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सुख-दुख

भड़ास के लेखक और शुभचिंतक पत्रकार थे डाक्टर मेहरुद्दीन खान!

Yashwant Singh : मेहरुद्दीन उर्फ महरुद्दीन खान Maheruddin Khan साहब नहीं रहे. जितना जिये जमकर जिये. नवभारत टाइम्स के वरिष्ठतम पत्रकारों में से थे. भड़ास के संचालन के कारण मेरा संपर्क बहुत से अच्छे-बुरे लोगों से होता रहा है. महरुद्दीन साहब भले लोगों में से थे. 24 कैरट के पत्रकार. साहसी. बेबाक. उनसे कभी मिल न पाया, पर लगा नहीं कि उनसे मिला न हूं. फोन पर, मेल पर, चैट में, एफबी पर… हर जगह उनसे संपर्क-बातचीत का सिलसिला चलता रहता था.

एक दफे वो मुश्किल में थे. हम लोग काफी सक्रिय हुए थे. आपात स्थिति की हालत आने पर उनके घर पहुंचने के लिए तत्पर था. पर सब दुरुस्त हो गया. उस प्रकरण में तब Shambhunath सर ने लखनऊ के अफसरों से संपर्क साधकर उन्हें मदद दिलाई थी. उस प्रकरण से संबंधित कुछ लिंक दे रहा हूं.

महरुद्दीन सर के दर्जनों आर्टकिल भड़ास पर छपे हैं. खोजता हूं. जो मिल जाएगा उसे इसी पोस्ट के नीचे डालता हूं.

सच कहूं तो मेहरुद्दीन सर से मैंने खुद बहुत कुछ सीखा. वे विशुद्ध पत्रकार थे. अगर कोई खांटी पत्रकार मुझे मिलता है तो खुशी होती है. खान साहब को श्रद्धांजलि. उनके परिजनों को दुख की इस घड़ी में संबल मिले. खान साहब की अब तक लिखे पढ़े को अगर एक संग्रह के तौर पर लाया जाए तो हम जैसे बहुत से पत्रकारों को बहुत कुछ जानने समझने को मिलेगा.

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भड़ास एडिटर यशवंत सिंह के एफबी वॉल से.

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