
संजय कुमार सिंह
सस्ती लोकप्रियता पाने के लिए गैर जरूरी युद्ध की शुरुआत और उसके नाटकीय अंत से नरेन्द्र मोदी और उनकी सरकार को अपेक्षित लाभ मिले या नहीं देश का बहुत बुरा मजाक बना, देशवासियों को भारी नुकसान हुआ और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मोदी की छवि का जो हुआ उसे अच्छा तो नहीं ही कहा जायेगा। फिर भी अपने अखबारों ने कल युद्ध विराम की खबर के साथ उसका खंडन छापा था और बताया था पाकिस्तान ने युद्ध विराम का उल्लंघन किया तो भारत ने जवाबी कार्रवाई की। इसके बाद आज साफ-साफ खबर होनी चाहिये थी कि आखिरकार दोनों पक्षों ने युद्ध विराम को स्वीकार कर लिया और युद्ध खत्म हो गया है। आज के अखबारों में ऐसा कुछ स्पष्ट नहीं है। लीपा-पोती के लिए पाकिस्तान को नुकसान गोली के बदले गोला दागने के मोदी के आदेश शीर्षक हैं। मैं पहले कह चुका हूं कि ऑपरेशन सिन्दूर नाम ही भावनाओं से खेलने वाला था और 2019 के चुनाव प्रचार में ‘घर में घुसकर मारूंगा’ से हुए लाभ के मद्देनजर हमले का मकसद चुनावी लाभ लेना ही हो सकता है। गोली का जवाब गोला से देने के ‘आदेश’ का प्रचार इसी क्रम में लगता है और युद्ध विराम कैसे हुआ की चर्चा और उसके लिये हुई आलोचना की झेंप मिटाने की कोशिश के अलावा और कुछ नहीं है। कहने की जरूरत नहीं है कि नोटबंदी से लेकर युद्ध तक की सारी कोशिशों से मोदी जी की लोकप्रियता चाहे बढ़ी हो उनका खोखलापन हर बार उजागर हुआ है, मीडिया चाहे न बताये संदेश जा रहा है, लोग समझ रहे हैं। फिर भी हिन्दुत्व भारी है वह अलग मुद्दा है और मेरी चर्चा का विषय नहीं है।
मेरी और मेरी तरह सोचने वाले बहुत सारे लोगों की राय में सबसे पहले तो युद्ध होना ही नहीं चाहिए था। हुआ तो शायद इसलिए कि केंद्रीय गृहमंत्री ने यह एलान कर रखा था कि आतंकवाद खत्म हो गया है उसे कुचल दिया गया है और इसका प्रचार तो नोटबंदी के समय से ही हो रहा था कि आतंकवाद की कमर टूट गई है। ऐसे में जब पहलगाम हमला हो गया तो बहुत सारे सवाल उठते, उठ रहे थे और उससे ध्यान हटाने के लिए तथा उसका जवाब देने से बचने का सबसे आसान रास्ता था युद्ध छेड़ देना। पर युद्ध या हमला स्पष्ट तौर पर गलत होता तो यह प्रचारित किया गया कि हमने सिर्फ आतंकी शिविरों को निशाना बनाया है और (पुराने) युद्ध विराम का उल्लंघन तो पाकिस्तान पहले से कर रहा था। मैंने लिखा था कि अखबारों में उसे प्राथमिकता नहीं मिली। ऐसे में पाकिस्तान की जवाबी कार्रवाई को पाकिस्तान की गलती के रूप में प्रचारित किया गया जबकि प्रतिक्रिया होनी ही थी और इसके लिए तैयार रहना चाहिये था ताकि जो नुकसान हुआ उससे बचा जाता पर नुकसान रोकने या उससे बचने की बजाय उसकी खबर सेंसर की गई जबकि सरकार को चाहिए था, वह था उन पाँच आतंकवादियों को पकड़ने की कोशिश करती, जो भारत में 300 किलोमीटर से ज़्यादा अंदर आए और फिर जंगल में गायब हो गए। सरकार को इन पाँचों पर एक विश्वसनीय डोजियर जारी करना चाहिए था और दुनिया को दिखाना चाहिए था कि ये पाकिस्तान से आए थे। ऐसा नहीं किया गया, इसकी बजाय एक युद्ध शुरू किया गया, जो पाकिस्तान और पीओके में आतंकवादियों के ठिकानों पर सीमित, ऐसा हमला बताया गया जिसे पाकिस्तान को चुपचाप झेल जाना चाहिये था जो भारत के हिसाब से न्यूनतम था। लेकिन भारत की कार्रवाई किसी सबूत के बिना थी इसलिये पाकिस्तान को जवाबी कार्रवाई करने का मौक़ा मिला। भारतीय मीडिया ने इसे तो प्रचार दिया पर यह नहीं बताया कि भारत ने पहलगाम हमले में पाकिस्तान के शामिल होने का कोई सबूत नहीं दिया। सीधे हमला कर दिया। इस तरह भारत किसी भी देश को यह समझाने में नाकाम रहा कि पहलगाम में हमला पाकिस्तान द्वारा प्रायोजित था। इससे पहले 26/11/2008 को मुंबई हमले के समय उस समय की सरकार ने हमले में पाकिस्तानी संबंधों को पूरी तरह से उजागर किया और पाकिस्तान को आतंकवाद के प्रायोजक के रूप में अंतरराष्ट्रीय समुदाय के निशाने पर ला दिया था। एक आतंकवादी को जिन्दा पकड़ा जाना बहुत बड़ी उपलब्धि थी लेकिन उसे बिरयानी खिलाने का प्रचार और प्रचारक को चुनाव लड़ने का टिकट देना भी राजनीति थी।
दूसरी ओर, तब की सरकार ने फिर भी पाकिस्तान पर युद्ध नहीं थोपा, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसे घेर लिया। इस मामले में और यहाँ तक कि पुलवामा मामले में भी, मोदी सरकार अपने नागरिकों या दुनिया के सामने कोई भी विश्वसनीय सबूत पेश करने में नाकाम रही। यही कारण है कि कोई भी युद्ध नहीं चाहता था। लेकिन एक बार जब देश पर युद्ध थोप दिया गया, तो अमेरिका के हस्तक्षेप पर भी युद्ध विराम की उम्मीद नहीं की जा सकती थी। भारत ने पाकिस्तान के साथ किसी भी संघर्ष में अमेरिका को मध्यस्थता की अनुमति कभी नहीं दी है। इस बार मोदी इसे स्वीकार करते नजर आये और भरपूर आलोचना हुई। यही कारण है कि लोग युद्ध विराम पर सवाल उठा रहे हैं। इसीलिये आज भी सीधे-सीधे यह नहीं छपा है कि दोनों देशों ने युद्धविराम को मंजूर किया। दूसरी ओर, कल छपी खबरों के अनुसार, सरकार का सख्त संदेश है, भविष्य में किसी भी आतंकवादी कृत्य को ‘युद्ध की कार्रवाई’ मानेगा भारत। यहां यह गौरतलब है कि अभी पुलवामा हमले का खुलासा नहीं हुआ है, पहलगाम के हमलावर पकड़े नहीं गये हैं, सरकार ने आतंकवाद पर नियंत्रण के लिए तमाम कार्रवाई की है, उपाय किये हैं और घोषणाएं की हैं। फिर भी आतंकवादी वारदात हो जाये तो सरकार के लिए वह मुश्किल होगा लेकन सबको पता है कि आतंकवाद खत्म करना इतना आसान नहीं है और उसके लिए काम करने का तरीका कुछ और होगा। पर प्रचार और अखबारी नैरेटिव से काम करने वाली सरकार की कहानियां भी अलग हैं और होंगी।
आइये अब आज के शीर्षक देखें। यहां यह बताना प्रासंगिक होगा कि इंडियन एक्सप्रेस की आज की लीड का कतरन शेयर करते हुए वरिष्ठ पत्रकार प्रशांत टंडन ने फेसबुक पर लिखा है, स्थिति बहुत खराब है, नॉर्थ कोरिया जैसी। भारत के बारे में खबरें अब विदेशी मीडिया मिलती हैं। यहां सरकार की प्रेस रिलीज़ लीड खबर बन जाती है। एक टेलीग्राफ को छोड़कर बड़े अंग्रेजी अखबार इस बात को गोल कर गये कि सीज़फायर को भारत और पाकिस्तान से पहले ट्रंप ने दुनिया को बताया। पहली बार दिखाई दिया कि भारत की नीतिगत फैसले वाशिंगटन में हो रहे हैं। फ्रंट पेज के संपादकीय नहीं आये। द हिंदू ने सीजफ़ायर की खबर मौसम के हाल जैसी लिख डाली है। इसमें मुद्दे की बात यह है कि फोन मोदी ने नहीं किया था जेडी वेंस का आया था। अमेरिका की शुक्रवार दोपहर और भारत के समय देर रात। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो और चीफ़ ऑफ स्टाफ सुसी वाइल्स को “अलार्मिंग इंटेलिजेंस” मिली जिसके बाद फोनकॉल और बैठकों का सिलसिला शुरु हुआ। शनिवार को डोनाल्ड ट्रंप ने युद्धविराम की घोषणा की और फिर भारत व पाकिस्तान ने। इंडियन एक्सप्रेस की आज की लीड का शीर्षक है, मोदी ने वांस से कहा भारत जोरदार हमला करेगा, हवाई अड्डे (एयर बेस) क्षतिग्रस्त होने पर पाकिस्तान ने अमेरिका को फोन किया।
इंडियन एक्सप्रेस की लीड का उपशीर्षक है, “पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों पर हमले के बाद प्रधानमंत्री ने सुरक्षा बलों से कहा वहां से गोली चलेगी, यहां से गोला…”। लीड के साथ छपे एक्सप्लेन्ड में एक्सप्रेस ने लिखा है, पाकिस्तान ने सुर बदला… हमलोगों ने कहा कि रुबियो को अपने चैनल से सुनने की जरूरत है, तब उनके डीजीएमो ने कॉल किया। इंडियन एक्सप्रेस में भारतीय सशस्त्र सेना का यह दावा भी छपा है कि पाकिस्तान सेना ने नियंत्रण रेखा पर 34-40 लोगों को खोया जबकि उसकी वायुसेना को कुछ विमानों का नुकसान हुआ। अमर उजाला में आठ कॉलम की लीड है और शीर्षक दो लाइन का, सीजफायर तोड़ा तो पाकिस्तान को कड़ा जवाब, ऑपरेशन सिन्दूर में दुश्मन के 40 सैनिक मारे, सभी ड्रोन भी मार गिराये। अमर उजाला का एक शीर्षक है, ऑपरेशन सिन्दूर जारी। इसके अनुसार वायुसेना ने स्पष्ट किया है कि ऑपरेशन सिन्दूर अब भी जारी है, समय पर इसकी विस्तृत जानकारी दी जायेगी। अखबार ने 100 आतंकी भी मार गिराये के साथ भारत के पांच सैनिक शहीद होने की खबर दी है। एक अन्य खबर का शीर्षक है, बीएसएफ का एक और जवान शहीद। इस खबर के अनुसार, पाकिस्तान के साथ चार दिन चले भीषण संघर्ष में जान गंवाने वालों की संख्या 28 हो गई है। आप जानते हैं कि पहलगाम हमले में 26 पर्यटकों के मारे जाने की खबर थी। बदले की कार्रवाई में 28 और लोग मारे गये हैं भले पाकिस्तान के सौ आतंकी भी मार गिराये गये हैं। यहां गौरतलब है कि पुलवामा के बाद सरकार ने एक बालाकोट हमले में 300 आतंकी मारने का दावा किया था। अब नौ ठिकानों पर हमले में 100 के मारे जाने का दावा है और वह भी तब जब 2019 में पाकिस्तान के सभी आतंकी खत्म कर दिये जाने का दावा किया गया था। जम्मू कश्मीर विधान सभा चुनाव में भी ऐसे ही दावे किये गये थे लेकिन तथ्य है कि इस दौरान पाकिस्तान का एक ठिकाना नष्ट किया गया तो नौ विकसित हो गये। इस रफ्तार से भारत पाकिस्तान से होने वाले आतंकवाद को कब तक कैसे खत्म कर पायेगा यह किससे पूछा जाये और कौन पूछे? मीडिया को बताने की चिन्ता ही नहीं है।
नवोदय टाइम्स की आज की लीड का शीर्षक है, नौ ठिकानों में 100 आतंकवादी ढेर किये गये। इससे लगता है कि बालाकोट का हमला सबसे बड़े शिविर पर था फिर भी 100 बचे रह गये थे या बाद में तैयार हो गये। जो भी हो, भारत के लिए यह भी चिन्ता का विषय है। अब जब विशेष लेख और संपादकीय लगभग नहीं होते हैं तब नवोदय टाइम्स में प्रमोद जोशी का लेख है, आतंकवाद की नाभि पर प्रहार प्रारंभ। पर मुद्दा यह है कि युद्ध में भारत को हुए नुकसान को नहीं बताया जा रहा है या छिपाया जा रहा है। कल शाम की एक खबर के अनुसार, प्रेस कॉन्फ्रेंस में वायुसेना के एयर मार्शल एके भारती से यह सवाल किया गया कि क्या ऑपरेशन सिंदूर के दौरान राफेल लड़ाकू विमान को नुकसान पहुंचा है, तो उन्होंने सीधे तौर पर न तो पुष्टि की और न ही इंकार किया। उन्होंने कहा, “युद्ध में नुकसान होना सामान्य है। मुख्य बात यह है कि क्या हमने अपना लक्ष्य हासिल किया? इसका जवाब है- बिल्कुल हां। बाकी विवरणों पर अभी टिप्पणी नहीं करूंगा क्योंकि हम अब भी संघर्ष की स्थिति में हैं और किसी भी जानकारी से दुश्मन को फायदा मिल सकता है। हमारे सभी पायलट सुरक्षित घर लौट आए हैं।”
द टेलीग्राफ में आज अनिता जोशुआ की बाईलाइन से एक खबर छपी है, जिसका शीर्षक है, सिंदूर संदेश : भारत ने आतंक की कीमत बढ़ा दी है। कहने की जरूरत नहीं है कि आतंक की इजाजत किसी भी कीमत पर नहीं होनी चाहिये और इसे रोकने के लिए क्या करना है, वह सरकार की जिम्मेदारी है। इसीलिए सरकार ने जब युद्ध या हमले का फैसला लिया तो सबने उसका साथ दिया। सरकार ने जो चाहा किया पर अचानक युद्धविराम सबके लिए एक झटके की तरह था। ऐसे में खबर है कि भारत ने रविवार को कहा कि ऑपरेशन सिंदूर खत्म नहीं हुआ है, वह पाकिस्तान में अंदर तक जाकर मनोवैज्ञानिक बढ़त हासिल करने के अपने दावे को बरकरार रखना चाहता है। टेलीग्राफ ने अपनी इस खबर के साथ एक महिला और बच्ची की फोटो छापी है जिसका कैप्शन इस प्रकार है, “उधमपुर एयरबेस पर हमले के दौरान शहीद हुए भारतीय वायुसेना के सैनिक सुरेन्द्र कुमार की बेटी वर्तिका रविवार को राजस्थान के महरादासी गांव में उनके अंतिम संस्कार के दौरान सैल्यूट करते हुए रो पड़ी। (रॉयटर्स)।” खबर के अनुसार, नई दिल्ली ने सिंधु जल संधि को स्थगित रखने पर भी अपनी बात रखी, अधिकारियों ने जोर देकर कहा कि “खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते”। सूत्रों ने कहा, ऑपरेशन सिंदूर अब से नई दिल्ली के लिए आतंकी गतिविधियों के जवाब का नया मानक होगा। साथ ही यह भी कहा कि भारत ने अब पाकिस्तान के लिए आतंक की कीमत बढ़ा दी है। हालांकि, सूत्रों ने आतंकी गतिविधियों की वह सीमा नहीं बताई, जिसके बाद की गई कार्रवाई का जवाब ऑपरेशन सिंदूर के तहत देगा।वपाकिस्तान में अंदर तक प्रमुख आतंकी केंद्रों पर हमला करके और सिंधु जल संधि को स्थगित रखकर नई दिल्ली यह संदेश देना चाहती है कि इस्लामाबाद को भारत को हजारों घाव देकर खून बहाने की अपनी नीति की कीमत चुकानी पड़ेगी।
ऑपरेशन सिंदूर के दृष्टिकोण को अलग रखते हुए, सिंधु जल संधि को स्थगित रखना भारत द्वारा पाकिस्तान को भारत के खिलाफ राज्य नीति के रूप में आतंकवाद का उपयोग जारी रखने के लिए दंडित करने के लिए उठाया गया सबसे महत्वपूर्ण कदम है। एक सूत्र ने कहा, “पहलगाम के बाद, हमने संकेत दिया है कि आतंकवाद की कीमत बढ़ाई जाएगी। खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते। यह उस सिद्धांत को रूप देना है।” 6-7 मई की रात को नौ लक्ष्यों पर निशाना साधा गया, जिनमें से तीन- बावलपुर, मुरीदके और मुजफ्फराबाद भारत के जवाबी कार्रवाई को बढ़ाने के निर्णय के लिए महत्वपूर्ण थे। सूत्रों ने कहा कि 2016 के उरी हमले का जवाब पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के अंदर “सर्जिकल स्ट्राइक” और पुलवामा का जवाब खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के अंदर हवाई हमले से देने के बाद, योजनाकार इस बार बड़ा और गहरा जाना चाहते थे। बहावलपुर, मुरीदके और मुजफ्फराबाद को इसलिए चुना गया क्योंकि ये पाकिस्तानी आतंकियों से बहुत करीब से जुड़े हुए हैं। सूत्रों ने बताया कि इन तीनों जगहों में से बहावलपुर में जैश-ए-मोहम्मद के ठिकाने को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचा है, जहां सशस्त्र बलों के पास सबसे ज्यादा ताकतवर हथियार मौजूद हैं।
युद्ध और युद्ध विराम की इन खबरों के बीच खबर यह भी है कि कांग्रेस ने सर्वदलीय बैठक की मांग की है, संसद के विशेष सत्र की अपनी मांग दोहराई है और मध्यस्तता की अमेरिकी कोशिशों को ना करने के लिए कहा है। दि एशियन एज में आज यह खबर कश्मीर का अंतरराष्ट्रीयकरण न करें कांग्रेस शीर्षक से छपी है। एक खबर जम्मू और कश्मीर पुलिस की भी है। इसके अनुसार (पुराने) राज्य (अब केंद्र शासित प्रदेश) की पुलिस ने 20 जगहों पर छापा मारकर पाकिस्तान स्लीपर सेल का खुलासा किया है। श्रीनगर डेटलाइन से द हिन्दू की खबर है, जम्मू व कश्मीर में बंदूकें शांत हुईं तो विस्थापित लोग घर वापसी की उम्मीद कर रहे हैं। द हिन्दू की लीड डीजीएमओ का बयान है, पाकिस्तानी सेना को भारी नुकसान पहुंचाया गया। आज एक खबर यह भी है कि सभी पायलट घर वापस आ गये हैं। रफाल विमान के नुकसान पर जो कहा गया उसे पहले बता चुका हूं। और जाहिर है, सरकार का कहना है कि पायलट वापस आ गये मतलब सब ठीक है और युद्ध में नुकसान होता ही है। पर सवाल है कि नुकसान कैसे हुआ और जब जनता को बताया गया है क बादल में रडार विमान को नहीं पकड़ पाते हैं तो इस बार जो सब (नुकसान) हुआ वह क्यों और कैसे हुआ। कोई भी देश प्रेमी जानना चाहेगा। हिन्दुस्तान टाइम्स ने लगभग इसी बात को लीड बनाया है। शीर्षक है, “उद्देश्य पूरे, भारत ने आतंकवाद से लड़ने में नया नॉर्मल तय किया”। कहने की जरूरत नहीं है कि उद्देश्य क्या थे यह बताये बगैर उन्हें कहना कि पूरे हुए और इसी तरह ऑपरेशन सिन्दूर नाम रखना और नया नॉर्मल क्या है नहीं बताना या जो हुआ है उसे सामान्य मान लिया गया है वह एक अलग खबर होनी चाहिये थी। यह याद दिलाते हुए कि पुराना सामान्य क्या था। टाइम्स ऑफ इंडिया की ली़ड का शीर्षक हिन्दुस्तान टाइम्स से बिल्कुल अलग, यह बताता है कि पाकिस्तान के हवाई अड्डों (एयर बेस) पर हमला पाकिस्तान के बदलने का मुख्य कारण था। ऊपर आपने पढ़ा कि हमला तो उधमपुर में भी हुआ था जहां एक मौत भी हुई लेकिन उसे छोड़कर टाइम्स ऑफ इंडिया ने दूसरी खबर को लीड बनाया है या शीर्षक बनाया है।


