आज तक की वेब टीम ने क्रिकेटर मोहम्मद शमी को करा दिया गिरफ्तार, विरोध में सोशल मीडिया पर चला अभियान

Mohammad Anas : ये देखिए आज तक की वेब टीम का कमाल। आज तक की वेब टीम में काम कर रही मोनिका शर्मा, ने अमरोहा की एक ख़बर लगाई है जिसमें उसने मोहम्मद शमी की फ़ोटो लगाते हुए लिखा है कि पशु तस्करी में भारतीय क्रिकेटर शमी पकड़े गए। लेकिन जब आप लिंक पर चटका लगा कर ख़बर पढ़ेंगे तो पता चलेगा कि शमी नहीं बल्कि उनका भाई पकड़ा गया है। वैसे भी वेब वाले हिट्स पाने के लिए साथ काम कर रही महिलाओं का ही फ़ोटो और वीडियो डालते रहे हैं लेकिन यह पहली बार हुआ है कि मोनिका शर्मा ख़ुद ही इस नीच हरकत में कूद पड़ीं। मोनिका शर्मा कौन है यह मुझे नहीं पता। आज तक की वेब टीम की नीचता को मुँह तोड़ जवाब देने के लिए ज़्यादा से ज़्यादा संख्या में इसे शेयर करें।

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थोड़ी देर पहले मेरी मोहम्मद शमी के घरवालों से बात हुई। उनका कहना है कि गोकशी के एक साल पुराने मामले में गाँव के एक व्यक्ति को पुलिस ले जा रही थी। कुछ मिसअंडर्सटैंडिग की वजह से शमी के भाई और पुलिस से तकरार हो गई इस वजह से उनको थाने पर बैठा लिया गया। मैंने उन्हें आजतक वेब पोर्टल पर आई मोहम्मद शमी से जुड़ी ख़बर के बारे में बताया तो उन्होंने कहा हम आजतक के वेब हेड कमलेश सिंह, मोनिका शर्मा आदि के नाम मानहानि के तहत मामला दर्ज करवाएँगे। मीडिया का एक वर्ग ख़ासकर वेब माध्यम जिस तरह से ख़बर लिखता और उसे प्रचारित करता है वह निंदनीय है। ग़ैरज़िम्मेदारी और जानबूझकर भारतीय क्रिकेटर मोहम्मद शमी को लेकर आजतक वेब डेस्क ने जो ख़बर लगाई वह घोर आपत्तिजनक है।

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आजतक की वेब डेस्क टीम ने भारतीय क्रिकेटर मोहम्मद शमी को लेकर अफ़वाह उड़ाई की उनको पुलिस ने पशु तस्कर की मदद के आरोप में गिरफ़्तार कर लिया है। मुझे एक साथी ने ख़बर की लिंक भेजी तो देखा उस ख़बर पर सैकड़ों की तादाद में आम जनता ने विरोध दर्ज कराते हुए ख़बर हटाने का आवेदन कर रखा था। लेकिन दो घंटे से वेब टीम हिट्स के चक्कर में भारतीय टीम के शानदार गेंदबाज़ के चरित्र और कैरियर से खेल रही थी। मुद्दा मेरा नहीं था। आम लोगों का था। पत्रकारिता के नाम पर गुंडई और फूहड़ता, दंगाई भाषा और झूठी रिपोर्टिंग का था। मैंने अफ़वाह फैलाने वालों को छिछोरा कहा और ये भी लिखा की किसी दिन हिट्स के लालच में कहीं ख़ुद की न्यूड तस्वीर न वॉयरल कर दें। और ऐसा हुआ भी है। पंजाब केसरी ने तहलका की मशहूर पत्रकार और माखनलाल में मेरी सीनियर रही प्रियंका दुबे की फ़ोटो उनके वॉल से उठाकर लिखा था, पत्नी पीट रही पति को, आगे देखिए।’ मेरा पोस्ट लिखना भर था कि वेब डेस्क तुरंत हरकत में आया और ख़बर को हटा कर फिर से लगाया। ऐसे गंदी हरकत करने वाले लोगों के साथ कुछ लोग खड़े हैं। वे इसलिए खड़े हैं क्योंकि उन्हें मुझसे व्यक्तिगत खुन्नस है। वे नहीं चाहते की मैं या कोई और उन्हें सही रास्ता दिखाए। बहुत से लोगों का ईगो हर्ट हुआ है। बहुतों को लगता है मैंने उन पर हमला कर दिया है। जबकि यह साफ़ और सीधा टीआरपी और कॉरपोरेट गुंडों के बीच फँस चुकी मीडिया को बचाने का मुद्दा है। जनपक्षधरिता रहित पत्रकारिता किसे कहते हैं। महिला विरोधी, महिलाओं को सेक्स ऑब्जेक्ट कैसे बनाया जाता है वह सब देखना हो तो आज तक की वेब टीम से संपर्क साधा जा सकता है। मेरे लिए आज तक वाले हैशटैग चला रहे हैं ‘मुँह में ले लो।’ जी सर, दे दीजिए। जो दे रहे हैं।

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कुछ साथी मोहम्मद शमी की फ़र्ज़ी गिरफ़्तारी वाली अफ़वाह आजतक वेबसाइट के माध्यम से उड़ाने वाली वेब टीम के साथ खड़े हैं। उनका कहना है कि मैंने अफ़वाह उड़ाने वाली मोनिका शर्मा को ‘छिछोरी’ कहा। यदि इस भाषा से किसी को आपत्ति है तो होती रहे। दूसरी, कुछ लोग आरोप लगा रहे हैं कि मैंने मोनिका शर्मा की न्यूड फ़ोटो वॉयरल करने की धमकी दी। जबकि मैंने लिखा था जिस तरह से मोनिका शर्मा और वेब के ग़ैर ज़िम्मेदार पत्रकार ख़बर लिख कर हिट्स की लालच करते हैं वैसे में किसी रोज़ ख़ुद की न्यूड फ़ोटो लगा कर कहीं कोई ख़बर न वॉयरल कर दें ख़ुद से। शमी को लेकर लिखी गई अफ़वाह यदि ग़लती होती तो तुरंत हटा दी जाती लेकिन ऐसा नहीं हुआ। मैंने पोस्ट लिखी उसके दस मिनट बाद ख़बर बदली गई। जबकि आजतक के फ़ेसबुक पेज पर लोग फ़र्ज़ी ख़बर को लेकर विरोध जता रहे थे पर उनका लोड नहीं लिया गया। जो लोग मेरी भाषा को लेकर पोस्ट से नाइत्तेफाकी ज़ाहिर कर रहे हैं वे इस बात का ख़्याल रखे की ऐसा करने से वे वेब के ग़ैरज़िम्मेदार और मीडिया के कारपोरेट गुंडों को शह दे रहे हैं। मुझे बेहद अफ़सोस है कि कुछ बेहद प्रिय साथी आजतक की ग़लती पर माफ़ीनामा लेने के बजाए मेरी भाषा की कथित ग़लती पर पूरे मुद्दे को दबा देना चाहते हैं। लेकिन ऐसा होगा नहीं क्योंकि भाषा का स्तर यदि मेरा गिरा हुआ था तो मुझे लेकर लिखी जा रही हर किसी की पोस्ट में भाषागत गुंडई और हरामीपना दिख रहा है। चूँकि यह लड़ाई मेरी अकेली की नहीं है। न तो मैं इसे अपनी व्यक्तिगत लड़ाई बनने दूँगा इसलिए जिन दोस्तों में मुझे लेकर पोस्ट लिखा है या लिखेंगे उन्हें जवाब भर नहीं दूँगा। मैं चाहता हूँ की आपमें से कोई भी मुझे लेकर कहीं गाली गलौज करे तो मेरे पक्ष में कुछ न लिखें क्योंकि मैं लोड नहीं लेता। बाकि तो लड़ाई जारी रहेगी। उन दोस्तों से भी जो आजतक के वेब डेस्क को बचा रहे हैं। क्योंकि मैं अकेला बहुत हूँ सैकड़ों के लिए।

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आजतक वेब डेस्क द्वारा मोहम्मद शमी को लेकर फैलाई गई अफ़वाह पर मेरे द्वारा लिखीं गई अधिकतर पोस्ट को हमारे समय के सबसे बड़े मीडिया आलोचक, चिंतक, इंडिया टुडे मैगज़ीन के पूर्व संपादक, दिलीप मंडल ने लाइक किया है। इस मुद्दे पर उनकी सहमति है मेरे साथ तो आजतक वेब टीम वालों और उनके समर्थकों से बस इतना कहना है कि आप लोग रांग साइड ड्राइविंग कर रहे हैं। एक बैलेंसवादी ब्राह्मण ने लिखा है कि वो लड़की बेचारी जूनियर है। ग़रीब है। शिफ़्ट के घंटों से परेशान थी। मतलब आप मीडिया के एक बड़े प्लेटफ़ॉर्म पर हैं या फिर घर के किचेन में। जहाँ दाल में नमक ही तो ज़्यादा हुई है टाइप के कुतर्क रख रहे हैं। दिलीप मंडल की मेरी इस पोस्ट पर उपस्थिति यह बताती है कि मीडिया में बैठे ब्राह्मणवादी और बाहर से उनको सपोर्ट कर रहे घोर जातिवादी ब्राह्मणों ने किस क़दर उत्पात मचा रखा है। आजतक वेब टीम में अस्सी फ़ीसदी ब्राह्मण कार्यरत हैं। मज़े की बात ये कि मुझे लेकर लिखे गए पाँच छह पोस्ट भी ब्राह्मणों ने लिखे। कुछ भोले और मासूम लोग फ़ोन करके कह रहे हैं कि वे लोग बच्चे हैं, उनकी कोई पॉलिटिक्ल ऑइडियोलॉजी नहीं है। मुझे ऐसा बिल्कुल नहीं लगता। मेरे ख़िलाफ़ जिस बेहुदगी से कुछ बैलेंसवादी ब्राह्मणों ने स्टैंड लिया वह बहुत कुछ साफ़ कर देता है। इस मामले में कुछ ब्राह्मण दोस्तों ने साथ भी दिया। उनका शुक्रगुज़ार हूँ कि उन्होंने शोषित, पीड़ित और दमित का पक्ष समझा और साथ खड़े हुए। गंभीर सवाल यहाँ उभरता है कि मीडिया हमेशा अल्पसंख्यक,दलित और स्त्रियों को लेकर ही ग़लती क्यों करता है किसी ब्राह्मण को लेकर उससे हेडिंग में भूलचूक क्यों नहीं होती? मोहम्मद शमी की गिरफ़्तारी की फ़र्ज़ी अफ़वाह फ़ेसबुक ने वॉयरल करने के लिए अपने फ़ेसबुक पेज पर पोस्ट किया था। जो कि पूरे दो घंटे तक वहाँ रही। सैकड़ों लोगों ने हटाने को निवेदन किया लेकिन नहीं हटाया गया। यह सब जानबूझ कर किया जा रहा था और डेस्क को इसकी पूरी जानकारी थी। ग़लती होती तो एक बार पीछे हट भी जाता मैं लेकिन जानबूझ कर बदनाम करने वालों को कैसी छूट?

सोशल और मीडिया एक्टिविस्ट मोहम्मद अनस के फेसबुक वॉल से.

Ankur Tiwary : आजतक की एक गलत स्टोरी पर Mohammad Anas जी ने एक पोस्ट लिखकर माफ़ी नामा छापने की बात कही। पोस्ट में चूंकि यह हैडलाइन दी गयी थी कि क्रिकेटर मोहम्मद शमी गिरफ्तार लेकिन वास्तविकता यह है कि मोहम्मद शमी नहीं उसका भाई गिरफ्तार हुआ है। आज तक के इस पोस्ट का स्क्रीन शॉट अनस जी ने फेसबुक पर अपलोड किया तो तमाम आज तक के कर्मचारी शिफ्ट, ज्यादा घंटे केकाम की वजह से होने वाली गलती को कारण बता उल्टा मोहम्मद अनस जी पर ही निशाना साधने लगे हैं। वो भी इतनी खूबसूरत भाषा शैली के साथ कि उसे पढ़ा नहीं जा सकता है। आजतक के तमाम कर्मचारियों को समझना चाहिए कि गलती किससे नहीं होती है। सभी से होती है लेकिन उसपर माफ़ी मांग लेनी चाहिए, एक माफ़ी मांगने से आपकी क्रेडिबिल्टी पूरी तरह से समाप्त तो होगी नहीं जनाब। चलिए मान लिया कि मोनिका जूनियर साथी होगी या काम के ज्यादा दबाव के चलते गलती हो गयी होगी। लेकिन आप दूसरा पक्ष भी तो सोचिये आज तक के साथियों।

यह सोचिए कि आपके फेसबुक पर एक करोड़ से ज्यादा लाइक्स हैं, ट्विटर पर भी लाखों हैं। टीआरपी में नम्बर एक पायदान पर हैं ही और दर्शक भी दस करोड़ हैं। इतनी बड़ी संख्या में आपकी पोस्ट पहुँचती है तो हो सकता है कि मोहम्मद शमी के घरवालों तक या उनके चाहने वालों तक भी पहुंची ही होगी। क्या कभी सोचा है कि एक दम से यह पोस्ट देखकर क्या बीती होगी उनपर? आपने तो एक गलती कर दी लेकिन उसकी वजह से दूसरे को दिक्कत हुई उसका क्या? उसकी भरपाई कौन करेगा साहेब? इसलिए कह रहा हूँ फेसबुक पर मोहम्मद अनस जी के खिलाफ पोस्ट लिखने में समय न खर्च कीजिये, सभी जानते हैं कि गलती होती है ठीक है लेकिन माफ़ी भी तो मांगिये न। मैंने तो आपके कई कार्यक्रमों में यह उपदेश देते हुए सुना है कि माफ़ी मांगने में कोई दिक्कत और देरी नहीं की जानी चाहिए। किसी एक व्यक्ति से लड़ाई करने के बजाये खुद सोचिये कि मोहम्मद शमी के बजाये आपके बड़े भाई, पिता, बहन आदि में किसी का नाम होता तो क्या करते? आपका लाख विरोध अनस जी के साथ हो सकता है लेकिन सवाल तो जायज है न? उम्मीद है कि जिम्मेदार चैनल होने के नाते माफ़ी मानेंगे।

युवा पत्रकार अंकुर तिवारी के फेसबुक वॉल से

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