमुख, ऊर्जावान एवं समाज सेवा में भी बढ़ चढ़कर हिस्सा लेने वाले रोमी की हत्या से पूरा मुगलसराय सन्न है. मुगलसराय पुलिस कार्रवाई के नाम पर फिलहाल लकीर पीट रही है.

अपराधी उसकी पकड़ से बाहर हैं. इस दुखद घड़ी में पूरा मुगलसराय गमगीन है. विरोध में व्यापारी अपनी दुकानों को बंद रखा है. दूसरी तरफ भाजपा बेशर्मों की तरह उसी बाजार से एकता यात्रा निकाल रही है.
दूसरी घटना लखनऊ की है. जहां सुदर्शन न्यूज के वीडियो जर्नलिस्ट एवं मित्र सुशील अवस्थी राजन को उनके घर से बुलाकर उन पर जानलेवा हमला किया गया. सुशील को गंभीर रूप से घायल करने के बाद अपराधी उन्हें मरणासन्न अवस्था में सड़क किनारे फेंक कर भाग निकले. मानकनगर थाने में एफआईआर तो दर्ज हो गई है, लेकिन अपराधी अब तक पुलिस की पकड़ से बाहर हैं. राजन दीनबंधु अस्पताल में गंभीर अवस्था में भर्ती हैं.
बड़ा सवाल है कि अपराधियों के घुटनों पर इतना ज्यादा निशाना लगाने के बावजूद बदमाशों में पुलिस का इकबाल कायम क्यों नहीं हो रहा है? क्या कारण है कि जगह जगह अब पुलिस वालों पर भी हमले हो रहे हैं?



