पत्रकारों पर हमले होते रहना लोकतंत्र के खतरे में पड़ने का संकेत!

पत्रकारों पर आये दिन हो रहे हमले इस देश को शायद गर्त की तरफ धकेलने का काम कर रहे हैं. इस बात को हम झुठला नहीं सकते कि अगर ऐसे ही पत्रकारों पर हमले होते रहे तो एक दिन लोकतंत्र खतरे में होगा. साथ ही अत्याचार और भ्रष्टाचार बहुत आसानी से फल फूल रहा होगा और ये देश उस वक्त मूक दर्शक बन के सब कुछ चुप चाप देख रहा होगा. आखिर ये लोग कौन हैं इनके हौसले इतने बुलंद कैसे हैं कि ये लोग हर आवाज उठाने वाले लोगों को मार देते हैं. सवाल यह भी उठता है कि बिना किसी सह के ये लोग ऐसा अंजाम कभी नही दे सकते. दरअसल पत्रकारों पर हमले वही लोग करते या करवाते हैं जो इन बुराइयों में डूबे हुये हैं. ऐसे लोग दोहरा चरित्र जीते है वजह साफ होती है कि ऐसे लोग मीडिया पर हमला क्यों करते हैं, वजह है अपना फायदा या अपनी भड़ास निकालने के लिए..

हाल ही में पत्रकार गौरी लंकेश को गोलियों से भून दिया गया देश के बुध्दिजीवियों ने तरह तरह की बातें की. नेताओं के भी बयान सामने आये लेकिन परिणाम शून्य रहा. खैर सच हमेसा कड़वा होता है सच लिखने के एवज में ही गौरी लंकेश को अपनी जान गंवानी पड़ी. जब गौरी लंकेश के हत्या का विरोध करने के लिए पत्रकारों का समूह प्रेस क्लब दिल्ली पहुंचा तो वहां एक घटना और घटी वो दु:खद थी वहां दो पत्रकारों ने मिलकर साथी पत्रकार भड़ास4मीडिया के संपादक यशवंत सिंह के साथ मारपीट की. जिसमें वह घायल हो गये.. इतना हो जाने के बावजूद भी यशवंत सिंह ने हिंसा करना उचित नहीं समझा यहां भी उन्होने कलम से ही जवाब देना उचित समझा और वही किया.

अब आप को हमला करने वाले इन पत्रकारों (गुण्डो) के बारे में अवगत करा दूं, एक है भूपेन्द्र सिंह भुप्पी और दूसरा है अनुराग त्रिपाठी. इन दोनों ने पहले प्रेस क्लब के अन्दर यशवंत सिंह से बातचीत की फिर बाहर निकलते ही उन पर हमला कर दिया. हमले में यशवंत सिंह को काफी चोटें आयी और उनका चश्मा भी टूट गया. आप को बता दें कि ये दोनो हमलावर अपनी ऐसी ही करतूतों की वजह से ही मीडिया जगत में नहीं टिक पाये हैं. इन दोनों का उल्टे सीधे काम करना ही पेशा बन गया है जो ये पत्रकारिता के जरिए अंजाम दे रहें है. इनकी पत्रकारिता को तत्काल प्रभाव से रद्द कर देना चाहिए ताकि आगे से यह ऐसी करतूत ना कर सकें.

अब आप को यशवंत सिंह के बारे में बताते हैं.. पेशे से पत्रकार हैं, पिछले कई वर्षो से भड़ास4मीडिया नामक बेवसाइट चलाते हैं. जहां मीडिया राजनीति और समाज से जुड़ी बुराइयों के बारे में लिखते हैं. यहां सवाल एक बार फिर यही उठ रहा है कि आखिर सच्चाई लिखने वाले पत्रकारों को क्यों मारा पीटा जाता है. क्या हमारे देश का चौथा स्तम्भ अब सुरक्षित नहीं रहा. हर बार दिखावे के तौर पर रिपोर्ट तो दर्ज की जाती है मगर उसका असर देखने को नहीं मिलता है. आखिर इसकी जवाबदेही कौन देगा कि जब भी पत्रकार प्रभावशाली लोगों के खिलाफ मुहिम छेड़ते हैं तो उन्हे उसकी कीमत जान देकर क्यों चुकानी पड़ती है.

यशवंत सिंह पर हमला हुआ लेकिन उसमें पुलिस प्रशासन ने अपनी क्या भूमिका निभाई… इसकी जवाबदेही कौन देगा… जब पत्रकारों की सुनवाई नहीं है तो आम जनता तो बहुत दूर की बात हो गयी. पुलिस प्रशासन क्या अब इसकी जिम्मेदारी लेगा कि अब यशवंत सिंह पूरी तरह से सुरक्षित हैं.. वन्दन करता हूं यशवंत जी आपका कि आज भी आपने अहिंसा को जिन्दा रखा है. आज गांधी जी की वो बात फिर याद आ गयी “अहिंसा परमों धर्म:”

लेखक हर्षित हर्ष शुक्ला युवा पत्रकार हैं.

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ना ना… ईमानदार न बनिए… वरना पिटाएंगे.. देखिए इन गुरुजी की हालत!

गजब है अपना देश. ईमानदार होना तो जैसे गुनाह है. फील्ड चाहे कोई हो. ठगी, लालच, धूर्तई, धोखेबाजी, बेईमानी, छल, अवसरवादिता, निहित स्वार्थीपना .. ये सब हम भारतीयों के खून में है. हजारों सालों से हो रहे हमलों और हमारी हारों ने अपन लोगों को जिंदा रहने की खातिर इन सब हथियारों का सहारा लेने को मजबूर किया और इतने दिनों तक इसका सहारा लेते रहे कि अब इसकी आदत पड़ गई है. यह हमारे खून, दिल, दिमाग का हिस्सा हो गया है. सदियों से चलने वाले ठगी प्रथा को साफ करने में अंग्रेजों को दशकों लग गए.

मतलब साफ है. जो चीजें हम लोगों से सदियों से करते रहे हैं, उसे भले कई वजहों से छोड़े हुए हों, कई किस्म के दबावों-मजबूरियों के कारण न करते हों, लेकिन अवचेतन में जिंदा है… अगर उचित मौका-अवसर मिले तो ये अपराधी डीएनए हुंकार भरने लगता है… धोखेबाज खून खौलने लगता है…. सो, सही कहा गया है- ‘हम भ्रष्टन के, भ्रष्ट हमारे’! 

बेइमानी के डीएनए वाले इस महा भ्रष्ट देश में इन्हीं ऐतिहासुक ‘गुणों’ की वजह से जनहित और देशहित में काम करने वाले सरोकारी टाइप लोग पगलेट माने जाते हैं. समाज-राजनीति से लेकर पेशे-महकमें के लोग तक इनका इलाज करने पर उतारू हो जाते हैं.

पत्रकारों के साथ तो इन दिनों खास बुरा हो रहा है. बेंगलुरु से लेकर बनारस तक पत्रकार मारे जा रहे हैं या पिट रहे हैं. त्रिपुरा और नोएडा की घटनाएं भी हाल की हैं. मेरा हाल भी आप लोगों ने देखा ही था. पोलखोल खबरों के प्रकाशन के कारण मेरे उपर भी दिल्ली के हर्ट प्रेस क्लब आफ इंडिया में हमला किया गया. फिलहाल ताजा मामला नकल रोकने पर एक गुरुजी के पिटाने का है. आगरा के इन प्रोफ़ेसर महोदय ने नकल विहीन परीक्षा के लिए कमर कस ली थी. बस, इसी गलती पर इन पर जानलेवा हमला हो गया. हमलावर मरणासन्न स्थिति में इन्हें छोड़ कर भाग निकले.

इन्हें देखकर अब मैं खुद के बारे में सोचता हूं… दुनिया में कितना ग़म है, मेरा ग़म कितना कम है…

युवा पत्रकार अंकित सेठी ने जानकारी दी है कि आगरा के सिकंदरा क्षेत्र के निवासी सीनियर प्रोफ़ेसर पीएस तिवारी को आरबी कॉलेज में चल रही लॉ की परीक्षाओं के लिए प्रभारी नियुक्त किया गया. सोमवार को परीक्षा के दौरान नक़ल करने से रोकने पर प्रोफ़ेसर तिवारी की कुछ छात्रों और एक साथी प्रोफेसर के साथ कहासुनी हो गई. मंगलवार सुबह लगभग सात बजे जब वह कॉलेज जाने के लिए निकले तो बाइक सवार अज्ञात हमलावरों ने उनकी गाडी रुकवाकर उन पर सरिया और लोहे की रोड से हमला कर दिया. पीड़ित ने बताया की हमलावर उन्हें परीक्षाओं में नकल को लेकर धमका रहे थे. उनका कहना है कि नक़ल विहीन परीक्षा कराने के उनके इरादों से परेशान होकर नक़ल माफिया, जिसमें कई प्रोफ़ेसर भी शामिल हैं, ने उन पर जानलेवा हमला करवाया है.

भड़ास एडिटर यशवंत सिंह की रिपोर्ट. संपर्क : yashwant@bhadas4media.com

पूरे मामले को समझने के लिए इन्हें भी पढ़ें…

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इन खबरों के कारण भड़ास संपादक यशवंत पर हमला किया भुप्पी और अनुराग त्रिपाठी ने!

साढ़े छह साल पुरानी ये वो खबरें है जिसको छापे जाने की पुरानी खुन्नस में शराब के नशे में डूबे आपराधिक मानसिकता वाले भूपेंद्र नारायण सिंह भुप्पी ने किया था भड़ास संपादक यशवंत सिंह पर प्रेस क्लब आफ इंडिया में हमला… इसमें सबसे आखिरी खबर में दूसरे हमलावर अनुराग त्रिपाठी द्वारा स्ट्रिंगरों को भेजे गए पत्र का स्क्रीनशाट है जिसके आखिर में उसका खुद का हस्ताक्षर है… ये दोनों महुआ में साथ-साथ थे और इनकी कारस्तानियों की खबरें भड़ास में छपा करती थीं… बाद में दोनों को निकाल दिया गया था…

इन दोनों से भड़ास एडिटर यशवंत की कभी कोई मुलाकात नहीं हुई थी, सिवाय कभी किसी कार्यक्रम या किसी जगह देखा-देखी के अलावा. इनके मन में इस बात की खुन्नस थी कि वैसे तो ये खुद को तीसमारखां पत्रकार समझते थे लेकिन इनका असली चेहरा सबके सामने लाया गया तो इन्हें चक्कर आने लगे. इनकी सारी दलाली-लायजनिंग की पोलपट्टी भड़ास पर लगातार खुलती रही जिसके चलते इनका पत्रकार का आवरण धारण कर दलाली करने का असली करतब दुनिया के सामने उदघाटित हो गया. इससे इनके लिए मुंह दिखाना मुश्किल हो गया होगा…

सोचिए, मीडिया के लोग वैसे तो पूरे देश समाज सत्ता की पोल खोलने के लिए जाने जाते हैं लेकिन जब इनकी पोल खुलती है तो ये कैसे पागल होकर हिंसक हो उठते हैं… जिसका पेशा कलम के जरिए दूसरों की पोल खोलना और आलोचना करना हो, वह खुद की सही-सही आलोचना छापे जाने से तिलमिलाकर कलम छोड़ बाहुबल पर उतर जाता हो, उसे क्या कहेंगे? पत्रकार के वेश में अपराधी या पत्रकार के वेश में पशु या पत्रकार के वेश में लंपट?

भड़ास4मीडिया के एडिटर यशवंत का कहना है कि ऐसे हमलों, पुलिस-थानों, मुकदमों और जेल से वे लोग डरने वाले नहीं… मीडिया के अंदरखाने का असल सच सामने लाते रहेंगे, चाहें इसके लिए जो भी कुर्बानी देनी पड़े… भुप्पी और अनुराग से संबंधित कुछ प्रमुख खबरों का लिंक, जो भड़ास पर साढ़े छह साल पहले छपीं, नीचे दिया जा रहा है… इन  खबरों पर एक-एक कर क्लिक करें और पढ़ें…


आजतक के ब्यूरो चीफ का हुआ स्टिंग?
http://old.bhadas4media.com/tv/8998-2011-02-03-04-47-10.html

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आजतक प्रबंधन ने अपने ब्यूरो चीफ को बर्खास्त किया?
http://old.bhadas4media.com/buzz/9130-2011-02-08-16-14-47.html

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ब्लैकमेलिंग के आरोपों में आजतक न्यूज चैनल से निकाले गए भुप्पी
http://old.bhadas4media.com/tv/9172-2011-02-10-19-01-06.html

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महुआ न्यूज चैनल के हिस्से हो गए भूपेंद्र नारायण सिंह भुप्पी!
http://old.bhadas4media.com/edhar-udhar/10121-2011-03-27-13-50-04.html

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आजतक से हटाए गए भुप्पी अब तिवारी जी की सेवा में जुटे
http://old.bhadas4media.com/tv/10769-2011-04-26-07-15-30.html

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महुआ न्यूज़ से भी विदाई हुई भूपेंद्र नारायण भुप्पी की
http://old1.bhadas4media.com/edhar-udhar/6062-bhuppi-out-from-mahua.html

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पैसे की जगह स्ट्रिंगरों को धमकी भरा पत्र भेज रहे हैं महुआ वाले
http://old1.bhadas4media.com/print/4507-2012-05-19-18-21-08.html


पूरे प्रकरण का अपनी तरफ से पटाक्षेप करते हुए यशवंत ने फेसबुक पर जो लिखा है, वह इस प्रकार है-

”मेरे पर हमला करने वाले भुप्पी और अनुराग त्रिपाठी को लेकर ये मेरी लास्ट पोस्ट है. इसमें उन खबरों का जिक्र और लिंक है जिसके कारण इन दोनों के मन में हिंसक भड़ास भरी पड़ी थी और उसका प्राकट्य प्रेस क्लब आफ इंडिया में इनने किया. मैंने अपनी तरफ से रिएक्ट नहीं किया या यूं कहें कि धोखे से इनके द्वारा किए गए वार से उपजे अप्रत्याशित हालात से मैं भौचक था क्योंकि मुझे कभी अंदेशा न था कि कलम धारण करने वाला कोई शख्स बाहुबल के माध्यम से रिएक्ट करेगा. मैं शायद अवाक था, अचंभित था, किंकर्त्व्यविमूढ़ था. इस स्थिति के लिए मानसिक रूप से तैयार नहीं था. अंदर प्रेस क्लब में तारीफ और बाहर गेट पर हमला, इस उलटबांसी, इस धोखेबाजी से सन्न हो गया था शायद. आज के दिन मैं मानता हूं कि जो हुआ अच्छा हुआ.  हर चीज में कई सबक होते हैं. मैंने इस घटनाक्रम से भी बहुत कुछ लर्न किया. मेरे मन में इनके प्रति कोई द्वेष या दुश्मनी नहीं है. मैं जिस तरह का काम एक दशक से कर रहा हूं, वह ऐसी स्थितियां ला खड़ा कर देता है जिसमें हम लोगों को जेल से लेकर पुलिस, थाना, कचहरी तक देखना पड़ता है. एक हमला होना बाकी था, ये भी हो गया. अब शायद आगे मर्डर वाला ही एक काम बाकी रह गया है, जिसे कौन कराता है, यह देखने के लिए शायद मैं न रहूं 🙂

मैंने अपने इन दोनों हमलावरों को माफ कर दिया है क्योंकि मैं खुद की उर्जा इनसे लड़ने में नहीं लगाना चाहता. दूसरा, अगर इनकी तरह मैं भी बाहुबल पर उतर गया तो फिर इनमें और मेरे में फर्क क्या रहा?  मैं इन्हें अपना दुश्मन नहीं मानता. मेरा काम मीडिया जगत के अंदर के स्याह-सफेद को बाहर लाना है, वो एक दशक से हम लोग कर रहे हैं और करते रहेंगे. ऐसे हमले और जेल-मुकदमें हम लोगों का हौसला तोड़ने के लिए आते-जाते रहते हैं, पर हम लोग पहले से ज्यादा मजबूत हो जाते हैं. लोग मुझसे भले ही दुश्मनी मानते-पालते हों पर मेरा कोई निजी दुश्मन नहीं है. मैं एक सिस्टम को ज्यादा पारदर्शी, ज्यादा लोकतांत्रिक और ज्यादा सरोकारी बनाने के लिए लड़ रहा हूं और लड़ता रहूंगा. मैं पहले भी सहज था, आज भी हूं और कल भी रहूंगा. हां, इन घटनाओं से ये जरूर पता चल जाता है कि मुश्किल वक्त में कौन साथ देता है और कौन नहीं. पर इसका भी कोई मतलब नहीं क्योंकि चार पुराने परिचित साथ छोड़ देते हैं तो इसी दरम्यान दस नए लोग जुड़ जाते हैं और परिचित बन जाते हैं. बदलाव हर ओर है, हर पल है, इसे महसूस करने वाला कर लेता है.  मैं नेचर / सुपर पावर / अदृश्य नियंता पर भरोसा करता हूं, बहुत शिद्दत के साथ, इसलिए मुझे कतई एहसास है कि हर कोई अपनी सजाएं, अपनी मौज हासिल करता रहता है. इसलिए मैं अपने हमलावर साथियों को यही कहूंगा कि उनने जो किया उसका फल उन्हें ये नेचर देगा जिसके दरम्यान उनका अस्तित्व है. जैजै”


पूरे मामले को समझने के लिए इन खबरों / टिप्पणियों / आलेखों को भी पढ़ें…

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हमलावरों भुप्पी और अनुराग के घर का एड्रेस चाहिए ताकि उन्हें ‘गेट वेल सून’ कहते हुए फूल सौंप सकें!

Yashwant Singh : मुझे यकीन है वे पश्चाताप करेंगे, अपराधबोध से ग्रस्त होंगे, सुधरेंगे, बदलेंगे, यही ठीक भी है. बहुत सारे साथी बदला लेने, ईंट का जवाब पत्थर से देने की बात कर रहे हैं. आठ साल पहले का दौर होता तो शायद मैं भी यही सोचता और ऐसा ही कुछ करता. लेकिन इस वक्त सोचता हूं कि अगले दस बीस तीस साल का जीवन देखिए, कौन कहां, मैं कहां, आप कहां. किसी एक घटना के प्रतिशोध में जीवन की उदात्तता और सहजता को न्योछावर कर दिया जाए, ये ठीक नहीं. हां, गांधीगिरी करेंगे हम सब. उन्हें कलम के जरिए जवाब दिया जाएगा. ध्यान रखें वे कलम की ताकत यानि खबरों के कारण गुस्साए थे और उसी प्रतिशोध में हमला किया. यानि तय है कि कलम ज्यादा ताकतवर है.

इस लोकतंत्र में लोकतांत्रिक और कानूनी तरीके से जो कुछ संभव है, वह किया जाएगा. लेकिन प्लीज, ये बदला और प्रतिशोध की बातें न करें. यह आदिम स्वभाव, यह मध्ययुगीन तरीका, यह आंख के बदले आंख वाला फार्मूला मनुष्यता को कहीं का न छोड़ेगा. गल्तियां हर कोई करता है. ज्यादातर लोग गल्तियों से सबक लेते हैं, प्रायश्चित करते हैं और उसे फिर न रिपीट करने की ठानते हैं. जीवन में मैंने भी दर्जनों गल्तियां की होगीं. हम मनुष्य हैं तो गल्ती करेंगे, अच्छाई करेंगे. पत्थर होते तो कुछ न करते, चुपचाप समाधिस्थ होते. सो, मौका उनको दिया जाना चाहिए. पर उन्हें बिलकुल निरापद भी नहीं छोड़ दिया जाना चाहिए.

जीवन को लेकर मेरी अपनी प्रियारटीज हैं. उसे कुछ पागलों की हरकतों के कारण नहीं बदलना चाहूंगा. तब तक नहीं बदलना चाहूंगा जब तक जीना दुश्वार न हो जाए. मैं अहिंसक या हिंसक, किसी पक्ष का आदमी नहीं हूं. जीवन की उदात्तता में अहिंसा और हिंसा के सवाल बहुत ही मामूली होते हैं. इसलिए अहिंसा या हिंसा, दोनों का पुजारी नहीं हूं. जैसे, सच या झूठ, दोनों मल्टीडायमेंशनल चीजें होती हैं, इनकी कोई एक परत नहीं होती. आपका सच मेरे लिए झूठ हो सकता है और मेरा सच आपके लिए झूठ. किसी फकीर का सच किसी सेठ के लिए झूठ हो सकता है और किसी धनवान का सच किसी फकीर के लिए बेहद झूठा.

इसलिए मैं अपने सभी जानने चाहने वाले साथियों से कहूंगा कि भूल जाएं कि मेरे पर कोई हमला हुआ था. याद रखना चाहें तो ये याद रखें कि एक रोज हम सब एक एक गुलाब का फूल लेकर हमलावर साथियों के घर चलेंगे और उनके गेट पर खड़े होकर गेट वेल सून कहेंगे. उनकी पत्नी और बच्चों से उनके पति-पिता की शिकायत करेंगे. इसलिए मेरी मदद यूं करें कि हमलावर साथियों का फोन नंबर और उनके घर का एड्रेस मालूम कर इनबाक्स करें. तारीख और समय की घोषणा जल्द की जाएगी.

जो जानकारी फिलहाल उपलब्ध है उसके मुताबिक भूपेंद्र नारायण भुप्पी गाजीपुर का रहने वाला है और नोएडा व चंडीगढ़ में इन दिनों रहता है. अनुराग त्रिपाठी लखनऊ का रहने वाला है और नोएडा में इन दिनों रहता है, न्यूजलांड्री नामक कंपनी में नौकरी करता है.

फोन नंबर इसलिए कि इन्हें हम लोग एडवांस में सूचित करके, फोन करके, डेट-समय बता कर इनके घर पर गुलाब का फूल लेकर पहुंचेंगे.

जैजै.

दोनों हमलावरों की तस्वीर ये है…

भड़ास4मीडिया के एडिटर यशवंत सिंह की एफबी वॉल से.

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क्या ‘भड़ास टास्क फोर्स’ बनाने का वक्त आ गया है?

भड़ास संपादक यशवंत पर पत्रकार कहे जाने वाले दो हमलावरों भूपेंद्र नारायण भुप्पी और अनुराग त्रिपाठी ने प्रेस क्लब आफ इंडिया के गेट पर हमला किया था. उस हमले से उबरने के बाद यशवंत ने अपने भविष्य की योजनाओं को लेकर काफी कुछ खुलासा किया है. इसमें एक भड़ास टास्क फोर्स बनाने का प्रस्ताव भी शामिल है.

इस बाबत यशवंत ने फेसबुक पर जो लिखा है, वो इस प्रकार है…

यशवंत ने अपनी पूरी बात इस वीडियो में कही है…

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यशवंत हजारों पीड़ितों को स्वर दे रहे हैं, भगवान उन्हें दीर्घायु दें

भड़ास के संपादक यशवंत सिंह पर हमले की खबर पढ़कर मन बहुत व्यथित हुआ। साथ ही इससे बहुत खिन्नता भी उपजी, आज के पत्रकारिता जगत के स्वरूप को लेकर। यशवंत सिंह पर हमला करने वाले निश्चित रूप से मानसिक रूप से दिवालिया हैं। यह बात भी तय है कि वे तर्क और सोचविहीन हैं।

निश्चित तौर पर वे पत्रकारिता जगत के लिए बदनुमा दाग हैं। उन्हें यह नहीं पता है कि यशवंत सिंह कितना बड़ा योगदान पत्रकारिता जगत के मूल्यों को समाज में बचाए रखने के लिए कर रहे हैं। यशवंत वो काम कर रहे हैं जिसे मीडिया जगत में बड़े नाम के रूप में स्थापित समूह भी नहीं कर सकते हैं। वे हजारों पीड़ितों को स्वर दे रहे हैं। भगवान उन्हें दीर्घायु दें।

उमेश शुक्ल
सीनियर जर्नलिस्ट
झांसी
umeshsukul@gmail.com

ये हैं दोनों हमलावर…

इसे भी पढ़ें…

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पत्रकार कहे जाने वालों का यशवंत जैसे एक निर्भीक पत्रकार पर हमला बेहद शोचनीय है : अविकल थपलियाल

Avikal Thapliyal : कोहरा घना है… बेबाक और निडर पत्रकारों पर हमले का अंदेशा जिंदगी भर बना रहता है। भाई यशवंत को भी एक दिन ऐसे घृणित हमले का शिकार होना ही था। बीते वर्षों में हुई मुलाकात के दौरान मैंने यशवंत का ध्यान इस ओर खींचा भी था। लेकिन मुझे ऐसा लगता था कि कई बार फकीराना अंदाज में सभी को गरियाने वाले यशवंत किसी अपराधी या फिर विशेष विचारधारा से ताल्लुक रखने वाले हिंसक लोगों के कोप का भाजन बनेंगे। लेकिन पत्रकार कहलाये जाने वाले ही अपने बिरादर भाई यशवंत की नाक पर दिल्ली प्रेस क्लब में हमला कर देंगे, यह नहीं सोचा था।

यशवंत ने अपने पोर्टल के जरिये हिंदुस्तान के मीडिया जगत की खबरों के अलावा कई रचनात्मक प्रयोग किये, जिसकी प्रशंसा सभी करते हैं। साथ ही बतौर पत्रकार अपने को भी गरियाने में यशवंत कोई कोर कसर नही छोड़ते। जेल जाने पर ‘जानेमन जेल’ किताब लिख मारी। वह किताब भी एक जेल याफ्ता पत्रकार की स्वीकारोक्ति स्वागत योग्य थी। बहरहाल, यशवंत पर हुए हमले की निंदा की जानी चाहिए और हमले के आरोपी को सजा मिलनी चाहिए। पत्रकार कहे जाने वालों का एक निर्भीक पत्रकार पर हमला बेहद शोचनीय है। यशवंत की धाकड़ लेखनी सच उगलती रहे, और ये घना कोहरा छंटे…. आमीन!

उत्तराखंड के वरिष्ठ पत्रकार अविकल थपलियाल की एफबी वॉल से.

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विकास सिंह डागर : कई दिनों पहले भड़ास वाले यशवंत जी पर दो मानसिक दिवालिया तथाकथित पत्रकारों ने दिल्ली प्रेस क्लब में हमला कर दिया था।  हमला तो अकेले यशवंत जी पर हुआ लेकिन उसकी चोट शायद उन तमाम पत्रकारों को लगी जो मेहनत और ईमानदारी से अपने पेट का गुजारा कर रहे हैं। लेकिन इस घटना पर दुःख जताने वाले कम हैं, दिवाली मनाने वाले ज्यादा। कारण है यशवंत सिंह की कलम, जो आये दिन मीडिया में बैठे दलालों पर वार करती रहती है। किसी बड़े चैनल का सम्पादक हो, कोई जिले का उगाहीबाज स्टिंगर हो या रात दिन मेहनत करने वाले पत्रकारों की तनख्वाह मारने वाले मालिक। यशवंत लगातार ऐसे लोगों की पोल भड़ास डॉट कॉम के जरिये खोलते रहे हैंं और यही कारण है कुछेक पत्रकारों को छोड़कर बाकी सभी इस शर्मनाक कांड पर चुप्पी साधे हुए हैं।

मौजूदा समय मे पत्रकारिता में कुछेक ही लोग हैं जो अपने ही पेशे में फैल रही कुरूतियों के खिलाफ लिखते बोलते हैं। अगर ऐसे में सबसे बड़े भड़ासी और भड़ासियों की आवाज़ यशवंत जी पर हमला होता है तो कहीं ना कहीं हम जैसे लोग जो अपने घर की कुरूतियो से लड़ रहे हैं, उन्हें झटका लगना लाजमी है। ऐसे समय में यशवंत सिंह का साथ देना और आरोपियों का बहिष्कार कर उन्हें सजा दिलवाना हमारा कर्तव्य है। साथ ही मैं उन लोगों को सलाह दूँगा जो इस कायराना काँड पर खुशी जता रहे हैं कि यशवंत सिंह की दुश्मनी आप लोगों से नहीं थी, उन्होंने आपकी कुरूतियों को उजागर किया, जिसकी खुन्नस तुम लोग दिमाग मे लिए बैठे हो।

लेखक विकास सिंह डागर एक टीवी चैनल के रिपोर्टर हैं.

ये हैं दोनों हमलावर…

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हमलावर लोग कायर होते हैं, इसलिए हारना अंततः उन्हें ही होता है…

Anoop Gupta : पत्रकार यशवंत सिंह पर प्रेस क्लब ऑफ इंडिया के बाहर हमला किया गया और पुलिस की चुप्पी तो समझ आती है, प्रेस क्लब की चुप्पी के मायने क्या हैं। अगर यशवंत का विरोध करना ही है तो लिख कर कीजिये, बोल कर कीजिए, हमला करके क्या साबित किया जा रहा है। मेरा दोस्त है यशवंत, कई बार मेरे मत एक नहीं होते, ये जरूरी भी नहीं है लेकिन हम आज भी दोस्त हैं। चुनी हुई चुप्पियों और चुने हुए विरोध से बाहर निकलने की जरूरत है।

यशवंत अपने सीमित संसाधनों में भड़ास4 मीडिया चलाते रहे हैं और मीडिया की दुनिया के कई गलत कारनामे निर्भीकता के साथ सामने लाते रहे हैं। एक ऐसे समय में जबकि पूरा मीडिया कॉर्पोरेट घरानों के कब्ज़े में है, इस तरह के सूचना माध्यम काफी अहमियत रखते हैं। काबिलेतारीफ बात यह रही कि यशवंत ने हिम्मत के साथ इस हमले को बेनकाब किया और अभी भी अपनी उसी प्रतिबद्धता के साथ मीडिया मैदान में डटे हुए हैं।

ये हैं दोनों हमलावर…

हम सब आपके साथ हैं। हमलावर लोग कायर होते हैं, इसलिए हारना अंततः उन्हें ही होता है… देश के सभी बागी पत्रकारों से मेरी अपील है की यशवंत सिंह पर हुए हमले के विरोध में दिल्ली के प्रेस क्लब पर सब लोग एक साथ आये और हमलावरों के खिलाफ मोर्चा खोले जिससे कभी कोई और यशवंत सिंह पर हमला करने की जुर्रत ना कर सके. में अनूप गुप्ता संपादक दृष्टान्त लखनऊ हर तरह से यशवंत सिंह के साथ थे, है और रहेंगे.

लेखक अनूप गुप्ता लखनऊ से प्रकाशित चर्चित मैग्जीन दृष्टांत के प्रधान संपादक हैं.

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हे ईश्वर, हमलावर भुप्पी और अनुराग को क्षमा करना, वे नहीं जानते कि वे क्या कर रहे हैं..

Shrikant Asthana : प्रेस क्लब आफ इंडिया परिसर में यशवंत पर हमला हुए कई दिन बीत चुके हैं। अपराधियों की पहचान भी सबके सामने है। फिर भी न पुलिस कार्रवाई का कुछ पता है, न ही इनके संस्थानों की ओर से। क्या हम बड़ी दुर्घटनाओं पर ही चेतेंगे? कौन लोग इन अपराधियों को बचा रहे हैं? वैसे भी, कथित मेनस्ट्रीम मीडिया के बहुत सारे कर्ता-धर्ता तो चाहते ही हैं कि वे यशवंत की चटनी बना कर चाट जाएं। इस श्रेणी से ऊपर के मित्रों-शुभचिंतकों से जरूर आग्रह किया जा सकता है कि वे उचित कार्रवाई के लिए दबाव बनाएं। अपनी फक्कड़ी में यशवंत किसी को अनावश्यक भाव देता नहीं। लगभग ‘कबीर’ हो जाना उसे यह भी नहीं समझने देता कि यह 15वीं-16वीं शती का भारत नहीं है। First hand account of attack on Yashwant Singh : https://www.youtube.com/watch?v=MgGks6Tv2W4 I’m very thankful to friends who have shown deep concern about the incident and are likely to help create due pressure.

Surendra Grover : पत्रकारों के साथ आये दिन होने वाली #मारपीट और उनकी हत्याओं से कई दिनों से सदमे की स्थिति में हूँ.. पिछले दिनों तो गज़ब हुआ जब पत्रकारिता का लबादा ओढ़े दो लोगों ने छोटे छोटे पत्रकारों की तकलीफ सबके सामने रखने वाले पत्रकार Yashwant Singh पर हमला कर दिया.. यानी कि अब पत्रकारिता लायजनिंग से होते हुए गुण्डागर्दी तक पहुंच गई है.. हे ईश्वर, उन्हें क्षमा करना, वे नहीं जानते कि वे क्या कर रहे हैं…

ये हैं दोनों हमलावर…

Sanjay Yadav : कलम के धनी Yashwant Singh भाई साहब पर हमला हुए कई दिन हो गए. यशवंत भाई को पिछले दो साल से पढ रहा हूँ और देख ऱहा हूँ. उनका संघर्ष अपनी पत्रकार बिरादरी के लिए है. मैं कोई पत्रकार नहीं हूँ. दिल्ली में अकेला रहकर नौकरी करता हूँ और yashwant भाई साहब से कभी मिला नहीं. पर मुझे पता नही क्यों ये लगता है कि कभी जरूरत पड़ी तो ये बंदा आधी रात को भी मेरे साथ खडा होगा. जबसे भाई साहब पर हमला हुआ, मैं बहुत परेशान था. अच्छा लगा कि लोग इनके साथ खडे हैं. पर कुछ लोग लिखते हैं कि yashwant की विचारधारा अलग है. ज़हां तक मैँ यशवंत भाई को समझा हूँ, इनकी एक ही विचारधारा है, और वो है इंसानियत. यशवंत भाई यारों के यार हैं. जब ये किसी के साथ खडे होते हैं तो ना तो उसकी विचारधारा देखते हैं और ना ही उसका कद-पद.

चन्द्रहाश कुमार शर्मा : यशवंत सिंह किसी राजनीतिक पार्टी का चोला पहने होते, तो न आवाज़ बुलंद होती? साथियों, आज मैं बात कर रहा हूं एक ऐसे निडर, निर्भीक व धारदार कलम के धनी उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले से निकले देश के नामी पत्रकार जो देश के हरएक नागरिक, यहाँ तक की मीडियाकर्मियों पर भी जब-जब जुल्म होते हैं, वह बड़ी प्रमुखता से अपने लोकप्रिय न्यूज़ पोर्टल भड़ास फ़ॉर मीडिया में प्रकाशित करते हैं। हुआ कुछ यूं कि… एक सप्ताह पहले वह प्रेस क्लब ऑफ इंडिया पहुंचे। वहां दो संकीर्ण विचारधारा के पत्रकार भूपेंद्र नारायण सिंह भुप्पी और अनुराग त्रिपाठी उनकी तारीफ में पुल बांधें। जब यशवंत बाहर निकलने लगे, तब उसी भुप्पी और त्रिपाठी ने उन पर हमला बोल दिया। यशवंत सिंह काफी चोटिल हुए। जब सोशल मीडिया पर उन्होंने अपना दर्द बयां किया, तो सभी हिल गए। इस घटना के इतने दिन बीत जाने के बाद भी न सरकार सख्त है, न पत्रकार। यशवंत सर में एक खूबी रही है कि वह किसी राजनीतिक पार्टी को सपोर्ट नहीं करते और न ही उनके एहसान तले दबते हैं। यदि वह ऐसा किये होते तो लगातार टीवी पर खबरें चलती और यह मामला तूल पकड़ लिया होता। (चंद्रहाश कुमार शर्मा, यूपी व बिहार प्रभारी- भोजपुरिया बयार न्यूज़ पोर्टल)

वरिष्ठ पत्रकार श्रीकांत अस्थाना, सुरेंद्र ग्रोवर, संजय यादव और चंद्रहाश कुमार शर्मा की एफबी वॉल से.

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‘यशवंत बड़ा वाला लंकेश है, इसे जान से मारना चाहिए था!’

Naved Shikoh : दिल्ली प्रेस क्लब में यशवंत भाई पर होता हमला तो मैंने नहीं देखा लेकिन लखनऊ के प्रेस क्लब में कुछ भाई लोगों को इस घटना पर जश्न मनाते जरूर देखा। पुराने दक्षिण पंथी और नये भक्तों के साथ फ्री की दारु की बोतलें भी इकट्ठा हो गयीं थी। आरोह-अवरोह शुरू हुआ तो गौरी लंकेश की हत्या से बात शुरु हुई और यशवंत पर हमले से बात खत्म हुई। कॉकटेल जरूर हो गयी थी लेकिन वामपंथियों को गरियाने के रिदम का होश बरकरार था।

एक ने कहा- ‘बड़े-बड़ों की फटी पड़ी है लेकिन इस यशवंत के सुर-लय में कोई फर्क नहीं आया’। एक मीडिया समूह के मालिक का चमचा और मैनेजमेंट का आदमी लगा रहा था, बोला- ‘हम लोगों ने तो आफिस के हर सिस्टम से भड़ास ब्लॉक करवा दिया है’। एक बेवड़ा कहने लगा कि हिम्मत तो देखो यशवंत की, बेलगाम इतना है कि नीता अंबानी तक के बारे मे भी लिखने से नहीं डरता। एक मोटा आसामी बोला- ‘बड़ा वाला लंकेश है यशवंत, इसे तो जान से मारना चाहिए था।’

ये हैं दोनों हमलावर…

इनकी बातें सुनकर लगा कि सच लिखने वाले निर्भीक पत्रकारों की आवाज बंद करने के लिए न सिर्फ अंबानी-अडानी के चैनल इस्तेमाल हो रहे हैं बल्कि टुच्चे और दलाल किस्म के पत्रकारों को भी निडर पत्रकारों को डराने धमकाने के लिए मारने-पीटने की सुपारी दी जा रही है। सरकार के भोपू चैनल हों या भुप्पी जैसे टुच्चे और दलाल पत्रकार, इन्हें कहीं न कहीं से सच लिखने वाले यशवंत सिंह जैसे पत्रकारों को डरा कर खामोश करने की सुपारी दी जा रही है।

उधर, लखनऊ के कई पत्रकार संगठनो ने बैठक की। उत्तर प्रदेश जिला मान्यता प्राप्त पत्रकार एसोसिएशन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस बैठक में आधा दर्जन पत्रकार संगठनों के सैकड़ों पत्रकारों ने शिरकत की। पत्रकारों ने यशवंत सिंह के हमलावरों को जल्द से जल्द गिरफ्तार किये जाने की मांग की।

नवेद शिकोह लखनऊ के वरिष्ठ पत्रकार हैं. उनसे संपर्क 9918223245 या Navedshikoh84@gmail.com के जरिए किया जा सकता है.

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पत्रकारिता में ‘सुपारी किलर’ और ‘शार्प शूटर’ घुस आए हैं, इनकी रोकथाम न हुई तो सबके चश्मे टूटेंगे!

Rajiv Nayan Bahuguna : दिल्ली प्रेस क्लब ऑफ इंडिया परिसर में एक उद्दाम पत्रकार यशवंत सिंह को दो “पत्रकारों” द्वारा पीटा जाना कर्नाटक में पत्रकार मेध से कम चिंताजनक और भयावह नहीं है। दरअसल जब से पत्रकारिता में लिखने, पढ़ने और गुनने की अनिवार्यता समाप्त हुई है, तबसे तरह तरह के सुपारी किलर और शार्प शूटर इस पेशे में घुस आए हैं। वह न सिर्फ अपने कम्प्यूटर, मोबाइल और कैमरे से अपने शिकार को निशाना बनाते हैं, बल्कि हाथ, लात, चाकू और तमंचे का भी बेहिचक इस्तेमाल करते हैं।

इस पेशे में इनकी उपस्थिति वास्तविक श्रम जीवी पत्रकारों के लिए राजनैतिक और आर्थिक धन पशुओं से अधिक भयावह है। इनकी रोकथाम न हुई, तो बारी बारी सबके हाथ, पाँव चश्मे तथा नाक तोड़ेंगे, जैसे यशवंत की तोड़ी है। इनका मुक़ाबला लिख कर, बोल कर तथा जूतिया कर करना अपरिहार्य है।

उत्तराखंड के वरिष्ठ और चर्चित पत्रकार राजीव नयन बहुगुणा की एफबी वॉल से.

भड़ास संपादक यशवंत पर हमले को लेकर धीरेंद्र गिरी, पंकज कुमार झा और शैलेंद्र शुक्ला की प्रतिक्रियाएं कुछ यूं हैं…

Dhirendra Giri : बेबाक शख्सियत है Yashwant Singh जी…. फ़र्ज़ी लोग इस वज़न को सह नही पाते… खैर उन्होंने कई दफा टुच्चो को सहा है। आगे भी वह हमेशा की तरह मज़बूत ही दिखाई देंगे । इस आक्रमण की घोर निंदा पढ़ने लिखने और चिंतन करने वाली पूरी बिरादरी को करनी चाहिए।

पंकज कुमार झा : मीडिया के एजेंडा आक्रमण के हमलोग भी ऐसे शिकार हो जाते हैं कि कोई घोषित अपराधी की हत्या पर पिल पड़ते हैं जबकि अपने निजी सम्पर्क के लोगों, मित्रों तक के साथ हुए किसी आक्रमण तक पर ध्यान नही जाता. गौरी लंकेश की हत्या पर होते वाम दुकानदारी के बीच ही मित्र Yashwant Singh पर प्रेस क्लब में आक्रमण की ख़बर आयी. कोई भुप्पी और किसी त्रिपाठी ने दारू के नशे में इस करतूत को अंजाम दिया. दोनों शायद किसी ख़बर के भड़ास पर छापे जाने से नाराज़ थे. आइए इस हरकत की भर्त्सना करें और अगर कर पायें तो दोषियों को दंडित कराने की कोशिश हो. सभ्य समाज में ऐसा कोई कृत्य बिल्कुल भी सहन करने लायक नही होनी चाहिए.

ये हैं दोनों हमलावर…

Shailendra Shukla : यशवंत भाई पर हमला यानी लोकतंत्र के चौथे स्तम्भ के चौथे स्तम्भ पर हमला..  भारत वर्ष में ऐसा माना जाता है कि मीडिया लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ है। अगर ये सही है तो यशवंत भाई और भड़ास चौथे स्तम्भ के स्तम्भ है। भाई के ऊपर कुछ तथाकथित पत्रकारों ने हमला किया और वह भी भरोसे में लेकर। यशवंत भाई… यानी अगर मीडिया आपके साथ गलत कर रहा है तो उसके खिलाफ खड़ा होने वाला एकमात्र इंसान… कुछ छुटभैये किश्म के तथाकथित फर्जी पत्रकारों ने उनके साथ जो गुस्ताखी की है उसकी सजा उन्हें कानून पता नहीं कब देगा लेकिन अगर मुझे भविष्य में ऐसा अवसर मिलता है जिसमें उन सज्जनों से मुलाकात होती है तो उनकी खातिरदारी मैं जरूर करूँगा… उसके बदले इस देश का कानून जो भी सजा मेरे लिए तय करेगा मैं उसे सत्य नारायण भगवान का प्रसाद समझकर ग्रहण कर लूंगा। अब बात यशवंत भाई और उन तथाकथित पापी किश्म के पत्रकारों की… अगर उन्हें लग रहा है कि उन्होंने यशवंत भाई को धोखा दिया तो वे गलत हैं… उन्हें लग रहा है कि उन्होंने यशवंत भाई पर हमला किया तो भी वो गलत हैं … किसी दीवार पर मैंने लिखा हुआ एक वाक्य पढ़ा था ….

“अगर आप किसी को धोखा देने में कामयाब हो जाते हो तो ये आपकी जीत नहीं है… बल्कि ये सोचो सामने वाले को आप पर कितना भरोसा था जिसे आपने तोड़ दिया”

खैर यशवंत भाई से बात की मैन भावुक होकर बदले की भावना प्रकट की और मैं आज नहीं तो कल उस चूहे तक जरूर पहुँच जाऊंगा… लेकिन भैया हो सकता है आप राम हो पर मैं नहीं…. मैंने लक्ष्मण जी की एक बात बिलकुल गाँठ बांध रखी है….

“जो ज्यादा मीठा होता है.. वह अपना नाश कराता है।
देखो तो मीठे गन्ने को.. कोल्हू में पेरा जाता है।।”

मैं यशवंत भाई पर हुए हमले की निंदा नहीं करूंगा… भर्तसना नहीं करूँगा… लेकिन अगर मौका मिला तो “जैसे को तैसा” वाला मुहावरा हमलावरों के साथ जरूर चरित्रार्थ करूँगा। अगर मेरे फेसबुक वॉल या किसी अन्य माध्यम से ये मैसेज उन दुर्जनों तक पहुचता है तो वो खुलकर मेरे सामने आ सकते है। वह इस बात का विशेष ध्यान रखें कि अगर वो धूर्त हैं… ठग हैं… मीठी मीठी बातों में मुझे फंसा लेंगे जैसे यशवंत भाई के साथ उन्होंने किया तो ऐसे मत सोचें… क्योंकि मैं वाकई में महाधूर्त… हूँ खासकर उन दुर्जनों से तो ज्यादा… पता नहीं मेरे इस पत्र को भड़ास अपने पास जगह देगा कि नहीं लेकिन अगर देता है तो अच्छा लगेगा… मेरा मैसेज दुर्जनों तक जल्दी पहुचेंगे.…. क्योंकि सफाई कर्मचारी से लेकर मुख्य संपादक तक सब भड़ास पढ़ते हैं… अगर हमलावर जरा सा भी मीडिया से जुड़े होंगे तो भड़ास जरूर पढ़ते होंगे…

पूरे मामले को समझने के लिए ये भी पढ़ें…

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‘4पीएम’ में छपी भड़ास संपादक यशवंत सिंह के हमलावरों की गिरफ्तारी न होने की खबर

धोखे से यशवंत पर किया गया हमला, हमलावर भी पेशे से पत्रकार, खुलेआम घूम रहे हैं हमलावर
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। भड़ास फॉर मीडिया के संपादक यशवंत सिंह पर दिल्ली में प्रेस क्लब ऑफ इंडिया के गेट पर हमला होने के एक सप्ताह बाद भी हमलावर पुलिस की गिरफ्त से दूर हैं। हमलावर खुलेआम घूम रहे हैं और पुलिस मूकदर्शक बनी हुई है। वहीं हमलावरों की गिरफ्तारी न होने से पत्रकारों में रोष है। पत्रकारों का कहना है कि जब प्रेस क्लब जैसी जगह पर पत्रकार सुरक्षित नहीं हैं तो और जगहों पर उनकी सुरक्षा भगवान भरोसे ही होगी। पत्रकारों ने हमलावरों की जल्द से जल्द गिरफ्तारी की मांग की है।

प्रेस क्लब में यशवंत सिंह शाम के समय बैठे हुए थे। दोनों हमलावर भूपेंद्र और अनुराग त्रिपाठी भी अलग टेबल पर मौजूद थे। प्रेस क्लब के भीतर ये दोनों यशवंत को देखने के बाद अपनी टेबल से उठकर उनकी टेबल पर आ गए। वहां बैठकर यशवंत की तारीफें किए जा रहे थे, उनसे गले मिल रहे थे। इसके कुछ ही देर बाद प्रेस क्लब से बाहर निकलने पर दोनों आरोपियों ने यशवंत पर धोखे से हमला कर दिया। इस हमले में यशवंत को काफी चोटें आयी है।

बताया जा रहा है कि यशवंत ने कुछ साल पहले भूपेन्द्र और अनुराग के कुछ कारनामों की पोल भड़ास पर खोली थी। वे दोनों इसी बात से नाराज थे। वरिष्ठ पत्रकार शंभुनाथ शुक्ल ने फेसबुक पर इस हमले की निंदा की है। उन्होंने लिखा है कि यशवंत सिंह पर हुए हमले पर पत्रकार जगत चुप है। असहिष्णुता को लेकर हल्ला-गुल्ला करने वालों ने भी एक शब्द नहीं कहा, जबकि यशवंत पर हमला सही मायने में एक जमीनी पत्रकार पर हमला है।

ये हैं दोनों हमलावर…

पत्रकारों की अपनी रोजी-रोटी और उसकी अपनी अभिव्यक्ति के लिए सिर्फ यशवंत सिंह ही लड़ रहे हैं। उन्होंने मीडिया हाउसेज और सत्ता की साठगांठ की परतें उजागर की हैं, लेकिन अब न तो वामपंथी न दक्षिणपंथी कोई भी संगठन उनके साथ खड़ा हो रहा है। बहरहाल कोई हो न हो लेकिन मैं इस साहसी और कर्मठ पत्रकार यशवंत सिंह पर हुए हमले की कड़ी भत्र्सना करता हूं। मैं फेसबुक के अन्य साथियों से भी अपील करूंगा कि वे साथी यशवंत पर हुए हमले की निंदा करें और सरकार पर दबाव डालें कि वह हमलावरों के विरुद्ध तत्काल कार्रवाई करे।

वरिष्ठ पत्रकार अंबरीष कुमार ने भी यशवंत पर हमले की निंदा की है। उत्तर प्रदेश मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति के उपाध्यक्ष संजय शर्मा ने भी हमले की निंदा करते हुए हमलावरों की गिरफ्तारी की मांग की है। ऐसे ही तमाम पत्रकारों ने इस हमले की निंदा करतेहुए हमलावरों की गिरफ्तारी की मांग की है।

साभार : 4पीएम, सांध्य दैनिक, लखनऊ

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यशवंत की गुरिल्ला छापामार पत्रकारिता और प्रेस क्लब में दो दलाल/भक्तनुमा पत्रकारों का हमला करना…

Anil Jain : गौरी लंकेश की हत्या के विरोध में प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में आयोजित सभा में कुछ वामपंथी नेताओं के आ जाने पर कुछ ‘राष्ट्रवादी’ पत्रकार मित्रों के पेट में काफी दर्द हुआ, जिसका इजहार करते हुए उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि प्रेस क्लब वामपंथियों और नक्सलियों का अड्डा बनता जा रहा है। लेकिन उसी सभा के दो दिन पहले प्रेस क्लब में न्यूज पोर्टल भडास4मीडिया के संपादक यशवंत सिंह पर हुए हमले को लेकर प्रेस क्लब के पदाधिकारियों सहित किसी ने कोई प्रतिक्रिया जाहिर नहीं की। प्रेस क्लब के ‘नक्सलियों का अड्डा’ बन जाने की काल्पनिक चिंता में दुबले हुए पत्रकार मित्रों की संवेदना भी पता नहीं कहां चली गई दक्ष-आरम और ध्वज प्रणाम करने!

सब जानते हैं कि यशवंत सिंह गुरिल्ला छापामार की तरह काम करते हुए अपने पोर्टल के माध्यम से दुर्दांत मीडिया घरानों के मालिकों और उनके पाले हुए दलालनुमा संपादकों तथा पत्रकारों की गुंडागर्दी को आक्रामक तरीके से जब-तब उजागर करते रहते हैं। इसीलिए कई बार उन पर हिंसक हमले हो चुके हैं और एक बार तो वे लंबी जेल यात्रा भी कर चुके हैं। पिछले दिनों प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में भी दो दलाल और भक्तनुमा पत्रकारों ने यशवंत पर उनकी लिखी किसी पुरानी खबर को लेकर उनके साथ मारपीट की जिसमें उन्हें गंभीर चोंटे आईं और उनका चश्मा भी टूट गया।

ये हैं दोनों हमलावर…

हालांकि इस घटना के आधार पर यह नहीं कहा जा सकता कि प्रेस क्लब भक्तनुमा पत्रकारों या शाखा बटुकों का अड्डा बन गया है लेकिन ऐसी घटनाओं की निंदा तो होनी ही चाहिए। मैं घटना का चश्मदीद नहीं हूँ। कुछ लोग इस घटना में दोनों पक्षों की गलती बता रहे हैं। अगर ऐसा है तो प्रेस क्लब को अपने स्तर पर इस घटना की जांच करके जो भी दोषी हो उसके खिलाफ कार्रवाई करना चाहिए।

पत्रकार अब दलाल ही नहीं बल्कि कातिल भी हो गए हैं….

Chaman Mishra : भड़ास4मीडिया के संपादक Yashwant Singh सर, पर दिल्ली में हमला हुआ। ये हमला किसी और ने नहीं पत्रकारों ने ही किया। अब भी आपको लगता है, कि पत्रकार ‘दलाल’ हैं, नहीं अब वो ‘क़ातिल’ भी हैं। पूरी हिंदी न्यूज़ इंडस्ट्री में ऐसा कौन है जो भड़ास को नहीं पढ़ता। बड़े से बड़ा, छोटे से छोटा और अदना पत्रकार या फिर पत्रकार बनने की प्रक्रिया में जो हैं, वो भी भड़ास को पढ़ते हैं, और हर दिन पढ़ते हैं। फिर भी मीडिया इंडस्ट्री भड़ास के संपादक के साथ उस तरह नहीं खड़ी है जैसे होना चाहिए। कोई नहीं ‘जेल जानेमन’ ऐसे ही गर्दिश के दिनों की उपलब्धि थी। हमें कुछ और रचानात्मक मिलेगा। लेकिन मैं तो कहता हूं, सर उन हमलावर गधों को जेल में जरूर डलवाइए, और उनका जेल वाला फ़ोटो भड़ास पर लगाइए। उसे Sponser भी कराइए।
इससे पहले-
गौरी लंकेश को मार दिया।
पंकज मिश्रा पर गोली चला दी।
इंडिया टीवी के रिपोर्टर सुनील को खूब पीटा।
फिर भी सब-सरकारें चुप्प हैं।

वरिष्ठ पत्रकार अनिल जैन और युवा पत्रकार चमन मिश्रा की एफबी वॉल से.

इसे भी पढ़ें…

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पढ़िए, यशवंत पर हमले को लेकर गीतकार नीलेश मिश्रा ने क्या कहा

इंटोलरेंस किसी एक विचारधारा में थोड़े है, आपकी और मेरी रगों में है : नीलेश

Neelesh Misra : प्रेस क्लब के गेट पर हुए वरिष्ठ पत्रकार Yashwant Singh पर हुआ हमला बेहद निंदनीय है। ऐसा कल आपके, हमारे, किसी के साथ हो सकता है। किसी की बात से इत्तेफ़ाक न रखना तो उसे शारीरिक चोट पहुँचाना, या चोट पहुँचे ऐसी इच्छा जताना, ये एक आम बात बन गयी है।

कड़वी सच्चाई ये है कि इंटोलरेंस किसी एक विचारधारा में थोड़े है, आपकी और मेरी रगों में है चाहे आपकी सोच कुछ भी हो। हम वो बदतमीज़ियाँ करने में दो बार नहीं सोचते जो शायद कुछ वर्षों पहले तक अकल्पनीय थीं। यशवंत, उम्मीद है आपकी एफ़आइआर दर्ज की गयी होगी और उम्मीद है उस पर दिल्ली पुलिस कोई कार्यवाही करेगी।

जाने-माने गीतकार, स्टोरी टेलर और पत्रकार नीलेश मिश्रा की एफबी वॉल से.

ये हैं दोनों हमलावर…

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खबर छापे जाने की नाराजगी में फिर एक पत्रकार हुआ जानलेवा हमले का शिकार

हमले के शिकार लखनऊ के पत्रकार राजेंद्र.

लखनऊ से जानकारी मिली है कि खबर छापने की कीमत एक वरिष्ठ पत्रकार को चुकाना पड़ा है. आरटीओ आफिस में करप्शन की खबर छापे जाने से नाराज़ आरटीओ कर्मियों ने वरिष्ठ पत्रकार पर लाठी, डंडों और ईंट से जानलेवा हमला कर दिया. पीड़ित पत्रकार हैं राजेन्द्र राज्य मुख्यालय से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं. उन पर आरटीओ कार्यालय परिसर में हुआ हमला. पत्रकार राजेंद्र गंभीर रूप से घायल हैं. थाना सरोजनीनगर इलाके में है आरटीओ कार्यालय.

ज्ञात हो कि दिल्ली के प्रेस क्लब आफ इंडिया में भड़ास4मीडिया के संपादक यशवंत सिंह पर हमला दो उन लोगों ने किया जो खुद के बारे में भड़ास पर छपी पोलखोल खबरों से नाराज थे. ये दोनों हमलावर पहले पत्रकार थे लेकिन इनकी दलाली-ब्लैकमेलिंग की घटनाओं के भड़ास पर खुलासे के बाद उन्हें अब काफी समय से नौकरी नहीं मिल रही है.

मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति के उपाघ्यक्ष संजय शर्मा ने कहा- ”हमको उम्मीद है एफआईआर होने के बाद पत्रकार पर हमला करने वाले आरटीओ को सरकार तत्काल गिरफ़्तार करायेगी और उनको मुख्यालय से अटैच करेगी”।

उत्तर प्रदेश राज्य मुख्यालय के मान्यता प्राप्त पत्रकार राजेंद्र पर आरटीओ कार्यालय में हुए हमले की निंदा करते हुए उत्तर प्रदेश राज्य मुख्यालय मान्यता प्राप्त पत्रकार सुधीर कुमार सिंह ने आरोपी कर्मचारियों को बर्खास्त किए जाने की मांग की. साथ ही पत्रकार की सुरक्षा के साथ हमलावर कर्मचारियों के विरुद्ध कठोर दंडात्मक कार्यवाही किए जाने की मांग की है.

बिहार प्रेस मेंस यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष एस.एन.श्याम ने कहा- ”लखनऊ में पत्रकार राजेंद्र पर प्राणघातक हमला. हमलावरों के पीछे पड़िए योगी सरकार. मोदी जी, बनाइये पत्रकार सुरक्षा कानून. कब तक बहेगा पत्रकारों का खून”.

फेसबुक पर Shashank Srivastava लिखते हैं : ”योगी जी जरा ध्यान इधर भी। रामराज में पत्रकार को अधिकारी बना रहे है अपना शिकार। क्या भाजपा सरकार में अब सच लिखने का ये परिणाम होगा। राजधानी में सच लिखना एक और वरिष्ठ पत्रकार को पड़ा भारी। सत्ता के मद में चूर आरटीओ ने खबर लिखने वाले प्रहरी मीमांसा के संपादक राजेंद्र पर अपने गुर्गों द्वारा करवाया हमला। लोकतंत्र में अब सच कहने की यही कीमत चुकानी होगी क्या।”

युवा पत्रकार Nishant Chaurasiya फेसबुक पर लिखते हैं : ”फिर मारा गया पत्रकार… राजधानी लखनऊ में… शुक्र है जान से नहीं गया… खून बहा और हड्डी टूटी… अब साबित कर दो दल्लों कि दलाली करने गए थे वहां पर, क्योंकि पत्रकारों को डर गुंडों बदमाशों से ज्यादा मठाधीशों से है! लेखनी से अपनी पहचान बना चुके राज्य मुख्यालय मान्यता प्राप्त पत्रकार राजेन्द्र (प्रहरी मीमांसा) पर आज RTO कार्यालय में भ्रष्टाचार की खबर लिखने पर जान लेवा हमला हुआ… मामला सरोजिनी नगर थाना क्षेत्र का है…. थाने से मेडिकल करवाने पहुचे राजेंद्र जी… फोन से बात करने के बाद पता चला कि सर पर काफी चोट आई है! राजेन्द्र जी से संपर्क 9415054807 के जरिए किया जा सकता है.”

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शैतानी ताकतों के हमले में चश्मा टूटा… ये लो नया बनवा लिया… तुम तोड़ोगे, हम जोड़ेंगे.. : यशवंत सिंह

Yashwant Singh : चश्मा नया बनवा लिया। दो लम्पट और आपराधिक मानसिकता वाले कथित पत्रकारों भुप्पी और अनुराग त्रिपाठी द्वारा धोखे से किए गए हमले में चश्मा शहीद हो गया था, पर मैं ज़िंदा बच गया। सो, नया चश्मा लेना लाजिमी था। वो फिर तोड़ेंगे, हम फिर जोड़ेंगे। वे शैतानी ताकतों के कारकून हैं, हम दुवाओं के दूत। ये ज़ंग भड़ास के जरिए साढ़े नौ साल से चल रही है। वे रूप बदल बदल कर आए, नए नए छल धोखे दिखलाए, पर हौसले तोड़ न पाए।

न जाने क्या मंजूर है नियति को, न जाने क्या योजना है नेचर की। मैं सिर्फ निमित्त मात्र हूं। जेल, मुकदमे, हमले, धमकी, पुलिस, कोर्ट कचहरी, आर्थिक तंगी… पर इरादे हैं कि दिन ब दिन चट्टानी होते गए। हमने सबको क्षमा किया। मेरा निजी बैर किसी से नहीं। पर सच की मशाल तो जलती रहेगी, सरोकार की पत्रकारिता तो होकर रहेगी, कुकर्मों का भाँडा तो फूटेगा। आप सभी साथियों का प्यार और समर्थन मेरे साथ है। वैसे नया वाला चश्मा कैसा है, बताएं तो जरा आप लोग 🙂

भड़ास संपादक यशवंत के उपरोक्त स्टेटस पर आए कमेंट्स में से कुछ प्रमुख इस प्रकार हैं….

Arsh Vats Are Yashwant Singh sir g u r bravo aapke bhi 1 crore anuyayi h aang laga denge aang
Yashwant Singh आग नहीं, प्रेम लगाएंगे हर ओर 🙂

Jyoti Singh सर नया चश्मा मुबारक हो। और एक सलाह आगे से कोई चश्मे पे अटैक करे तो आप उसके दांत तोड़ देना।
Yashwant Singh तोड़ने का काम प्रकृति के हवाले। अपन तो कलम से लड़ेंगे और कलम से तोड़ेंगे 🙂

Vinay Maurya Sinner हम तोहरे साथ हई भईया। ई अउर बात हव की छोट भाईयन के भूल गईला …संजय शर्मा भईया के तरे
Yashwant Singh दिल मे हउआ भाय। कहा त करेजवा फाड़ के देखायीं 🙂

प्रवीण श्रीवास्तव उ दूनो भुप्पी और भुप्पा की तस्वीर हो तो देखाईये… देखल जाए शकल दुनहुँन क
Yashwant Singh आप लोग ही खोजिए। मैं इन इग्नोर किए जाने लायक लोगों पर टाइम नहीं खर्च करता। ये काम भड़ास समर्थकों पर छोड़ता हूं।

Vikash Rishi बढ़िया चेहरे पर गंभीरता दिख रही है कुछ ठोस करना होगा।
Yashwant Singh अरे नहीं। कुछ चीजें प्रकृति पर भी छोड़ देनी चाहिए। हम लोग कलम वाले हैं। उनके जैसे आपराधिक मानसिकता वाले नहीं। क्षमा किए जाने योग्य हैं वो ताकि खुद आत्म मंथन कर सकें वो। 🙂

Brijendra Singh दाढ़ी तो तभी बनेगी जब…
Yashwant Singh अरे नहीं। कुछ चीजें प्रकृति पर भी छोड़ देनी चाहिए। हम लोग कलम वाले हैं। उनके जैसे आपराधिक मानसिकता वाले नहीं। क्षमा किए जाने योग्य हैं वो ताकि खुद आत्म मंथन कर सकें वो। 🙂

Soban Singh चश्मा अच्छा है. आपकी फिक्र रही दो दिन. थोड़ा दाढ़ी साड़ी भी बन जाती तो भुप्पी और त्रिपाठी का कुछ और भला हो जाता।

Rajeev Tewari इस चश्मे में ज्यादा प्रबुद्ध दिखे हैं। सरोकार की पत्रकारिता तो होकर रहेगी। बहुत बधाई, shubhkamnayen

Vivek Dutt Mathuria भाई ज़म रहे हो और जमे रहो! आपके साथ पूरा कारवां है!

Rehan Ashraf Warsi विचारों का मतभेद यहाँ तक आ पहुँचा, दुःखद है। ये सब कहाँ ले जाएगा, और कब रुकेगा।

Nirupma Pandey वो फिर तोड़ेगें, हम फिर जोड़ेगें

Yuvneet Rai Chaudary Desh badh raha hai …..apke patrkar mitra Kuch jyda aage badh gye

Bhoopendra Singh आपने ऐतिहासिक काम किया है। पीढ़ियां ज़रूर याद करेंगी

Aditya Singh Bhardwaj चश्मा आप गांधीवादी रखिये 🙂

Ansh Sumit Sharma जबरदस्त चश्मा है भैया जी।

Nivedita Patnaik Never mind… change your glasses but never the visions…. thru which you made people to see what is what.

Gandhi Mishra ‘Gagan’ चश्मा क्या खरीदे पिछले चार दिनों की खोयी आंख मिल गयी.. अब उसकी खाट खड़ी करने से इन्हें कौन रोक सकता। इतनी बड़ी हमदर्दों व समर्थकों की टीम जो ठहरी… उठाओ ठाकुर साहब कलम और रगड़कर मटियामेट कर दो उन्हें जो अंधा बनाकर देश को कई महत्वपूर्ण सूचनाओं से दूर रखना चाह रहे थे जिससे उनकी भविष्य की मंशा पुनः होश नहीं संभाल पाए।

Mohanraj Purohit नया वाला भी अच्छा हैं, लेक़िन पुराने वाले शहीद वाले को भी संभाल कर रखें, भुप्पी और अनुराग को याद रखने के लिए।

Anand Kumar तेरे वजह से चश्मा बदला, अफसोश नजरिया ना बदल सका, ऐ भुप्पी और अनुराग तू तो ताकत दे गया…

Arvind Tripathi दुष्टों के चिन्हांकन की दृष्टि साफ़ बनी रहनी चाहिए, बाक़ी सब ठीक है।

Deepak Srivastava गांधी जी का रूप तो आपके लेख में दिखा… किंतु भगत सिंह, आज़ाद जी , बोस , बिस्मिल जी की प्रतिक्रिया भी देखनी है

Maruf Khan Journalist Bhadas ne media ke ander ke haal btaye. jo sach me hota hai.

अनिल अबूझ सरोकारों के साथ-साथ खुद का भी खयाल भी रखिए सर! पत्रकारों की हालत देख रहे हैं? आपका जीना जरूरी है..बल्कि हर उस शख्स का जीना जरूरी है जो सच कहता है..सच लिखता है| हौसले को नमन करता हूँ|

Tahir Khan इस चश्मे से उन लोगों के कुकृत्य भी दिखेंगे जो अभी मीडिया का चोला ओढ़े किसी बिल में छिपे बैठे हैं…शानदार ..जय हिंद।

Rajnish Tara Bahute hi gazab hai bhaiya…. lage rahiye mission sachchai ke liye…

Majid Qureshi निडर और बिना डिगे पत्रकारिता के होंसले को सलाम। वैसे भी ये किस्म कम ही रह गई है। वरना तो ऐसा होने पर क़लम तोड़ देते है लोग।

Keshav Kumar अगर आप सही हो तो आपको कुछ साबित करने की जरूरत नहीं होती है। केवल आपको अपनी सच्चाई पर टिके रहना होता है, गवाही वक्त खुद देता है।

Sudhir Jagdale बिना लक्ष्य के जीने वाले इंसानों की जिंदगी कहाँ अमीर होती है, जब मिल जाती है सफलता तो नाम ही सबसे बड़ी जागीर होती है।

सुधीर अवस्थी ‘परदेशी’ chashma bahut achchha hai . aap bhi bahut achchhe ho . sankalp bada hai to dikkat to rhengee

Shailesh Tiwari पुराना टूटता है तभी नया बनता है । उन दोनों को भगवान सद्बुद्धि दे यही प्रार्थना है। वैसे यह चस्मा चेहरे पर जम तो रहा है गुरु… इस हेतु उन दोनों शैतानी ताकतों के कारकुनों का आभार की एक नए चश्मे को लेने का बहाना बनने में उनका योगदान था..

Nitin Thakur चश्मा कातिल है Yashwant जी.

Amit Ahluwalia और चूंकि काले फ्रेम का है तो चश्मे कातिल से भी बचाएगा

Manvinder Bhimber ऐतिहासिक काम करते हो

Rajpal Parwa चश्मा सुंदर है। आप सेहतमंद रहें ईश्वर से ये दुआ है।

Sarvesh Singh आपके बेमिसाल व्यक्तित्व को प्रणाम

Rahul Amrit Raj शानदार, जानदार, जबरदस्त, भड़ास जिंदाबाद

Hitesh Tiwari चीता हो आप। और चश्मा मस्त है।

Sanjay Swadesh डरे, सहमे, बुजदिल ही ऐसी हिंसात्मक हरकत पत्रकारों के साथ करते हैं

Mafatlal Agrawal हर जोर जुल्म की टक्कर मे संघर्ष हमारा नारा है।

Madan Tiwary पहले यह बताये उन हरामियों की ठुकाई कीजियेगा या नहीं।

Ziaur Rahman आप हजारों-लाखों मीडिया कर्मियों की आवाज हो, उन सभी का प्यार, सहयोग और दुआ आपके साथ है।

Mukesh Singh बच्चे अक्सर कुछ ना कुछ तोड़ते ही रहते हैं। वैसे नया चश्मा व्यक्तित्व को और घना बना रहा है।

Narendra M Chaturvedi थोड़ा टेड़ा है…वैसे ऊपर से नीचे तक टेड़े की नगरी रहकर सब टेड़ा ही दिखता है…?

Satya Prakash Chashma mein DRISHTI ki dhaar tez ho gayee hai

Golesh Swami Very nice, god bless you. Keep it up.

अजित सिंह तोमर चश्मा और आप दोनों ही दमदार हैं सर

Ashok Anurag ये आपका बड़प्पन है यशवंत भाई, फिर भी जो हुआ वो माफ़ी योग्य नहीं था

Purushottam Asnora गुण्डे कहीं भी हो सकते हैं, पत्रकारिता में भी

Sunil Negi himate marda mardade khuda

Sushovit Sinha नए चश्मे से दुनिया बेहतर दिखेगी सर!

Rakesh Punj चश्मा सुंदर है। आप सेहतमंद रहें ईश्वर से ये दुआ है।

Santosh Singh उन लोगो को खोजा कैसे जाए

मुकुन्द हरि शुक्ल तनिक अपनी कुंडली की ग्रहदशा की विवेचना भी कर लीजिएगा।

Sadique Zaman हम सब साथ हैं दादा, लड़ेंगे

Virendra Rai लल्लनटाप बाटई

Madhvendra Kumar चश्मा आपका टूटा दिल उन दोनों का,शानदार है ये वाला चश्मा।

Narendera Kumar गजबे लुक है

Dinker Srivastava चेहरे पे एक सबक चढ़ा हुआ दिख रहा और क्या…

Ashok Aggarwal चश्में के साथ साथ हौसला भी बढिया है ।

Sudhendu Patel आपही की तरह पारदर्शी गुरू .

Dilip Clerk इंकलाब जिन्दाबाद …धन्य है आप

Rahul Chouksey चश्मा बहाना है। नज़र और नज़रिया वही रहेगा।

Syed Shakeel आप और आपका चश्मा दोनों बिंदास है दादा

Hemant Shukla … पर सच की मसाल तो जलती रहेगी … बहुत सुंदर विचार ।

Kuldeep Singh Gyani दुवाओं के दूत के साथ साथ आप युवाओं के दूत भी हैं…

Sambhrant Mishra ये चश्मा तो और जोरदार है।

Nitesh Tripathi नया चस्मा स्मार्ट बना रहा है और

Pawan Kumar Upreti शानदार चश्मा। ताकतवर व्यक्तित्व

Manoj Anuragi अच्छा है सावधान रहो

Arshad Ali Khan आप जैसे क्रांतिकारी पत्रकार के लिए यह आम बात है….

Govind Badone आपके होंसले को सलाम

Farhan Quraishi कलम में बहुत ताकत है

Nurul Islam गजब सर, ख़्याल रखिए अपना

Mahendra Singh दूसरे गांधी बनने के रास्ते पर है आप

Veernarayan Mudagl पत्रकार जगत में जलवा कायम है सर आपका

Pramod Singh सलाम है यशवंत भाई! आपके बड़प्पन को.

Vindhya Singh भइया ! तनी उन्हन लोगन के फोटू शेयर कइल जा, के हवे जानलअ जरूरी बा… बड़का भूपति बनता लोग
Yashwant Singh आप लोग ही खोजिए। मैं इन इग्नोर किए जाने लायक लोगों पर टाइम नहीं खर्च करता। ये काम भड़ास के साथियों पर छोड़ता हूं।

Sharvan Panchal अच्छा लग रहा ह ,,,,,,,आप ऐसे धूर्त लोगो के लिए पत्रकार जैसा शब्द क्यू इस्तेमाल करते ह सर
Yashwant Singh ‘कथित पत्रकार’ लिखा हूं भाई

Vipin Shrivastava ये चश्मा पहले से ज्यादा साफ दिख रहा है , यकीनन वो जितने चश्में तोड़ेंगे , नए चश्में और बेहतर क्वालिटी के क्लियर होते जाएंगे

Man Mohan Singh Achche ensan pe sab achcha lagta hai !

Avinash Singh आपके निर्भीकता और आपके व्यक्तित्व को सलाम, आपकी लेखनी , निडरता, और व्यक्तिव से बहुत कुछ सीखने को मिलता है ,

Syed Quasim चश्मा 40 + होने यानी लौंडियाहुज जो हमारे रुदौली में बचपन को कहते हैं खत्म होने की निशानी है.. इसी लिए तो मुस्कुरा कर मार देते हैं बड़े से बड़े दुश्मन को

Pawan Dubey हे क़लम के पुजारी आपकी बेबाक़ और निर्भीक अभिव्यक्ति को प्रणाम। क्षमा बड़े साहस का आभूषण है। आप को कमज़ोर लोग कमज़ोर नही कर पाएँगे।

Om Prakash Pathak आप स्वस्थ्य हो गए उसके लिए भगवान का शुक्रिया। ऐसे कमजोर लोग हमेशा टकराएंगे यह भी सही है। ऐसे चश्मा अच्छा लगा।

Shishubh Bhargava जय हो, क्रिज़ोल है या थोड़ा सामान्य कुछ भी हो आखिर आँखों पर चस्मा लगाए थोड़ी न बैठे लड़ते रहिये यशवंत जी सत्य आपके साथ है

कुंदन वत्स अब मारक बदला लीजिये

Humaira Zafar Allah aapko salamat rakhe.Aameen

Chandan Sharma चश्मा का तो ठीक है लेकिन एक नया संकल्प दिख रहा है। बनाये रखिये। 🙂

Rajendra Mishra सच साहस सरोकार! जय हो

यशवंत पर हमला करने वालों की ये है तस्वीर… याद रखें, ध्यान रखें…

पूरे मामले को समझने के लिए इन्हें भी पढ़ें….

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दो बददिमाग और विक्षिप्त कथित पत्रकारों द्वारा यशवंत पर हमले के बाद हमारी बिरादरी को सांप क्यों सूंघ गया?

Padampati Sharma : क्या किसी पत्रकार के समर्थन में मोमबत्ती दिखाने या विरोध ज्ञापित करने के लिए उसका वामपंथी या प्रगतिशील होना जरूरी है? यदि ऐसा नहीं है तो सिर्फ पत्रकार हित के लिए दिन रात एक करने वाले यशवंत सिंह पर दो बददिमाग मानसिक रूप से विक्षिप्त कथित पत्रकारों द्वारा किये गए हमले पर हमारी बिरादरी को क्यों सांप सूंघ गया? यशवंत के बहाने पत्रकारों की आवाज दबाने का कुत्सित प्रयास करने वाले की मैं घोर निंदा करता हूं.

सच तो यह है कि उन अपराधियों के अंत्राशय पर इतने प्रहार किए जाते कि वे महीनों न सो पाते और न बैठ पाते. मगर हम जिस बिरादरी से ताल्लुक रखते हैं वहां कलम ही तलवार है और मेरी ओर से सजा यही कि अगर वे दोनो शख्स मेरी फ्रेंड लिस्ट में हुए तो न सिर्फ उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दूंगा वरन ब्लाक भी करूंगा. यशवंत! डटे रहना भाई. आ गया है सोशल मीडिया का दौर. मुख्य धारा के मीडिया का यही हाल जारी रहा तो उसकी दुकान बंद होने में अब ज्यादा वक्त नहीं बचा. तब यशवंत जैसे जाबांज पत्रकारों का ही वर्चस्व होगा. जुझारू पत्रकार Yashwant Singh पर हमले की निंदा करता हूँ। शायद कुछ लोग शर्म से सर झुका सकें।

(कई अखबारों और न्यूज चैनलों में खेल संपादक रहे वरिष्ठ पत्रकार पदमपति शर्मा की एफबी वॉल से.)

फेसबुक पर आईं कुछ अन्य प्रमुख प्रतिक्रियाएं यूं हैं…

Surendra Pratap Singh : जिस दिन यशवंत पर हमले वाली घटना घटित हुई थी उसी दिन किसी ने इस पर पोस्ट लगाई थी लेकिन किसी पत्रकार ने कोई नोटिस नहीं लिया… और, तभी लंकेश वाली वारदात हुई और लंका में लगी आग मचा हाहाकार… सभी पत्रकार बंधु अपनी अपनी बाल्टी का पानी लेकर उधर ही दौड़ लगाने लगे… फिर क्या, यशवंत जी समाचारों से गायब। धन्य हो।

Sarvesh Singh : पिछले दिनों भड़ास 4मीडिया के संपादक Yashwant Singh सर पर हमला हुआ।हमला किसी और ने नहीं बल्कि पत्रकारिता को कलंकित करने वाले दो दिमागी दिवालियों ने किया। उस हमले से जुड़ा एक वीडियो यशवंत सर ने फेसबुक पर साझा किया। इसमें उन्होंने साफ तौर पर उन दोनों को माफ़ करने की बात कही। पीत पत्रकारिता करने वाले पत्रकारों और सरकार की गोद में झूलने वाले मीडिया समूह की काली करतूतों को देश के सामने निष्पक्षता और निडरता से रखने वाले यशवंत सर के प्रति मेरे मन में अनन्त सम्मान बढ़ गया है। उन्होंने उन पर हमला करने वालों को माफ किया। और कुछ ऐसी बातों का जिक्र किया जो मेरे मानस पटल पर सदैव सदैव के लिए अंकित हो गया।

ये हैं दोनों हमलावर…

यशवंत ने भूपेंद्र सिंह भूप्पी और अनुराग त्रिपाठी को माफ करते हुए कहा कि “मेरे पास कलम की ताकत है सच्चे पत्रकार के लिए कलम ही सब कुछ है।कलम ही तोप होती है, कलम ही बंदूक होती है, बशर्ते उसे कलम का इस्तेमाल करने आता हो”।”प्रकृति न्याय करती है। हम कौन होते हैं न्याय करने वाले”। आपके इस वाले वीडियो को देखकर आपकी बातों को सुनकर मैं बहुत भावुक हुआ। बड़ी आसानी से आपने उन दोनों सनकी और तथाकथित पत्रकारों को माफ कर दिया। शायद यह आप जैसा बड़े और महान व्यक्तित्व वाला ही कर सकता है। एक बात तो तय है कि उन दोनों पागलों का न्याय प्रकृति ही करेगी।आप के सच्चे व निडर व्यक्तित्व का मैं हमेशा से कायल रहा हूं। पर आप की सहजता, सहनशीलता, विशाल हृदयता वाले आपके इस महान व्यक्तित्व को मैं हजार बार सलाम करता हूं। और, हां सर! चश्मा तो निर्जीव वस्तु है वह टूटेगा भी और जुड़ेगा भी। पर आप के अदम्य साहस, बेबाक सच्चाई, साफगोई को भूपेंद्र सिंह भूप्पी और अनुराग त्रिपाठी जैसे हजारों आसूरी प्रवृत्ति के लोग कभी दबा नहीं पाएंगे।

Dhananjay Singh : ”थोड़ा मारने दो इसे,बहुत खबरें छापता है” कहते हुए दिल्ली के प्रेस क्लब में भड़ास वाले Yashwant भाई को दो पत्रकारों ने ही पीट दिया…. जाहिर है इस घटना के गवाह भी कई एक रहे ही होंगे… निर्भीक पत्रकारिता पर खुद पत्रकारों की तरफ से हुए इस हमले की मैं निंदा करता हूँ….खम्भों की यह लड़ाई निंदनीय है… आप भी छापिये न भाई… असहमति है तो किसी को पीट देंगे? ऐसे ही कमजोर पलों में निहायत ही कमजोर लोग पिस्टल भी निकाल लेते हैं और परिणाम अत्यंत भयानक होता है… आशा है देश की राजधानी के प्रेस क्लब में हुई इस घटना के विरोध में तमाम एक्टिविस्ट्स से लगायत प्रधानमंत्री भी संज्ञान लेंगे.. ऐसी हरकत निंदनीय है, अभी निंदा करिए, सिर्फ देखिए और इंतजार करिए की रणनीति पर न चलिए…

पूरे मामले को समझने के लिए इन्हें भी पढ़ सकते हैं….

 

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यशवंत किसी विचारधारा-गिरोहबाजी के आधार पर किसी को रियायत नहीं देते, इसलिए गिरोहबाजों ने चुप्पी साध रखी है!

Vivek Satya Mitram : प्रेस क्लब में हाल ही में जमा हुए पत्रकारों! इस मामले पर कहां जुटान है? इसका भी खुलासा हो जाए। वैसे भी ये हमला तो प्रेस क्लब के बाहर ही हुआ। एक वरिष्ठ पत्रकार पर कुछ ‘गुंडा छाप’ पत्रकारों द्वारा। फिर भी ना तो प्रेस क्लब के पदाधिकारियों को फर्क पड़ा ना ही साथी पत्रकारों को। Yashwant Singh को करीब से जानने वाले जानते होंगे कि वो पिछले एक दशक से गौरी जैसी ही निर्भीक पत्रकारिता कर रहे हैं। महज़ इसलिए कि वो इस हमले में ज़िंदा बच गए, पत्रकारों को उनके लिए न्याय नहीं चाहिए?

वाह रे क्रांतिकारी पत्रकारगण! अबे खुलके कहो ना कि तुम गौरी के लिए नहीं, किसी पत्रकार के लिए नहीं, किसी दमन के ख़िलाफ़ नहीं, राजनीति करने के लिए जमा हुए थे। और, यशवंत जैसा पत्रकार जो किसी को भी विचारधारा और गिरोहबाजी के आधार पर कोई रियायत नहीं देता उस पर हमला तुम्हारे लिए कोई महत्व नहीं रखता। सुनो, तुम्हारे सेलेक्टिव, दिखावे की क्रांति लोग समझते हैं, इसलिए सोशल मीडिया पर अपनी एक ख़ास किस्म की ब्रांडिंग करते हुए ये भी याद रखा करो कि लोग कभी तो हिसाब मांग सकते हैं तुम्हारे ढ़ोंग का। बाई द वे, मैं जानता हूं तुम पत्रकार नहीं हो!

(आजतक समेत कई न्यूज चैनलों में कार्यरत रहे और अब एक सफल उद्यमी के तौर पर स्थापित विवेक सत्य मित्रम की एफबी वॉल से.)

Praveen Jha : पत्रकारों के लिए सबसे खतरनाक देश कौन सा है? मैं टुकड़ों में ‘विश्व मीडीया विमर्श’ नामक किताब पढ़ता रहा हूँ, जिसमें पूरे विश्व के अलग-अलग देशों की मीडिया पर लिखा है। स्कैंडिनैविया के सभी देश सालों से ‘प्रेस फ्रीडम’ में टॉप 5 पर हैं। यहाँ कोई पत्रकार कभी मारा-पीटा अब तक नहीं गया। कई रिपोर्ट के अनुसार ईरीट्रिया और चीन में पत्रकारों की हालत खस्ता है। तुर्की और रूस पर भी इल्जाम लगते रहे हैं। पर वो अलोकतांत्रिक देश है।

एक लोकतंत्र में पत्रकार अमूमन सुरक्षित होता है। पर पिछले साल की CPJ की रिपोर्ट पढ़ रहा था, उसमें पत्रकारों के लिए विश्व के दस सबसे खतरनाक (डेडलिएस्ट) देशों में भारत का भी नाम है। यह पढ़ कर अजीब लगा। यह अकेला लोकतांत्रिक देश है जहाँ पत्रकारों पर हमला हो रहा है, और मृत्यु भी होती है। एक और अजीब बात है कि यह मामले अन्य हत्याओं की अपेक्षा ठंडे बस्ते में चले जाते हैं। छिट-पुट मार-पीट तो दब ही जाते हैं। कई बार आपस में सुलझ जाते हैं, या ‘पार्ट ऑफ जॉब’ मान लिया जाता है।

यह कैसा ‘पार्ट ऑफ जॉब’ है? डॉक्टर पिट रहे हैं, पत्रकार पिट रहे हैं, और नेता वगैरा तो खैर पिटते ही रहे हैं। पार्ट ऑफ जॉब? मैं जब-जब इन रिपोर्ट को गलत मानता हूँ, किसी पत्रकार पर हिंसा की खबर आ जाती है। वजह जो भी हो, हिंसा को आप कैसे सही मान सकते हैं? कलम का जवाब कलम से ही दिया जा सकता है। हम रूस या चीन नहीं हैं, और कभी होंगें भी नहीं। मित्र Yashwant Singh जी पर हुए हमले के पोस्ट कुछ दिनों से देख रहा हूँ। हत्याओं पर तो काफी कुछ लिखा ही जा चुका। यह बात गले से उतर ही नहीं रही कि हमारा देश कभी पत्रकारों के लिए खतरनाक देशों में गिना जाएगा। बल्कि भारत प्रेस स्वतंत्रता के शिखर पर पहुँचे, यही कामना है।

(नार्वे में मेडिकल फील्ड में कार्यरत और सोशल मीडिया पर अपने लेखन के कारण चर्चित प्रवीण झा की एफबी वॉल से.)

प्रवीण श्रीवास्तव : कहीं किसी से सुना था कि … यशवंत सिंह जब वाराणसी संस्करण से प्रकाशित एक बड़े अखबार में थे.. उनका बाघा बॉर्डर जाना हुआ… लौटे तो “निगाहों- निगाहों में होती हैं बातें” नामक शीर्षक की ख़बर लिख डाली… कि दोनों देशों के सैनिक कैसे करते हैं बातें … उस यात्रा वृतांत में क्या था ये तो हमें नही पता… लेकिन जिसने ये बात छेड़ी थी उसके बातों से लग रहा था कि उस वृतांत के शब्दों ने कई पत्रकारों को हिला दिया था। लोग सोचने पर मजबूर हो गए कि हम भी बाघा बॉर्डर घूम आये लेकिन ऐसा भी लिखा जा सकता है दिमाग में क्यों नही आया। फिर क्या था लोग जलते गए… कारवां शिखर की तरफ बढ़ता गया… गाजीपुर का वह युवा यशवंत सिंह भड़ासी बन गया…
फिर क्या था.. संघर्षों और जीवन के उतार चढ़ाव ने भड़ासी बाबा की कलम मजबूत कर दी।

ये तो होना ही था… एक रोल मॉडल तैयार हो गया पत्रकारिता के छात्रों के लिए .. हम भी उन्हीं छात्रों में से थे… 2010 की बात है… हम पत्रकार बनने की लालसा लिए भोपाल पहुंचे… माखनलाल पत्रकारिता विश्वविद्यालय में दाखिला लिया.. वहां पहुंचने के बाद भड़ासी बाबा यशवंत सिंह के बारे में पता चला… हमें पूर्वांचल के होने के नाते इतना पता था कि पत्रकार होना अपने आप में भौकाली होता है…. उसपर भौकालियों की भौकाल पर नकेल कसने वाला इंसान कितना भौकाली होगा… वहीं से यशवंत सिंह से मिलने की लालसा जगी… खुशी तो तब और बढ़ गयी जब पता चला यशवंत जी हमारे पड़ोसी जिले गाजीपुर के हैं…. तमन्ना पूरी हुई कुछ सालों बाद गाज़ीपुर में पत्रकारों के एक कार्यक्रम में यशवंत जी मुख्य अतिथि थे… उनके साथ पिछले दिनों हुए वाकये के बाद भी उनकी उदार सोच ने युवा पत्रकारों में फिर से ऊर्जा भरी…

इस एक छोटी सी कथा को उन्होंने चरितार्थ किया.. कथा यूं है… “एक ब्राह्मण हर रोज मंदिर की 50 सीढियां चढ़कर पूजन को जाते थे… जैसे ही वह 25वीं सीढ़ी पर पहुंचते एक बिच्छु उन्हें डंक मार देता और वह उसे उठाकर किनारे रख देते और मंदिर में चले जाते, हर रोज ऐसा ही होता, लोगों ने एक दिन उनसे कहा बाबा आपको वो बिच्छु हर रोज काटता है और आप उसे मारने के बाजाय किनारे क्यों रख देते हैं.. इसपर ब्राह्मण ने जवाब दिया ” वो अपना धर्म निभा रहा है और मैं अपना” बिच्छु का धर्म है काटना सो वो मुझे काटता है…

(पूर्वी उत्तर प्रदेश के युवा और प्रतिभाशाली पत्रकार प्रवीण श्रीवास्तव की एफबी वॉल से.)

भड़ास संपादक यशवंत पर प्रेस क्लब आफ इंडिया में हमला करने वाले ये दो हमलावर हैं.. इन्हें जान लीजिए, पहचान लीजिए…

पूरे मामले को समझने के लिए ये भी पढ़ें….

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हमलावर नंबर एक भुप्पी भी मिल गया फेसबुक पर, देखें-जानें इसकी हकीकत

Yashwant Singh : फेसबुक पर मिल गया हमलावर नम्बर एक भूपेंद्र नारायण सिंह भुप्पी। हमलावर नंबर दो अनुराग त्रिपाठी की तरह इसने भी मुझे फेसबुक और ट्विटर पर ब्लॉक कर रखा है ताकि खोजने पर ये न मिले। हमले के अगले ही दिन दोनों ने मुझे सोशल मीडिया पर ब्लाक कर दिया। क्यों? शायद उस डर से कि उन लोगों को खोजा न जा सके और उनकी करनी जगजाहिर न की जा सके। मुझे वाकई सोशल मीडिया पर खोजते हुए भूपेंद्र नारायण सिंह भुप्पी और अनुराग त्रिपाठी नहीं मिले। फिर मैंने दोस्तों को टास्क दिया। इसके बाद पहले अनुराग त्रिपाठी की कुंडली मिली। अब भुप्पी का भी पता चल गया है।

इस भुप्पी के बारे में फिलहाल थोड़ा-सा बता दूं। यह आजतक न्यूज चैनल से ब्लेकमेलिंग के आरोपों में निकाला गया था। चार पांच साल पहले की घटना है। तब उसकी खबर भड़ास पर विस्तार से छपी थी। उसके बाद भुप्पी ने महुआ न्यूज चैनल में दलाली परवान चढ़ाने के लिए कदम रखा। इसकी और अनुराग की हरकतों के कारण इन दोनों को न सिर्फ महुआ न्यूज से जाना पड़ा बल्कि महुआ न्यूज को बंद हो जाना पड़ा। बताया जा रहा है कि ये भुप्पी फिलहाल किसी करेस्पांडेंट टीवी नामक एक वेबसाइट को चलाता है और इसी नाम से कोई पत्रिका प्रकाशित करता है, चंडीगढ़ से। फिलहाल इस डरपोक तक संदेश भेजकर इसको गेट वेल सून कहने का अभियान शुरू किया जाए।

इसका फेसबुक पता ये है https://www.facebook.com/bhupendranarayan.singh.54

भड़ास के एडिटर यशवंत सिंह की एफबी वॉल से.

इसे भी पढ़ें..

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भड़ास वाले यशवंत पर हमला दुर्भाग्यपूर्ण है लेकिन चौंकाता नहीं : देवेंद्र सुरजन

Devendra Surjan : बेबाक निडर और साहसी पत्रकार Yashwant Singh पर हमला होना दुर्भाग्यपूर्ण है लेकिन चौंकाता बिलकुल नहीं. इस असंवेदनशील युग में जिसकी भी आप निडरता से आलोचना करोगे, वह आपका दुश्मन हो जाएगा. यशवंत भाई इसी इंस्टेंट दुश्मनी के शिकार हुए हैं लेकिन उन्हें अपनी भड़ास निकालना नहीं छोड़ना चाहिए. गौरी और उस जैसे दस और पत्रकारों ने इसी निडरता की कीमत अपने जीवन की आहुति देकर चुकाई है. अगला नम्बर किसी का भी हो सकता है. यशवंत सिंह जी जो करें, अपने जीवन को सुरक्षित रखते हुए करें क्योंकि उन जैसों की ही आज देश और समाज को जरूरत है.

देशबंधु अखबार समूह के निदेशक देवेंद्र सुरजन की एफबी वॉल से.

ये हैं दोनों हमलावर…

प्रेस क्लब आफ इंडिया में यशवंत पर हमला करने की निंदा का दौर जारी है… कुछ चुनिंदा प्रतिक्रियाएं पढ़िेए….

Nadim S. Akhter : पत्रकार और bhadas4media के संस्थापक Yashwant Singh पर हुए हमले की मैं घोर भर्त्सना करता हूँ। उनके ऊपर दिल्ली में प्रेस क्लब के बाहर हमला हुआ था। यशवंत भाई से यही कहूंगा कि जो लोग इसके लिए ज़िम्मेदार हैं, उन्हें कानून के दायरे में ज़रूर लाएं। हां, अगर वे कानूनी रूप से अपना जुर्म कुबूल करके सार्वजनिक माफी मांगें, तो उन्हें क्षमा किया जा सकता है। साथ ही अपनी निजी सुरक्षा का भी ख्याल रखें । बाकी भड़ास पर शब्द छापते रहें। कागद कारे, कागद कारे।

Vinay Dwivedi : पत्रकार Yashwant Singh पर प्रेस क्लब ऑफ इंडिया के बाहर हमला किया गया और पुलिस की चुप्पी तो समझ आती है, प्रेस क्लब की चुप्पी के मायने क्या हैं। अगर यशवंत का विरोध करना ही है तो कीजिये, हमला करके क्या साबित किया जा रहा है। मेरा दोस्त है यशवंत, कई बार मेरे मत एक नहीं होते, ये जरुरी भी नहीं है लेकिन हम आज भी दोस्त हैं। चुनी हुई चुप्पियों और चुने हुए विरोध से बाहर निकलने की जरुरत है।

Sunil Kumar Suman : Bhadas4media के संचालक और युवा साहसी पत्रकार Yashwant Singh पर किया गया हमला निंदनीय है। यशवंत अपने सीमित संसाधनों में भड़ास4 मीडिया चलाते रहे हैं और मीडिया की दुनिया के कई गलत कारनामे निर्भीकता के साथ सामने लाते रहे हैं। एक ऐसे समय में जबकि पूरा मीडिया कॉर्पोरेट घरानों के कब्ज़े में है, इस तरह के सूचना माध्यम काफी अहमियत रखते हैं। काबिलेतारीफ बात यह रही कि यशवंत ने हिम्मत के साथ इस हमले को बेनकाब किया और अभी भी अपनी उसी प्रतिबद्धता के साथ मीडिया मैदान में डटे हुए हैं। हम सब आपके साथ हैं। हमलावर लोग कायर होते हैं, इसलिए हारना अंततः उन्हें ही होता है…

वेद प्रकाश पाठक गोरखपुर : मीडिया में बैठे गुंडों के खिलाफ यूं ही लड़ते रहिये Yashwant Singh भाई. बड़ा कठिन और साहसिक काम है मीडिया का लिबास ओढ़ कर बैठे गुंडों से निपटना। वह भी तब जबकि आप खुद कलमकार हों। मीडिया से जुड़ी खबरों के एकमात्र सर्वाधिक लोकप्रिय न्यूज वेबसाइट bhadas4media.com के संपादक आदरणीय यशवंत सिंह भाई यह काम अर्से से बखूबी कर रहे हैं। भ्रष्ट मीडिया घरानों ने आपको जेल में भी डलवाया लेकिन आप टूटे नहीं। आप मजबूती से लड़ते रहे। जेल में भी कलम चलती रही। हाल ही में अपनी लेखनी के कारण दो गुंडा और कथित पत्रकारों ने उनको फिर निशाना बनाया। प्रेस क्लब आफ इंडिया के बाहर उन पर हमला किया गया। यशवंत भाई पर हमले से उन पत्रकारों में खासा गुस्सा है जो कलम पर विश्वास रखते हैं। वे पत्रकार दुखी हैं, जिन्हें गुंडई की बजाय कलम पर आस्था है। यशवंत जी भी सक्षम हैं और उनके साथ इतना समर्थन है कि दोनों गुंडों का जवाब उन्हीं की भाषा में दिया जा सकता है। लेकिन वह ऐसा नहीं करेंगे। क्योंकि यशवंत सिंह उस शख्सियत का नाम है जो कलम से जवाब देते हैं। आपकी लेखनी में वह धार है जो गुंडई का माकूल उत्तर देने में सक्षम है। और वह समय-समय पर इस बात का आभास भी कराते रहते हैं। हम सभी आपकी लड़ाई में साथ हैं और अपने इस साथी से बस इतनी दरख्वास्त है कि यह लड़ाई हर हाल में जारी रहनी चाहिये।

Nirala Bidesia : दो दिनों पहले ही खबर को पढ़ा कि Yashwant भाई पर हमला हुआ है. पढ़कर अजीब लगा.घटना के बारे में जानकर तो और भी अजीब. क्या फालतू और बकवास टाइप की हरकतें पत्रकार करने लगे हैं. यशवंत भाई से मेरी आमने—सामने की कभी मुलाकात नहीं. ऐसा भी नहीं कि हर कुछ दिनों पर बात हो. पिछले करीब दस सालों से हम एक दूसरे को जानते हैं लेकिन कुल जमा दस बार भी चैट से बात नहीं हुई होगी. फोन से तो एक दूसरे की आवाज अब तक सुने नहीं हैं. लेकिन यह एक पक्ष है. असली वाला पक्ष यह है कि हम एक दशक से उन्हें जानते हैं, क्लोजली फॉलो करते हैं. इन दस सालों में यह हमेशा लगा है कि बहुत करीबी हैं यशवंत भाई.भड़ास की जब शुरुआत उन्होंने की तो पहले कुछ दिन लगा कि यह क्या बकवासबाजी है. लेकिन ऐसा कुछ ही दिनों तक लगा. फिर देखा कि कई संस्थान दे दनादन भड़ास को फॉलो करने लगे. उसी ट्रेंड पर वेबसाइट बनाने लगे. अब आज जबकि नये वेंचर का आइडिया मांगा जा रहा है और लोग दे रहे हैं तो उस लिहाज से भड़ास को एक फ्रेश और इनोवेटिव आइडिया माना जाना चाहिए. एक ऐसा आइडिया, जिसने देश भर के पत्रकारों को परोक्ष तौर पर एक दूसरे से जोड़ दिया. मीडिया के अंदर की खबर बाहर आने लगी तो न जाने कितने नंगे होने लगे, संस्थानों की परत दर परत पोल खुलने लगी. यह करिश्मा, चालबाजी कम थी, एक नये किस्म की बदलाव की आहट ज्यादा. भड़ास के बाद न जाने कितने लोगों ने कितने तरह के आरोप लगाये यशवंत पर. तरह—तरह के आरोप. मैं नहीं जानता कि उन आरोपों में कितना दम था. हो सकता है कि बहुत कुछ सच हो, संभव है कि बहुत कुछ मनगढ़ंत. ब्लैकमेलर, दारूबाज और भी न जाने क्या—क्या कहते थे. लेकिन इतने तरीके से व्यक्तिगत हमले, सार्वजनिक जीवन में चरित्र हनन के बावजूद ऐसा कभी नहीं सुना कि यशवंत ने किसी के साथ गुंडई की, हमला किया, करवाया. कायरों की तरह, बुजदिलों की तरह मतभेद—मनभेद वाले दुश्मनों से निपटा. दो दिनों पहले जब यशवंत भाई पर हमले की बात सुना तो लगा कि कितने कमजोर लोग हैं. सत्ता—सल्तनत टूट रही है तो यशवंत के मुकाबले कुछ नया कीजिए. परास्त कीजिए. अप्रासंगिक बनाइये भड़ास को. तर्कों और तथ्यों के साथ यशवंत को खड़ा कीजिए ताकि सार्वजनिक जीवन से वे तौबा कर लें. भड़ास और यशवंत के बारे एफबी पर लिखिए, कोई रोक थोड़े हैं. आपका लिखना सही होगा, भड़ास गलत होगा, यशवंत गलत होंगे तो वे तर्क देेंगे, कुतर्क करेंगे, जवाब देंगे या निरूत्तर हो जायेंगे. लेकिन इस तरह से हमला करना, मारना, मारने की कोशिश करना तो यही साबित करता है कि अभी भड़ास का भूत पीछा छोड़ नहीं रहा. उसका असर अब भी रगों में दौड़कर दिमाग को चैन से नहीं रहने दे रहा.यशवंत भाई पर हुए हमले का सिर्फ विरोध नहीं है बल्कि यह भी मानना हे कि हिंसा का सहारा लेनवाला कोई भी व्यक्ति चाहे कुछ और हो, वह पत्रकार तो नहीं होगा, नहीं हो सकता

Manoj Bhawuk : मैं Yashwant भाई को बहुत नजदीक से जानता हूँ। मुँहफट है, दिलेर हैं। बुजदिलों की तरह कभी नहीं लड़ते। चुप्पी के साथ मदद भी करते हैं और कमजोर के पक्ष में खड़े हो जाते हैं, बिना किसी रिश्ते-नाते के भी। हमला करने वाले लोग बहुत हीं घटिया और बुजदिल हैं।

Ravi Kumar Singh : वरिष्ठ पत्रकार लंकेश की हत्या के दुसरे दिन ही बड़ी संख्या में प्रेस क्लब में पत्रकारों का जमावड़ा लगा था, अंग्रेजी और हिंदी दोनोंं भाषाओं में बतियाते हुए समझदार लोग एक स्वर में निंदा कर रहे थे,किसी के हाथों में तख्तियां थी तो किसी के आंखों में गुस्सा, कातिल का पता नहीं फिर भी लोग दोषी को सख्त सजा दिलवाने की मांग कर रहे थे, लेकिन उसी राजधानी में भड़ास के संपादक Yashwant Singh जी पर हमला हुआ वो भी पत्रकारों के द्वारा जिनमें उन्हें चोट भी लगी, उन्होंने बकायदा इसकी जानकारी फेसबुक पर शेयर किया, फोटो में चेहरे पर लगा चोट साफ दिख रहा था हमलावर के नाम भी सामने थे,और ये राजधानी का ही मामला था, लेकिन यहां पर “वी वांट जस्टिस” करने वाले लोग नदारद हो गये, जैसे कुछ हुआ ही न हो, ये दावे के साथ कह सकता हूं कि पत्रकार लंकेश से कहीं ज्यादा भड़ास संपादक यशवंत सिंह जी ने पत्रकारों के लिए आवाज उठायी, बड़े बड़े मीडिया घरानों से टकराने की क्षमता इन्हीं में दिखी, बिना कोई लोभ लालच के ये भड़ास को कई सालों से चलाते आ रहे हैं जिसमें पत्रकारों के लिए हर बार आवाज उठायी जाती है, लेकिन आज वही बिरादरी अपने इस संपादक पर हुए हमले पर खामोश है, इससे बुरा हमारे लिए और क्या हो सकता है, खैर पहले राजनेता लाशों पर राजनीति करते थे लेकिन अब पत्रकार भी इस दिशा में काफी आगे बढ़ चुके हैं, जहां उन्हें स्वार्थ दिखता है वहीं वह मुंह खोलते हैं, यकिन से कह सकते हैं पत्रकारिता का सबसे बुरा दौर चल रहा है…..

अजित सिंह तोमर : वरिष्ठ पत्रकार Yashwant Singh पर हाल ही में प्रेस क्लब,दिल्ली के बाहर दो ‘कथित’ पत्रकारों हमला किया और उनके साथ अभद्रता की। यशवंत जी की चोटिल तस्वीरें हमनें फेसबुक पर देखी। मैं उसी दिन से यह सोच रहा हूँ कि मीडिया की अंदरूनी दुनिया के शोषण और पत्रकारों की समस्याओं पर लिखने बोलने और अभियान चलाकर शोषित पत्रकारों के साथ खड़े होने वाले भाई यशवंत सिंह यदि ऐसी हिंसा के शिकार हो गए है तो इससे पता चलता है पत्रकारों की अंदरूनी दुनिया वास्तव ने कितनी अकेली और विचित्र किस्म की कुत्सओं से भरी है। मैं यशवंत जी को एक दशक से अधिक समय से जानता हूँ जितना स्पेस उन्होंने भड़ास फ़ॉर मीडिया पर विपक्ष को दिया है इतना कोई नही देता है वो गजब के लोकतांत्रिक सोच के व्यक्ति है। इस घटना के बाद उनकी प्रतिक्रिया में उदात्तमना होना ही मुखर होकर सामने आया उनका एक वीडियो मैनें देखा जिसमे वो क्षमा और नेचर की जस्टिस की बात कर रहे। मैं सोच रहा था ये आदमी किस मिट्टी का बना है यदि उनकी जगह मैं होता तो निसन्देह इतना उदार होकर कतई पेश नही आता। मीडिया के अंदर यदि पत्रकार (?) ऐसी गुंडई करेंगे तो हम उस मीडिया से संविधान सम्मत होने की अपेक्षा कैसे रख सकेंगे? निसन्देह भूप्पी और अनुराग त्रिपाठी पत्रकार तो नही है। बतौर जर्नलिज़्म टीचर मुझे यह बात भी खराब लगी कि एक वरिष्ठ पत्रकार के साथ जो अभद्रता हुई उस पर जैसा विरोध मीडिया के अंदर होना चाहिए था वैसे नही हुआ। खैर! हमनें यशवंत जी का जेल प्रकरण भी देखा था तब भी कमोबेश ऐसे ही लोग चुप्पी लगा गए थे। मैं यह पोस्ट यशंवत जी के लिए नैतिक समर्थन या न्याय के लिए नही लिख रहा हूँ उनका अपना एक स्वतन्त्र अस्तित्व है और उनके चाहने वाले भी कम नही है मगर पत्रकारों के सुख-दुःख में मीडिया घरानों से लड़ने वाले पत्रकार के साथ हुई ऐसी हिंसा और अभद्रता देखकर मेरा मन खिन्न जरुर है। उम्मीद करता हूँ उन दोनों पत्रकारों के संस्थान इस निंदनीय कृत्य के लिए जरुर सख्त कार्यवाही उन पर करेंगे।

Apoorva Pratap Singh : अभी 3 दिन पहले पत्रकार Yashwant Singh पर हमला हुआ, कारण उनके पोर्टल पर उन दोनों व्यक्तियों (पत्रकार नहीं कहूंगी) के पिछले काले कारनामों की पोल खोली गई थी । अचंभा यह है कि रेगुलर मीडिया और सोशल मीडिया से जुड़े लोगों की चुप्पी। दिवगंत गौरी जी और उनसे पहले वाले पत्रकारों जिनकी हत्याएं हुईं उन पर अगर सही समय ध्यान दिया गया होता, हाइलाइट किया होता तो हो सकता है कि यह सब नहीं होता। हम सब लोग सांप गुजरने के बाद लाठी पीटने वालों में से हैं । दुर्घटनाओं के बाद शोक सभाएं करने से बेहतर है कि मुद्दों को सही समय उठाया जाए। एक और कड़वी बात यह कि अपने मुद्दों, दिक्कतों को हाइलाइट या खुद की शोक सभा भी अगर ऑर्गनाइज करनी हो तो पहले एक गुट बनाइये या जॉइन करिये, तभी सम्भव है कि मसले को trp मिले, वरना लोग पीड़ित के ही सौ गुनाह गिनाने को तैयार हैं।

प्रेमी चन्द्रहाश कुमार शर्मा : पिछले दिनों पूर्वांचल के रहने वाले और दिल्ली में रहकर पूरे देश की मीडिया की खबर लेने वाले तेज-तर्रार पत्रकार भड़ास फॉर मीडिया के संपादक यशवंत कुमार सिंह पर प्रेस क्लब ऑफ़ इंडिया के गेट पर जानलेवा हमला हुआ, जिसकी मैं कड़ी निंदा करता हूं। क्या कहूँ, मुझे दुख इस बात की है, कि धारदार कलम के धनी यशवंत सिंह अपनी कलम को ही अपना तोप व हथियार समझतें हैं, यह मेरे जैसे नवोदित पत्रकार का भी यही तोप व हथियार है। भूपेंद्र नारायण सिंह भुप्पी और अनुराग त्रिपाठी जैसे पत्रकार यशवंत सर पर हमला कर इस पेशे को कलंकित कर बैठे हैं। कई नामचीन प्रिंट मीडिया दैनिक जागरण, अमर उजाला जैसे अखबारों में अपनी लेखनी का लोहा मनवाने वाले पूर्वांचल के गाजीपुर जिले से ताल्लुक रखने वाले यशवंत सिंह एक लोकप्रिय हिंदी न्यूज़ पोर्टल भड़ास फ़ॉर मीडिया के संस्थापक व प्रधान सम्पादक हैं। उनकी लेखनी का मैं भी कायल हूँ। घटना के एक सप्ताह बाद भी इस प्रकरण पर शासन-प्रशासन का तनिक भी ध्यान नहीं है। खैर, जो हुआ उसका परिणाम तो भुप्पी और त्रिपाठी को भुगतना ही है, पर… जो हुआ गलत हुआ। यह घटना लोकतंत्र पर ”लोकतंत्र” का हमला है।

Prakash Asthana : सच तो यह है कि यशवंत ने कई मीडिया घरानों से पंगा लिया हुआ है..वहां जो पत्रकार काम कर रहे हैं, वे भले ही दिल से यशवंत के साथ हों, लेकिन संपादक या मालिक के खिलाफ जाकर वे उसकी खबर तक नहीं बना सकते..उन्हें भी नौकरी करनी है…अब पहले वाली पत्रकारिता तो रही नहीं, अलबत्ता मीडिया संगठन जरूर कुछ कर सकते हैं

Azeem Mirza : सत्य कड़वा होता है लेकिन हकीकत यही है कि न जाने कौन सी लालच, प्रभाव या दबाव में मीडिया का बड़ा वर्ग काम कर रहा है, संस्थान में बड़े ओहदों पर बैठे मीडिया मैनेजर अपने अधिनस्तो का शोषण कर रहे हैं, ऐसे लोगों में यशवन्त जी के समर्थन में बोलने की हिम्मत ही नहीं है, मैं यशवन्त जी के साथ हूँ।

Virendra Dubey : सर जी बात तो सही है। सभी को सांप सूघ गया है। इस मुद्दे पर कोई बात ही नहीं करना चाहते है। रवीश भाई भी इस मुद्दे पर चुप है। वे क्या यशवंत भाई को पत्रकार नहीं मानते है या फिर अभी तक उन्हें इसकी जानकारी ही नहीं हो पायी। पत्रकारों की असली लड़ाई तो यशवंत जी ही लड़ रहे हैं।

Nirmal Kumar : जिस तरह की पत्रकारिता यशवंत सिंह जी करते हैं, मुझे पहले से अंदेशा था कि ऐसा होगा। आज की तारीख में ईमानदार को कोई देखना नहीं चाहता। ईमानदारी एक ऐसी रौशनी की तरह हो गयी है जो चहुँ ओर व्याप्त बेईमानी और भ्रष्टाचार के अँधेरे को चीरती है इसलिए इन धतकर्मों में लिप्त लोग रौशनी के स्त्रोत को ही बंद करने में लगे हैं काली कोठरी के रोशनदान को बंद करने में लगे हैं। धिक्कार है डरपोक सियासतदानों पर।

सौजन्य : फेसबुक

पूरे मामले को समझने के लिए इसे भी पढ़ें…

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क्या ‘न्यूजलांड्री’ वाले अपराधी और मानसिक रोगी पत्रकार अनुराग त्रिपाठी को नौकरी से निकालेंगे?

Yashwant Singh : मधु त्रेहन और अभिनंदन सेखरी (Newslaundry के संचालक द्वय) को ट्वीट कर अपराधी पत्रकार अनुराग त्रिपाठी की हरकत के बारे में सूचित कर दिया है। इसके बाद न्यूज़ लॉन्ड्री से अभी फोन आया। मैनेजमेंट ने कल तक का वक्त मांगा है। दे देते हैं। वैसे पता चला है कि अनुराग त्रिपाठी नशे में पहले भी कई हरकतें कर चुका है जिसके कारण नौकरी गयी। लेकिन रो-धो कर, आगे से नशा न करने का वादा कर और बच्चों की दुहाई देते हुए नौकरी बहाल करवाने में कामयाब होता रहा।

कुल मिला कर ये मानसिक रूप से गड़बड़ शख्स लगता है जो दारू पीकर आत्मघाती या उग्रवादी बन जाता है। ऐसे लोगों से हम सबको सावधान रहने की ज़रूरत है और इन्हें चिन्हित कर अलग थलग किए जाने की आवश्यकता है।

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हमलावर अनुराग त्रिपाठी जो Newslaundry में काम करता है, आज सुबह एक मेरे वरिष्ठ मित्र को फोन कर घंटों रोया। बख्श दिए जाने की गुहार लगा रहा था। मित्र ने उससे कहा कि सीधे यशवंत से बात करो, वो बड़े दिलवाला है, तुम्हें माफ कर देगा।

मैं अनुराग त्रिपाठी से कहना चाहता हूं कि बन्धु पहले तो अपना fb एकाउंट एक्टिवेट कर लो, समाज और दुनिया का सामना करो। गले मिलकर पीठ में खंजर भोंकने की मानसिकता वाले लोग उजाले से डरते हैं, सवालों से भागते हैं। ये अनुराग त्रिपाठी ट्विटर पर भी मुझे ब्लाक कर चुका है। इसके मन मे चोर है, तभी ये चोरों सरीखा व्यवहार कर रहा है। इसके ट्विटर एकाउंट का स्क्रीनशॉट दे रहा हूँ। इसको वहां भी घेरा जाए, पूछा जाए।

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मेरे पर हमला करने वालों में से एक ये भाई साहब भी थे। यही कह रहे थे- ‘बहुत खबरें छापता है मार लेने दो यशवंत को’। हमले के दौरान मोबाइल से वीडियो बनाने की भी कोशिश ये कर रहे थे। पूरी साजिश इन्हीं महोदय की रची हुई थी। इनका नाम अनुराग त्रिपाठी है। आजकल न्यूज़ लांड्री में काम करते हैं। इन्होंने मुझे fb पर ब्लाक कर रखा है।

एक मित्र ने इनकी पिक्स और fb यूआरएल भेजा है। बहुत सारे कॉमन फ्रेंड इनकी फ्रेंड लिस्ट में बताए जाते हैं। इन्हें गेट वेल सून लिख कर पूछा जाना चाहिए कि क्या इनकी कलम की स्याही सूख गई है जो फिजिकल अटैक से एक कलमकार से खबरों से सम्बंधित किसी पुराने विवाद का स्कोर सेटल कर रहे हैं। इनका फेसबुक पता ये है :  https://www.facebook.com/anurag.tripathi.31

भड़ास के एडिटर यशवंत सिंह की एफबी वॉल से.

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यशवंत पर हमला करने वाले भूपेंद्र नारायण सिंह भुप्पी और अनुराग त्रिपाठी सजा के पात्र हैं

Bhawna Vardan : भड़ास4मीडिया के एडिटर और फाउंडर यशवंत सिंह जी पर जब से हमला हुआ तभी से मैं इंतजार कर रही थी कि हमलावर पत्रकार भूपेंद्र सिंह के खिलाफ क्या एक्शन लिया जाता है …लेकिन मुझे हैरानी हुई कि अभी तीन-चार दिन बाद भी वह खुलेआम घूम रहा है..आजकल कैसे-कैसे लोग पत्रकार बनते फिरते हैं, इन पर रोक लगनी चाहिए और इन्हें उचित सजा मिलनी चाहिए…  अन्यथा पत्रकारिता पर लगे कलंक के कारण यह पूरा पैशा ही कलंकित हो जाएगा और लोगों का पत्रकारिता पर से विश्वास उठ जाएगा…

मैं हैरान हूं ऐसे भी लोग पत्रकार होते हैं जो कलम की जगह पर हिंसा का सहारा लेते हैं… लोकतंत्र का चौथा खंबा होता है पत्रकारिता… जहां यह समसामयिक विषयों पर लोगों को जागरुक करने तथा उनकी राय बनाने में बड़ी भूमिका निभाता है वहीं वह अधिकारों/शक्ति के दुरुपयोग को रोकने में भी महत्‍वपूर्ण है.ज़रा सोचिए ऐसा पत्रकार किसी मीडिया हाऊस से जुडऩे के बाद अपनी हेकड़ी बघारते हुए लोगों को डराने-धमकाने या मारपीट का काम करेगा तो ऐसे कथित पत्रकारों से भला मीडिया के सम्मान तथा उसके कर्तव्यों व जि़म्मेदारियों को निभाने की उम्मीद भी क्या की जा सकती है?

यशवंत सिंह पर इस हमले की जितनी निंदा की जाए कम है.. भूपेंद्र नारायण सिंह सिंह भुप्पी और अनुराग त्रिपाठी के बारे में मैं अधिक नहीं जानती लेकिन जो काम उन्होंने किया है उसके बाद वह सजा के पात्र हैं… देश की न्याय व्यवस्था कार्यप्रणाली को सुचारु रुप से चलाने के लिए फीडबैक की आवश्यकता होती है… स्वतंत्र पत्रकार ऐसे में वॉइस ऑफ पीपल का रोल अदा करते हैं..निष्पक्ष और स्वतंत्र पत्रकारिता ना केवल सत्य खबरों को जनता के सामने लाने का कार्य करती है बल्कि जनता और सरकार के बीच सशक्त माध्यम होती है जिसके द्वारा देश के मौजूदा हालात पता चलता है.

आज हमारे देश में निर्भींक और ईमानदार पत्रकारिता की कमी है …ऐसे में केवल कुछ ही मीडियाकर्मी हैं जो अपना काम सही प्रकार से कर रहे हैं. इनके नाम उंगलियों पर भी गिने जा सकते हैं .. यशवंत भी उनमें से एक हैं … भड़ास फॉर मीडिया पोर्टल के एडिटर और फाउंडर यशवंत सिंह जो अपनी बेबाकी, निर्भीकता और स्पष्टवादिता के कारण मीडिया में काफी लोकप्रिय हैं.. ऐसे सीनियर मीडिया कर्मी के ऊपर हमला पत्रकारिता का अपमान है… भूपेंद्र सिंह भुप्पी और अनुराग त्रिपाठी को जल्द ही सजा मिलनी चाहिए नहीं तो इनकी अपराधी प्रवृत्ति को बढ़ावा मिलेगा और कोई और पत्रकार या मीडिया कर्मी इसी तरह हमले का शिकार होगा…!! यशवंत ने हमले के बाद जो एक वीडियो जारी कर सब कुछ विस्तार से बताया, उसे देखिए : https://www.youtube.com/watch?v=MgGks6Tv2W4

आगरा की सोशल एक्टिविस्ट और उद्यमी भावना वरदान शर्मा की एफबी वॉल से.

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यशवंतजी हमलावरों को अपनी कलम की ताकत से धूल चटा देंगे : अश्विनी कुमार श्रीवास्तव

अश्विनी कुमार श्रीवास्तव

Ashwini Kumar Srivastava : दुनिया में कुछ लोग विलक्षण प्रतिभा के साथ आते हैं। जाहिर है, ऐसे लोग भीड़ और भेड़चाल से अलग होते हैं और अमूमन इसका खामियाजा भी भुगतते हैं…कभी रोजी-रोटी के बेहिसाब संघर्ष से जूझ कर तो कभी सभी तरह के आम इंसानों की आंख की किरकिरी बनकर। Yashwant Singh ने जब से भड़ास ब्लॉग लिखना शुरू किया था, तब ही से मैं उनका मुरीद रहा हूँ। उन्होंने बेबाकी और साहस से भड़ास फ़ॉर मीडिया का जो अद्भुत सफर तय किया, उस सफर में उनके साथ इस सफर की शुरुआत करने वाले तकरीबन सभी दोस्त उनके कोपभाजन का शिकार हुए और दुश्मन भी बने। उनके अलावा, यशवंत जी ने बेशुमार नए दुश्मन भी तैयार किये।

मगर इस दौरान हम जैसे बेशुमार मुरीद भी उनको हासिल हुए, जो शुरू के उनके किसी दोस्त या दुश्मन से या फिर खुद यशवंत जी से ही बरसों तलक सीधे तौर पर वाकिफ तो नहीं रहे लेकिन उनके जीवन के हर पहलू से अच्छी तरह वाकिफ जरूर रहे। मुझे याद है कि सन 2000-01 के बैच में आईआईएमसी करने के बाद मीडिया को लेकर जो ख्वाब और तस्वीर बुनी थी, वह जब हर रोज टूटती थी तो किस तरह यशवंत जी और उनका भड़ास फ़ॉर मीडिया हर रोज ही हमें संघर्ष करने की नई ताकत भी दिया करते थे। मीडिया और उसके मठाधीशों के चेहरे पर लगी कालिख दिखाने के लिए आईना पेश करके यशवंत जी ने जो अब तक किया है, उसका कोई जोड़ है ही नहीं। जब 2010-11 में मीडिया की नौकरी को अलविदा किया तो भी कभी भड़ास और यशवंत जी को पढ़ना नहीं छोड़ा। आज भी बदस्तूर यही सिलसिला जारी है।

आज भड़ास और यशवंत जी का जिक्र इसलिये किया क्योंकि उन पर हाल ही में हमला हुआ है और यह सुनकर मुझे बेहद दुख हुआ है। मीडिया में वैसे तो बड़े बड़े पत्रकार हैं लेकिन यशवंत जी को ही अभी तक मैंने वास्तविक पत्रकार माना है। इतने लंबे अरसे में उन पर हमले का दुःसाहस किसी ने नहीं किया। और ज्यादा दुख इस बात का है कि उन पर हमला उन लोगों ने किया है, जिन्होंने हथियार के तौर पर कलम ही थाम रखी है। न जाने ऐसी कौन सी मजबूरी आ गयी, जो कलम छोड़कर उन्हें किसी गुंडे की तरह जवाब देना पड़ गया।
खैर, यशवंत जी ने शारीरिक हमला भले ही पहली बार झेला हो लेकिन बाकी हर तरह के हमलावरों को वह अपनी कलम की ताकत से ही धूल चटा चुके हैं। उम्मीद है इस बार भी उनके दुश्मनों को हार माननी ही पड़ेगी। शुभकामनाओं के साथ यशवंत जी के जज्बे को सल्यूट… कहते हैं न- ”खींचो न कमानों को न तलवार निकालो, जब तोप मुक़ाबिल हो तो अख़बार निकालो।”

बिजनेस स्टैंडर्ड समेत कई अखबारों में कार्य कर चुके और इन दिनों लखनऊ में उद्यमी के तौर पर स्थापित अश्विनी कुमार श्रीवास्तव की एफबी वॉल से.

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साहसी पत्रकार यशवंत सिंह पर हमला करने वालों के विरुद्ध तत्काल कार्रवाई करे सरकार : शंभूनाथ शुक्ल

Shambhunath Shukla : वरिष्ठ पत्रकार Yashwant Singh पर हुए हमले पर पत्रकार जगत चुप है. असहिष्णुता को लेकर हल्ला-गुल्ला करने वालों ने भी एक शब्द नहीं कहा. जबकि यशवंत पर हमला सही में एक ज़मीनी पत्रकार पर हमला है. पत्रकारों की अपनी रोज़ी-रोटी और उसकी अपनी अभिव्यक्ति के लिए सिर्फ यशवंत सिंह ही लड़ रहे हैं. उन्होंने मीडिया हाउसेज और सत्ता की साठगाँठ की परतें उजागर की हैं.

लेकिन अब न तो वामपंथी न दक्षिणपंथी कोई भी संगठन उनके साथ खड़ा हो रहा है. बहरहाल कोई हो न हो, लेकिन मैं इस साहसी और कर्मठ पत्रकार यशवंत सिंह पर हुए हमले की कड़ी भर्त्सना करता हूँ. मैं फेसबुक के अन्य साथियों से भी अपील करूँगा कि वे साथी यशवंत पर हुए हमले की निंदा करें और सरकार पर दबाव डालें कि वह हमलावरों के विरुद्ध तत्काल कार्रवाई करे.

कई अखबारों में संपादक रहे वरिष्ठ पत्रकार शंभूनाथ शुक्ला के उपरोक्त एफबी स्टेटस पर आए ढेरों कमेंट्स में से कुछ चुनिंदा इस प्रकार हैं….

Nirmal Kumar जिस तरह की पत्रकारिता यशवंत सिंह जी करते हैं मुझे पहले से अंदेशा था कि ऐसा होगा। आज की तारीख में ईमानदार को कोई देखना नहीं चाहता। ईमानदारी एक ऐसी रौशनी की तरह हो गयी है जो चहुँ ओर व्याप्त बेईमानी और भ्रष्टाचार के अँधेरे को चीरती है इसलिए इन धतकर्मों में लिप्त लोग रौशनी के स्त्रोत को ही बंद करने में लगे हैं काली कोठरी के रोशनदान को बंद करने में लगे हैं। धिक्कार है डरपोक सियासतदानों पर।

Thakur Ramsingh Chhonkar सचतो यह है कि दक्षिणपंथी और वामपंथी दोनों ही पत्रकार अपने-अपने खेमों में चिपके हुए हैं और एक दूसरे पर वाक प्रहार कर रहे हैं। निष्पक्ष और अखबार के पुराने पत्रकार का आज के दौर में कोंन साथ देगा। मीडिया पतन के दौर में हैं।

Amitaabh Srivastava हर तरह की हिंसा, मारपीट घोर निंदनीय है. एक ऐसे समय में जबकि समूची पत्रकार बिरादरी की साख तमाम वजहों से संकट में है, इस तरह की घटनाएं, उस संकट को और गहरा करती हैं

Anshuman Shukl आपने ये मुद्दा उठाया देख कर अच्छा लगा। आप पर भरोसा है आप पक्ष पात नहीं करते। रही बात इस मुद्द्दे कि तो यशवंत भाई तो उनको माफ करने को भी तैयार हैं लेकिन ये दोनों मुँह छुपाए घूम रहे है। अपना फेसबुक और ट्विटर भी बंद कर दिए है। बाकी सभी वरिष्ठ पत्रकार मौन है। शायद मन ही मन सोच रहे है अच्छा हुआ मारा गया बहुत बमचक मचाये था।

Sanjay Sharma Sir कटु सत्य तो यह है कि हिंदी पत्रकारों को अंग्रेज़ी पत्रकार के मुक़ाबले आज भी दोयम स्थिति का सामना करना पड़ता है चाहे विरोध हो या समर्थन । अंग्रेज़ी वाले हो हल्ला ज़्यादा मचाते है हिंदी वाले रस्म अदायगी। विचारधारा का फ़र्क़ तो है ही।

Pradeep Tiwari यशवंत सिंह पर हुए हमले की मध्यप्रदेश के सभी पत्रकार संगठनों ने अलग अलग ढंग से अलग अलग तरीके से निंदा की। कोई भी पत्रकार यशवंत की हत्या पर विरोध ना करे, ऐसा कहां हो सकता है।

Asha Shailly जिसके बारे में कोई बोल नहीं रहा उसके पक्ष में आप बोल रहे हैं यह महत्वपूर्ण है। यहाँ बिकाऊ मीडिया को चारा नहीं मिला होगा। एक बात और समझ में आती है और वो यह कि यदि यशवंत वामपंथी होते या हिन्दुओं को गरियाने वाले होते तो लोग खूब उछलते। क्योंकि यह निष्पक्ष रहे इस लिए इनका पक्ष बिकाऊ मीडिया नहीं ले रहा। पर हम आप के साथ हैं। हम सरकार से अनुरोध करेंगे कि सरकार इन हत्याओं, आक्रमण कारियों पर जांच बैठाए और ऐसे अपराधियों को बेनकाब करे जो सरकार को कठघरे में खड़ा करते हैं।

Shiv Kumar Dixit हमे जो करना है कर्तव्य के रूप में, हम करते चले। शब्दद्रोहियों का समाज शताब्दियों से रहा है, इनके सिंहासनों का इतिहास खोजे नहीं मिलता लेकिन शब्द रहता है, केवल यही रहता है जैसे राम नहीं केवल राम शब्द बचा। कोई पत्रकार हो शिक्षक हो लेखक हो इनका काम जोखिम का है तो फिर डर या अपेक्षाओं का बोझ क्यों लादें। समय का जबड़ा किसने देखा, शम्भुजी, भाग्यवाद की बात नहीं कह रहा हूँ। नाक की सीध में चलने की बात कह रहा हूँ, जितने बार रोका जाएगा फिर उसी रास्ते पर चल देंगे। आतंक की भर्त्सना के साथ, अभिवादन।

Ranjana Tiwari बिलकुल ..सर जो हमारी आवाज को बुलंद करते है अपनी कलम से आज वही पत्रकार सुरक्षित नहीं.. बेहद दुखद।

Niranjan Sharma यशवंत सिंह जी जैसे संघर्षशील पत्रकार पर हमला अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है ! इस कृत्य की जितनी भी निंदा की जाए कम है!

Hemraj Singh Chauhan सहमत सर उनके द्वारा एफआईआर करने के बाबजूद वो पकड़ से बाहर हैं, दोषियों को सज़ा मिलनी चाहिए

Abhay Dwivedi यह घटना अत्यंत निंदनीय है। लोकतंत्र के चतुर्थ स्तम्भ पर हो रहे हमले बन्द होने चाहिए।

Gopal Rathi एक ही तरह के कुछ मुद्दे राष्ट्रीय चिंता बन जाते है और कुछ मुद्दे स्थानीय भी नही बन पाते ?

Ajay Kumar Shukla गौरी लंकेश की हत्या पर पूरी मीडिया ने हल्ला मचा दिया वही मीडिया यसवंत जी के लिए कुछ नही बोल रही क्योंकि यहां उसकी राजनीतिक रोटियां नही सिक पाएंगी। यह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है।

Shariq Ahmad Khan हम सख़्त मज़म्मत करते हैं

Pradeep Mahajan सबसे पहले आरोपियों पर कानूनी कार्यवाही करा कर मुकदमा बनाया जाए Yashwant Singh

Sukesh Sharma Attack on Yashvant is really attack on PATRAKARITA.

Sujeet Singh Prince शुक्ला जी जब तक आप जैसे लोग सच्चाई का साथ देते रहे गे, यशवंत भाई साहब हरामखोरों को सबक सिखाते रहेंगे.

Usmaan Siddiqui बिल्कुल सही बात कही आपने Shambhunath Shukla सर.. आई एम टोटली एग्री विद यू… ज़िन्दाबाद, ज़िन्दाबाद, ज़िन्दाबाद…

Shweta R Rashmi बड़े चैनल और अखबारों के पैरोकारों को जगाएं… हम लोग तो पहले दिन से निंदा कर रहे हैं और कदम से कदम मिला रहे हैं।

Jai Narain Budhwar हर तरह की हिंसा के खिलाफ खड़े होना पड़ेगा। चुनी हुई चुप्पियां नहीं चलेंगी।

Satish Tyagi यशवंत पर हुआ हमला निंदनीय है। हम रोहतक के कितने ही साथी भड़ास के ज़रिए यशवंत से जुड़े हैं। हमें उनकी फिक्र है और हम पूरी शिद्दत से उनके साथ खड़े हैं।

Kailash Prasad Sharma एक निन्दा करने से नहीं, जबरदस्त विरोध होना चाहिए, तभी कुछ होगा सर…

Mahendra Agrawal बहुत ही निंदनीय, पत्रकारों पर लगातार हमले हो रहे हैं एकजुटता की आवश्यक्ता है

Yasmeen Kausar Athar ये कब हुया?

Shambhunath Shukla चार दिन पहले. दिल्ली में ऐन संसद के पास.

Yasmeen Kausar Athar Omg… सभी वरिष्ठ पत्रकारों को सुरक्षा प्रदान की जाए…. वरना सरकार इसकी, ज़िम्मेदार होगी…

डॉ.धनञ्जय सिंह भर्त्सना के इन स्वरों में एक स्वर मेरा मिला लो……..सही बात करनेवाला आदमी आज अकेला पड़ता जा रहा है, यह हमारे समय की सबसे बड़ी विडंबना है

Awadh Sharma भाई ये यशवन्त सिंह तथाकथित सेकूलरों को खुश नहीं करते होंगे

ब्रजभूषण प्रसाद सिन्हा यशवंत जी ने अपनी फोटो भी फेसबुक पर पोस्ट की थी पर वे वामपंथी नहीं हैं, इसलिए रवीश जैसे पत्रकार भी चुप है।

Shalabh Mani Tripathi बेहद अफ़सोसजनक और दुर्भाग्यपूर्ण !!

Abhinav Chauhan सर, उनके बारे में बोलने से किसी की दुकान नहीं चलनी, इसलिए कोई नहीं बोलेगा।

Shambhunath Shukla यहाँ आप निंदा करिए, कौन चुप है कौन नहीं यह अलग प्रश्न है.

Chander Mohan Singla यशवंत जी पर हमला पत्रकारिता पर हमला नही मानते चापलूस मीडिया कर्मी ।

Ashok Kumar Kaliramna मैं निंदा करता हूँ हमले की

Rakesh Pandey वरिष्ठ पत्रकार यशवंत सिंह पर हमले की कड़ी निंदा, आरोपी शीघ्र पकड़े जाय।

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यशवंत पर हमला करने वाले इन दो अपराधियों को पत्रकार कहना ही गलत है : नितिन ठाकुर

Nitin Thakur : भड़ास एक महाप्रयोग था, Yashwant Singh का. जो सबकी खबरें लेते थे उनकी खबरें लेने-देने का मंच. पत्रकारों को कोसने के दौर में उनकी बदहाली को भड़ास ने खूब उठाया. अब तीन ही दिन पहले यशवंत के साथ दो लोगों ने इसलिए मारपीट कर दी क्योंकि उन्होंने दोनों के खिलाफ अलग-अलग मौकों पर खबर छाप दी थी. वैसे तो उन दोनों को पत्रकार कहना ही गलत है क्योंकि उन्होंने कलम छोड़ हाथ उठाया लेकिन पेशेगत पहचान की वजह से उनको पत्रकार ही कहा जाएगा.

हमलावर नंबर एक- भूपेंद्र नारायण सिंह भुप्पी

हमलावर नंबर दो- अनुराग त्रिपाठी

एक को किसी चैनल ने पहले ही इसलिए बाहर कर दिया था क्योंकि वो वसूली करने लगा था तो दूसरा अभी Newslaundry में काम कर रहा है. पत्रकारों के प्रति असहिष्णु दौर में पत्रकारों के दुख सुख का हिसाब रखनेवाले यशवंत पर यूं हमला किया जाना बताता है कि सहनशीलता चारों ओर कम हो रही है. यशवंत जो करेंगे सो करेंगे लेकिन हम सबको इस खबर का प्रसार करके संबंधित संस्थानों तक उनके कर्मचारियों के गैर कानूनी बर्ताव की जानकारी पहुंचानी चाहिए. हमले के आरोपियों के नाम तस्वीर पेश है.

फेसबुक के चर्चित युवा लेखक नितिन ठाकुर की एफबी वॉल से.

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यशवंत सिंह पर कैसे हुआ हमला, सुनिए उनकी जुबानी (देखें वीडियो)

प्रेस क्लब आफ इंडिया के गेट पर भड़ास4मीडिया के संपादक यशवंत सिंह पर दो लफंगानुमा पत्रकारों ने हमाला किया. इनमें से एक का नाम भूपेंद्र सिंह भुप्पी है और दूसरा अनुराग त्रिपाठी है. प्रेस क्लब के भीतर ये दोनों यशवंत को देखने के बाद अपनी टेबल से उठकर यशवंत की टेबल पर आ गए और बैठकर यशवंत की तारीफें किए जा रहे थे, गले मिल रहे थे. बाहर निकलने पर धोखे से हमला कर दिया.

यशवंत ने हमले के दो दिन बाद पूरी कहानी इस वीडियो के जरिए विस्तार से बताई. साथ ही ऐसे हमलों को लेकर अपनी सोच का इजहार भी किया. नीचे दिए वीडियो पर क्लिक करें:

यशवंत ने उपरोक्त वीडियो के लिंक को फेसबुक पर साझा करते हुए जो लिखा है, वह इस प्रकार है :

उपरोक्त एफबी स्टेटस पर आए कुछ प्रमुख कमेंट्स इस प्रकार हैं :

Alok Singh : बहुत दुःखद है इस तरह का विरोध करना। मारपीट और हाथापाई कायराना हरकत है जो कि निंदनीय है। शुक्र है कि आपको ज्यादा चोटें नहीं आई। आपका चश्मा टूट गया। कोई बात नहीं। मिलिये मैं आपको उस से बढ़िया वाला चश्मा दिलवाने का प्रयत्न करूँगा। जल्द स्वस्थ होकर पुनः अपने जीवन का आनंद लें।

Rishabh Yadav : bhaiya lage raho…prerna de raha hai aapka yeh video। भैया आप जब समय मिले तो यह भी बताये की किन कारणों से जेल यात्राएं हुई और ओर नौजवान लोगों के लिए क्या सावधानियां रखना चाहिए। थोड़ा कोर्ट कचहरी का अनुभव भी साझा करें तो बढ़िया रहेगा। लिखें पूरे सिलसिलेवार ढंग से, अगर आप उचित समझें तो।

Hemant Jaiman Dabang : यशवन्त सर आपको कुछ नही होगा। हजारो लोगो की दुआएं आपके साथ है।

Qamer Baig : भड़ास है तो निकलेगी ही किसी के कायराना हरकत के लिए तो भड़ास भर भर के निकले कलम की तेज धार से भड़ास निकालते रहिये सतर्क रहिये होशियार रहिये खुश रहिये और ज़िंदादिली से सभी से मिलते रहिये।

अंशुमान मिश्रा : सर ये कोई आम हमला नहीं बल्कि नाक पर हमला है। अब सवाल नाक का है तो कुछ न कुछ करना ही चाहिए।

Dhananjay Singh : ”थोड़ा मारने दो इसे,बहुत खबरें छापता है” कहते हुए दिल्ली के प्रेस क्लब में भड़ास वाले Yashwant भाई को दो पत्रकारों ने ही पीट दिया……… जाहिर है इस घटना के गवाह भी कई एक रहे ही होंगे… निर्भीक पत्रकारिता पर खुद पत्रकारों की तरफ से हुए इस हमले की मैं निंदा करता हूँ ….खम्भों की यह लड़ाई निंदनीय है… आप भी छापिये न भाई,असहमति है तो किसी को पीट देंगे? ऐसे ही कमजोर पलों में निहायत ही कमजोर लोग पिस्टल भी निकाल लेते हैं और परिणाम अत्यंत भयानक होता है… आशा है देश की राजधानी के प्रेस क्लब में हुई इस घटना के विरोध में तमाम एक्टिविस्ट्स से लगायत प्रधानमंत्री भी ट्विट करेंगे. ऐसी हरकत निंदनीय है, अभी निंदा करिए.

Shahid Naqvi : जब खबर छापने के विरोध में पत्रकार ही पत्रकार पर हमलावर हो तो सच के नज़दीक पहुंचना मुश्किल है। पत्रकार पर किसी भी तरह के हमले की मैं घोर निन्दा करता हूं।

Vaibhav Agrawal : यशवंत जो पत्रकारिता की पोल खोल राजनीती करते है वो निश्चित ही प्रसंशक कम दुश्मन अधिक बनाती है! .. इस ढंग से मार पीट कर इन लोगो ने पत्रकारिता को और अधिक कलंकित किया है! दुर्भाग्यपूर्ण रूप से, इसमें राजनीतिक लाभ का कोई एंगल न होने की वजह से अधिकतम बिरादरी चुप है! 🙁

Abdul Noor Shibli : shandar. dono se ab bhi nafrat nahin. wah.

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यशवंत पर हमले का मामला : अब तो प्रेस क्लब आफ इंडिया में ही पत्रकार सुरक्षित नहीं!

Narendra M Chaturvedi : सवाल “नाक” का…..? अब दिल्ली का प्रेस क्लब आफ इंडिया भी सुरक्षित नहीं? “जानेमन जेल” के रचयता और लम्बे अरसे से पत्रकार बहन-भाइयो की समस्याओं के लिये सदैव सघर्षरत भड़ास 4 मीडिया के संस्थापक / संपादक भाई यशवंत सिंह जी पर प्रेस क्लब ऑफ इंडिया के गेट पर हमला हुआ। बहुत मारा पीटा जिससे नाक पर भयंकर चोट आयीं है। यशवंत भाई की फेसबुक पोस्ट बताती है कि ये घटना पार्ट ऑफ जॉब ही है। भूपेंद्र सिंह भुप्पी और अनुराग त्रिपाठी की कारस्तानी है। जाने किस खबर की बात करके पीटा उसने। सवाल अब “नाक” का है दोस्तों। सोचिये जब हम अपनी गद्दी, अपना मंच प्रेस क्लब में ही सुरक्षित नहीं… कोई भी ऐरा गेरा किसी को भी पीटकर चला जाये… ये हम लोगों के लिये शर्म की बात है… हमारे पत्रकार भाई-बहनों, जागिये और दलालों को सबक सिखाने को ईमानदारों को जगाइये…. आखिर यार सच कहने की खातिर कब तक ठुकते रहोगे?

Amit Rajpoot : कल Yashwant जी पर हमला और आज गौरी लंकेश जी की हत्या! क्या अभी भी सरकार को नहीं लगता कि पत्रकार सुरक्षा के वास्ते कोई कारगर क़दम तत्काल उठा लिया जाये?

Divakar Singh : भईया क्षत्रिय का धर्म है आताताइयों का विनाश करना. प्रकृति को भी न्याय करने के लिए निमित्त चाहिए, साधन चाहिए. अगर हम ऐसे राक्षसों से प्रभावित हो रहे हैं तो उनका नाश करने में हमारा योगदान भी होना चाहिए. हम सब उस प्रकृति का ही हिस्सा हैं. प्रकृति ने आप और अन्य न्यायप्रिय विभूतियों की रचना की है इन राक्षसों के सर्वनाश में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए. आगे बढिए और ज़ोरदार ढंग से प्रतिरोध दर्ज कीजिये. हम जैसे हज़ारों आपके साथ हैं.

Anup Mishra सर मेरे मार्गदर्शक हो आप पत्रकारिता जगत मे.. मै आपको स्वयम् कभी ना मिला हू पर आपकी ऐसी सोच का हमेशा दीवाना रहता हूं! आप सलामत रहे.. मुस्कुराते रहे

Anand Agnihotri हमलावर को उसके किये की सजा मिलनी ही चाहिए, ऐसे इंतजाम भी होने चाहिए जो कलम के सिपाहियों पर हमला करने का अवसर ही न पा सकें।

Ramji Mishra ऐसे लोग अपनी बिरादरी के नही हो सकते और अगर हैं भी तो धोखे से छल से पहुंचे लोग हैं ये क्या खाकर समाज सेवा करेंगे जिनकी नीयत इतनी गंदी है.. उन पर कार्यवाही होगी अगर वह रोक सकें तो रोक लें। दिखाता हूँ संविधान में कितनी ताकत है। उनके अखबार या टी वी का नाम बता दें कृपा करके

Abhinandan Mishra Koi पत्रकार gunda gardi kare to woh patrakar nahee gunda hai.

Durgesh Pandey पत्रकार तो पूरे समाज का होता है इसमें बिरादरी वाली कौन सी बात FIR तो होनी ही चाहिए नही तो फेस बुक पर सहाभूति बटोरने का क्या अवचित्य? आप एक बहादुर पत्रकार है यही घटना किसी और के साथ समाज मे होता तो आप क्या उसे भी यही समझा देते की जाने दो बिरादरी की बात है? सोचिये यसवंत जी आपसे हम आम लोग कितनी उम्मीदे लगाए बैठे होते है जब हमारा कोई नही सुनता तो एक पत्रकार ही है जो मदद पहुचता है!

रजनीकान्त वीरसिंह आर्य पिटाई प्रेस क्लब की हुई है या आपकी… प्रेस क्लब तो एक्शन लेगा ही… आप पर पर्सनल अटैक है… आप कायराना बात कर रहे है.. इस बार एक्शन नहीं लेंगे तो दोबारा करने को उनकी हिम्मत बढ़ेगी… खैर हमें क्या… आपकी बिरादरी के लोग हैं

Sanjaya Kumar Singh आपकी उदारता प्रशंसनीय है। सहमत हूं। पर प्रेस क्लब को लिखित शिकायत दीजिए।

Neeraj Kumar Singh देश का दुर्भाग्य है ऐसे दुस्ट लोग इन संस्थानों मे है, इनको सबक मिलना चाहिये

Kamta Prasad वह आदमी है कौन, लोगों को भी तो पता चलना चाहिए। पुलिस किसी की नहीं होती। पर जवाब तो बनता है।

Sanjeev Kumar BaBa भईया जी ऐसे छोड़ देंगे तो इन लोगो का मन बढ़ जाएगा इनको इनकी करतानी का जवाब दीजिये ।

Ramji Mishra खबरों से घबराए लोग जब कुछ न कर पाए तो इस पर उतर पड़े। मैं इसे कतई बर्दास्त नही करूँगा और तुरन्त इस पर कार्यवाही की माग और भविष्य में यशवंत जी के लिए सुरक्षा की माग भी भेजता हूँ। सरकार को इसके लिए जवाबदेही के साथ सामने लाऊँगा। आदरणीय यशवंत जी आप जल्द ठीक हों और यह साबित करता है कि खबरों में असर जबरदस्त है बाकी सावधान रहिये। मैं आपके साथ हूँ और सिर्फ बातों में ही नही मैं यह जंग समाज के खातिर अपने लड़ने जा रहा हूँ मुझे तत्काल न्याय चाहिए……… आप स्वयं सक्षम हैं लेकिन मैं कुछ भी नही हूँ लेकिन जो हूँ पूरी ताकत के साथ आपके साथ खड़ा हूँ ………

Sachin Mishra यह भूपेंदर सिंह द्वारा किया गया कृत्य बेहद निंदनीय और शर्मनाक है। भूपेंदर वाद-प्रतिवाद से न जीत पाओ तो मार पीट करोगे।। यशवंत भैया जैसे पत्रकार पर हमला करके तुमने यह साबित कर दिया कि तुम एक तुच्ची सोच के हो। तुमको पता होना चाहिए कि हमेशा से ही यशवंत भैया के बहुजन प्रशंसक रहे हैं। लेकिन तुमने जो किया है उसपर प्रतिक्रिया जरूर दिया जाएगा।। अब ईंट से ईंट बजेगी।। बेटा भूपेंदर अब तुम्हारे पाप का घड़ा भर चुका है। इसलिए लंगोटी संभालो।। क्या पता इस बार सरे आम नंगा कर दिया जाए।। यशवंत भैया Get well soon

शुभम त्रिपाठी निंदनीय ! आपके साहस को सलाम , वास्तव में ! खुद के दम पर पानी में रहकर पत्रकारिता के मगरमच्छों से लोहा लेने का ये जज्बा..! गुरु …. सलाम लीजिये
Manoj Kumar Mishra Yashwant Singh is darling of people. किसी भी बहुत बड़े पत्रकार से जनता में कम सम्मान नही है इनका । बेहद कायराना हरकत ! संपादक बंधुओं, पत्रकार बंधुओं प्रेस क्लब, प्रेस काउंसिल सभी को इस का संज्ञान लेकर कठोर कानूनी कार्यवाही करनी चाहिए और दोषी को कठोर दंड मिलने तक इसे लगातार देखा जाना चाहिए। नहीं करोगे तो तुम सब ऐसे ही पीटते रहोगे और किसी को कोई सानुभूति नही होगी ।

Divakar Singh मन दुखी हो गया. आराम कीजिये कुछ समय, फिर बात करते हैं. आघात हो रहे हैं इसका मतलब आप कुछ अर्थपूर्ण कर रहे हैं. ऐसी गंभीर घटना आपको ज़रूर पहले से अधिक ऊर्जा के साथ उठ खड़े होने के लिए प्रेरित करेगी, ये मैं जानता हूँ.

Rajshekhar Vyas कौन हैं यह दुष्ट ?आप पोलिस और कानून का सहारा ले ,वैसे में आपकी क्षमता से सुपरिचित हूँ आप खुद सक्षम हैं

Aleeza Hasan very sad to hear and see this…who is this guy and why did he dare to do this? take legal and…….action against him and his gang.

Satya Prakash Assaulter is pathetic. Keep writing like brave journalist.They are condemned and condemnable always.

Abhishek Tripathi ये तो तय है कि हमला करने कराने वाला आपके सामने घुटने टेक चुका होता है। वो जानता है कि वैचारिक स्तर पर हरा नहीं सकता आपको, इसलिए पाषाणयुगीन तरीकों की शरण लेता है…लेकिन आपको यह बताना चाहिए कि वो किसी भी स्तर पर आपके सामने खड़ा होने लायक नहीं। मन न बढ़े इसलिए कानूनी कार्रवाई जरूरी है भैया, शठे शाठयम समाचरेत…

Anil Saumitra अत्यंत दुःखद और निंदनीय हरकत। प्रेस क्लब, पुलिस और मीडिया के मित्रों को कुछ करना चाहिए।

Ashok Verma He himself needs the same treatment….

Dhyanendra Tripathi  सच उजागर करने के खतरे तो हमेशा से रहे हैं कलमकारों ने ये जुल्मो सितम हंस के सहे है… सैल्यूट है प्यारे भाई यशवंत. आप पर फख्र है कि तमाम संघर्षों और झंझावातों के बीच ये साहस की पत्रकारिता की लौ आपने जलाये रखी है.. सिरफिरों की हरकतों का क्या लेना? आप आराम कीजिये. शीघ्र स्वस्थ होइये. गाजीपुरी लाठी की मार बहुत खतरनाक होती है. भूपेन्द्र भुप्पी को मालूम होना चाहिये..तेल पिलाई गाजीपुरी लाठी से इस सरफिरे के पिछवाड़े की मजम्मत होनी चाहिये..

Rajesh Somani Take the matter with Union and dharna with take confidence of cm Delhi than see sir but if man belongs bjp than sure we will win perhaps first our family security and your security than take action

Pandey Parmanand I express my solidarity with you. My earlier comment was incomplete.Therfore,I suggest you to lodge an FIR without losing time. Also please give the details of the untoward incident.

Shubham Tripathi ईश्वर आपको जल्दी स्वस्थ करे भाई। कुछ सही कर रहे हैं, तब ही इस तरह के हमले का शिकार हुए हैं। बाकी भूप्पी साहब जो भी हैं, मानसिक रूप से बीमार हैं। उनके खिलाफ हमें मिल कर कुछ करना होगा, ताकि उनका भी इलाज हो सके। वैसे क्या वे अपने पत्रकारिता के पेशे से हैं?

Vinod Kumar Bhardwaj बचपन मे, या स्कुल; कालेज के समय आपकों मुक्केबाजी जरुर, थौडा ढंग की सीखनी और करनी थी, कसम सें, आज वह गुन्डा, अपने घर पर पडा अपने कर्मों को रो रहा होता। हर मुक्केबाज के साथ, पंगा लने वाला, जीवन मे, कभी सही नही रह सकता है। जरुर वह भगवा गैंग का रहा होगा, किसी खबर पर, काम पर, बिलबिला रहा होगा, जी।

Shri Krishna Prasad Sir, Please lodge an F I R against assailants immediately.Don’t make a delay in registering the case with the nearest police station.

Chandra Prakash Pandey ‘क्या होगा FIR कराकर’ पता नहीं क्यों ये शब्द Yashwant Singh के नहीं लगते! FIR तो कराइये ही, उसके बाद अगर कुछ नहीं होता तो उससे उसी भाषा मे संवाद हो, जिसे वह जानता हो। वैसे ये भूपी है कौन?

Arif Beg Aarifi virdhiyo ki chaati par kitna hola bhoona hai ye uska suboot hai jo akele insan par hamla kiye hai,mard hote to yu janvaro wali hatlrkat na karte,himmat rakkhe hum sab apke sath hai.

Pramod Sharma Yashwant Singh आपको संबंधित आरोपी लोगों पर एफ़आईआर करानी चाहिए.. हम आपके साथ हैं। अगर किसी को शिकायत थी भी तो भी उसका ये तरीका गलत है।

Ghanshyam S Baghi Yashwant Singh आपको संबंधित आरोपी लोगों पर एफ़आईआर करानी चाहिए.. हम आपके साथ हैं। अगर किसी को शिकायत थी भी तो भी उसका ये तरीका गलत है। हम पत्रकार साथी इसे कतई बर्दाश्त नहीं करेंगे भाई | कुछ तो करना होगा |

Shri Krishna Prasad Sir, have no mercy on assailants whosoever be. If they are journalists, you must lodge an F I R against them.
Md Rahmatullah Very sad and unfortunate. I strongly condemn this cowardly act… Plz take care of yourself. Get well soon…
Shailesh Singh bhaiya bhut bura huaa hai lekin eska riply to karana pdega sale napunsko ko ye aap par hmla nhi hai pure bebak patrika ke lekhan par sawaliya nisan hai hum aapke sat hai

Arvind Kumar Singh पत्रकार जब आपराधिक कृत्य करे तो उसके उपर कानूनी प्रक्रिया के तहत ही कार्यवाही होनी चाहिए। इसके लिए आप को प्राथमिकी तो दर्ज करानी ही पडेगी। आगे भले ही बात समझौते पर आ जाएं। ख्याल रखिए यशवंत भाई। ऐसे कायर आगे और मिलेंगे। आगे की पत्रकारिता कई तरह की चुनौतियों से घिरी होगी।

Purushottam Asnora निरा गुण्डागर्दी, पुलिस कम्पलेंट कीजिये।निंदनीय कृत्य। पुलिस को शीघ्र गुण्डों को गिरफ्तार करना चाहिए।

Manish Thakur आप जीवट वाले आदमी हैं। पत्रकारों को पत्रकारिता के बदले कुछ और करते देख आपने उन्हें अक्सर आईना दिखाया है। खैर ये पेशा किसी पत्रकार के प्रति सम्मान रखे आपके प्रति तो रखेगा ही बेईमानो को बेईमान कहने की हिम्मत सब में नहीं देता विधाता। अब कानूनी करवाई कीजिये। तत्काल प्रभाव से

Tarun Kumar Tarun जसवंत एक चट्टानी हौसले का नाम है! बेखौफ अभिव्यक्ति का एक सफरनामा! भुप्पी जैसे चूतिये क्या रोक पाएंगे आपको! सेहत का खयाल रखिए दादा… हमारी संवेदना

Vinay G. David ऐसी घटना के विरोध में पत्रकारों को एकजुट होकर आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करवाना चाहिए । यशवंत भाई आप जल्दी ठीक हो जाए और उनके पूरे काले चिट्ठे का खुलासा करें

DrBipin Pandey आप पर हमला दुःखद है , ये भुप्पी कौन है जिसने ये दुस्साहस किया? हम् लोग संयुक्त रूप से उसको सबक सिखाएं

Sourabh Sachan बेहद निंदनीय और नपुंसकता से भरा कृत्य है। कानूनी कार्यवाही कीजिए। एक आर्टिकल लिखिए और हम सभी साथियों को दीजिए। एक साथ हज़ारों पोर्टल्स पर पब्लिश होगा। तब तो उसे जेल होगी

Dev Bisht जिस ब्यक्ति ने इस घटनाक्रम को अंजाम दिया है वो निन्दनीय है। ऐसे असामाजिक व्यक्ति को मीडिया में रहने का अधिकार नहीं है। और बडे भाई यशवंत जी आप इस विषय में कानूनी सहारा लेते हुए इस व्यक्ति को सबक सिखाओ हम तन मन और धन से आपके साथ है।

Vikram Singh Chauhan भूपेंद्र सिंह हो या कोई भी सिंह ,उनकी हिम्मत कैसे हुई आप पर हाथ उठाने की। ऐसे लोगों को माफ़ बिलकुल मत कीजिये। एफआईआर दर्ज कीजिये।

Shailesh Tiwari अविलंब एफआईआर कराए। समाज मे ऐसे अराजक तत्वों का छुट्टा घूमना उचित नही है। उसके किये की सजा कानूनन मिलनी ही चाहिए

Hariom Garg यशवंत जी..आप पर हमला करने वाले कमीने लोग पत्रकार नहीँ भड्वे हैं !आप नामजद FIR दर्ज करवाए और कानूनी कार्यवाही करने से पीछे ना हटें !आपके हजारों प्रशंशको के साथ ही हम आपके साथ हैं !आदेश तो करिये !

Bikash K Sharma पहले प्रेस क्लब को सूचना, कुछ न हो तो पुलिस में रिपोर्ट उसपर भी कुछ न तो अपना स्टाइल अपनाकर थूर देना। शर्मनाक। किन्तु बिरादिरी का ही व्यक्ति है यह ज्यादा आश्चर्यजनक है।

Avi Dandiya आपको किसी भी तरह क़ानूनी करवाहि के लिए मदद चाइए हो तो बता दीजिएगा भाई। अपना ख़याल रखे आपके जल्द ठीक होने की प्रार्थना करेंगे।

Kamal Sharma निदंनीय हरकत। यशवंत भाई आप हमेशा सही लिखते हैं इसलिए ऐसे दुशमन पैदा होते हैं। प्रेस क्‍लब क्‍या कार्रवाई करेगा, पता नहीं लेकिन पुलिस में रिपोर्ट दर्ज करानी थी। अपना ख्‍याल रखिए और आज जल्‍दी ठीक हो, यही कामना है।

Sanjay Shukla Towards Infinity Very sad, culprits must be punished. Plz file fir

मोहित कृष्ण शुक्ल बहुत दुःखद बात है , ये आप पर हमला नही समूचे लोक तंत्र के चौथे स्तंभ पर हमला हुवा है,बहुत ही निदनीय कृत्य है।

Hemant Jaiman Dabang  अत्यंत दुःखद और निंदनीय हरकत। अक्सर ऐसा ही होता है , जब सच आगे बढ़ता है तो झूठ और फरेब पंजे मारता है। हम आपके साथ है जब मन करे बुला लेना , 3 घंटे ज्यादा से ज्यादा दिल्ली के लिये। हर तरह से तैयार आपके लिये। लेकिन स्वाभिमान को कमजोर मत होने देना। आप ओर हम जैसे पत्रकार बस स्वाभिमान के चलते ही जिंदा है। वरना इन भ्रस्ट मीडिया कर्मियों ने कोई कसर नही छोड़ी है ये अपने काले धंधे में मिलाकर किस किस के चरण धुलाई करा देता पता नही लगता। 2 सूखी रोटी चटनी से लेकिन ईमानदारी की, स्वाभिमान की।

Rudra Mishra This is very disgusting…kya RAM RAHIM ka follower hai ye sardar…

अजित सिंह तोमर ये बेहद कायराना हरकत की है जिसने भी की है. दुःख हुआ सर यह जानकार. आप कानूनी कार्यवाही जरुर करें और अपना ख्याल रखें.

Pawan Upadhyay वैसे में हिंसक प्रवित्ति के विरुद्ध हूँ , लेकिन अगर किसी को लगता है कि यह भी एक विकल्प है तो जोर तो देखना ही पड़ेगा कि कितना है

A.k. Roy निन्दनीय और दुखःद घटना है,प्रेसक्लब कड़ी कार्यवाही करें।ऐसे लोगो कोआजीवन प्रतिबंधित करें।

Shiivaani Kulshresthhaa बहुत दुख हुआ जानकर। आप जल्दी से ठीक हो जाए और FIR करवाइए सर। यदि आप सुरक्षित नहीं है तो हम लोग कैसे सुरक्षित रहेंगे।

Mahendra K. Singh Sorry to know about this! Wish you speedy recovery!

Dushayant Shaarma बहुत दुःखद और निंदनीय घटना, रिपोर्ट लिखाई या नहीं. अब कैसे हैं आप और कहाँ हैं?

Akhilesh Dwivedi पत्रकार के नाक पे हमला है नाक में दम कर दीजियेगा। छोड़िएगा मत

Ramendra Tripathi बहुत दुःखद , आपराधिक कृत्य , Criminal assault , आई पी सी की धाराओं में मुक़दमा क़ायम करायें , यशवंत भाई !!!

Tarun Kumar Tarun अपनी बिरादरी के लोग ऐसे ही होते हैं? एक तरफ आप अन्याय खिलाफ आवाज उठाते हैं, दूसरी तरफ अन्याय सहते हैं!

Upendra Prasad Sharmnaak.Press Club to action lega hi, uspar FIR bhi hona chaahiye.

Atul Chaurasia ऐसे लोग पत्रकार हो ही नहीं सकते| अगर आप मेरी किसी बात या खबर से असहमत है तो और भी तरीके है| मारपीट करना कायरो का काम है|

Singhasan Chauhan शायद यही है न्यू इंडिया की तस्वीर….. मगर उन्होंने आपके हौसले को और बुलन्द किया है … बेहद शर्मनाक और घटिया हरकत

Anuj Awasthi इस घटना की जितनी निंदा की जाय उतनी कम है, वही दो चार को ठिकाने लगा देना चाहिए था ।तभी इनकी समझ मे आ जाता ।कि एक सच्चा पत्रकार क्या कर सकता है।

Kuldeep Singh Gyani बेहद अफसोस…बेहद घृणित कार्य…पुलिस कम्प्लेन करवा दीजिए लेकिन यथा को तथा ज्ञान दिलवाने के लिए स्वयं ही तत्पर रहिये…

Madhav Krishna Get well soon bhaiya. This is just unacceptable. Civil society does not have any pace for hooliganism

Avnish Jain Please take legal opinion and should register complaint against these Goons

Lakshmikant Sharma इमानदार पत्रकारों के साथ यही होना है. मेरे भतीजे के साथ भी तीन बार ऐसा हो चुका है. एक बार जबलपुर विश्वविद्यालय के भ्रष्ट इन्जीनियर द्वारा अखबार के दफ्तर में ही धमकी. दूसरी बार खंडवा के विधायक पति द्वारा मारपीट और हरिजन ऐक्ट का दुरूपयोग. तीसरी बार तो हद…See more

Akshat Krishna Saxena ये क्या तरीक़ा हैं, और कोई बचाने वाला नही था वहाँ पर आपको, निंदनीय हैं ये घटना, आप ऐसे लोगों के ख़िलाफ़ क़ानूनी कार्यवाही कीजिए, प्रेस क्लब कार्यवाही करता रहेगा, लेकिन अगर अभी आपने कोई ऐक्शन नही लिया तो ऐसे लोगों की हिम्मत को बल मिल जाएगा। और अगर उनकी कुटाई अभियान की आप भी तैयारी कर चुके हैं तो उसके लिए आपको अग्रिम शुभकामनायें।

Yusuf Ansari Its really shameful….i condemn…Police must take against culprit. I am with you Yashwant.

Naveen Sinha इतने गुंडे भरे पड़े हैं प्रेस में। शर्मनाक। आप जल्दी ठीक हो यसवंत भाई।कोई नही हाँथी जब चलता है तो कुत्ते तो भौंकते ही हैं

Care Naman It’s disgusting they should be punished

Vipin Singh अत्यंत दुःखद और निंदनीय हरकत। प्रेस क्लब, पुलिस और मीडिया के मित्रों को कुछ करना चाहिए।

Shwetank Ratnamber Bhai Thanks God. Aap safe ho. Jab Kahoge Jaisa chahoge vaise badla liya jayega

Ved Prakash Singh पत्रकारिता पर हमला है। शुभचिंतकों की फौज आपके पीछे है। आप जितना समझते हैं उससे कई गुना अधिक शुभचिंतक आपके हैं। कुछ आपके साथ खड़ा नजर आयेंगे, कुछ पर्दे के पीछे से मदद करेंगे।

Amit Kumar Bajpai कमजोर लोग हाथ उठाते हैं… फिलहाल सेहत पर ध्यान दें और जल्द चंगे हों… भूप्पी का भोंपू बाद में बजाएंगे..

Umesh Srivastava Socialist इस समय तबीयत कैसी है जीवन दर्द का नाम है इस दर्द से भी आप ऊपर जाएंगे अब आगे के दर्द के बारे में सोचना है कि आगे किस तरह का दर्द होने वाला है भगवान आपको शक्ति दे हर दर्द को सहने का आप जो भी करेंगे अच्छा ही करेंगे

चैतन्य घनश्याम चन्दन बेहद निंदनीय कृत्य। जिसने भी यह किया है या करवाया है वह बख्शा नहीं जाना चाहिए। आपकी बहादुरी को सलाम।

Satyanarayan Verma Sameer निंदनीय, क्या एक्शन ले रहे हैं आप? मेरी कोई हेल्प लगे तो ज़रूर बताना।

Ritesh Raj Sir aap thik hai sir f. I. R. Jarur hona chahiye sir vo log ko saja milni chahiye sir

Ajai Kumar अत्यंत दुःखद, निन्दनीय कृत्य, कौन है ये लोग? दिल्ली पुलिस में रिपोर्ट करें। हम सब आपके साथ है। इन गुंडों से पूरी ताकत के साथ निपटना है।

Rajesh Agrawal घोर निंदनीय जिनके पास जवाब देने के लिए तर्क नहीं होते हैं वह ऐसा ही दुष्कृत्य करते हैं. हमला करने वालों को कानून के हवाले करें और आप अपने अभियान को ज्यादा मजबूती से उठाएं साहस आपके खून में है डरपोक से तो आप कभी नहीं डरने वाले.

Rajeev Gupta शर्मनाक और निंदनीय है। अगर किसी से किसी को शिकायत है भी तो कानून हाथ में लेना अपने आप में अपराध है। मुक़दमे की कार्र्वाई होनी चाहिए।

Chaturved Arvind बहुत बुरा लग रहा है, यह गुंडई करने वाला कोई भी हो- है असामाजिक तत्व। इसके खिलाफ तुरंत कानूनी कार्रवाई कीजिए। आपके साथ हूं।

Mohd Haroon Siddiqui शायद यही है न्यू इंडिया की तस्वीर …………….. मगर उन्होंने आपके हौसले को और बुलन्द किया है … बेहद शर्मनाक और घटिया हरकत
ऋतुपर्ण दवे दुःखद, निन्दनीय,…सभ्य समाज के लिए पीड़ादायक असभ्यता….आपके साथ थे, हैं और रहेंगे…..सच्चाई ज़िन्दाबाद थी, है और रहेगी………अपना ध्यान रखें और मिशन मोड को कामियाब करें…..जल्द स्वस्थ हों यही प्रभु से कामना है….

Rahul Amrit Raj जिन लोगों की पत्रकारिता की दुकान चलती है उन्हें तो bhadas से तकलीफ होती है……घटना की घोर निंदा होनी चाहिए

Sunit Nigam यशवंत जी, पहले आपके लिए स्वास्थ्य लाभ जरूरी है, वो लें। आप जल्द स्वस्थ हों, यह ईश्वर से दुआ है। फिट होते ही पहले जैसी बहादुरों वाली ही बात करोगे, ऐसा हम सभी आपके चहेतों को विश्वास है.. .. टेक केयर

Prem Singh भाई बताओ कहाँ मिलेगा यह भूपेन्द्र सिंह भूप्पी, अभी साले के दिमाग सही किये देते है।

Mahesh Chandra अत्यंत दुःखद और निंदनीय हरकत। प्रेस क्लब, पुलिस और मीडिया के मित्रों को कुछ करना चाहिए।

Sushil Khare दुःखद एवं घोर निंदनीय… पुलिस मे रपट जरूर लिखवाए, अन्यथा ऐसे में तो ये लोग निरंकुश हो जाएंगे…..

Sheshmani Shukla खबर पर नाराज तो लोग होते रहते हैं बाबा, इस तरह इजहार कोई करे यह तो ठीक नहीं….

Sanjay Rathee This is very unfortunate and condemable.

Atul Porwal कलम के लोग जब जवाब देने के लिए कुछ और रास्ता अख्तियार करते हैं तो वह नितांत निंदनीय है. ऐसे कुकृत्य पर कार्रवाई अपेक्षित है

Vipin Dhuliya Behad sharmnak. Jald se Jald police action hona chahie.

Abhinandan Mishra Do register a police complaint Yashwant Singh this cannot be ignored.

Parvez Ahmed भुप्पी को छोड़िएगा नहीं।यह कोई ग़ुंडा है या पत्रकार….वैसे दोनों ही हो सकता है।अपना ख़्याल रखें।

Amitabh Agnihotri Police must take immediate action.

Samar Anarya कौन है ये भुप्पी? कहाँ मिलेगा? बाकी एफआईआर तो करवाइये ही यशवंत भाई!

Vikas Mishra स्वामी कब और कैसे हो गया..? केस दर्ज करवाए कि नहीं।

Amitabh Gunjan अत्यंत दुःखद और निंदनीय हरकत। उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।

Arun Khare दुखद और निंदनीय । एफआईआर दर्ज जरूर करायें । लोगों को इस व्यक्ति का पूरा परिचय भी दें ।

Kamal Kumar Singh दुबारा चलिए,अबकी कूट के आएंगे साले को

Aditya Singh Bhardwaj  अरे। कुशल मंगल रहिये।। कौन है ये भुप्पी, कानूनन कार्यवाही कीजिए भइया

DrRakesh Pathak ओह कौन है ये भुप्पी…आपसे किस बात पर विवाद है..? अपना ध्यान रखें।

Arvind Mohan Kaun hai Bhippi. Kaise theek hoga. Tum hausala rakho.

K Vikram Rao Bahut hi nindanerya hai. Police action quick hona chahiye

Sarvesh Yadav FIR जरूर करवाइए। भले पुलिस पर कोई एक्शन लेने का दबाव न बनाइये पर FIR जरूरी है।

रवि कुमार राठौर दुखद घटना FIR कराये अपने साथी है तो क्या हुआ जो अपने होते है वह वार नही करते।

Haresh Kumar अत्यंत दुखद और निंदनीय घटना।अपराधी को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए।

Manvinder Bhimber अरे यशवंत… पूरी बात तो कहो हुआ क्या… किसने किया

Santosh Singh FIR जरूर करवाएं

मंगरूआ उवाच dhone ki taiyari karen biradar—batayen kab ana hai

Rai Sanjay दुःखद आप हैं कहाँ ? और कौन है ये बन्दा

Rj Shalini Singh बड़ी चोट लग गई भइया।इस तरह मारा है आपको ससुरा मरेगा

Dayanand Pandey ओह ! यह तो हद्द हो गई !

Rupesh Kumar Singh ईट का जवाब पत्थर से देना होगा

Anoop Hemkar अत्यंत दुःखद । बेहद शर्मनाक

Jaleshwar Upadhyay FIR तो जरूर कराइए। यह सरासर गुंडई है।

Himmat Singh भुप्पी का बायोडाटा निकालिये.

Krishna Kalpit निंदनीय और कायराना ।

Virendra Rai निहायत घटिया काम हुआ है। डरपोक कहीं के

Manoj Upadhyay अत्यंत शर्मनाक और निंदनीय

Harsh Vardhan Tripathi FIR कराइए

Payal Chakravarty Sir FIR toh kara hi do

पीयूष ब्रह्माधार मिश्र हद हो गयी। छोड़िएगा नहीं।

Shweta R Rashmi यसवंत भाई fir करवाये या नहीं ,मैं आपके साथ हु इस लड़ाई में आगे बढ़िये।

Ajay Mishra कभी कभी हमला करने वाले झूठ भी बोलते हैं ताकि शक दूसरे पर जाए ! ये भी जांच का बिंदु है

Ravi Batra Arrey very sad … take care and …. ???

Rajeev Mishra बहुत ही निंदनीय कार्य किया जिसने भी किया है

Sanjay Sharma हम आपके साथ है .. अपना ध्यान रखिये और क़ानूनी कार्यवाही कीजिये .

Rahul Singh यह दुखथ और शर्मनाक है। आप खयाल रखिये अपना और आगे की लडझाई में हम क्या कर सकते हैं बतायें।

Nadim S. Akhter बेहद दुखद। आप अपना ख्याल रखिए। बाकी कानूनी कार्रवाई ज़रूर कीजिएगा।

Vinod Bhardwaj नहीं यशवन्त भाई , इन कायर हमलावरों को ऐसे मत छोड़ना । इसका सन्देश अच्छा नहीं जाएगा !

Vinay Maurya Sinner अत्यंत दुखद और नींदनीय हमलवारों पर सख्त कार्यवाही होनी चाहिए भइया आपने रिपोर्ट दर्ज कराया कि नही

Rajesh Vajpayee कौन है मादर जात यह!उतार देते पीतल सालो के जितनी भी माउजर में होती तब भले ही उसके बाद यह दशा होती।

Abhishek Sharma उन सालों को करारा जवाब मिलेगा दादा

Jha Nisha Sir ap security guard rakhiye ab

DrMandhata Singh एफ आई आर कराइए और उसकी गिरफ्तारी के लिए प्रेस क्लब पर ही धरना अनशन किया जाना चाहिए।

Satbir Saini आज जिन्होंने सारा मीडिया ख़रीद लिया, कल वो कहा करते थे कि मीडिया बिकाऊ है..

Yogendra Singh Chhonkar बहुत कायरतापूर्ण हरकत। है कौन ये भुप्पी… आपने क्यों नहीं दिया ससुरे के एक कनटोप धर के

Sanjaya Kumar Singh शर्मनाक। निन्दनीय। पत्रकार भी गुंडों की तरह व्यवहार करने लगे तो काहे के पत्रकार?

Swapnil Kumar Pandey कौन है भैया ये भूप्पी ???? बहुत ही दुख़द घटना है ,कानूनी कार्यवाही होनी चाहिए ।

Ashutosh Misra एक ऐसा संगठन हो जो पत्रकारों की समस्या हल करे मानसिक और भौतिक समस्याओं को हल करे न कि दुकान चलाये।

Jagannath Sharma अत्यंत दुखद और निंदनीय कृत्य है ये… कामना करता हूं कि आप जल्द स्वस्थ हो जाए

Hareprakash Upadhyay हर जोर जुल्म के टक्कर में संघर्ष हमारा नारा है। यशवंत भाई, साथ समझें।

Mahendra Mishra ये तो बहुत निन्दनीय घटना है। कौन है ये भुप्पी? एफआईआर हुआ? दिन में बात करता हूं.

Abhinav Shankar अरे ये क्या हुआ !! मुझे नही पता कि ये गुप्पी कौन है पर जो भी है उसे अंजाम भुगतना चाहिए इसका!

Manish Srivastava अरे। यशवंत भाई। वाकई शर्मनाक। आपको साईं बाबा जल्द स्वास्थ्य लाभ दे

Shri Krishna ये तो बहुत ही निर्लज्ज और गिरे हुए पत्रकार दिख रहे हैं .FIR कार्वाइये

आशीष सागर कौन थे बड़े भाई जी ? नितांत दुखद घटना सभी को एकजुट होना आवश्यक है

Sheebu Nigam अत्यंत दुःखद आपको तुंरत कार्यवाही करनी चहिये हम सब आपके साथ है ।

Abdul Noor Shibli Bhai yah kon hai. qanooni action bhi lijiye. afsosnak

Shambhunath Shukla ये है कौन? आप जल्द स्वस्थ हो जाएँ।

दिनेशराय द्विवेदी एफआईआर कराइए, जरूरत हो तो न्यायालय में परिवाद भी करिए।

Amit Mishra कायराना, इंसाफ करो,याचना नहीं अब रण होगा युद्ध महा भीषण होगा

Satyendra PS ये क्या है? कार्रवाई करें आगे क़ी

Prateek Chaudhary report darz krwayen bhaiya . chorna mat main aapke sath hun

Ziaur Rahman भूपेंद्र सिंह भुप्पी का नंबर दीजिये । इसका कुत्ता बनाया जाएगा

Manoj Rai Dhoopchandi दुःखद एवं निंदनीय घटना

Kamal Kumar Singh ये कब हुआ ? अकेले थे क्या ? साथ कोई नही था ?

Shrinarayan Tiwari कायर होगा वो जो कलम के सिपाही पर हमला किया

Vaidika Gupta अत्यंत दुखद और नींदनीय! दोषियों पर सख्त कार्यवाही की जानी चाहिए

Ghanshyam Dubey कमजोर ही हमला करते हैं, क्योंकि वे कायर- जाहिल और घटिया होते हैं !!

Rider Rakesh अत्यंत दुखद और निंदनीय! दोषियों पर मुकम्मल कार्रवाई हो।

Golesh Swami कायराना कृत्य। दोषियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।

Dinesh Sharma अत्यंत दुखद और निंदनीय घटना।अपराधी को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए।

Sidhant Suchit नाक पे हमला एटेम्पट टू मर्डर में आता है

अजित वडनेरकर बेहद दुखद। सबसे पहले स्वस्थ हों।

Ashok Wankhade Yashvant Bhai. Take care. Take legal action

Anehas Shashwat Logon ne sahi kaha hai pahle maaro usko

Vishnu Rajgadia भोगेगा, जो भी होगा

Sanjay Kumar Agarwal aap k jaldi swasthy hone ki ishwar se prarthna karta hu

देवेन्द्र नाथ तिवारी कौन रहल हऽ भाई जी, आपन ख्याल राखीं। एफआईआर होखे।

Nitin Gupta बेहद निंदनीय कृत्य । आप कार्यवाही कीजिये । हम सब आपके साथ हैं ।

Vijay Yadav जब व्यक्ति के विचार खत्म हो जाते हैं तब वह हथियारों से लड़ता है.

Kumar Shashank अत्यंत दुखद और निंदनीय घटना।अपराधी को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए।

Praveen Kumar Khariwal भौपू बज जाएगा अब उसका

Atulya Astavakra बहुत ही दुखद, शर्मनाक घटना।

Syed Shahroz Quamar दलाल होगा मारने वाला

Jitendra K Choubey अपन भी पीटेंगे बताओ कब का प्लान बनायें ?

Ramesh Kumar Singh अत्यंत दुखद भईया ,पुलिसिया कार्यवाही तो तुरन्त कीजिये औऱ बाकि भी

Sadique Zaman दुखद। कौन है ये भुप्पी, इसको कुप्पी लगाना जरूर भाई।

Padampati Sharma ये कमीना है क्या चीज

Ram Gayas ओह्ह । आप कारवाई अवश्य कीजियेगा उसके ऊपर

Abhishek Tiwari Cartoonist यशवंत भाई , कानून का सहारा लें। हम सब आपके साथ हैं

Sanjeev Parihar करबो लडबो मरबो …..डटे रहो वीर

Santosh Agarwal ये तो बहुत गलत है भैया उनपर क्या कार्रवाई हो रही है प्रशाशन क्या कर रहा है ।

Avanindr Singh Aman खिसियानी बिलईया खंबा नोचे…

शुक्ल प्रशांत खाल खिंचवा दीजिए…हरामखोरों की…!!

संजीव सिन्हा भुप्पी की शर्मनाक हरकत! उसे कड़ी सजा मिले।

Manoj Bhawuk अविलंब कानूनी कार्रवाई शुरू करीं। फेर दोसर उपाय होई।

Mahesh Singh FIR turant hona chahie baki chije hoti rahegi

Lal Singh पिटना तो पत्रकारों की छठी मे रखा है बाकी मौका मिले तो छोडिएगा नही

Pankaj Sharma Police must take immediate action.

Sachin Jha Shekhar दुःखद, निंदनीय,असहनीय घटना

एस.पी. सिंह कमज़ोर ओर चोर ही ऐसी घटिया नर्मदगी घटना को अंजाम दे सकते हसीन।

Vivek Dutt Mathuria बहुत गलत हुआ है ! दुखद

Pradeep Phathak बहुत शर्मनाक दर्दनाक। कड़ी निदा है इस पैशाचिक आचरण की।।

Dilip Clerk क्या हुआ बड़े भाई हम सब आपके साथ है

Vinay Pandey बहुत बुरा हुआ सर हम आपके साथ हैं

Raj Mishra बेवकूफ है जो सोचते है कि इससे हिम्मत टूट जाएगी

Sumit Kumar Singh भुप्पी की कुप्पी भर दो भैया

Manoj Kumar अत्यंत निंदनीय। पुलिस क्या कर रही है।

Deepak Singh fir कराये हरामखोर पर, या ठीक होने पर उस की भी ठुकाई ।

वेद प्रकाश पाठक गोरखपुर शर्मनाक और निंदनीय। आपको एक्शन लेना चाहिये सर।

Deshpal Singh Panwar निंदनीय,अपने स्वास्थय का ध्यान रखिए…

Tr Pawan Dubey शर्मनाक, क्या अराजकता है?

Shailendra Kumar Nimbalkar Bilkul Fir ho mlc bhi karwa le

Prashant M Kumar कायरों का काम है ये

Imran Khan भैया fir कराओ, और ये कौन है

Ismail Lahari hamari aavaz yashvant ke sath he.

Aman Singh Chauhan सब आपकी कलम की ताक़त है सर्… Get well soon

Girijesh Kumar छोड़ना तो नहीं चाहिए उसको यशवंत भाई

Rajendra K. Gautam बहुत शर्मनाक घटना, दोषियों के खिलाफ सख्त करवाई हो।

Deepak Parashar ऐसे लोगों के खिलाफ कार्यवाही होनी जरूरी है

Dilip Motwani इस पोस्ट को शेयर कर वायरल कर दो, जरूर कार्रवाई होगी।

Gaurav Kumar kya ho gya sirji bhut bura ho gya h kya kr diya

Vivek Singh लिखने से ही उसकी जली है… तो और लिखिए… लिख लिख के मारिये…

Ashok Anurag शर्मनाक और दुःखद, FIR तो करवा ही देते

Anup Kr Awasthi पता करके मारो साले को

Ashutosh Dwivedi शर्मनाक, बेहद दुःखद। कायर लोग हैं।

Sachin Kumar Jain ओह। यह तो गलत और आपराधिक है।

Aryan Kothiyal कलम की ताकत से घबरा गया लगता है कोई ।

Tariq Anwar Siddiqui सर अकेले मत रहा करो

Irshadul Haque एफआईआर कीजिए और कलम की धार को कुंद ना होने दीजिए

Rahul Chouksey सबक से नज़ीर कायम कीजियेगा। हम साथ हैं।

Narendra M Chaturvedi अत्यंत दुख़द आप हो कहा यसवंत भाई

Ajay Singh मार का बदला मार बस

Hemant Shukla प्रियवर, मजबूती से रहिए ।

Gyanvardhan Mishra बहुत ही दुखद और निंदनीय।

Ravindra Tripathy दुखद। पुलिस में रिपोर्ट की?

Subhash Gupta बहुत दुखद और शर्मनाक हमला .

Hitesh Tiwari उसके गुर्दे में क्या तकलीफ हो गयी जो ये काम कर दिया

Manish Kumar Soni Are , khairiyat to hai

Pankaj Mishra बहुत ही गंदा काम किया

Golu Maddheshiya सर हमला एक पत्रकार करे या गुंडा अपराधी ही माना जायेगा एफ आई आर करे

Suresh Mahraj निंदनीय है, हम आपके साथ है, पुलिस कार्रवाई पर जोर दीजिए

Farhan Quraishi FIR जरूर करवाइए

Ramendra Kumar Sinha निंदनीय। कार्रवाई होनी चाहिए हमलावरों के खिलाफ

Chandan Mishra दुखद है। जाने क्या होगा इस समाज का।

Deepak Kr Chauhan बहुत निंदनीय है ये आप कानून का सहारा लो

Sarvesh Kumar Singh निंदनीय घटना, हमलावर के खिलाफ कार्रवाई हो

Anand Prakash पुलिस रिपोर्ट तो कीजिए पहले

Rajaram Tripathi क्या करना है बोलिए,, मैं आ रहा हूं,,,, भाई Yashwant Singh ji

Varun Singh एक बार इस भुप्पी को छत्तीसगढ़ भेज दो भैया इससे भी बड़ा जवाब मिलेगा

चन्द्रहाश कुमार शर्मा पहले भूपेंद्र सिंह की आप भी जमकर धुलाई कीजिये, फिर देखा जाएगा

संतोष उपाध्याय मज़बूती मिली भाई । मिलता हूँ जल्दी ही Vikas भईया के साथ । भईया मिलवाइये । कुछ ज़रूरी चीज़ें बताना है यशवंत भाई साहब को।

Furqan Ghazi बहुत गलत हुआ .दोस्त फेसबूक पे सब हमदर्दी दिखायेंगे .कांधे से कांधा मिलाकर कोई साथ नही देगा .अपनी लडाई खुद लडनी होगी .

Syed Quasim बिरादरी के नंगे गंदे लोगो को पर भड़ास आप कलाम से निकलते है मगर कलम का खुद को कहने वाले कांड कर दें तो कार्यवाही बनती है

Markandey Pandey एफआईआर कराइये नामजद। धरना प्रदर्शन अथवा उसको पकड़ कर कूटना हो तो बताइए मैं सहयोग करूँगा।

Mitrapal Singh Yadav पत्रकार को पीटना या पिट जाना कोई बड़ी बात नहीं है। जोखिम भरे सच्चाई के सफर कोई दोस्त नहीं सब दुश्मन की निगाह से देखते हैं। चाहे पुलिस हो प्रशासन ।नेता या व्यापारी। पत्रकार गुंडा नहीं होता इसलिए वह अपनी सुरक्षा की कभी चिंता नहीं करता। ऐसे अगर कोई अचानक हमला कर दे तो संभलना मुश्किल ही होगा

Harish Siyol Choudhary शर्मनाक हरकत. शायद आपकी द्वारा बताई जा रही सच्चाई उन चप्पल चाट लोगों को बर्दाश्त नहीं रही हैं.

Om Prakash Pathak ओह। दुखद और निंदनीय। वो क्या सोचता है फिर भी रूकेंगे। ऐसी घटनाओं से और मजबूत होंगे। आप जल्द स्वस्थ्य हों।

Insaf Qureshi बड़े शर्म की बात है कि एक प्रकार को प्रेसक्लब के गेट पर पीट दिया जहां पे हमे सुरक्षा मिलने का भरोसा मिलता है वो ही जगह पत्रकारों के लिये असुरक्षित हो गई खेर घबराने की बात नही पूरे देश के पत्रकार आपके साथ है। ये बात तो तय है की आपकी खबरों मे दम रहती होगी तभी तो ये बुज़दिल आप पर हमले जैसा कायराना काम कर गए

Shivam Soni महोदय जिसने भी किस कृत्य को किया है सीधे सीधे लोकतंत्र के चतुर्थ स्तम्भ की गरिमा को ठेस पहुँचाही है। उसे दंड अवश्य मिलना चाहिए है।

Yugal Sharma जरा सा विरोध क्या किया, सच सच क्या कह दिया, तमाम गुंडे मेरी गली के एक हो गए?

पटेल अभिषेक चौधरी ऐसी घटना के विरोध में भांड मीडिया से अलग सोच वाले पत्रकारों को एकजुट होकर आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करवाना चाहिए । यशवंत भाई आप जल्दी ठीक हो जाए और उनके पूरे काले चिट्ठे का खुलासा करें,सच परेशान हो सकता है किंतु दबेगा नहि

Murari Lal Sharma Deeply Condem the act. Law will take care of the culprit. God bless you

Rajesh K Singh बहुत दुखद! पत्रकारिता पे हमला प्रजातंत्र पे हमला है। अति निंदनीय। Get well soon.

Vitthal Garg FIR जरूर करवाइए। भले पुलिस पर कोई एक्शन लेने का दबाव न बनाइये पर FIR जरूरी है।

Amitabh Bhushan क्या ये पहले आजतक फिर महुआ में रहा, चंडीगढ़ से दिल्ली वाला कमीना है क्या

Saquib Ahmad बिरादरी के चक्कर में समाज ने बड़े लुच्चो को पैदा किया है यशवंत भाई।

Ajai Kumar अरे यशवंत भाई, -“मर नही सकता है दुश्मन तीर और तलवार से, गर चाहते हो मारना उसको, मार दो एहसान से।” आपने तो उन्हें मार कर दफना भी दिया। आपकी दरियादिली को सलाम।

Mafatlal Agrawal : क्या बात… मजबूत लोगों की दमदार बातें… मैंने भी आपकी तरह अनेक बार गुंडों के हमलों का सामना कर उन्हें माफ़ किया है। उनका बुरी तरह अंत हुआ है।

Dev Bisht भ्राता श्री आप महान विचार धारा वाले ब्यक्ति है इसलिए आप उनको माफ भी कर देंगे। परन्तु एक बार भुप्पी से हमारी मुलाकात करवा देंगे तो कुक्का लात का मजा ही कुछ और रहेगा।

Anil Jain यार यशवंत तुम किस मिट्टी के बने हो! Love

Vivek Dutt Mathuria वाह! बहुत सही कहा आपने ….यही हिन्दुस्तानियत है! सारे जहां से अच्छा भडासी बाबा हमारा ..हमारा

Aditya Singh Bhardwaj ज़िन्दगी का ये भी दिन ज़िंदाबाद। ज़िन्दगी का वो भी दिन मार्च ऑन।

Atulya Astavakra आप महान हो, ठाकुर साहब ।।।

Manvinder Bhimber यशवंत, ईशवर आपके साथ हैं।

Umesh Srivastava Socialist आप आंतरिक रुप से काफी मजबूत हो चुके हैं। भगवान आपको और शक्ति दे।

Aditya Singh Bhardwaj वाह। प्रकृति न्याय करेगी।  ज़िंदाबाद

शुभम त्रिपाठी सनकी हैं भड़ास बाबा

Anehas Shashwat Bada dil dikhaya tumne,sukhi raho

Ziaur Rahman यशवंत भैया जिंदाबाद

Dev Nath माफी के काबिल नहीं हैं वे

Rajesh Somani Big heart

Harshit Harsh Shukla भाई जवाब काफ़ी बेहतर है. बहुत कुछ सिखा दिया आपने

Dheeraj Tagra साथ हैं सर

Kamal Sharma जिंदा आदमी आप ही है।

Ram Kinkar Singh इसी जज्बे के कारण तो आप हम सबके अजीज हैं

Pratah Sandesh Best of Luck ! God bless you

Sampurnanand Dubey prakriti ke nyay par bharosa rakhen nyay hoga

Ram Dayal Rajpurohit Waah sab dil ho to aap jaisa

उपरोक्त सारे कमेंट्स यशवंत द्वारा खुद के उपर किए गए हमले को लेकर एफबी वॉल पर लिखी गई दो पोस्ट्स पर आए हैं.

मूल खबर….

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भड़ास4मीडिया के संपादक यशवंत सिंह पर प्रेस क्लब गेट पर भुप्पी और अनुराग त्रिपाठी ने किया हमला

(कोबरा पोस्ट में प्रकाशित यशवंत पर हमले की खबर का स्क्रीनशाट)

भड़ास4मीडिया के संस्थापक और संपादक यशवंत सिंह पर चार सितंबर की रात करीब साढ़े दस बजे प्रेस क्लब ऑफ इंडिया के गेट पर जानलेवा हमला हो गया. यशवंत को बुरी तरह से मारा-पीटा गया और गालियां दी गई. भड़ास4मीडिया के संपादक यशवंत सिंह ने अपनी फेसबुक वाल पर घटना की जानकारी देते हुए लिखा, ”अटैक हो गया गुरु। प्रेस क्लब ऑफ इंडिया के गेट पर। बहुत मारा पीटा मुझे। पार्ट ऑफ जॉब ही है। भूपेंद्र सिंह भुप्पी और अनुराग त्रिपाठी की कारस्तानी है। जाने किस खबर की बात करके पीटा उसने।” इस हमले में यशवंत का चश्मा टूट गया और नाक, कान, गर्दन, होंठ पर चोट आई है.

यशवंत ने बताया कि भूपेंद्र सिंह भुप्पी और अनुराग त्रिपाठी प्रेस क्लब के अंदर तो काफी अच्छे मिले. तारीफ की. लेकिन वे पूरी योजना से थे. बाहर गेट पर इंतजार कर रहे थे. जब यशवंत बाहर निकले तो भूपेंद्र सिंह भुप्पी ने हाथ मिलाने के बहाने पास बुलाया और हमला कर दिया. इस दौरान अनुराग त्रिपाठी मोबाइल से वीडियो बनाने लगा. वहां मौके पर वरिष्ठ पत्रकार रुबी अरुण भी मौजूद थीं जो हमलावर को बार बार रोक रही थीं लेकिन भुप्पी और अनुराग दोनों लगातार कह रहे थे कि ‘इसे मार खाने दो, बहुत खबरें छापता है’. इस अप्रत्याशित घटनाक्रम से यशवंत हक्के बक्के थे और लगातार भुप्पी से कह रहे थे कि आखिर गुस्सा किस बात पर है, प्रेस क्लब के अंदर तो तुम ठीक थे, बाहर अचानक क्या हो गया?

भुप्पी हमले के दौरान कुछ बरस पुरानी छपी भड़ास की खबरों का जिक्र कर रहा था. ज्ञात हो कि भूपेंद्र सिंह भुप्पी रहने वाला गाजीपुर का है लेकिन चंडीगढ़ में केपीएस गिल की खानदान की एक लड़की से शादी करने के बाद अब नोएडा और चंडीगढ़ सेटल हो गया है. आजतक के लिए पंजाब, हरियाणा और हिमाचल के ब्यूरो चीफ के बतौर एक जमाने में काम करता था पर किन्हीं कारस्तानियों के कारण उसे निकाल दिया गया. फिर उसने महुआ न्यूज चैनल ज्वाइन किया जहां वह फिर अपनी कारस्तानियों के कारण असफल साबित हुआ और अब मीडिया से ही बाहर हो चुका है. उन दिनों इसी से संबंधित खबरें भड़ास पर छपा करती थीं.

अनुराग त्रिपाठी भी महुआ में भुप्पी के साथ था और आजकल खुद को तहलका / न्यूज लांड्री के साथ कार्यरत बताता है. यशवंत ने प्रेस क्लब आफ इंडिया के प्रबंधन को हमले के बाबत लिखित शिकायत दे दी है. साथ ही एक लिखित कंप्लेन पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन में दी है. यशवंत ने पहले एफआईआर न करने का निर्णय लिया था लेकिन अपने देश भर के हजारों साथियों समर्थकों के अनुरोध पर थाने में लिखित कंप्लेन देने का फैसला कर लिया.

यशवंत का कहना है कि दो पत्रकारों का किसी खबर को लेकर एक पत्रकार पर हमला करना पत्रकारिता के आजकल के निम्नतम स्तर को दर्शाता है. जब हम पत्रकार खुद ही मानसिक लेवल पर सामंती / आपराधिक सोच रखते हैं तो कैसे इस लोकतांत्रिक देश में मीडिया की निष्पक्षता की बात सोच सकते हैं. कलम का जवाब कलम ही हो सकता है, हथियार या हमला नहीं. यशवंत ने भुप्पी और अनुराग त्रिपाठी को बेहद कमजोर आदमी करार देते हुए कहा कि ये माफी के योग्य हैं, इन्हें खुद नहीं पता कि ये क्या कर बैठे हैं. ये लोग सामने कुछ कहते-बोलते हैं और पीठ पीछे छुरा घोंपने को तैयार रहते हैं. ऐसे दोहरे व्यक्तित्व और आपराधिक मानसिकता के लोग अगर मीडिया में हैं तो यह मीडिया की दयनीयता / दरिद्रता को ही दिखाता है. एक आदमी जो अकेले और निहत्था है, उस पर अचानक से घेर कर हमला कर देना कहां की बहादुरी है. उम्मीद करते हैं कि भुप्पी और अनुराग में अगर थोड़ी भी पत्रकारीय सोच-समझ होगी अकल आएगी और अपने किए पर पश्चाताप करेंगे. 

यशवंत ने अपने पर हमले को लेकर फेसबुक पर दो पोस्ट्स डाली हैं, जो इस प्रकार हैं-

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