देहरादून। उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC) की स्नातक स्तरीय परीक्षा का पेपर बाहर आना राज्य सरकार के लिए नई परेशानी बन गया है। सरकार की ओर से बार-बार पारदर्शी परीक्षा कराने के दावे किए जाते रहे हैं, लेकिन हकीकत यह है कि कड़े प्रतिबंधों के बावजूद परीक्षा कक्ष से पेपर की फोटो बाहर चली गई। इससे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की “नकल माफिया पर सख्ती” की नीति पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
सुरक्षा व्यवस्था की पोल खुली
आयोग ने परीक्षा केंद्रों पर मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों पर सख्त पाबंदी लगाई थी। अभ्यर्थियों की कड़ी जांच के बाद ही उन्हें भीतर जाने दिया गया। इसके बावजूद परीक्षा शुरू होने के महज़ 35 मिनट बाद पेपर के तीन पन्ने बाहर आ गए। आयोग ने भी स्वीकार किया है कि परीक्षा कक्ष के भीतर से फोटो खींची गई थी। बड़ा सवाल यह है कि मोबाइल भीतर पहुंचा कैसे और आरोपी खालिद को किसने मदद की?
आरोपी खालिद अब भी फरार
पेपर भेजने का मुख्य आरोपी अभ्यर्थी खालिद अब तक पुलिस की पकड़ से बाहर है। आयोग और पुलिस दोनों की जांच इस सवाल पर अटकी है कि खालिद के साथ और कौन शामिल था। आयोग के सचिव डॉ. शिव कुमार बरनवाल ने माना कि इस साजिश में किसी और की मदद की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।
बीजेपी ने डिफेंस मोड अपनाया
पेपर लीक का मामला सामने आते ही बीजेपी डिफेंस मोड में नज़र आई। पार्टी के प्रदेश मीडिया प्रभारी मनवीर सिंह चौहान ने कहा कि राज्य में नकल माफिया धामी सरकार से पहले से सक्रिय थे। उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाते हुए कहा कि विपक्ष षड्यंत्र के तहत युवाओं को भ्रमित करने और सरकार को बदनाम करने की कोशिश कर रहा है।
कांग्रेस का पलटवार – “बीजेपी का कुतर्क”
कांग्रेस ने बीजेपी के बयान को कुतर्क बताया और धामी सरकार पर सीधा हमला बोला। कांग्रेस प्रवक्ता सुजाता पॉल ने कहा कि बीजेपी खुद मान रही है कि पेपर माफिया त्रिवेंद्र रावत सरकार के दौरान सक्रिय थे। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर नकल माफिया पहले से सक्रिय थे तो खुफिया तंत्र ने कार्रवाई क्यों नहीं की? पेपर शुरू होने के आधे घंटे में तीन पन्ने बाहर आ जाना इस बात का सबूत है कि धामी सरकार का सुरक्षा और खुफिया तंत्र पूरी तरह नाकाम हो चुका है।
पुलिस और आयोग का दावा
SSP अजय सिंह ने कहा कि मामले की जांच जारी है और जल्द ही खुलासा किया जाएगा। उन्होंने युवाओं से संयम रखने की अपील की। वहीं UKSSSC का दावा है कि पेपर पूरी तरह लीक नहीं हुआ, इसलिए परीक्षा रद्द नहीं की गई है।
धामी सरकार पर विपक्ष का निशाना
हालांकि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि मामले में सख्त कार्रवाई होगी, लेकिन विपक्ष का आरोप है कि धामी की पारदर्शी परीक्षा प्रणाली की पूरी कहानी सिर्फ़ दावों तक सीमित है। बार-बार पेपर लीक के मामले सामने आना सरकार की असफलता का सबूत है।
इस प्रकरण को लेकर पत्रकार सचिन गुप्ता ने एक्स पर लिखा है-
“पुष्कर धामी वीक है, तभी तो पेपर लीक है”
UKSSSC पेपर लीक के खिलाफ तमाम स्टूडेंट्स रात में भी देहरादून के परेड ग्राउंड में प्रोटेस्ट कर रहे हैं। उनकी मांग है कि परीक्षा रद हो और इसकी CBI जांच हो। 2 दिन पहले UKSSSC परीक्षा हुई थी। पेपर लीक में कई अरेस्ट हैं। UKSSSC का पेपर हरिद्वार के आदर्श बाल सदन इंटर कॉलेज से लीक हुआ। इसके प्रिंसिपल धर्मेंद्र सिंह चौहान हैं, जो BJP नेता हैं। पेपर लीक करने वाला छात्र खालिद मलिक यहां परीक्षा दे रहा था। उसने व्हाट्सएप से पेपर अपनी बहन साबिया को भेजे।
साबिया ने प्रोफेसर सुमन चौहान से पेपर सॉल्व कराया। इस सेंटर पर कुल 18 कमरों में परीक्षा थी, लेकिन जैमर सिर्फ 15 कमरों में थे। खालिद के कमरे में जैमर ही नहीं था। खालिद और उसकी बहन दोनों ही अरेस्ट हैं।
आज दूसरे दिन हजारों स्टूडेंट्स का प्रदर्शन जारी रहा। वे पेपर रद करने की मांग कर रहे हैं। उत्तराखंड सरकार और पुलिस इस पर अडिग है कि पूरा पेपर लीक नहीं हुआ, बल्कि पेपर के सिर्फ 3 पेज लीक हुए।



