‘आजतक’ वालों को थोड़ा ज्ञान दे दो प्रभु!

प्रद्युम्न तिवारी-

रात्रि के एक बजे हैं। आज तक न्यूज़ चैनल पर बाढ़ की विभीषिका से तबाही का विवरण प्रस्तुत किया जा रहा है। नेपथ्य से गाने के रूप में गूंज सुनाई पड़ रही है-

पानी दे गुड़धानी दे!

अब इसे पत्रकारिता और सामाजिक ज्ञान की किस परिभाषा में रखेंगे। इनको पता भी है कि पानी दे गुड़धानी दे पानी न बरसने पर किस तरह प्रयोग किया जाता था।

इसको चलाने वालों को यदि वास्तव में इसकी सच्चाई पता होती तो ऐसा न करते। चिल्ला चिल्लाकर कुछ भी बोल देने और दिखा देने को पत्रकारिता नहीं कहा जा सकता।

विडंबना है कि एक ओर प्रलयंकारी बाढ़ का दृश्य और दूसरी ओर पानी दे गुड़धानी दे?

हे प्रभु!

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