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दिल्ली

पत्रकार उमर राशिद प्रकरण से जानिए, फेक न्यूज़ के जरिए किसी को शिकार बना लेना कितना आसान है!

रविंद्र रंजन-

फे़क न्यूज और नफ़रत के फलते-फूलते ‘कुटीर उद्योग’ के इस दौर में किसी को अपना ‘शिकार’ बना लेना कितना आसान हो गया है, इसका ताजा सबूत है पत्रकार उमर राशिद का मामला। किसी ने दो पन्ने की एक कहानी गढ़ी, जिसमें नफरत का सारा मसाला डाला गया (लड़की, हिंदू-मुस्लिम, गोमांस, लव जेहाद इत्यादि) और उसको फर्जी आईडी से X पर पोस्ट कर दिया गया। उसके बाद पूरा दक्षिणपंथी तंत्र राशिद के खिलाफ सक्रिय हो गया।

कहानी में चूंकि तथाकथित विक्टिम हिंदू थी और आरोपी मुस्लिम.. लिहाजा, तमाम फर्जी आईडी से नमक-मिर्च लगाकर और भड़काऊ टिप्पणियों के साथ उस पोस्ट को शेयर किया जाने लगा। वेरीफाइड अकाउंट वाले स्वघोषित फेमिनिस्ट भी इसमें पीछे नहीं रहे।

चूंकि ऐसे मामलों में विक्टिम की पहचान उजागर नहीं की जाती है, इसलिए पूरी साजिश रचने वाले ने इसी ‘सुरक्षा’ को अपना हथियार बनाया। आईटी सेल के सैकड़ों लोग अज्ञात पीड़ित के पक्ष में आंसू बहाते रहे और उमर राशिद की लानत-मलानत करते रहे। सिर्फ एक गुमनाम विक्टिम की कहानी के आधार पर कोई “संगठन” पत्रकार के खिलाफ NHRC पहुंच गया और NHRC ने भी पत्रकार के खिलाफ सक्रिय होने में देर नहीं लगाई। लेकिन दिल्ली पुलिस को लंबे समय तक हाथ-पांव मारने के बाद भी पत्रकार के खिलाफ कुछ नहीं मिला। ना ही तथाकथित विक्टिम मिली और न ही पुलिस के मुताबिक शिकायतकर्ता ने जांच में कोई “सहयोग” किया।

पुलिस ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि शिकायत पूरी तरह सोशल मीडिया पर वायरल गुमनाम आरोपों पर आधारित थी। आखिरकार पुलिस ने NHRC के सामने हाथ खड़े कर दिए और लगभग 10 महीने बाद NHRC ने केस बंद करने का फैसला सुना दिया। लेकिन इस पूरे मामले में पुलिस ने ये पता लगाने की कोशिश नहीं की कि X पर फर्जी पोस्ट करने वाला कौन था? हो सकता है कि पता भी चल गया हो, तो उसे बचा लिया गया हो? उसका एजेंडा तो पूरा हो गया। लेकिन फर्जी पोस्ट के जरिये उमर राशिद के खिलाफ सोशल मीडिया पर नफरत फैलाने का जो अभियान चला उसकी जवाबदेही किसकी है?

पत्रकार ने जो मानसिक प्रताड़ना झेली उसका क्या? उसके प्रोफेशनल करिअर पर जो डेंट लगा उसका क्या? यहां तक कि दिल्ली पुलिस ने वो सारी फर्जी पोस्ट और अभद्र टिप्पणियां भी अभी तक नहीं हटवाईं हैं, जिनका मकसद ही पत्रकार के खिलाफ घृणा फैलाना था।

और हां, जो लोग उस वक्त उमर राशिद के खिलाफ लंबी-लंबी पोस्ट लिख रहे थे, NHRC द्वारा केस बंद करने के बाद उनमें से किसी की भी कोई पोस्ट नजर नहीं आ रही है। आपको नजर आए तो कृपया जरूर बताएं।

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