सुजीत सिंह प्रिंस-
VISTAAR NEWS – इनकी टैग लाइन है “हर ख़बर विस्तार से” …वही “आपका अपना चैनल” ..वैसे तो रावतपुरा सरकार की हर खबरें इस चैनल पर विस्तार रूप से मिल जाएगी ..पर मेडिकल कॉलेज की जांच मामले में सीबीआई ने महाराज रावतपुरा सरकार का नाम भी FIR में दर्ज किया है ..रावतपुरा सरकार का नाम रविशंकर महाराज भी है ..इस “व्यापक” घोटाले और आरोपियों की ख़बर विस्तार न्यूज़ में विस्तार में नहीं बताई गई तो लीजिये इस ख़बर को विस्तार पूर्वक समझिए ..की ये घोटाला कितना व्यापक रूप से फ़ैला है ..!
व्यापक घोटाले की विस्तार पूर्वक जानकारी ..
रावतपुरा मेडिकल कॉलेज मान्यता घोटाले में 35 आरोपियों की सूची, अब तक सिर्फ 6 गिरफ्तार
छत्तीसगढ़ की राजधानी नवा रायपुर में स्थित श्री रावतपुरा सरकार इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च (SRIMSR) को मेडिकल काउंसिल की मान्यता दिलाने के नाम पर सीबीआई ने बड़े पैमाने पर जांच शुरू की है। इस भ्रष्टाचार की जांच में कुल 35 व्यक्तियों को आरोपी बनाया गया है इस मामले में सीबीआई डॉ. मंजुप्पा सीएन, डॉ. चैत्रा एमएस, डॉ. अशोक शेलके, अतुल कुमार तिवारी (एसआरएसआईएमएसआर के डायरेक्टर), सतीशा ए, रविचंद्र को हिरासत में ले के पूछताछ में जुटी है ..!
इन सभी पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (धारा 7–12) और भारतीय दंड संहिता की धारा 61(2) के अंतर्गत मुकदमा दर्ज किया गया है आरोप है छत्तीसगढ़ के रावतपुरा मेडिकल कॉलेज घोटाले में मेडिकल काउंसिल की रिपोर्ट को ‘सकारात्मक’ बनाने के लिए लाखों की रिश्वत ली गई..!
चार्जशीट में जिन प्रमुख नामों का उल्लेख है उनमें संस्थान के चेयरमैन, निदेशक, वित्तीय अधिकारी, स्वास्थ्य मंत्रालय और एनएमसी (NMC) के उच्चाधिकारियों सहित प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों और तकनीकी एजेंसियों से जुड़े कई लोग शामिल हैं.. देखिये लिस्ट ..
यहाँ CBI की जांच में आरोपियों की सूची..
संस्थान से जुड़े
- रविशंकर जी महाराज (चेयरमैन, SRSIMSR) दुनिया इनको रावतपुरा सरकार के नाम से जानती है
- अतुल कुमार तिवारी (डायरेक्टर, SRSIMSR)
- लक्ष्मीनारायण चंद्राकर (एकाउंटेंट)
- अतिन कुंडू (अधिकारी, SRSIMSR)
- संजय शुक्ला
चिकित्सा व निरीक्षण दल (NMC/NHA/स्वास्थ्य मंत्रालय)
- डॉ. पी. रजनी रेड्डी
- डॉ. सतीश
- डॉ. चैत्रा एमएस
- डॉ. अशोक शेलके
- डॉ. मंजप्पा सीएन
- डॉ. जीतू लाल मीणा (संयुक्त निदेशक, NHA)
- पीयूष माल्यान (सेक्शन ऑफिसर, स्वास्थ्य मंत्रालय)
- अनूप जायसवाल (स्वास्थ्य मंत्रालय)
- राहुल श्रीवास्तव (स्वास्थ्य मंत्रालय)
- दीपक (स्वास्थ्य मंत्रालय)
- मनीषा (स्वास्थ्य मंत्रालय)
- धर्मवीर (स्वास्थ्य मंत्रालय)
अन्य संस्थानों से जुड़े
- मयूर रावल (रजिस्ट्रार, गीतांजलि यूनिवर्सिटी, उदयपुर)
- आर. रणदीप नायर (प्रोजेक्ट लीड, टेकइन्फ़ी सॉल्यूशंस)
- डीपी सिंह (चांसलर, टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ सोशल स्टडीज)
- डॉ. वीरेंद्र कुमार (गुड़गाँव, हरियाणा)
- सुरेश सिंह भदौरिया (चेयरमैन, इंडेक्स मेडिकल कॉलेज)
- उदित नारायण (कानपुर, उत्तर प्रदेश)
- डॉ. जोशी मैथ्यू
अन्य निजी और पदासीन व्यक्ति
- इन्द्रबली मिश्र (गुरुजी; वाराणसी)
- डॉ. बी. हरि प्रसाद (आंध्रप्रदेश)
- डॉ. अंकम रामबाबू (हैदराबाद)
- वेंकट (निदेशक, गायत्री मेडिकल कॉलेज, विशाखापत्तनम)
- जोसेफ कोमारेड्डी (फादर, कोलंबो इंस्टिट्यूट, वारंगल)
- शिवानी अग्रवाल (NCR इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, मेरठ)
- स्वामी भक्तवत्सलदासजी (स्वामीनारायण मेडिकल इंस्टिट्यूट, गांधीनगर)
अन्य सरकारी व निजी व्यक्ति
- चंदन कुमार (स्वास्थ्य मंत्रालय)
- कृष्णा किशोर (विशाखापत्तनम; गायत्री मेडिकल कॉलेज से जुड़े)
- फादर जोसेफ कोम्मारेड्डी (वारंगल)
- शिवानी अग्रवाल – दोहरा हुआ लेकिन लिस्ट में बनाए रखा गया
इस घोटाले की जांच के तहत छः राज्यों—कर्नाटक, राजस्थान, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और दिल्ली—में करीब 40 से अधिक स्थानों पर रेड की गई ..जांच एजेंसी को गुप्त सूचना मिली की निरीक्षण टीम को सकारात्मक रिपोर्ट तैयार करने के लिए प्रभावित किया गया है ..इस छापेमारी में महत्वपूर्ण दस्तावेज़, डिजिटल रिकॉर्ड और वित्तीय लेनदेन के सबूत जब्त किए गए..!
यह मामला सिर्फ एक कॉलेज तक सीमित नहीं बल्कि पूरे मेडिकल शिक्षा तंत्र में व्यापक भ्रष्टाचार की बू निकालता है..
हिरासत में लिए गए आरोपियों की डिटेल –
डॉ. मंजप्पा C.N., डॉ. चैत्रा M.S., डॉ. अशोक D. शेल्के — निरीक्षण टीम के सदस्य, आरोप है कि उन्होंने सकारात्मक रिपोर्ट देने के लिए रिश्वत ली..
डॉ. अतिन कुंडू, मेडिकल डायरेक्टर (जो सरकारी कॉलेज में सह-प्राध्यापक भी हैं) — ड्यूल जॉब और अनुचित लाभ देने का मामला।
एडमिनिस्ट्रेटिव डायरेक्टर अतुल कुमार तिवारी, सतीशा A., और रविचंद्र K. — बिचौलिए और संस्थान पदाधिकारी जिनके माध्यम से लेन-देन हुआ।
रिश्वत की राशि 55 लाख रुपये हवाला के जरिये बेंगलूरु में ली गई है..ताकि एनएमसी को सकारात्मक रिपोर्ट दी जा सके इस कार्यवाही के बाद एनएमसी जैसी संवैधानिक संस्था की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठने लगे हैं कि जब निरीक्षणकर्ता खुद पैसे लेकर रिपोर्ट तैयार करते हों तो क्या उम्मीद की जा सकती है..!












