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उत्तर प्रदेश

‘4पीएम’ में छपी भड़ास संपादक यशवंत सिंह के हमलावरों की गिरफ्तारी न होने की खबर

धोखे से यशवंत पर किया गया हमला, हमलावर भी पेशे से पत्रकार, खुलेआम घूम रहे हैं हमलावर
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। भड़ास फॉर मीडिया के संपादक यशवंत सिंह पर दिल्ली में प्रेस क्लब ऑफ इंडिया के गेट पर हमला होने के एक सप्ताह बाद भी हमलावर पुलिस की गिरफ्त से दूर हैं। हमलावर खुलेआम घूम रहे हैं और पुलिस मूकदर्शक बनी हुई है। वहीं हमलावरों की गिरफ्तारी न होने से पत्रकारों में रोष है। पत्रकारों का कहना है कि जब प्रेस क्लब जैसी जगह पर पत्रकार सुरक्षित नहीं हैं तो और जगहों पर उनकी सुरक्षा भगवान भरोसे ही होगी। पत्रकारों ने हमलावरों की जल्द से जल्द गिरफ्तारी की मांग की है।

धोखे से यशवंत पर किया गया हमला, हमलावर भी पेशे से पत्रकार, खुलेआम घूम रहे हैं हमलावर
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। भड़ास फॉर मीडिया के संपादक यशवंत सिंह पर दिल्ली में प्रेस क्लब ऑफ इंडिया के गेट पर हमला होने के एक सप्ताह बाद भी हमलावर पुलिस की गिरफ्त से दूर हैं। हमलावर खुलेआम घूम रहे हैं और पुलिस मूकदर्शक बनी हुई है। वहीं हमलावरों की गिरफ्तारी न होने से पत्रकारों में रोष है। पत्रकारों का कहना है कि जब प्रेस क्लब जैसी जगह पर पत्रकार सुरक्षित नहीं हैं तो और जगहों पर उनकी सुरक्षा भगवान भरोसे ही होगी। पत्रकारों ने हमलावरों की जल्द से जल्द गिरफ्तारी की मांग की है।

प्रेस क्लब में यशवंत सिंह शाम के समय बैठे हुए थे। दोनों हमलावर भूपेंद्र और अनुराग त्रिपाठी भी अलग टेबल पर मौजूद थे। प्रेस क्लब के भीतर ये दोनों यशवंत को देखने के बाद अपनी टेबल से उठकर उनकी टेबल पर आ गए। वहां बैठकर यशवंत की तारीफें किए जा रहे थे, उनसे गले मिल रहे थे। इसके कुछ ही देर बाद प्रेस क्लब से बाहर निकलने पर दोनों आरोपियों ने यशवंत पर धोखे से हमला कर दिया। इस हमले में यशवंत को काफी चोटें आयी है।

बताया जा रहा है कि यशवंत ने कुछ साल पहले भूपेन्द्र और अनुराग के कुछ कारनामों की पोल भड़ास पर खोली थी। वे दोनों इसी बात से नाराज थे। वरिष्ठ पत्रकार शंभुनाथ शुक्ल ने फेसबुक पर इस हमले की निंदा की है। उन्होंने लिखा है कि यशवंत सिंह पर हुए हमले पर पत्रकार जगत चुप है। असहिष्णुता को लेकर हल्ला-गुल्ला करने वालों ने भी एक शब्द नहीं कहा, जबकि यशवंत पर हमला सही मायने में एक जमीनी पत्रकार पर हमला है।

ये हैं दोनों हमलावर…

पत्रकारों की अपनी रोजी-रोटी और उसकी अपनी अभिव्यक्ति के लिए सिर्फ यशवंत सिंह ही लड़ रहे हैं। उन्होंने मीडिया हाउसेज और सत्ता की साठगांठ की परतें उजागर की हैं, लेकिन अब न तो वामपंथी न दक्षिणपंथी कोई भी संगठन उनके साथ खड़ा हो रहा है। बहरहाल कोई हो न हो लेकिन मैं इस साहसी और कर्मठ पत्रकार यशवंत सिंह पर हुए हमले की कड़ी भत्र्सना करता हूं। मैं फेसबुक के अन्य साथियों से भी अपील करूंगा कि वे साथी यशवंत पर हुए हमले की निंदा करें और सरकार पर दबाव डालें कि वह हमलावरों के विरुद्ध तत्काल कार्रवाई करे।

वरिष्ठ पत्रकार अंबरीष कुमार ने भी यशवंत पर हमले की निंदा की है। उत्तर प्रदेश मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति के उपाध्यक्ष संजय शर्मा ने भी हमले की निंदा करते हुए हमलावरों की गिरफ्तारी की मांग की है। ऐसे ही तमाम पत्रकारों ने इस हमले की निंदा करतेहुए हमलावरों की गिरफ्तारी की मांग की है।

साभार : 4पीएम, सांध्य दैनिक, लखनऊ

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