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दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश पर यूएनआई प्रबंधन को 23 लाख रुपए जमा कराना पड़ा

नई दिल्ली : आखिरकार दिल्ली हाई कोर्ट के कड़े आदेश पर देश की प्रतिष्ठित समाचार एजेन्सी यूनाइटेड न्यूज़ ऑफ इंडिया (यूएनआई) के प्रबंधन को एक वरिष्ठ पत्रकार सहित दो कर्मियों के लम्बित वेतन भुगतान के मद में लगभग 23 लाख रुपए कोर्ट में जमा कराना पड़ा. इसके साथ ही अदालत की तरफ़ से जारी कुर्की की कार्रवाई से प्रबंधन को मुक्ति मिल गयी. हालाँकि हाई कोर्ट ने जुर्माने की 20 प्रतिशत रक़म तत्काल नहीं जमा कराने की प्रबंधन को छूट दे दी.

नई दिल्ली : आखिरकार दिल्ली हाई कोर्ट के कड़े आदेश पर देश की प्रतिष्ठित समाचार एजेन्सी यूनाइटेड न्यूज़ ऑफ इंडिया (यूएनआई) के प्रबंधन को एक वरिष्ठ पत्रकार सहित दो कर्मियों के लम्बित वेतन भुगतान के मद में लगभग 23 लाख रुपए कोर्ट में जमा कराना पड़ा. इसके साथ ही अदालत की तरफ़ से जारी कुर्की की कार्रवाई से प्रबंधन को मुक्ति मिल गयी. हालाँकि हाई कोर्ट ने जुर्माने की 20 प्रतिशत रक़म तत्काल नहीं जमा कराने की प्रबंधन को छूट दे दी.

इससे पूर्व दिल्ली की एक अदालत से जारी कुर्की वारंट को लेकर दिल्ली पुलिस की एक टीम पिछले दिनों यू.एन.आई. मुख्यालय पहुंची थी. प्रबंधन ने रिकवरी आदेश को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी थी लेकिन हाईकोर्ट के कड़े निर्देश पर प्रबंधन को लगभग 23 लाख रुपए जमा कराने पड़े. यूएनआई बचाओ अभियान से जुड़े वकीलों सर्वश्री अरविन्द चौधरी एवं राहुल झा ने यह जानकारी दी।

संस्थान के ही एक वरिष्ठ पत्रकार के लम्बित वेतन आदि भुगतान के मद में करीब 15 लाख रुपये की रिकवरी के लिए दिल्ली की एक अदालत ने संस्थान के निदेशकों सर्व श्री विश्वास त्रिपाठी एवं प्रफुल्ल महेश्वरी के नाम कुर्की वारंट जारी किया था। श्रम उपायुक्त (नई दिल्ली) की अदालत से जारी आदेश के बावजूद यूएनआई प्रबंधन ने पीड़ित को यह राशि भुगतान नहीं किया था। बाद में विभाग की ओर से इस राशि की रिकवरी के लिए चीफ मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट की अदालत को भेजा गया था।

ऐसा ही एक मामला संस्थान के एक दलित कर्मचारी से जुड़ा है, जिसे श्रम उपायुक्त की अदालत से जारी आदेश के मुताबिक करीब साढे बारह लाख रुपये का भुगतान किया जाना था। इस मामले में भी दिल्ली हाईकोर्ट के कड़े आदेश पर पैसे जमा कराये गये. इस दलित कर्मचारी के प्रताड़ना के मामले में संस्थान के दो पत्रकारों सहित तीन को एससी/ एसटी एक्ट के तहत दिल्ली की एक सत्र अदालत ने 12 दिसंबर 2013 को न्यायिक हिरासत में तिहाड़ जेल भेजा था। यह मामला माननीय उच्च न्यायालय में लम्बित है।

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