समाचार प्लस के कर्मचारी ‘I Support Umesh Kumar’ कंपेन चलाने लगे!

अपने सीईओ और एडिटर इन चीफ को गंभीर आरोपों में जेल भेजे जाने के हफ्ते भर बाद समाचार प्लस चैनल के कर्मचारी धीरे-धीरे ही सही, आगे आने लगे हैं और उमेश कुमार के समर्थन में सोशल मीडिया पर अभियान की शुरुआत कर इसे आगे बढ़ाने में लगे हैं. एक पोस्टर जारी किया गया है जिसमें उमेश कुमार की तस्वीर के साथ लिखा हुआ है ‘I Support Umesh Kumar’.

इस तस्वीर में उमेश की छवि भ्रष्टाचार विरोधी योद्धा के बतौर पेश की गई है. खुद उमेश कुमार भी कोर्ट में यही कह चुके हैं कि उन्होंने जनता के हित में स्टिंग किया और उनके द्वारा कराए गए स्टिंग के जरिए सरकार में व्याप्त भ्रष्टाचार का खुलासा किया जाता है.

वैसे कहा ये भी जा रहा है कि अगर मालिक जेल जाता है तो चैनल में काम करने वाले कर्मचारी उनके पक्ष में खड़े होने के लिए मजबूर हो जाते हैं क्योंकि उन्हें नौकरी भी चलानी होती है, सो वे समर्थन के अलावा कोई अन्य स्टैंड लेने का रिस्क नहीं ले सकते. जो भी हो, समाचार प्लस चैनल के कर्मी संगठित तौर पर उमेश के पक्ष में आवाज उठाने लगे हैं.

उमेश कुमार के पक्ष में एक खबर और है. पत्रकार संगठन आईएफडब्ल्यूजे के पांडे-तिवारी धड़े ने खुलकर उमेश कुमार का समर्थन कर दिया है. IFWJ के पांडे-तिवारी धड़े में जो पांडे जी हैं, उनका पूरा नाम परमानंद पांडेय है. ये कभी पत्रकार रहे हैं पर आजकल वकील के रूप में सक्रिय हैं. जो दूसरी तिवारी जी हैं, उनका पूरा नाम हेमंत तिवारी है. ये भी कभी पत्रकार रहे हैं पर इन दिनों लाइजनर के तौर पर सक्रिय रहते हैं.

दरअसल IFWJ का जो मूल संगठन है, के. विक्रम राव वाला, उसने साफ-साफ उमेश कुमार से किसी भी किस्म के नाते-संबंध से इनकार करते हुए एक प्रेस रिलीज काफी पहले ही जारी कर दी. इस प्रेस रिलीज से चिढ़े-भड़के IFWJ के पांडे-तिवारी गुट ने उमेश कुमार के समर्थन में प्रेस रिलीज का ऐलान कर दिया. दोनों ही गुटों की प्रेस रिलीज में एक दूसरे की जमकर खटिया खड़ी की गई है. आनंद लेने वालों के लिए दोनों प्रेस रिलीजों में काफी मसाला है और पत्रकारिता के वर्तमान हाल की झलक भी जहां पत्रकार नेता स्टैंड लेते हैं तो उनके बीच का फासलाल धरती-आसमान जितना हो जाता है..

देखें IfWJ के पांडे-तिवारी गुट की प्रेस विज्ञप्ति….

IFWJ stands by fearless journalist Umesh Kumar, let the thug know it

The unceremoniously expelled President of the IFWJ K Vikram Rao for his fraud, lies, cheating and misuse of the organisation has issued a ridiculous clarification in his abysmally bad Hindi and ridiculously corrupt English in the name of one Vipin Dhuliya, who is blissfully ignorant of what is being sent in his name. Mr Rao must have fleeced the journalists, their national and international organisations and different governments of various hues and colours with not less than hundred crores have got the cheeks to call other fearless journalists as blackmailers. It is like ‘ulta chor kotwal ko daante’.

Mr Rao has lost his mental balance because of the frustration and rebuff that he has been getting from all over the country after his expulsion from the IFWJ in November 2015. He calls meetings at different places, but nobody listens to him. What to say of journalists, now not even tourists, take any notice of his call. He had to humble pie at Patna, Ranchi, Jaisalmer and somewhere in Kerala and Kanyakumari. Anyway, this is altogether different matter because genuine journalists always hated him and considered it below their dignity to be seen with him anywhere. He claims himself to be a detenu of Emergency but does not tell the fact that for his release he stabbed his other colleagues in their backs by allegedly becoming an approver and tendering and an apology to the authorities, which any self-respecting person will be ashamed of.

Look at the fraud of this man that he says that a senior journalist of Samachar Plus, Umesh Kumar does not have any relationship with IFWJ. A person, who has been thrown out from the IFWJ by the overwhelming majority of the members now issues a certificate about another respectable journalist and member of the organisation. How can he do it when he himself has been thrown out of the IFWJ? Surely, it can be done only a mentally deranged person. This man stopped working decades before his retirement from the Times of India but was being rewarded by the management for spying against the union and union leaders. He got his salary month after month till his retirement. Apart from it, the management used to pay him fabulous amounts for working against the Unions. He is indeed a despicable blackleg.

Now come to his pedestrian understanding of journalism. He believes only in press release journalism and that is why he is against investigative journalism. He does not know that the words and deeds associated with ‘whistle-blower’, ‘sting operation’ and ‘cover-up’ journalism have acquired a respectable meaning in the realm of investigative journalism. Any journalist, who takes the risk of exposing the truth by sting operations deserve admiration from the journalists’ community. It is because of such journalists the cases of corruption rampant among politicians, bureaucrats, police officials, businessmen and other sleek operators come to the fore. The society is indebted to them. Journalists community should stand behind such courageous journalists like a rock. It is no wonder that corrupt elements gang up and try to paint such bold journalists as blackmailers. But this should be taken as a badge of honour by any journalist, who is committed to the cause of the society and the good of the country.

Therefore, Indian Federation of Working Journalists (IFWJ) wishes to reiterate that in this hour of crisis it stands solidly behind Umesh Kumar of TV Channel ‘Samachar Plus’ when some corrupt elements are trying their best to implicate him in cooked up cases. The aim of the Union is to extend all support to any journalist, who is distress and not to pull his legs and that is what a fourth-grade journalist and a black leg trade unionist Mr Rao has done. Fortunately, everybody dismisses him for his habit of speaking unmixed lies. This man must be given a resounding kick, again and again, by all sensible persons. Shame on you Mr Thug. Don’t worry, you will not be able to escape for very long from the long hands of the law. It is soon going to catch you.

के. विक्रमराव वाले IFWJ के मुख्य विंग की तरफ से जारी प्रेस विज्ञप्ति पढ़ने के लिए नीचे दिए शीर्षक पर क्लिक करें…

जेल में बंद समाचार प्लस वाले उमेश कुमार से IFWJ का कोई नाता नहीं : विपिन धूलिया

इस बीच, कुछ छोटे अखबारों ने उमेश कुमार की आवाज बनने का काम शुरू कर दिया लेकिन इन अखबारों का प्रसार नगण्य है. भड़ास की हमेशा से कोशिश रही है कि किसी भी मामले के दोनों पक्षों को संपूर्णता से प्रकाशित किया जाए. इसी के चलते उमेश कुमार के समर्थन में एक बेनाम से अखबार में छपे आर्टकिल को यहां प्रकाशित किया जा रहा है.

उमेश कुमार के साथ आरोपी बनाए गए उनके भांजे प्रवीण साहनी ने अपनी गिरफ्तारी पर रोक संबंधी हाईकोर्ट के आदेश और टिप्पणी संबंधी खबर को फेसबुक पर पोस्ट किया हुआ है. इसमें समाचार प्लस चैनल पर चली खबर का एक स्क्रीनशाट भी है जिसमें होईकोर्ट की टिप्पणी के आलोक में लिखा गया है- ‘सत्य परेशान हो सकता है, पराजित नहीं’

समाचार प्लस के लखनऊ ब्यूरो चीफ आलोक पांडेय ने अपने तरीके से उमेश कुमार की पक्षधरता शुरू की है और कई पोस्ट फेसबुक पर डाले हैं… देखें स्क्रीनशाट…

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