मोदी सरकार अब ऑनलाइन मीडिया पर लगाम लगाएगी, कमेटी गठित

फेक न्यूज पर पत्रकारों की मान्यता रद्द करने संबंधी नियम बनाने के ऐलान के बाद मचे हो हंगामे से बैकफुट पर आई मोदी सरकार ने अब आनलाइन मीडिया को नियंत्रित करने के लिए नियम बनाने की घोषणा कर दी है. इसके लिए बाकायदे कमेटी तक गठित कर दी गई है. इस कमेटी में टीवी, प्रिंट, प्रेस काउंसिल के प्रतिनिधियों के अलावा बाकी सब केंद्र सरकार के मंत्रालयों के सचिव हैं. Continue reading

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क्या ‘न्यूज़ वेब पोर्टल’ विश्वसनीयता हासिल नहीं कर पा रहे हैं?

Abhishek Ranjan Singh :  न्यूज़ चैनल ‘लाइव प्रसारण’ की क्षमता से ज़िंदा हैं। बाकी मौजूदा ‘न्यूज़ वेब पोर्टल’ भ्रामक, अधूरी और एकपक्षीय ख़बरों की वजह से देश की जनता के बीच अपनी पकड़ नहीं बना पा रहे हैं। इसकी वजह विश्वसनीयता हासिल न कर पाना है। न्यूज़ चैनलों और डिजीटल मीडिया की मेहरबानी से भारत में अख़बारों और पत्रिकाओं का भविष्य पहले अधिक उज्जवल हो गया है।

एक महत्वपूर्ण बात और.. बड़े-बड़े अख़बारों के वेबसाइट्स हिट्स बढ़ाने के लिए अनाप-शनाप ख़बरें लगाते हैं। यहां अख़बारों की तरह स्वतंत्र लेखन का कोई अवसर नहीं है। वैसे अख़बारों में भी हालत कौन सी अच्छी है? हिंदी में एक आलेख का भाव आज भी 1000-1500 से अधिक नहीं है। वह भी दो-तीन महीने या उससे भी अधिक समय बाद मिलते हैं। जब ज़्यादा अख़बार, न्यूज़ चैनल और ‘मोथा घास’ की तरह उग आए ‘डिजीटल मीडिया’ नहीं था. उस वक़्त कई लेखक-पत्रकार स्वतंत्र लेखन कर अपनी जीविका चला लेते थे। मौजूदा समय में ऐसा करना संभव नहीं रह गया है।

आईआईएमसी के छात्र रहे युवा पत्रकार अभिषेक रंजन सिंह की एफबी वॉल से.

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अनुभव मित्तल की ‘आनलाइन कंपनी’ से सुधीर चौधरी भी हो गए परेशान!

Sudhir Chaudhary : My personal phone suddenly started ringing non stop last night and since then it has not stopped even for a second. I am getting nonstop calls from hired online goons using prepaid shady numbers, all of them similar in nature.

All messages and callers are pressurising to show news in Ablaze Online Scam’s main accused Anubhav Mittal’s favour. It’s a new age online intimidation executed by paid trolls.

Even if I switch off my phone for some time, the bombardment of text messages and continuous calls start as soon as I start the phone again. I have been receiving intimating calls and messages earlier also in my career while different stories against high and powerful but have never ever faced such consistent nonstop trolling on phone in such a high volume.

Anubhav Mittal masterminded a big online scam and now I know he is actually a mastermind in online terrorism. It’s a new phenomenon for media and also for police and investigating agencies to be prepared for in future.

जी न्यूज के संपादक सुधीर चौधरी की एफबी वॉल से.

इस मामले में सुधीर चौधरी ने यूपी पुलिस से मदद मांगी और यूपी पुलिस ने उन्हें तुरंत वो सारे नंबर देने को कहा है जिससे उन्हें कॉल, मैसेज और ह्वाट्सएप आदि आ रहे हैं… देखिए ट्वीट…

Sudhir Chaudhary ‏@sudhirchaudhary 

Spoke to @Uppolice Giving them all the numbers of online goons propagating for Anubhav Mittal of Ablaze Scam. 1680 Whatsapp, 321SMS, 132 Calls


UP POLICE @Uppolice 

@sudhirchaudhary @sardanarohit Matter taken up with @uppstf. Pls report it at reportfraud@upstf.com Action will b taken against intimidators


Sudhir Chaudhary ‏@sudhirchaudhary 

Thanks @Uppolice for this quick response.

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First Online Singing Competition in the History of India

New Delhi : The First Free Online Singing Competition in the history of India has  been launched recently by Sakha Cultural Society. Singers from any city of the world and of any age group (from 3 years to 100 years) can participate in this totally free competition sitting at home by just uploading their voices on Sakha’s website www.sakha.co.in

Speaking on the occasion Mr Amarjit Singh Kohli, founder Chairman of Sakha Cultural Society, said that top singers will get chance to sing in TV Serial “Geet Jo Ban Gaye Meet” which is expected to begin on Sony TV in early 2017. He explained that he himself is the Chief Adviser of RK Telefilms who are producing this TV Serial for Sony TV, and has been asked by RK Telefilms to select singers on their behalf. Also many singers will get chance to sing in TV Serial “The Live Studio” beginning in February 2017 which is being produced by Yesudas BC, Managing Partner of Spectral Media and producer-director of forthcoming Hindi feature film “30 Minutes”.

Explaining the idea behind the launching of Online Singing Competition, Mr Amarjit Singh Kohli said “ I had seen that in the preliminary auditions held by various TV Channels like Sony, Zee in various towns for selecting singers, the singers have to stand in long queues waiting for their turn for as much as 6-8 hours”. Therefore, the idea struck me to start an online competition through which singers can record their voices sitting at home and upload without any hassels. Singers voices will be evaluated by top music personalities of India as judges and singers shortlisted for participating in  Musical Shows on TV Channels. He said that he was the first person in India to start the tradition of organizing All India Stage Singing Competitions in memories of great singers like Rafi, Mukesh and later Kishore about 35 years ago, which led to the discovery of many great singers including Sonu Nigam. “My idea is now to have a tie-up with various producers of Musical TV Shows, Telefilms etc wherein Sakha Cultural Society selects the singers through online competitions for their TV Shows.

The Singing Competition has already started and the last date for participating is Friday, the 16th December, 2016. Those desirous of participating may visit www.sakha.co.in. The final results of competition will be announced on 12th Feb 2017.

भड़ास तक सूचनाएं bhadas4media@gmail.com के जरिए शेयर कर सकते हैं. आप चाहें तो 9999330099 पर ह्वाट्सएप भी कर सकते हैं.

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ओला, ब्ला ब्ला के बाद अब ओयो : नाश्ता और वाई-फाई समेत एसी कमरा सिर्फ 750 रुपये में!

Yashwant Singh : OYO ने सचमुच क्रांति कर दी है. होटल का शानदार एसी कमरा मात्र 750 रुपये में. हाल के दिनों में टेक्नालजी ने गजब की सुविधाएं मुहैया कराई है जिससे हम जैसे घुमंतूओं का जीवन बहुत स्मूथ हो गया है. ब्ला ब्ला, ओला से लेकर ओयो तक. गाड़ी, होटल सब कुछ बेहद सस्ते दरों पर और आपके एक क्लिक पर उपलब्ध. आज पहली बार ओयो की सुविधा यूज कर रहा हूं.

यकीन से कह रहा हूं कि ओयो के जिस कमरे को 750 रुपये में बुक किया (आफर और ओयो कैश का यूज करके), वह कमरा मैं 3000 रुपये देकर भी पाता तो लगता कि सस्ता ही रहा सौदा. ओयो वाले पच्चीस प्रतिशत आफ और पच्चीस प्रतिशत कैश बैक दे रहे हैं. इससे कमरा बेहद सस्ता पड़ रहा है.

ओयो की एक बड़ी खासियत ये है कि बजाए ये होटलों और कस्टमरों के बीच ब्रोकर बनने के, खुद के निजी होटल भारी मात्रा में खोल रहे हैं. इनके कमरे, टायलेट बेहद साफ-सुथरे, माडर्न लुक-फील वाले हैं. फ्री वाई फाई है. डीटीएच कनेक्शन युक्त फ्लैट स्क्रीन टीवी है. कुर्सी मेज ठीकठाक हैं. लॉबी है. दो आलमारियां. नाश्ता फ्री है. मतलब कि 750 रुपये में आपको क्या क्या चाहिए!

आप एप्प के जरिए अपने मोबाइल से ही रूम में बैठे बैठे खाने, नाश्ते, चाय, क्लीनिंग आदि के आर्डर दे सकते हैं, कोई फोन करने या घंटी बजाने का झंझट नहीं. सब कुछ आपके एप्प पर अपडेट होता रहेगा.

आपने OYO के एप्प न डाउनलोड किए हों तो जरूर करें और इसके जरिए जरूरत पड़ने पर किसी शहर में रूम बुक कर एक बार स्टे करें. डाउनलोड लिंक नीचे दे रहा हूं. इस लिंक पर क्लिक करके ओयो एप्प अपने मोबाइल में इंस्टाल करेंगे तो हजार रुपये का ओयो मनी भी आपको मिलेगा जिसे आप कमरा बुक करने के दौरान यूज कर सकते हैं, यानि एक दिन का स्टे लगभग मुफ्त. Try out the OYO Rooms App and get ₹1000 worth OYO Money. Download link: OyoRooms.com/YASHTNY8F 

भड़ास के एडिटर यशवंत सिंह की एफबी वॉल से. उपरोक्त स्टेटस पर आए कुछ प्रमुख कमेंट्स इस प्रकार हैं…

Km Madhavi Badiya jaankari…..waise, aapne hotel kahan ki book ki hai?….all India level me kahi par v ye suvidha available hogi Na….

Yashwant Singh नोएडा गोल्फ कोर्स. नोएडा में ही इनके ढेरों होटल हैं.

Km Madhavi Aapne Bahut badiya jaankari Di ….OYO app installed karti Hun…. Shukriya

Kish Sharma वैसे ओयो व्यापार के तौर पर अभी सैकड़ों करोड़ के घाटे में चल रहा है।

Yashwant Singh लेकिन हम जैसे लोग इनके पक्के ग्राहक बन गए तो इनके लाभ में आते देर न लगेगी. ओला का सीन भी कुछ ऐसा ही था. अब तो ओला जबरदस्त फायदे में है.

Aryan Kothiyal OYO का ब्रांड एम्बेसडर हमारे यशवन्त भईया को ही होना चाहिये।

Yashwant Singh अच्छी चीजों का प्रचार करना चाहिए. ज्ञान बांटने से बढ़ता है. हम लोग बुरी बात हो या अच्छी बात, उसका ढिंढोरा पीटने से नहीं चूकते 🙂

Mukund Hari अपनी हाल की 6000 किमी लंबी सड़क यात्रा में ओयो का जमकर इस्तेमाल किया। हर जगह वैल्यू फ़ॉर मनी की तरह लगा। साथ में हर होटल में सुबह का नाश्ता भी किराये के साथ ही मिला यानि नो एक्स्ट्रा भुगतान।

Ravi Kumar Singh Oyo से बेहतर MMT को युज करें सर, उससे बेहतर प्रोपर्टी है उसको पास सारी, रेट में भी लास्ट टाइम बुकिंग पर बेहतर मिलेगा, कैश बैक में पूरे पोंइट युज कर सकते हैं.

Yashwant Singh ओके. जरूर ट्राई करूंगा.

Ravi Kumar Singh जी बेहतर है सर, कैश बैक सबसे बेहतर यही दे रहा है, एक बार यूज करके देखियेगा सर.

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भारतीय मोहतरमा को एक पाकिस्तानी के प्यार में पड़ने की ये सजा मिली, न्यूड तस्वीरें आनलाइन हो गईं

Yashwant Singh : एक भारतीय मोहतरमा ने एक पाकिस्तानी से चैट किया और प्यार में पड़कर अपनी कई न्यूड तस्वीरें भेज डालीं. उन परदेसी भाई साहब ने एक रोज सब कुछ आनलाइन कर दिया. साथ ही मोहतरमा के सारे एफबी मित्रों के पास उस आनलाइन फोटोज के लिंक भेज दिए. मेरे पास भी आई हैं कुछ नंगी तस्वीरें लेकिन मैंने एक आंख से देखा और दूसरी आंख से डिलीट का बटन दबा दिया. सुना है वस्त्र विहीन तस्वीरें देख कुछ करीबियों की जुगलबंदियां टूट गईं और दिल इधर उधर छटपटाते बिखरे पाए गए.

पर सवाल वही है कि अगर मर्द की न्यूड फोटो लीक हो तो मर्दों वाली बात, लेकिन औरत की हो तो वो क्यों हो गई बेसवा? प्यार में सारा खेल शरीर का ही क्यों रखते हो, कुछ दिमाग का भी रखा करो. शरीर दागी हो गया (चलो मान लेते हैं) तो दिमाग तो क्रिएटिव है, सेंसेटिव है, कुछ नया रचेगा, फिर से वो छपेगा और फिर चल निकल सकती हैं जुगलबंदियां.

ये पूरा खारिज और पूरा कुबूल वाला खेल मुझे समझ नहीं आता. जितना अच्छा है, उसे प्यार करो. जो खराब लगे, उसे इगनोर करो. और वैसे भी, पत्थर वो मारे जिसने पाप न किया हो. देह के दायरे में उम्र के आखिरी पड़ाव तक डूबे रहना कहां की होशियारी है. पाप करिए, लेकिन उससे सबक लेकर आगे बढ़िए, रिपीट मत करिए, अटकिए मत.

का कहूं, कछु कहा नहीं जाए. बिन कहे भी रहा नहीं जाए.

भड़ास के एडिटर यशवंत सिंह के फेसबुक वॉल से.

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आज तक की वेब टीम ने क्रिकेटर मोहम्मद शमी को करा दिया गिरफ्तार, विरोध में सोशल मीडिया पर चला अभियान

Mohammad Anas : ये देखिए आज तक की वेब टीम का कमाल। आज तक की वेब टीम में काम कर रही मोनिका शर्मा, ने अमरोहा की एक ख़बर लगाई है जिसमें उसने मोहम्मद शमी की फ़ोटो लगाते हुए लिखा है कि पशु तस्करी में भारतीय क्रिकेटर शमी पकड़े गए। लेकिन जब आप लिंक पर चटका लगा कर ख़बर पढ़ेंगे तो पता चलेगा कि शमी नहीं बल्कि उनका भाई पकड़ा गया है। वैसे भी वेब वाले हिट्स पाने के लिए साथ काम कर रही महिलाओं का ही फ़ोटो और वीडियो डालते रहे हैं लेकिन यह पहली बार हुआ है कि मोनिका शर्मा ख़ुद ही इस नीच हरकत में कूद पड़ीं। मोनिका शर्मा कौन है यह मुझे नहीं पता। आज तक की वेब टीम की नीचता को मुँह तोड़ जवाब देने के लिए ज़्यादा से ज़्यादा संख्या में इसे शेयर करें।

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थोड़ी देर पहले मेरी मोहम्मद शमी के घरवालों से बात हुई। उनका कहना है कि गोकशी के एक साल पुराने मामले में गाँव के एक व्यक्ति को पुलिस ले जा रही थी। कुछ मिसअंडर्सटैंडिग की वजह से शमी के भाई और पुलिस से तकरार हो गई इस वजह से उनको थाने पर बैठा लिया गया। मैंने उन्हें आजतक वेब पोर्टल पर आई मोहम्मद शमी से जुड़ी ख़बर के बारे में बताया तो उन्होंने कहा हम आजतक के वेब हेड कमलेश सिंह, मोनिका शर्मा आदि के नाम मानहानि के तहत मामला दर्ज करवाएँगे। मीडिया का एक वर्ग ख़ासकर वेब माध्यम जिस तरह से ख़बर लिखता और उसे प्रचारित करता है वह निंदनीय है। ग़ैरज़िम्मेदारी और जानबूझकर भारतीय क्रिकेटर मोहम्मद शमी को लेकर आजतक वेब डेस्क ने जो ख़बर लगाई वह घोर आपत्तिजनक है।

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आजतक की वेब डेस्क टीम ने भारतीय क्रिकेटर मोहम्मद शमी को लेकर अफ़वाह उड़ाई की उनको पुलिस ने पशु तस्कर की मदद के आरोप में गिरफ़्तार कर लिया है। मुझे एक साथी ने ख़बर की लिंक भेजी तो देखा उस ख़बर पर सैकड़ों की तादाद में आम जनता ने विरोध दर्ज कराते हुए ख़बर हटाने का आवेदन कर रखा था। लेकिन दो घंटे से वेब टीम हिट्स के चक्कर में भारतीय टीम के शानदार गेंदबाज़ के चरित्र और कैरियर से खेल रही थी। मुद्दा मेरा नहीं था। आम लोगों का था। पत्रकारिता के नाम पर गुंडई और फूहड़ता, दंगाई भाषा और झूठी रिपोर्टिंग का था। मैंने अफ़वाह फैलाने वालों को छिछोरा कहा और ये भी लिखा की किसी दिन हिट्स के लालच में कहीं ख़ुद की न्यूड तस्वीर न वॉयरल कर दें। और ऐसा हुआ भी है। पंजाब केसरी ने तहलका की मशहूर पत्रकार और माखनलाल में मेरी सीनियर रही प्रियंका दुबे की फ़ोटो उनके वॉल से उठाकर लिखा था, पत्नी पीट रही पति को, आगे देखिए।’ मेरा पोस्ट लिखना भर था कि वेब डेस्क तुरंत हरकत में आया और ख़बर को हटा कर फिर से लगाया। ऐसे गंदी हरकत करने वाले लोगों के साथ कुछ लोग खड़े हैं। वे इसलिए खड़े हैं क्योंकि उन्हें मुझसे व्यक्तिगत खुन्नस है। वे नहीं चाहते की मैं या कोई और उन्हें सही रास्ता दिखाए। बहुत से लोगों का ईगो हर्ट हुआ है। बहुतों को लगता है मैंने उन पर हमला कर दिया है। जबकि यह साफ़ और सीधा टीआरपी और कॉरपोरेट गुंडों के बीच फँस चुकी मीडिया को बचाने का मुद्दा है। जनपक्षधरिता रहित पत्रकारिता किसे कहते हैं। महिला विरोधी, महिलाओं को सेक्स ऑब्जेक्ट कैसे बनाया जाता है वह सब देखना हो तो आज तक की वेब टीम से संपर्क साधा जा सकता है। मेरे लिए आज तक वाले हैशटैग चला रहे हैं ‘मुँह में ले लो।’ जी सर, दे दीजिए। जो दे रहे हैं।

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कुछ साथी मोहम्मद शमी की फ़र्ज़ी गिरफ़्तारी वाली अफ़वाह आजतक वेबसाइट के माध्यम से उड़ाने वाली वेब टीम के साथ खड़े हैं। उनका कहना है कि मैंने अफ़वाह उड़ाने वाली मोनिका शर्मा को ‘छिछोरी’ कहा। यदि इस भाषा से किसी को आपत्ति है तो होती रहे। दूसरी, कुछ लोग आरोप लगा रहे हैं कि मैंने मोनिका शर्मा की न्यूड फ़ोटो वॉयरल करने की धमकी दी। जबकि मैंने लिखा था जिस तरह से मोनिका शर्मा और वेब के ग़ैर ज़िम्मेदार पत्रकार ख़बर लिख कर हिट्स की लालच करते हैं वैसे में किसी रोज़ ख़ुद की न्यूड फ़ोटो लगा कर कहीं कोई ख़बर न वॉयरल कर दें ख़ुद से। शमी को लेकर लिखी गई अफ़वाह यदि ग़लती होती तो तुरंत हटा दी जाती लेकिन ऐसा नहीं हुआ। मैंने पोस्ट लिखी उसके दस मिनट बाद ख़बर बदली गई। जबकि आजतक के फ़ेसबुक पेज पर लोग फ़र्ज़ी ख़बर को लेकर विरोध जता रहे थे पर उनका लोड नहीं लिया गया। जो लोग मेरी भाषा को लेकर पोस्ट से नाइत्तेफाकी ज़ाहिर कर रहे हैं वे इस बात का ख़्याल रखे की ऐसा करने से वे वेब के ग़ैरज़िम्मेदार और मीडिया के कारपोरेट गुंडों को शह दे रहे हैं। मुझे बेहद अफ़सोस है कि कुछ बेहद प्रिय साथी आजतक की ग़लती पर माफ़ीनामा लेने के बजाए मेरी भाषा की कथित ग़लती पर पूरे मुद्दे को दबा देना चाहते हैं। लेकिन ऐसा होगा नहीं क्योंकि भाषा का स्तर यदि मेरा गिरा हुआ था तो मुझे लेकर लिखी जा रही हर किसी की पोस्ट में भाषागत गुंडई और हरामीपना दिख रहा है। चूँकि यह लड़ाई मेरी अकेली की नहीं है। न तो मैं इसे अपनी व्यक्तिगत लड़ाई बनने दूँगा इसलिए जिन दोस्तों में मुझे लेकर पोस्ट लिखा है या लिखेंगे उन्हें जवाब भर नहीं दूँगा। मैं चाहता हूँ की आपमें से कोई भी मुझे लेकर कहीं गाली गलौज करे तो मेरे पक्ष में कुछ न लिखें क्योंकि मैं लोड नहीं लेता। बाकि तो लड़ाई जारी रहेगी। उन दोस्तों से भी जो आजतक के वेब डेस्क को बचा रहे हैं। क्योंकि मैं अकेला बहुत हूँ सैकड़ों के लिए।

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आजतक वेब डेस्क द्वारा मोहम्मद शमी को लेकर फैलाई गई अफ़वाह पर मेरे द्वारा लिखीं गई अधिकतर पोस्ट को हमारे समय के सबसे बड़े मीडिया आलोचक, चिंतक, इंडिया टुडे मैगज़ीन के पूर्व संपादक, दिलीप मंडल ने लाइक किया है। इस मुद्दे पर उनकी सहमति है मेरे साथ तो आजतक वेब टीम वालों और उनके समर्थकों से बस इतना कहना है कि आप लोग रांग साइड ड्राइविंग कर रहे हैं। एक बैलेंसवादी ब्राह्मण ने लिखा है कि वो लड़की बेचारी जूनियर है। ग़रीब है। शिफ़्ट के घंटों से परेशान थी। मतलब आप मीडिया के एक बड़े प्लेटफ़ॉर्म पर हैं या फिर घर के किचेन में। जहाँ दाल में नमक ही तो ज़्यादा हुई है टाइप के कुतर्क रख रहे हैं। दिलीप मंडल की मेरी इस पोस्ट पर उपस्थिति यह बताती है कि मीडिया में बैठे ब्राह्मणवादी और बाहर से उनको सपोर्ट कर रहे घोर जातिवादी ब्राह्मणों ने किस क़दर उत्पात मचा रखा है। आजतक वेब टीम में अस्सी फ़ीसदी ब्राह्मण कार्यरत हैं। मज़े की बात ये कि मुझे लेकर लिखे गए पाँच छह पोस्ट भी ब्राह्मणों ने लिखे। कुछ भोले और मासूम लोग फ़ोन करके कह रहे हैं कि वे लोग बच्चे हैं, उनकी कोई पॉलिटिक्ल ऑइडियोलॉजी नहीं है। मुझे ऐसा बिल्कुल नहीं लगता। मेरे ख़िलाफ़ जिस बेहुदगी से कुछ बैलेंसवादी ब्राह्मणों ने स्टैंड लिया वह बहुत कुछ साफ़ कर देता है। इस मामले में कुछ ब्राह्मण दोस्तों ने साथ भी दिया। उनका शुक्रगुज़ार हूँ कि उन्होंने शोषित, पीड़ित और दमित का पक्ष समझा और साथ खड़े हुए। गंभीर सवाल यहाँ उभरता है कि मीडिया हमेशा अल्पसंख्यक,दलित और स्त्रियों को लेकर ही ग़लती क्यों करता है किसी ब्राह्मण को लेकर उससे हेडिंग में भूलचूक क्यों नहीं होती? मोहम्मद शमी की गिरफ़्तारी की फ़र्ज़ी अफ़वाह फ़ेसबुक ने वॉयरल करने के लिए अपने फ़ेसबुक पेज पर पोस्ट किया था। जो कि पूरे दो घंटे तक वहाँ रही। सैकड़ों लोगों ने हटाने को निवेदन किया लेकिन नहीं हटाया गया। यह सब जानबूझ कर किया जा रहा था और डेस्क को इसकी पूरी जानकारी थी। ग़लती होती तो एक बार पीछे हट भी जाता मैं लेकिन जानबूझ कर बदनाम करने वालों को कैसी छूट?

सोशल और मीडिया एक्टिविस्ट मोहम्मद अनस के फेसबुक वॉल से.

Ankur Tiwary : आजतक की एक गलत स्टोरी पर Mohammad Anas जी ने एक पोस्ट लिखकर माफ़ी नामा छापने की बात कही। पोस्ट में चूंकि यह हैडलाइन दी गयी थी कि क्रिकेटर मोहम्मद शमी गिरफ्तार लेकिन वास्तविकता यह है कि मोहम्मद शमी नहीं उसका भाई गिरफ्तार हुआ है। आज तक के इस पोस्ट का स्क्रीन शॉट अनस जी ने फेसबुक पर अपलोड किया तो तमाम आज तक के कर्मचारी शिफ्ट, ज्यादा घंटे केकाम की वजह से होने वाली गलती को कारण बता उल्टा मोहम्मद अनस जी पर ही निशाना साधने लगे हैं। वो भी इतनी खूबसूरत भाषा शैली के साथ कि उसे पढ़ा नहीं जा सकता है। आजतक के तमाम कर्मचारियों को समझना चाहिए कि गलती किससे नहीं होती है। सभी से होती है लेकिन उसपर माफ़ी मांग लेनी चाहिए, एक माफ़ी मांगने से आपकी क्रेडिबिल्टी पूरी तरह से समाप्त तो होगी नहीं जनाब। चलिए मान लिया कि मोनिका जूनियर साथी होगी या काम के ज्यादा दबाव के चलते गलती हो गयी होगी। लेकिन आप दूसरा पक्ष भी तो सोचिये आज तक के साथियों।

यह सोचिए कि आपके फेसबुक पर एक करोड़ से ज्यादा लाइक्स हैं, ट्विटर पर भी लाखों हैं। टीआरपी में नम्बर एक पायदान पर हैं ही और दर्शक भी दस करोड़ हैं। इतनी बड़ी संख्या में आपकी पोस्ट पहुँचती है तो हो सकता है कि मोहम्मद शमी के घरवालों तक या उनके चाहने वालों तक भी पहुंची ही होगी। क्या कभी सोचा है कि एक दम से यह पोस्ट देखकर क्या बीती होगी उनपर? आपने तो एक गलती कर दी लेकिन उसकी वजह से दूसरे को दिक्कत हुई उसका क्या? उसकी भरपाई कौन करेगा साहेब? इसलिए कह रहा हूँ फेसबुक पर मोहम्मद अनस जी के खिलाफ पोस्ट लिखने में समय न खर्च कीजिये, सभी जानते हैं कि गलती होती है ठीक है लेकिन माफ़ी भी तो मांगिये न। मैंने तो आपके कई कार्यक्रमों में यह उपदेश देते हुए सुना है कि माफ़ी मांगने में कोई दिक्कत और देरी नहीं की जानी चाहिए। किसी एक व्यक्ति से लड़ाई करने के बजाये खुद सोचिये कि मोहम्मद शमी के बजाये आपके बड़े भाई, पिता, बहन आदि में किसी का नाम होता तो क्या करते? आपका लाख विरोध अनस जी के साथ हो सकता है लेकिन सवाल तो जायज है न? उम्मीद है कि जिम्मेदार चैनल होने के नाते माफ़ी मानेंगे।

युवा पत्रकार अंकुर तिवारी के फेसबुक वॉल से

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‘समाचार फर्स्ट’ पोर्टल को जरूरत है 18 पत्रकारों की, करें आवेदन

हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा से ‘समाचार फर्स्ट’ नाम का यह पोर्टल शुरू होने जा रहा है। अभी यह निर्माणाधीन है। ऐंड्रॉयड और iOS ऐप के साथ लोगों तक पहुंच बनाने के इरादे से इसे फरवरी के पहले हफ्ते में विधिवत लॉन्च किया जाएगा। इस पोर्टल का इरादा हिमाचल प्रदेश पर केंद्रित रहते हुए भारत और दुनिया की सभी जरूरी खबरों को लोगों तक पहुंचाना है।

खबरों के अलावा करियर, शिक्षा, रोजगार, नारी सशक्तीकरण और विकास जैसे कई अहम मुद्दों को प्राथमिकता दी जाएगी। इसके लिए टेक्स्ट के अलावा विडियो कॉन्टेंट का भी सहारा लिया जाएगा। कई राष्ट्रीय अखबारों के ऑनलाइन पोर्टल में काम कर चुके वरिष्ठ वेब जर्नलिस्ट समाचार फर्स्ट के साथ जुड़े हैं। चूंकि यह पोर्टल हिमाचल प्रदेश से चलना है, इसलिए हिमाचल प्रदेश के युवा पत्रकारों को इसमें प्राथमिकता दी जाएगी। विभिन्न पदों के लिए आवेदन करने की विस्तृत जानकारी नीचे दी गई है:

पद.

1. कॉपी एडिटर- 8
2. सीनियर कॉपी एडिटर -4
3. चीफ कॉपी एडिटर- 2
4. न्यूज ऐंकर – 2
5. VT एडिटर -2

योग्यता:

1. मास कम्यूनिकेशन और जर्नलिजम की डिग्री/ डिप्लोमा धारकों के अलावा किसी भी विषय में ग्रैजुएट लोग भी आवेदन कर सकते हैं, बशर्ते उनकी हिंदी पर अच्छी पकड़ हो। इंग्लिश से हिंदी में अनुवाद करने की योग्यता भी होनी चाहिए।

2. फ्रेशर भी आवेदन कर सकते हैं। ऑनलाइन में काम कर चुके लोगों को प्राथमिकता दी जाएगी।

3. हिंदी में टाइपिंग (Inscript/ mangal) करनी आनी चाहिए।

कैसे करें आवेदन:

1. ईमेल की सब्जेक्ट लाइन में लिखें: Samachar First
2. अपना अपडेटेड रेज्युमे अटैच करें।
3. अपनी पसंद के किसी भी विषय पर 1000 शब्दों में कोई लेख लिखकर भेजें। यह लेख सिर्फ इसलिए मंगवाया जा रहा है, ताकि लेख की भाषा देखकर स्क्रीनिंग की जाए।
4. ये सब चीज़ें inewsfirst@gmail.com पर मेल कर दें।
5. 15 जनवरी, 2016 तक मिले आवेदन ही स्वीकार किए जाएंगे।
6. लेख की स्क्रीनिंग के बाद चुने गए पत्रकारों की लिखित परीक्षा और इंटरव्यू लिए जाएंगे।
7. चुने गए पत्रकारों को ऑफर लेटर देकर नियुक्त किया जाएगा।
8. प्रोबेशन पीरियर 6 महीने का होगा, जिसे परफॉर्मेंस के बाद रिव्यू किया जाएगा।

ध्यान दें:

– पद और वेतन क्षमता और अनुभव के आधार पर ऑफर किए जाएंगे।
– पोर्टल का ऑफिस कांगड़ा, हिमाचल प्रदेश में होगा।
– सिर्फ डेस्क के लिए हायरिंग की जा रही है, रिपोर्टिंग के लिए बाद में आवेदन मंगवाए जाएंगे।

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नेट न्यूट्रलिटी जरूरी… ताकि इंटरनेट का विस्तार न बाधित हो और इस पर बड़ी कंपनियों का एकाधिकार न स्थापित हो

नेट न्यूट्रलिटी यानी बिना किसी अवरोध के अपनी इच्छा से इंटरनेट का उपभोग करने की स्वतंत्रता का मुद्दा एक बार फिर बहस में है. भारतीय टेलीकॉम नियामक प्राधिकरण (ट्राइ) ने इस साल दूसरी दफे लोगों से इस मसले पर राय मांगी है. नेट न्यूट्रलिटी के विवाद के एक सिरे पर सोशल मीडिया कंपनी फेसबुक और कुछ इंटरनेट सेवा प्रदाता हैं तथा दूसरे सिरे पर इंटरनेट के इस्तेमाल की मौजूदा स्थिति को बरकरार रखने की मांग करते उपभोक्ता और कार्यकर्ता. फेसबुक और उसके साथ खड़े सेवा प्रदाताओं का कहना है कि वे बेसिक इंटरनेट सेवा के माध्यम से जरूरी साइटें और सेवाएं उन लोगों तक मुफ्त या कम शुल्क में पहुंचाना चाहते हैं, जो अभी तक इसका उपभोग नहीं कर पा रहे हैं या फिर सीमित रूप में करते हैं.

लेकिन नेट न्यूट्रलिटी के पक्षधर इन दावों को खारिज करते हुए कहते हैं कि इससे एक तो नेट महंगा हो जायेगा और इससे जुड़ी सेवाओं पर कुछ कंपनियों और साइटों का वर्चस्व स्थापित हो जायेगा. मौजूदा स्थिति में उपभोक्ता को सेवा प्रदाता को एक निर्धारित शुल्क देने के बाद किसी भी उपलब्ध साइट पर जाने का विकल्प होता है. लेकिन फेसबुक और सेवा प्रदाताओं की बात मान लेने के बाद ऐसी स्थिति पैदा हो सकती है कि मुफ्त सेवा के घाटे को पूरा करने के लिए वे अन्य सेवाओं को महंगा कर दें तथा लोगों को खास सेवा प्रदाता और साइटों के पास जाने के लिए मजबूर कर दें. इसके लागू हो जाने के बाद धनी साइटें और सेवा प्रदाता आर्थिक रूप से कमजोर साइटों या सेवा प्रदाताओं के लिए कठिन परिस्थितियां पैदा कर सकते हैं.

इसका नकारात्मक असर स्टार्ट अप, नये उद्यमियों और छोटी साइटों को भुगतना पड़ेगा. उपभोक्ताओं को वही साइटें सस्ती दरों पर उपलब्ध होंगी, जिन्हें फेसबुक और उसके साथी सेवा प्रदाता तय करेंगे. अन्य साइटों के लिए उन्हें अलग से और अधिक शुल्क देना होगा. इस वर्ष के पूर्वार्द्ध में अमेरिका में भारी विरोध के कारण इस तरह के प्रयासों की अनुमति नहीं दी गयी थी. भारत में भी कुछ महीने पहले कुछ सेवा प्रदाताओं और साइटों की अलग-अलग इंटरनेट आपूर्ति मार्ग बनाने की कोशिश विफल रही थी. केंद्र सरकार का कहना है कि वह ट्राइ की राय के बाद ही कोई फैसला लेगी, पर कार्यकर्ताओं का कहना है कि सरकार ढुलमुल रवैया अपना रही है. उम्मीद है कि सरकार और ट्राइ नेट सेवाओं से जुड़ी मुश्किलों के समाधान को प्राथमिकता देते हुए उपभोक्ताओं के व्यापक हित में निर्णय करेगी, ताकि न तो देश में इंटरनेट का विस्तार बाधित हो और न ही इस पर बड़ी कंपनियों का एकाधिकार स्थापित हो.

(‘प्रभात खबर’ अखबार में प्रकाशित संपादकीय)

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क्या गूगल, क्या माइक्रोसॉफ्ट और क्या फेसबुक… आप सबके लिए मोहरे हैं…

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क्या गूगल, क्या माइक्रोसॉफ्ट और क्या फेसबुक… आप सबके लिए मोहरे हैं…

Sanjay Tiwari : इंटरनेट पर आजादी की दुहाई के दिन फिर से लौट आये हैं। फेसबुक अगर नयी तैयारी से मुफ्त सेवा देने के लिए कमर कसकर दोबारा लौटा है तो उसी फेसबुक पर उसकी इस मुफ्त सेवा का मुखर विरोध भी शुरू हो गया है। अच्छा है। जनता के हक हित और आजादी की मांग तो होनी ही चाहिए लेकिन आजादी की यह दुहाई थोड़ी बचकानी है। जिन दिनों फेसबुक मैदान में उतरा ही था उन दिनों भी कहा गया था कि यह प्राइवेसी में बहुत बड़ी सेंध लग रही है। लेकिन सेंध क्या? फेसबुक ने तो पूरा पनारा ही खोल दिया। क्या हुआ प्राइवेसी का? यह जानते हुए कि आपकी प्राइवेसी को सचमुच खतरा है फिर भी क्या बिना फेसबुक एकाउण्ट बनाये रह सकते हैं आप?

और फेसबुक तो बहुत बाद में आता है। उसके पहले आता है वह प्लेटफार्म जहां खड़े होकर आप फेसबुक ट्विटर का तामझाम फैलाते हैं। एन्डरॉयड। जो कि दुनिया के अस्सी फीसदी से ज्यादा स्मार्टफोन एन्डरॉयड पर चल रहे हैं। आपको मुफ्त सेवा देनेवाली गूगल बदले में आपसे कहां कहां से क्या क्या ले रही है, कभी ख्याल आया क्या? कभी आपने सोचा कि गूगल ने सर्च इंजन के बाद सबसे ज्यादा पैसा एण्डरॉयड के विकास पर ही क्यों खर्च किया?

यह मार्केट इकोनॉमी है साहब और यहां कुछ भी मुफ्त नहीं होता। न तो वालस्ट्रीट में बैठे पूंजीपति मूर्ख हैं और न ही सिलिकॉन वैली में मंहगी पगार लेनेवाले कोई जनक्रांति कर रहे हैं। क्या गूगल, क्या माइक्रोसॉफ्ट और क्या फेसबुक। आप सबके लिए मोहरे हैं। वे जैसा चाहेंगे चाल चलेंगे और आपको उन्हीं की मर्जी के मुताबिक अपनी आजादी की सीमारेखा भी तय करनी पड़ेगी। पिंजरे में बंद तोता पिंजरे में कितनी उछलकूद करके टांय टांय कर ले, उछलकूद करने से वह आजाद नहीं हो जाता। उसे खाने के लिए एक लाल मिर्ची मिल जाती है। बस।

वरिष्ठ वेब जर्नलिस्ट संजय तिवारी के फेसबुक वॉल से.

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आनलाइन एड एजेंसी झुकी, भड़ास के खाते में हफ्ते भर के विज्ञापन के लिए 70 डालर आए… चीयर्स

एक विदेशी आनलाइन एड एजेंसी ने 70 डालर मेरे एकाउंट में भेज दिए. काफी दिनों से बारगेनिंग चल रही थी. मैंने बहुत पहले तय कर लिया था कि बिना एडवांस लिए आनलाइन या आफलाइन, किसी एड एजेंसी वालों या किसी शख्स का विज्ञापन नहीं चलाउंगा क्योंकि विज्ञापन चलवाने के बाद पेमेंट न देने के कई मामले मैं भुगत चुका था. बकाया भुगताने के लिए बार बार फोन करने, रिरियाने की अपनी आदत नहीं रही. हां, इतना जरूर कुछ मामलों में किया हूं कि किसी रोज दारू पीकर बकाया पैसे के बराबर संबंधित व्यक्ति को फोन कर माकानाकासाका करके हिसाब चुकता मान लेता हूं. पर यह कोई ठीक तरीका थोड़े न है. इसलिए एक नियम बना लिया. बिना एडवांस कोई विज्ञापन सिज्ञापन नहीं. दर्जनों एड प्रपोजल इसलिए खारिज करता रहा क्योंकि आनलाइन एजेंसी को एडवांस पेमेंट वाला शर्त मंजूर न था. लेकिन आखिरकार एक एड एजेंसी झुकी और 70 डालर हफ्ते भर के विज्ञापन के लिए दे दिए.

बात सत्तर डालर जैसी छोटी रकम की नहीं. बात सिद्धांत की है. कंटेंट और तेवर मेनटेन रखें तो विज्ञापन पैसा प्रतिष्ठा सब खुद ब खुद अपने कदमों पर चल कर आते हैं. अन्यथा डग्गामारी पत्रकारिता का हश्र देख ही रहे हैं. कंटेंट छोड़ कर बाकी सभी मोर्चे पर संपादक से लेकर मार्केटिंग तक के लोग बांय बांय करते हुए मरे जा रहे हैं पर जनता है कि उन्हें भाव न देकर बिकाउ बिकाउ पेड पेड बाजारू बाजारू समेत जाने क्या क्या कह कह कर लिहो लिहो कर रही  है. और, ये सच है कि अगर मीडिया बिकाउ व पेड न हुआ होता तो मीडिया के खिलाफ भड़ास निकालने की खातिर किसी आनलाइन प्लेटफार्म की जरूरत न पड़ती.

मीडिया के बदलते व नए ट्रेंड्स को लेकर मेरे पास जो थोड़ी बहुत समझ है, वह खुद के अनुभव के आधार पर है. साफ साफ दिख रहा है कि मीडिया का बहुत तेजी से विकेंद्रीकरण हो रहा है. जिस कदर आनलाइन न्यूज पोर्टल और वेब टीवी चैनल शुरू हो रहे हैं, उससे मीडिया व पत्रकारिता नामक महत्वपूर्ण चीज कुछ घरानों, कुछ व्यक्तियों, कुछ शख्सियतों की बपौती नहीं रहा करेगी. सोशल मीडिया और आनलाइन मीडिया के कारण जो जबरदस्त चेंज आए हैं उससे बड़ा फायदा आम पत्रकारों समेत उन तमाम लिखने पढ़ने वालों को हो रहा है जो अपने सोच में क्रिएटिव हैं, सरोकारी हैं, हार्डवर्किंग है, इन्नोवेटिव हैं, तकनीकी ज्ञान से लैस हैं. दुनिया भर में एड रेवेन्यू का बहुत बड़ा हिस्सा डिजिटल यानि इंटरनेट की तरफ मुड़ चुका है. कोई यूट्यूब पर अपना चैनल चलाकर लाखों रुपये महीने कमा रहा है तो कोई अच्छा सा ब्लाग लिखकर लाखों रुपये महीने विदेश से मंगा रहा है.

दिल्ली से लेकर आगरा तक के उन कई लोगों को जानता हूं जो सामान्य गृहिणी हैं या युवा टेक एक्सपर्ट हैं, और, गूगल के ही प्लेटफार्म्स पर अपनी क्रिएटिविटी व ज्ञान के जरिए लाखों रुपये महीने कमा रहे हैं. डिजिटल की तरफ शिफ्ट हो रहे एड रेवेन्यू का छोटा छोटा हिस्सा हम भड़ास जैसे पोर्टलों /  न्यू मीडिया माध्यमों के जरिए अलग किस्म का कंटेंट क्रिएट करने वालों को भी मिल रहा है. यह एड रेवेन्यू लाखों करोड़ों उन न्यूज पोर्टलों / न्यू मीडिया माध्यमों तक पहुंच रहा है जो जमीनी-रीयल किस्म की पत्रकारिता या किसी खास फील्ड का एक्सपर्ट होकर संबंधित कंटेंट क्रिेएट कर रहे हैं व इसके जरिए खुद का व अपने माध्यम का अलग स्थान पहचान बनाए हुए हैं. ये लोग खुद का एक बड़ा पाठक वर्ग / दर्शक वर्ग क्रिएट कर चुके हैं.

यूट्यूब से लेकर ब्लाग, वेब, सोशल मीडिया आदि के जरिए एक होनहार समझदार नौजवान अब अच्छा खासा पैसा कमा सकता है, इसका उल्लेख आनलाइन कंटेंट मानेटाइजेशन वर्कशाप में कर चुका हूं जिसमें शरीक होने के लिए देश भर से लोग ग्यारह ग्यारह सौ रुपये देकर आए थे. पहले सारा ज्ञान व पैसा अंग्रेजी में था. लेकिन अब हिंदी के आगे बड़े बड़े घुटने टेक रहे हैं. गूगल के एडसेंस से महीने में सैकड़ों डालर मिलने के साथ साथ अब दूसरी आनलाइन एड कंपनीज भी भड़ास को एडवांस में पेमेंट देकर अपने विज्ञापन लगवा रही हैं. यह हिंदी के लिए और आनलाइन हिंदी मीडिया के लिए सुखद मोड़ है. बड़े, कारपोरेट व बिकाऊ मीडिया घराने देश का पैसा ब्लैक में इकट्ठा कर विदेश में चुरा रहे हैं तो हम छोटे व नए मीडिया वाले विदेश से हजारों डालर देश में मंगवाकर सच्ची देश सेवा भी कर रहे हैं. सो दोस्तों, आगे बढ़िए और बिकाउ मीडिया की नौकरियों में सपने तलाशने की जगह खुद की छोटी शुरुआत कर डालिए. मैं तो चला 70 डालर के नाम आज शाम पार्टी मनाने.. चीयर्स गुरु!!!

लेखक यशवंत सिंह भड़ास के संस्थापक और संपादक हैं. इनसे संपर्क yashwant@bhadas4media.com के जरिए किया जा सकता है.

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सोशल मीडिया पर साइबर गुंडागर्दी से बचने का एक ही तरीका है…

Dilip C Mandal : सोशल मीडिया पर साइबर गुंडागर्दी से बचने का एक ही तरीका है कि आप बचने की कोशिश न करें। आप बच जाएँगे।

1. दी जा रही गालियों से न डरें। दी जा रही गालियाँ आपका नहीं, गाली लिखने वालों का परिचय है। मैं तो अक्सर गालियों को डिलीट भी नहीं करता।

2. अगर गालियाँ न दी जा रही हों, तो आपके लिए यह चिंतित होने का समय है। क्या आप ऐसा कुछ भी नहीं कर रहे हैं कि न्याय और लोकतंत्र के विरोधी आपको गालियां दें? यह तो बुरी बात है। कुछ तो ऐसा कीजिए कि बुरे लोग आपसे नाराज हों।

3. अगर आपके जीवन में ऐसा बहुत कुछ है, जिसे आप छिपाना चाहते हैं और जिनके खुल जाने से आपको दिक्कत हो सकती है, तो सोशल मीडिया आपके लिए नहीं है। आप लिमिटेड फ़्रेंड लिस्ट से काम चलाएँ और कमेंट ऑप्शन सिर्फ फ़्रेंड के लिए रखें। या फिर आप अखबार में लेख लिखें या टीवी पर विश्लेषक गेस्ट बनकर पेश हों।

4. इसमें किसी की तो जीत होनी है। आपका पीछे हटना उनकी जीत है।

5. गालियों से डरकर पीछे हटने का मतलब है कि आप जो लिख रहे थे वह आपके लिए फ़ैशन था। आपको खुद से पूछना चाहिए कि आपकी इज़्ज़त बडी है या आपके विचार।

आप बताएँ कि आपकी क्या राय है।

वरिष्ठ पत्रकार दिलीप मंडल के फेसबुक वॉल से.

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क्या भारतीय प्रधानमंत्री और अमेरिकी राष्ट्रपति अपने देश के नागरिको को ‘ऑनलाइन गुंडा’ कहकर संबोधित करेंगे!

NDTV के पत्रकार रवीश कुमार ने ट्विटर पर लिखना छोड़ ही दिया था अब फेसबुक पर लिखना भी बंद कर दिया। कारण दिया सोशल मीडिया पर गुंडागर्दी। रवीश कुमार आप या आपके समर्थक पत्रकार कुछ भी कहे लेकिन, सोशल मीडिया’ सहमति,असहमति और विरोध का माध्यम है और रहेगा। पिछले 2 दशकों से जिस प्रकार आप लोगों ने अपनी पत्रकारिता के माध्यम से देश की जनता पर अपने एक विचारो को थोपते चले आ रहे हैं, ‘सोशल मीडिया’ आ जाने से लोगो को एक ताक़त मिली है कि आप लोगो से भी प्रश्न कर सके। आप लोग अभी तक एकतरफा पत्रकारिता करते हुए जनता को गुमराह कर रहे थें, ‘सोशल मीडिया’ द्वारा जनता आपसे प्रश्न करती है तो आप उन्हें ‘राष्ट्रवादी गुंडा’ कहकर बुलाते हैं।

आप मीडिया को देश का चतुर्थ स्तम्भ होने की बात करते हैं तो आपको बता दूं सारे स्तंभों से बड़ा भारत की जनता है, उसे हक़ है आप चारो स्तंभों से प्रश्न पूछने का। जब आप अपनी पत्रकारिता पर दंभ भरते हैं तो मुझे आपका ‘प्राइम टाइम’ याद आता है कि किस प्रकार कितनी बहसों में तथ्यों के बिना भी किसी घटना को एक संगठन से जोड़ देते रहें हैं। मैं हाल के सिर्फ 2-3 घटनाओ का जिक्र कर देता हूँ।

एक घटना दिल्ली के चर्च में हुई, जिसमे कुछ असामाजिक तत्वों ने चर्च में तोड़फोड़ की थी। आपने इसके लिए हिंदूवादी संगठनो को सीधे-सीधे जिम्मेदार ठहराया था, बाद में क्या हुआ पकड़े गए लोग ईसाई धर्म के और इसी चर्च से सम्बंधित थे। एक और याद आ रहा है ‘नन रेप’ वाली घटना, इसमे तो आप अपनी तथाकथित पत्रकारिता करते हुए इतने उग्र हो गए की चिल्लाते हुए बिना किसी तथ्य के इस घटना का भी सम्बन्ध हिंदूवादी संगठनो से करने लगे।बाद में क्या हुआ ये तो आपको पता ही हैं।

कुछ वर्ष पहले की बात करें तो किस प्रकार से आपलोगो ने ‘हिन्दू आतंकवाद’ का नाम दिया था और जनता के बीच एक अफवाह फ़ैलाने का दौर अपनी पत्रकारिता के माध्यम से चलाया था। आप लोगो ने पत्रकारिता से ऐसा माहौल तैयार कर दिया था कि हिन्दू शब्द सांप्रदायिक शब्द घोषित हो गया था।जब आपकी पत्रकारिता और प्राइम टाइम को लेकर कोई आपसे प्रश्न पूछ देता है तो वो आपके लिए ‘राष्ट्रवादी गुंडा’ हो जाता है।

एकतरफा विचार थोपना, जनता को गुमराह करना आपकी पत्रकारिता में स्पष्ट दिखती है। ये ‘सोशल मीडिया’ है यहाँ हर प्रकार के लोग हैं आपकी घाटियां पत्रकारिता से परेशान होकर कुछ लोग आपके पेजो पर गाली-गलौच कर देते होंगे लेकिन इसका ये मतलब नहीं है कि आप ‘सोशल मिडिया’ पर उपस्थित लोगो को राष्ट्रवादी या ऑनलाइन गुंडा कहे। भारत के प्रधानमंत्री से लगाकर अमेरीका के राष्ट्रपति तक को ‘सोशल मीडिया’ पर गाली गलौच का सामना करना पड़ता है तो क्या भारत के प्रधानमंत्री और अमेरीका के राष्ट्रपति अपने देश के नागरिको को ऑनलाइन गुंडा कहकर संबोधित करेंगे।

दिक्कत सिर्फ गाली-गलौच का नहीं है रवीश कुमार जी। यहाँ दिक्कत ये है कि ‘सोशल मीडिया’ के आ जाने से अब लोग पत्रकारो से भी प्रश्न पूछ ले रहे हैं। और आप जैसे पत्रकारो का गन्दा खेल जो अबतक चल रहा था ‘सोशल मीडिया’ आ जाने से लोगो को आपकी सच्चाई दिखने लगी। आज ‘सोशल मीडिया’ ‘मेन स्ट्रीम मीडिया’ से कही ज्यादे ताक़तवर हो रहा है। पहले मीडिया ट्रायल में आप खुद मुद्दे सेट करते थे, उसपर बहस करके खुद ही फैसला सुना देते थे। लेकिन अब ‘सोशल मीडिया’ आने से देश की जनता अपना मुद्दा खुद तय करती है, सार्वजनिक बहस होता है और फैसला सुनाने की कोई जरूरत नहीं होतो लोग खुद ही समझ जाते हैं क्या सही है, क्या गलत है।

गोरखपुर निवासी साफ्टवेयर डेवलपर पवन उपाध्याय के फेसबुक वॉल से.

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Flipkart पर कुछ भी ऑर्डर करने से पहले मेरी कहानी सुनिए

31 अगस्त 2015 का दिन. मेरे दिल में एक स्मार्टफोन लेने का विचार आया. मैं इंटरनेट पत्रकार हूं तो ये मेरे लिए काफी ज़रूरी भी था. मेरा पुराना स्मार्टफोन मेरी अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतर पा रहा था और काम काफी प्रभावित हो रहा था. जो स्मार्टफोन मेरे बजट में था वह Flipkart पर बिक्री के लिए उपलब्ध था. मैंने Flipkart को एक मोटो-ई सेकेंड जेनरेशन फोन ऑर्डर कर दिया. मेरी परेशानी की शुरुआत यहीं से हुई.

 

जब हम बाजार जाते हैं तो पहले माल लेते हैं और फिर पैसा देते हैं, Flipkart पर भी ये सुविधा मौजूद है, लेकिन मैंने जैसे ही अपना पता गाजियाबाद दिखाया Flipkart ने मुझे कैश ऑन डिलीवरी का कोई ऑप्शन नहीं दिया. मुझे फोन की बेहद ज़रूरत थी तो मैंने उन्हें पैसा एडवांस दे दिया. मेरे एक दोस्त जिसके Flipkart अकाऊंट से मैंने ऑर्डर किया उसने भी मुझे आश्वस्त किया कि कोई बात नहीं ये अच्छी कंपनी है और सामान टाइम से दे देगी. Flipkart ने वादा किया कि वह मुझे 7 सितंबर तक फोन दे देगी लेकिन जब मुझे 7 तारीख तक फोन नहीं मिला तो मैंने Flipkart के फेसबुक अकाऊंट पर अपनी परेशानी बताई.

फेसबुक अकाऊंट पर इसलिए क्योंकि जो नंबर उन्होंने अपनी वेबसाइट पर उपलब्ध कराया है उसने आधे-आधे घंटे फोन होल्ड पर रखने के बाद काट दिया, बिना किसी से बात कराए. तो मुझे थक कर सोशल मीडिया का सहारा लेना पड़ा. मैंने जब अपनी परेशानी उनके फेसबुक अकाऊंट पर लिखी तो मुझे Flipkart की ओर से मेरे स्टेटस पर रिप्लाई आया कि हमारा लॉजिस्टिक पार्टनर 5000 रुपये से अधिक के मोबाइल डिलीवर करने में सक्षम नहीं है.

मेरा सवाल ये कि जब Flipkart ऐसा करने में सक्षम नहीं थी तो ऑर्डर लिया ही क्यों? और यदि ले लिया था तो उन्हें ये कब पता चला कि वे मुझे मोबाइल पहुंचाने में सक्षम नहीं हैं? क्या मेरे द्वारा सवाल पूछे जाने के बाद? और जब पता चल गया तो क्या उसी वक्त मेरा पैसा नहीं लौटाया जा सकता था?

मैंने Flipkart के रिप्लाई पर जवाब दिया कि आप लोग मेरा पैसा वापस कर दें. उनका रिप्लाई आया कि ‘हम मामले को देख रहे हैं, जल्द ही आपको अपडेट करेंगे.’ जब उन्होंने ऐसा कहा तो तारीख थी 8 सितंबर और वक्त था रात के 9 बजकर 29 मिनट. अगले दिन मुझे Flipkart की सोशल मीडिया टीम की ओर से फोन आया. उसने मुझे आश्वासन दिया कि जल्द ही मेरे पैसे लौटा दिए जाएंगे.

उसके आश्वासन पर मैंने और एक हफ्ता इंतजार किया लेकिन पैसा नहीं मिला. मतलब ये कि कंपनी ने ऑर्डर लिया, माल नहीं दिया और पैसा भी वापस करने में आनाकानी!! जो मैसेज Flipkart ने अपनी वेबसाइट पर लिखा है वह ये है कि ‘जब हमें माल वापस मिल जाएगा तब रिफंड की प्रक्रिया शुरु की जाएगी’.

अब सवाल ये कि माल मुझे मिला नहीं, Flipkart के मुताबिक उसके पास भी नहीं है तो गया कहां? और इसमें मेरी गलती कहां है? अब Flipkart की किसी गलती या चूक की सजा मुझे क्यों? या तो मुझे स्मार्टफोन दे देते या फिर पैसा वापस लेकिन Flipkart ने ऐसा कुछ भी नहीं किया और 16 दिन गुजर गए.  एक डिजिटल पत्रकार का जीवन बिना स्मार्टफोन के कैसा होगा आप समझ सकते हैं. मैं इतना अमीर तो नहीं हूं कि एक जगह पैसा फंसाकर दूसरी जगह फिर से फोन ऑर्डर करूं, इसीलिए इंतजार कर रहा हूं कि Flipkart मेरा पैसा वापस कर दे तो मैं नया फोन ले सकूं.

Varun Kumar
digitalindian85@gmail.com

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ऑनलाइन टिकट के नाम पर लूट रहे आईआरसीटीसी और रेलवे

वाराणसी (उ.प्र.) : आईआरसीटीसी (irctc) और रेलवे मिलकर ऑनलाइन टिकट के नाम पर लोगों को लूट रहे हैं। अगर आपने ऑनलाइन टिकट को बुक कराकर कैंसिल किया तो कोई गारंटी नहीं कि वो पैसा आपके खाते में वापस आये।

 

जन

अधिकार मंच के अध्यक्ष अनिल कुमार मौर्य के मुताबिक आईआरसीटीसी (irctc) का कहना है कि उसने मेरे बैंक खाते में कैंसिल टिकट का पैसा 2 जून को ही भेज दिया और बैंक 8 जून को अपनी रिपोर्ट में कह रहा है कि आपके खाते में पैसा नहीं आया है। 

इसके बाद जब इसकी शिकायत पुन: आईआरसीटीसी (irctc) से की गयी तो उसने कहा कि कैश कार्ड के ऑफिस में संपर्क करें क्योंकि आपका पैसा कैश कार्ड के माध्यम से वापस किया गया है। मतलब जो लड़ेगा, उसे पैसा मिलेगा, नहीं तो पैसा गायब। 

अनिल कुमार मौर्य से संपर्क : 0542-2280238

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इस साल के अंत तक दुनिया की आधी आबादी जुड़ जाएगी इंटरनेट से

इस साल के आख़िर तक दुनिया की कुल जनसंख्या में से आधे लोग इंटरनेट से जुड़ चुके होंगे. संयुक्त राष्ट्र की संस्था अंतरराष्ट्रीय टेलीकम्यूनिकेशन यूनियन (आईटीयू) की एक रिपोर्ट में अनुमान है कि 3.2 अरब से ज़्यादा लोग ऑनलाइन हो चुके होंगे, फिलहाल दुनिया की जनसंख्या 7.2 अरब है. इनमें विकासशील देशों के तकरीबन दो अरब लोग शामिल हैं. लेकिन सबसे कम विकसित देशों की सूची में शामिल नेपाल और सोमालिया से सिर्फ 8 करोड़ 90 लाख लोग ही इंटरनेट का इस्तेमाल कर पाएंगे.

रिपोर्ट के मुताबिक साल के अंत तक विकसित देशो में 80 प्रतिशत घरों और विकासशील देशों में 34 प्रतिशत घरों में किसी न किसी रूप में इंटरनेट की सुविधा होगी. आईटीयू के डेवलपमेंट ब्यूरो के निदेशक ब्राहिमा सनोऊ ने बताया, “पिछले 15 वर्षों में इंटरनेट ने वैश्विक विकास में अहम भूमिका निभाई है. डिजिटल समुदाय बनने की तरफ बढ़ रही दुनिया के विकास के लिए इंटरनेट की महत्वपूर्ण भूमिका होगी.” साल 2000 में इंटरनेट इस्तेमाल करने वालों की संख्या आज के आंकड़े के आठवें हिस्से के बराबर यानी 40 करोड़ थी.

मोबाइल ब्रॉडबैंड इस्तेमाल करने वालों की संख्या 7 अरब तक पहुंच जाएगी. अमरीका और यूरोप में 100 में से 78 लोग मोबाइल ब्रॉडबैंड का इस्तेमाल करते हैं. दुनिया में 69 फ़ीसदी लोगों के पास 3G कवरेज है लेकिन ग्रामीण इलाकों में ये सिर्फ़ 29 फ़ीसदी तक पहुंचा है. अफ्रीका में मोबाइल ब्रॉडबैंड सिर्फ 17.4 फीसदी आबादी तक पहुंचा है.

बीबीसी हिंदी डॉट कॉम से साभार

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The problem is that if the ISP restricts or obstructs my access to sites which dont pay the ISP

Sushant Sareen : Can someone explain this whole ‎netneutrality‬ issue to me? from the cacophony on TV and web all I have been able to figure out is this: I currently pay a certain sum to use an X amount of data. Now I could browse news sites, porn sites, religious sites or whatever else but for ever site I access i expend some of the data I have bought. if however, say a newspaper or a TV channel pays my ISP a sum of money, then I could browse their site, download or whatever else without paying anything. Up to this point I dont see a problem. If all the big shots pay the ISP money so I can browse their sites for free, I would imagine thats good for me.

The problem is that if the ISP restricts or obstructs my access to sites which dont pay the ISP. If thats forbidden and is strictly regulated with heavy penalties on the ISP for now allowing or blocking or providing slow access to guys who dont enter into deals with them, then the whole furor is unnecessary. As I see it, I can access some sites for free and for others I will have to pay…..net net I am better off. Of course, the ISP could give higher visibility to the guys who pay them. But thats marketing and even google does that.

In any case, most of the small guys who became big — say flipkart – were unknown, virtual minnows. when they started and because they had a good idea or were lucky or marketed themselves well, they made it big. That same thing will happen now, provided there is no restriction on access to non-paying sites. So what am I missing? Can someone educate me? Or is it that because we instinctively distrust big corporations we think they must be doing something wrong?? Could the entire campaign be launched by media houses because they fear their costs go up?? Frankly I dont know and really wish to be educated on this.

xxx

gen VK Singh has a knack for being abrasive. But what’s with the media for reacting so petulantly just because he takes a dig at them, which was both funny and naughty as well as factual. His visit to Pakistan HC was ‘more exciting’ for media than his stellar role in the rescue efforts of Indians in Yemen. Even if he hadn’t said that ‘for the media…..’ And had just said that his Pakistan HC visit was more exciting, one should have just laughed away his dig. As for presstitudes, the media knows the skeletons in its cupboard, how deals are made, how bribes are taken, how info is sold, how people are blackmailed and browbeaten, how favours are taken, how stories are killed and some of the people involved in this were on some channel today. We have radia case, cash for vote scam etc. and yet if the media is so prickly at someone calling them presstitudes then surely they are adopting a holier than thou attitude. Also remember a post by Mohan Guruswamy about his visit to the farm house of a journo at the time of the scandal hat recently broke of leaks from economic ministries. So times now not only clearly got the drift wrong, but also the wrong panel today.

इंडियन एक्सप्रेस के वरिष्ठ खोजी पत्रकार सुशांत सरीन के फेसबुक वॉल से साभार.

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bhadash4media से वैकल्पिक मीडिया की ताकत मिली तो लांच कर दिया ऑनलाइन चैनल ‘newsnationonline’

”आदरणीय यशवंत जी, प्रभु कृपा और आपके आशीर्वाद से अपना वेब न्यूज़ चैनल ‘न्यूज़ नेशन ऑनलाइन’ के नाम से लांच कर दिया हैं। इस बारे आपसे फ़ोन पर भी बात हुई थी। bhadash4media ने ही हमे यह ताकत दी वरना मध्यमवर्गीय परिवार में पैदा हुआ एक अदना पत्रकार यह कैसे साहस कर सकता था।

”पत्रकारिता में वीक्ली न्यूज़ पेपर ‘बोलते पत्थर’ व ‘अपनी धरती अपने लोग’ से शुरू हुई यात्रा उत्तम हिन्दू , जगत क्रांति, राष्ट्रीय सहारा, पंजाब केसरी, अमर उजाला व दैनिक जागरण तक चली। दैनिक जागरण में चीफ सब एडिटर के रूप में चार साल से अधिक समय तक रहे। ‘आज समाज’ में भी दो वर्षों से चीफ रिपोर्टर फिर टीवी पत्रकारिता में भी दिनभर, पीटीसी, खबर फ़ास्ट, दिशा न्यूज़ के अलावा न्यूज़ एजेंसी के लिए काम करते हुए अब अपना न्यूज़ पोर्टल चलाने की ओर अग्रसर हुए हैं, जो कभी हमारे पास पत्रकारिता में बीट रिपोर्टर होते थे, दलाली और चापलूसी के कारण कारों पर घूमते हैं लेकिन हमने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया। हमे अपने बुजर्गों पर गर्व है। आखिर क्रांतिकारी का पोता हूं, जिन्होनें देश की आज़ादी के बाद कभी पेंशन तक नहीं ली। 

”जब देखा कि समाचार पत्र और कुछ चैनल भड़वागीरी कर रहे हैं तो मन निराश हो गया लेकिन भड़ास4मीडिया ने कलम से जुडे़ रहने का नया मन्त्र दिया, वैकल्पिक मीडिया। प्ली,ज यशवंत जी सहयोग करें। यदि हो सके तो दो लाइन भड़ास में लिख देना कि हम नया न्यूज़ वेब चैनल खोल रहे हैं। 28 मार्च से इसका शुभारंभ साधारण तरीके से हो गया है। अपने पिताजी के हाथों ओपिनिंग कराई है, किसी नेता-परेता से नहीं, न किसी अधिकारी से। मेरे चैनल की वेब साइट का पता है- www.newsnationonline.com और ई-मेल पता है – bhartiynr0@gmail.com, साथ यमुना नगर का मेरा संपर्क नंबर है -राकेश भारतीय – 9729203017.”

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ऑनलाइन पत्रकार सुप्रिया को चमेलीदेवी पुरस्कार

नई दिल्ली : मीडिया फाउंडेशन ने सर्वश्रेष्ठ महिला पत्रकार को दिया जाने वाला प्रतिष्ठित चमेली देवी जैन पुरस्कार इस साल एक ऑनलाइन पत्रकार सुप्रिया शर्मा को दिए जाने की घोषणा की है। यह पुरस्कार ऑनलाइन न्यूज पोर्टल पर काम करने वाली किसी पत्रकार को पहली बार दिया जा रहा है। ‘स्क्रॉल डॉट इन’ की समाचार संपादक ने बताया कि यह पुरस्कार हाशिए पर जीने को मजबूर व उपेक्षित समुदायों पर रिपोर्ताज तथा समसामयिक मुद्दे उठाने के लिए दिया जा रहा है। सम्मान दिल्ली स्थित इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में 19 मार्च को दिया जाएगा, जिसके बाद एक व्याख्यान होगा। 

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लाइव इंडिया की हिंदी, अंग्रेजी और मराठी वेबसाइट्स लांच

नई दिल्ली में आयोजित एक रंगारंग समारोह में लाइव इंडिया की हिंदी, अंग्रेजी और मराठी वेबसाइट्स की लॉन्चिंग हुई। तीनों ही भाषाओं में मोबाइल एप्प की लॉन्चिंग भी हुई। इस मौके पर केंद्रीय मंत्रियों समेत तमाम राजनेता और विभिन्न क्षेत्रों के गणमान्य लोग मौजूद रहे। इस मौके पर केंद्रीय मंत्री नजमा हेपतुल्ला ने कहा कि लाइव इंडिया की मराठी वेबसाइट मी मराठी की मदद से वो मराठी सीख सकेंगी। उन्होंने कहा कि नई तकनीक की मदद से जेनरेशन गैप को दूर किया जा सकता है और हमें उम्मीद है कि लाइव इंडिया ऐसा करने में सफल रहेगा।

केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान ने कहा कि लाइव इंडिया ने डिजिटल दुनिया में कदम रखकर एक नया आयाम स्थापित किया है। उन्होंने कहा कि लाइव इंडिया ग्रुप का मकसद अपनी खबरों से देश में एकता और भाईचारा बढ़ाने के साथ नैतिकता कायम करना है। कांग्रेस के सीनियर नेता राशिद अल्वी ने लाइव इंडिया ग्रुप को डिजिटल दुनिया में प्रवेश करने पर बधाई दी। उन्होंने कहा कि मीडिया की रफ्तार काफी तेज है और लाइव इंडिया के डिजिटल युग में प्रवेश करने के साथ ही इसकी तेजी और बढ़ेगी।

बीजेपी सांसद मनोज तिवारी ने लाइव इंडिया टीम डिजिटल को बधाई देते हुए कहा कि सबके हाथ में मोबाइल हो और भले ही उसमें कुछ न हो लेकिन लाइव इंडिया डिजिटल जरूर हो। ग्रुप सीएमडी डॉ महेश किसन मोतेवार, सीईओ सुप्रिया कणसे, लाइव इंडिया डिजिटल के मैनेजिंग एडिटर बसंत झा और टीम ने कार्यक्रम में पधारे मेहमानों का स्वागत किया। कार्यक्रम में ‘डॉ. महेश किसन मोतेवार एक समृद्ध उन्नति’ पुस्तक का विमोचन भी किया गया।

प्रेस विज्ञप्ति

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‘हिंदी समय’ का इस बार का अंक सिनेमा पर केंद्रित

मित्रवर, सिनेमा एक ऐसी कला है जिसमें सारी कलाएँ आकर गलबहियाँ करती हैं। साहित्य, संगीत, चित्रकला, नृत्य, फोटोग्राफी सभी कलाएँ यहाँ मिल-जुलकर काम करती हैं। यही नहीं, सिनेमा में तकनीकि भी आकर कला के साथ ताल से ताल मिलाती नजर आती है। किसी एक फिल्म में दिखने वाले और न दिखने वाले हजारों लोगों की मेहनत शामिल होती है। ऐसी सामूहिकता किसी भी अन्य कला विधा में संभव नहीं। इसलिए यह अनायास नहीं है फिल्मों का जादू हम सब के सिर चढ़ कर बोलता है। हमने हिंदी समय (http://www.hindisamay.com) का इस बार का अंक सिनेमा पर केंद्रित किया है। हमें उम्मीद है कि हमारी यह विनम्र कोशिश आपको अपनी सी लगेगी।

दादा साहब फाल्के को भारतीय सिनेमा का पितामह कहा जा सकता है। हम यहाँ उन पर केंद्रित दो आलेख, सुधीर सक्सेना का बस, इक जुनूँ की खातिर और धरवेश कठेरिया का दादा साहब फाल्के और भारतीय सिनेमा दे रहे हैं। हमारी यह भी कोशिश है कि हिंदी सिनेमा के विकासक्रम पर सरसरी तौर पर ही सही पर एक नजर डाली जा सके। इस लिहाज से यहाँ प्रस्तुत चार आलेख, सलिल सुधाकर का कहाँ-कहाँ से गुजर गया सिनेमा, विनोद विप्लव का हिंदी सिनेमा : कल, आज और कल, हिमांशु वाजपेयी का भारतीय सिनेमा में पहली बार और ज्ञानेश उपाध्याय का बदलता देश, दशक और फिल्मी नायक दृष्टव्य हैं। यहाँ कुछ ऐसे निर्देशकों पर भी सामग्री दी जा रही है जिन्होंने न सिर्फ भारतीय सिनेमा पर गहरा असर छोड़ा अपितु अपनी फिल्मों के लिए दुनिया भर में प्यार और प्रतिष्ठा अर्जित की। यहाँ पढ़ें सत्यजित राय पर केंद्रित जावेद सिद्दीकी का संस्मरण क्या आदमी था ‘राय’!, राज कपूर पर केंद्रित अरविंद कुमार का संस्मरण क्यों न फटा धरती का कलेजा, क्यों न फटा आकाश तथा चार बड़े फिल्मकारों के रचना-संसार पर केंद्रित लेख, मनमोहन चड्ढा का बिमल राय का रचना संसार, सुरेंद्र तिवारी का ऋत्विक घटक सा दूसरा न कोई, प्रहलाद अग्रवाल का महबूब और उनका सिनेमा, परंपरा का आदर : डगर आधुनिकता की और अमरेंद्र कुमार शर्मा का धूसर दुनिया के अलस भोर का फिल्मकार : मणि कौल भी हमारी इस बार की खास प्रस्तुतियाँ हैं। इसी तरह से कुछ अभिनेताओं पर केंद्रित आलेख भी पेश हैं। यहाँ पढ़ें प्रताप सिंह का लेख अभिनय की सँकरी गली के सरताज भारत भूषण, प्रभु जोशी का लेख अंतिम पड़ाव के अधर में अकेला आनंद, उमाशंकर सिंह का लेख हंगल के जाने से उपजा सन्नाटा और अजय कुमार शर्मा का लेख ‘जन कलाकार’ बलराज।

साहित्य और सिनेमा के अंतरंग रिश्तों पर प्रस्तुत है सचिन तिवारी का लेख साहित्य और सिनेमा : अंतर्संबंध, इकबाल रिजवी का लेख सिनेमा और हिंदी साहित्य, जवरीमल्ल पारख का लेख ‘चित्रलेखा’ और सिनेमाई रूपांतरण की समस्याएँ और प्रयाग शुक्ल का लेख मणि कौल का सिनेमा और हिंदी। साथ में प्रस्तुत है सिने-व्यक्तित्वों द्वारा लिखी गई आत्मकथाओं पर केंद्रित अनंत विजय का लेख सिने आत्मकथाओं का सच। सिनेमा और सरोकार के अंतर्गत पढ़ें रामशरण जोशी का लेख सामाजिक राजनीतिक यथार्थ और सिनेमा, प्रेम भारद्वाज का लेख फिक्रे फिरकापरस्ती उर्फ दंगे का शोक-गीत, किशोर वासवानी का लेख सिनेमा में प्रतिरोध का स्वरूप, सुधीर विद्यार्थी का लेख बॉलीवुड के व्यंजन में क्रांति की छौंक, एम.जे. वारसी का लेख हिंदुस्तानी सिनेमा में भाषा का बदलता स्वरूप और अशोक मिश्र का लेख सामाजिक सरोकारों से हटता सिनेमा। समानांतर सिनेमा पर केंद्रित कृपाशंकर चौबे का लेख समानांतर सिनेमा के सारथी : राय से ऋतुपर्ण तक, सुधा अरोड़ा का लेख कला सिनेमा में कितना सामाजिक सरोकार और सुरजीत कुमार सिंह का लेख भगवान बुद्ध पर निर्मित फिल्में और उनका स्वरूप भी हमारी इस बार की खास प्रस्तुतियाँ हैं। सिनेमा और संगीत के अंतर्गत पढ़ें सुनील मिश्र का मन्ना डे से एक लंबा आत्मीय संवाद, पुष्पेश पंत का लेख हिंदी फिल्मी गीत : साहित्य, स्वर, संगीत और शरद दत्त का लेख हिंदी फिल्मों में गीत संगीत का बदलता चेहरा। सिनेमा और कैमरा के अंतर्गत पढ़ें जयप्रकाश चौकसे का लेख मनुष्य का मस्तिष्क और उसकी अनुकृति कैमरा। क्षेत्रीय सिनेमा पर पढ़ें डॉ. सतीश पावड़े का लेख बदल रहा है मराठी सिनेमा और कुमार नरेंद्र सिंह का लेख भोजपुरी सिनेमा का बढ़ता संसार। आगे पढ़ें गाँव और कस्बों से सिनेमा के रिश्तों पर केंद्रित प्रकाश चंद्रायन का लेख

गाँव में सलम और सलीमा और उमेश चतुर्वेदी का लेख आँसू बहा रहे हैं कस्बे के टॉकीज। यहाँ प्रस्तुत हैं हिंदी की इधर की कुछ चर्चित फिल्मों पर केंद्रित फिल्म समीक्षाएँ। यहाँ पढ़ें शिप ऑफ थीसि‍यस पर केंद्रित गरिमा भाटिया की समीक्षा बेहतर का सपना देती फिल्म, लंचबॉक्स पर केंद्रित राहुल सिंह की समीक्षा अप्रत्याशित जायकों का डब्बा, गांधी टू हिटलर पर केंद्रित शेषनाथ पांडेय की समीक्षा गांधी जिंदा रहे और हिटलर मर गया, हैदर पर केंद्रित उमाशंकर सिंह की समीक्षा जो कू-ए-यार से निकले तो सू-ए-दार चले और इसके साथ में प्रस्तुत है एक काफी पुरानी फिल्म एक रुका हुआ फैसला पर केंद्रित विमल चंद्र पांडेय की समीक्षा एक कमरा, कुछ पूर्वाग्रह भरे लोग और एक हत्या। साथ में पढ़ें दो बेहद चर्चित और नोबेल पुरस्कार विजेता कथाकारों गैब्रिएल गार्सिया मार्खेज और मो यान की कृतियों पर आधारित दो फिल्मों की समीक्षा। यहाँ पढ़ें लव इन द टाइम ऑफ कॉलरा पर केंद्रित विजय शर्मा की समीक्षा कॉलरा की चपेट में प्रेम और नॉट वन लेस पर केंद्रित विमल चंद्र पांडेय की समीक्षा एक आधा गीत और ढेर सारी जिद।

मित्रों हम हिंदी समय में लगातार कुछ ऐसा व्यापक बदलाव लाने की कोशिश में हैं जिससे कि यह आपकी अपेक्षाओं पर और भी खरा उतर सके। हम चाहते हैं कि इसमें आपकी भी सक्रिय भागीदारी हो। आपकी प्रतिक्रियाओं का स्वागत है। इन्हें हम आने वाले अंक से ‘पाठकनामा’ के अंतर्गत प्रकाशित भी करेंगे। हमारा अगला अंक आपके सामने होगा दिनांक 26 दिसंबर 2014 को। हमेशा की तरह आपकी प्रतिक्रियाओं का इंतजार रहेगा।

सादर, सप्रेम

अरुणेश नीरन

संपादक, हिंदी समय

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गूगल एडसेंस Google AdSense आ गया हिंदी ब्लॉगरों के लिए, करें घर बैठे कमाई

अगर आप हिन्दी ब्लॉगर है और अपने चिट्ठे (ब्लॉग) से कमाई करना चाहते हैं तो आपके लिए गूगल एडसेंस Google AdSense बहुत ही बढ़िया ख़ुशखबरी लाया है। दरअसल गूगल एडसेंस (Google AdSense)ने दिसम्बर 2014 से अपने विज्ञापन प्रदर्शित करने के लिए समर्थित भाषाओं (Supporting Languages) में हिन्दी (Hindi) भाषा को भी शामिल कर दिया है। यानि इसका मतलब अब ये हुआ कि आप अब अपने हिन्दी चिट्ठे से भी कमाई कर सकते हैं।

करीब 5 महीने पहले ही मैंने इसी चिट्ठे (प्रचार) पर आपको बताया था कि हिन्दी चिट्ठाकारों (ब्लॉगरों) के लिए आ रहा है गूगल एडसेंस Google Adsense !!  हिन्दी ब्लॉगजगत के लिए ये एक बहुत बड़ी सफलता भी है। आखिरकार गूगल ने भी नेट पर हिन्दी को बढ़ावा देने के लिए तथा कई वरिष्ठ हिन्दी ब्लॉगरों के अथक प्रयास और परिश्रम से प्रभावित होकर गूगल एडसेंस के विज्ञापन हिन्दी ब्लॉग्स के लिए शुरू कर दिये है। वरिष्ठ हिन्दी ब्लॉगर श्री रवि रतलामी जी तथा श्री प्रवीण त्रिवेदी जी (प्राइमरी का मास्टर) ने भी इस बारे में लिखा है।

प्रचार ब्लाग से साभार.

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गूगल ट्रांसलेशन प्रतियोगिता के ये हैं 100 विजेता, हिंदी भाषा के लिए एडसेंस शुरू करेगा गूगल

Khushdeep Sehgal : गूगल ट्रांसलेशन प्रतियोगिता में Sangita Puri जी, GK Awadhia ji और भाई Vivek Rastogi समेत सभी 101 विजेताओं को एंड्रायड फोन जीतने के लिए बहुत बहुत बधाई… आज पूरा दिन गूगल के ऑफिस में रहने का सौभाग्य मिला… एक खुशख़बरी और कि हिंदी के लिए एडसेंस बहुत जल्दी (इसी महीने) शुरू हो जाएगा… ट्रांसलेशन के सारे विजेताओं की लिस्ट इस प्रकार है-

Girish Varadarajan

Vipan Kamr

VIJAY KAYAL

Punit Shukla

PRABHAKAR PANDEY

Gopal Krishna Awadhiya

Aadil

Himanshu Kumar Pandey

PARITOSH TRIVEDI

Subodh Nagrale

umesh kumar mahato

Nisarg Pandya

Vikraant Singh Sanwal

Mansi Taneja

Baldev Singh

udit sharma

Sumit Watal

Diptamoy Goswami

mayank saxena

Akash Sharma

Akshay Kumar Burusa

Dipesh Bhavsar

SHANKAR SHARAN

Vishal Mishra

Abhishek Tripathi

Vardhan Patankar

Mayur Tondwalkar

Goverdhan Kumar

nutan mishra

Manikandan Surendren

Vivek Rastogi

Nivedit Majumdar

Preeti Kumari

Gyan Prakash Sharma

Mukesh Kumar Dangi

Jayrajsinh Gol

Anil Das

kiran verma

PRAKASH

Anshumaan Gupta

Vikranth kumar gadde

feroz Shaikh

Prateek Tewari

Satwik Bhat

Mustafa Jamena

DIVYA BHARTI

Lakshay Nagpal

Pravin Gorakh Pandav

Prithvi Chavhan

Nilesh Giri

Somesh Meena

Roshan Kumar

Deepak Raja

pradip

Rohi Gupta

Ashish Bahl

Jaydev Desai

Shriyash Warghade

Narendra Singh

shivaji laxmanrao kamble

Vedanta Patil

Ganesh Satpute

Nilesh Nag

ROHIT UPADHYAY

Kalpit Kothari

POOJA BHOI

Kamlashankar Carpenter

Yogesh Chaudhari

Arihant Jain

Ashish Ojha

Rajneesh Yadav

Abhishek Acharya

Aman Agrawal

Malini Gupta

Kapil Raut

Suma Kumar Jha

Mohit Atul Sidhpura

Dinesh sain

Rajarajeswari M

Anand Choudhary

sumit

Kaustav Das

Mohit Chauhan

Shivani Maheshwari

Paramjeet Singh

Mukesh Sharma

Shantanu Pathak

Tushar Sonawane

Gaurav Kashyap

Suman Adhikari

Mousum Kumar

Bharat Joshi

VISHWANATH MUCKERJI

संगीता पुरी

varun poladiya

Santosh Kumar

Ayala somaya jula

yogesh oza

LALIT KUMAR BABULAL RANA

Aaditya Amit kumar Brahm bhatt

Hitesh Kumar Singh

neeti dayal

टीवी पत्रकार और ब्लागर खुशदीप सहगल के फेसबुक वॉल से.

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सूफी संत ख्वाजा मुइनुद्दीन चिश्ती और उनकी दरगाह पर हिन्दी का पहला वेब न्यूज पोर्टल तैयार हो रहा

पिछले एक दो साल से लगातार यह उधेड़बुन थी कि मीडिया के क्षेत्र में ही ऐसा कुछ किया जाना चाहिए जो नया हो। नए मीडिया न्यूज पोर्टल से थोड़ा आगे, थोड़ा हटकर और थोड़ा बहुआयामी भी। वेबसाइट, न्यूज पोर्टल, न्यूज सोर्स, रिसर्च कुलमिलाकर ऐसा ही कुछ। विषय की तलाश अपने शहर अजमेर में ही पूरी हो गई। सूफी संत ख्वाजा मुइनुद्दीन चिश्ती और उनकी दरगाह। कुछ और भी वजह रहीं। ना गांठ में पैसा था और ना ही कोई संसाधन। बस कर दी शुरूआत। इस सच्चाई को स्वीकारने में कतई संकोच नहीं है कि इसकी शुरूआती प्रेरणा भड़ास के भाई यशवंत से मिली। उन्होंने भड़ास पर कई मर्तबा पत्रकार साथियों को इस बात के लिए प्रेरित किया है कि वे नए मीडिया में आगे आएं। उनकी इस सोच का ही परिणाम Media4Khwajagaribnawaz.com है।

अजमेर से बाहर के जितने भी मिलते हैं। उनके मन में भी ख्वाजा साहब के लिए श्रद्धा, आस्था या फिर अजीब सी उत्सुकता नजर आती है। कुछ ऐसी विचित्रताएं हैं जिसने इस दिशा में और प्रेरित किया। जैसे कि 802 साल पहले ख्वाजा साहब जिस्मानी तौर पर इस दुनिया से जा चुके थे और करीब ढाई सौ साल तक उनकी मजार कच्ची रही। कि किसी को भुलाने-बिसराने के लिए यह अरसा कम नहीं होता परंतु आज वहां दस से पंद्रह हजार लोग रोजाना आते हैं। कि इस्लाम के अनुयायियों के लिए मक्का के बाद दुनिया का यह दूसरा सबसे बड़ा आस्था का केंद्र है। कि रोजाना यहां आने वाले श्रद्धालुओं में मुसलमानों से ज्यादा तादाद हिन्दुओं की है। कि यह पहला मजार है जहां महिलाओं को भी सजदा करने की इजाजत है। कि इस्लाम के चिश्तिया सिलसिले का सबसे बड़ा केंद्र ख्वाजा साहब हैं। कि चिश्तिया सिलसिले में संगीत को प्रमुखता दी गई है। कि महफिल और कव्वाली के बगैर गरीब नवाज का जिक्र अधूरा रहता है। कि हुमायूं की जान बचाने वाले और एक दिन की बादशाहत में चमड़े के सिक्के चला देने वाले भिश्ती बादशाह का मजार इसी दरगाह में है। कि शहंशाह अकबर फतहपुर सीकरी से यहां पैदल चलकर आया। कि बादशाह जहांगीर ने तीन साल यहीं रहकर हिन्दुस्तान की सल्तनत संभाली। कि शाहजहां की बेटी जहांआरा यहीं की होकर रह गई। और यह भी कि नई दिल्ली के ख्वाजा कुतुबुद्दीन के शिष्य और हजरत निजामुद्दीन औलिया के गुरू ख्वाजा साहब की दरगाह में इतिहास के ऐसे ही कई पन्ने खुले हुए हैं।

इस वेब न्यूज पोर्टल के लिए तथ्य एवं ऐतिहासिक सामग्री जुटाने में छह महीने से अधिक का वक्त लगा। करीब पचास से अधिक फारसी और उर्दू से अंग्रेजी में अनुवादित और अंग्रेजी तथा हिन्दी ग्रंथों से सामग्री जुटाई गई। कोशिश यह की गई है कि गरीब नवाज और दरगाह शरीफ के बारे मे आपके मन मे उठने वाले हर सवाल का जवाब इस वेब न्यूज पोर्टल में मिले। ख्वाजा साहब के जन्म से लेकर दुनिया से परदा कर लेने तक की पूरी जानकारी, ख्वाजा साहब की शिक्षाएं, उनकी रहमत से जुड़ी वास्तविक घटनाएं, गरीब नवाज का करम, यहां सजदा करने आई हस्तियां, दरगाह में कहां, क्या है, कौन-कौन सी ईमारतें हैं, जियारत के दौरान किन बातों का ध्यान रखा जाना चाहिए, अजमेर पहुंचने के लिए रेल और बसें, अजमेर पहुंचने के बाद किन-किन रास्तों से गुजर कर दरगाह पहुंचा जा सकता है, इस्लाम में सूफीमत, सूफी सिलसिला, सूफी तसव्वुुफ, गरीब नवाज और चिश्तिया सिलसिला, सूफी काव्य, नृत्य और संगीत, दरगाह कमेटी, अंजुमन सैयद जादगान, अंजुमन शेख जादगान, सज्जादानशीन आदि तमाम ऐसी जानकारियां हैं जो एक जगह और हिन्दी में नहीं मिल सकेगी। इसके अलावा ख्वाजा साहब और दरगाह से जुड़ी जरूरी ताजातरीन खबरें भी मुहैया रहेगी। सूफी संगीत की अपनी अलग दुनिया होती है। इसलिए हर महीने एक सूफी गाना भी इस वेब न्यूज पोर्टल पर सुनने को मिलेगा। आने वाले दिनों में दरगाह के खुद्दाम, अजमेर की होटलें, अजमेर में कहां से क्या खरीदारी कर सकते हैं, टेªवल कंपनियां, सरवाड़ शरीफ, नागौर शरीफ, तारागढ़ शरीफ आदि जानकारियां भी शीघ्र मुहैया करवाई जाएंगी। ख्वाजा साहब, गरीब नवाज और दरगाह शरीफ आदि नामो से कई वैबसाइट हैं। सब में दो बातें समान है। एक सभी अंग्रेजी में हैं और दूसरी ज्यादातर वैबसाइट वे हैं जो ख्वाजा साहब के खादिमों ने बनाई है जिनका मुख्य मकसद लोगों को जियारत के लिए आमंत्रित करना होता है।

दरगाह आने वाले जायरीन में 90 फीसदी हिन्दी भाषा बोलते-समझते हैं। इसलिए इरादा किया गया कि वेबसाइट हिन्दी में हो और इसे रूप दिया गया वेब न्यूज पोर्टल का, www.media4khwajagaribnawaz.com नाम से। एक और मकसद था विभिन्न समाचार पत्रं, पत्रिकाएं, न्यूज व फीचर एजेंसियां, वेबसाइट, न्यूज चैनल चाहें तो इस ‘वेब न्यूज पोर्टल’ की जानकारियों और खबरों का इस्तेमाल अपने लिए कर सकें। कितनी और कैसी खबरें बनती हैं इस दरगाह से। पिछले एक-दो महीने में यहां जम्मू-कश्मीर से पीडीपी की अध्यक्ष महबूबा मुफती, बांग्ला देश संसद की अध्यक्ष डॉ शीरिन शरमीन चौधरी, फिल्म निर्माता मुजफ्फर अली, अभिनेत्री करीना कपूर, शायर वसीम बरेलवी, अनवर जलालपुरी, आप पार्टी की राखी बिडला, दुनिया के सबसे बुजुर्ग चित्रकार सैयद हसन रजा, उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी, उनकी पत्नी सलमा अंसारी, अजय देवगन, क्रिकेटर अजहरूद्दीन, फिल्म अभिनेत्री मनीषा कोईराला आदि यहां जियारत के लिए आए। बाबा फरीद का चिल्ला जियारत के लिए खुला। मोहर्रम में कर्बला का मंजर और हाइदौस की परम्परा। ऐसी बहुत सी खबरें हैं जो पठनीय और जानकारी के लिए जरूरी होती हैं। वेब न्यूज पोर्टल का लिंक http://www.media4khwajagaribnawaz.com है। अभी तक कोई टीम नहीं है। एक अकेले पत्रकार, वकील और राजनीति व मीडिया विश्लेषक राजेंद्र हाड़ा का प्रयास। दस साल दैनिक नवज्योति, दस साल दैनिक भास्कर और अन्य अखबार-एजेंसियों का करीब 28 साल का पत्रकारिता व लेखन का अनुभव साथ है और विश्वास है, अकेले ही कुछ कर दिखाने का।

लेखक राजेंद्र हाड़ा अजमेर के जाने-माने पत्रकार और वकील हैं. उनसे संपर्क 09829270160 या 09549155160 या rajendara_hada@yahoo.co.in के जरिए किया जा सकता है.

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भड़ास संपादक यशवंत की जेल कथा ‘जानेमन जेल’ पढ़ने-पाने के लिए कुछ आसान रास्ते

भड़ास के संस्थापक और संपादक यशवंत सिंह के जेल-गमन की खुद यशवंत द्वारा लिखी गई कथा ‘जानेमन जेल’ ऑनलाइन स्टोरों से सीधे ऑर्डर करके घर बैठे प्राप्त की जा सकती है… नीचे दिए गए किसी आनलाइन स्टोर पर क्लिक करें और किताब बुक कर लें…

@Flipkart – http://bit.ly/jjflip

@Amazon.in – http://bit.ly/jjamazin

@ Infibeam – http://bit.ly/jjinfibeam

@Paytm – http://bit.ly/jjpaytm

@Hindi book Centre – http://bit.ly/jjhbc

उपरोक्त के अलावा ‘जानेमन जेल’ किताब इन दुकानों से भी प्राप्त की जा सकती है-

दिल्ली
1) गीता बुक सेंटर, गंगा ढाबा के पास, जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्ली
2) बुक कार्ट, शॉप नं 12, ताप्‍ती हॉस्टल के पास, जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्ली
3) रामबिलास न्यूज़ पेपर, मैगजीन सेलर एंड सप्लायर, रीगल बिल्डिंग के पीछे, इलाहाबाद बैंक के गेट के पास, कनॉट प्लेस, नई दिल्ली, फोन : 8588006266, 9650465603
4) आर पी न्यूज़ एजेंसी, F-14/1, कॉर्नर शालीमार पार्क, मॉडेल टाउन-2, दिल्ली, फोन : 9891784066

बिहार
1) मोहन बुक्स एंड न्यूज़ एजेंसी, सरकारी बस स्टैंड के पास, कोनिया माई मंदिर, छपरा (बिहार), फोन : 9334024390
उत्तराखंड
1) शुक्ला न्यूज़ एजेंसी, बल्लीवाला चौक, जीएमएस रोड, देहरादून-248001

राजस्थान
1) सर्वोदय बुक स्टॉल, 70-71, जसवंत बिल्डिंग, स्टेशन रोड, जोधपुर-342001, फोनः 0291-2653734, 2627991
2) एम एल स्टेशनर्स, 1, पालिका बाज़ार, स्टेशन रोड, बाड़मेर (राजस्थान), मोबाइल: +919460133709 ( एम एल भुतड़ा)

उत्तर प्रदेश
1) यूनिवर्सल बुक डिस्ट्रीब्यूटिंग कं., A-1, आरिफ चैम्बर्स-1, कपूरथला कॉमर्शियल कॉम्प्लेक्स, अलीगंज, लखनऊ, फोन : 0522-2324909, 3291259
2) यूनिवर्सल बुक हाउस, शॉप नं 17, विक्रम बिल्डिंग, लंका, वाराणसी
3) यूनिवर्सल बुक कंपनी, गोदौलिया, वाराणसी
4) सिंह एंड ब्रदर्स न्यूज़ पेपर एजेंट, विद्यापीठ रोड, वाराणसी-02
5) ज्ञानभारती, यूनिवर्सिटी रोड, इलाहाबाद-02
6) फेमस बुक स्टाल, लंका बस स्टैंड, गाजीपुर

आखिरी रास्ता…  अगर आप न तो आनलाइन बुक कर पा रहे हैं और न ही किसी दुकान पर जाकर खरीद सकने की स्थिति में हैं तो आपके लिए सबसे आसान रास्ता ये है.  आप अपने मोबाइल नंबर से अपना नाम, पता (पिन कोड- मोबाइल नंबर समेत) 9891219805 नंबर पर SMS या WhattsApp करके भी यह किताब प्राप्त कर सकते हैं. SMS या Whattsapp संदेश में किताब का नाम और प्रतियों की संख्या भी अवश्य लिखें.

हिंदयुग्म प्रकाशन द्वारा भड़ास के पाठकों के लिए जारी प्रेस रिलीज.

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पोर्न वेबसाइट बंद करना है तो दैनिक भास्कर, नवभारत टाइम्स जैसी तथाकथित समाचार वेबसाइट को भी इसके दायरे में लाएं

Vineet Kumar : अगर सरकार सचमुच पोर्न वेबसाइट बंद करना चाहती है तो दैनिक भास्कर, नवभारत टाइम्स जैसी तथाकथित समाचार वेबसाइट को भी इसके दायरे में लाए. लगभग सारे मीडिया संस्थानों की दूकानदारी इसी के बूते चलती है..त्वचा से जुड़ी समस्या से लेकर सौन्दर्य तक की अंडरटोन वही होती है जिससे सरकार के अनुसार हमारे संस्कार खत्म हो रहे हैं..पोर्न वेबसाइट को रेखांकित करने के साथ-साथ ऐसी वेबसाइट के भीतर की पोर्नोग्राफी एफेक्ट कंटेंट को बहस के दायरे में शामिल करना बेहद जरूरी है.

युवा मीडिया विश्लेषक विनीत कुमार के फेसबुक वॉल से.  उपरोक्त स्टेटस पर आए ढेर सारे कमेंट्स में से कुछ चुनिंदा यूं हैं….

Mithlesh Sharan Choubey अनेक अखबारों में यौन वर्धक और यौन बीमारियों के नीम हकीमी विज्ञापन इस कदर अश्लील होते हैं कि पोर्न साइट्स का जैसे लघु संस्करण ही हो।

Ram N Kumar Just to give you a persective out of every 1 million page views about 40 percent content consumption online are related to women and/or sex/beauty/lifesytyle related stuffs. On an average these media sites have 200-400 million plus page views per month.

Umesh Kumar हिन्दुस्तान के खेल पन्ने पर विदेशी खिलाडियों की माशूकाओं की लघु वस्त्र विन्यास वाली फोटो नियमित रुप से देना भी सोफ्ट पोर्न नीति का ही एक हिस्सा है…जो यौनिक भावनाओं की तुष्टि का ही प्रयास है…जिस पंजाब केसरी से ऐसे फोटो छपने की शुरूआत हुई थी, आज वह दौड में बहुत पीछे रह गया है और कभी साहित्य और विचारों को स्थान देने वाले अखबार आज चटपटी थाली परोस रहे हैं…

Ram N Kumar Bollywood contributes another major chunk for content contribution. I can give actual data if Vineet Kumar bhai promises me a meal.

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तीन बड़ी आनलाइन दुकानों के बाद होमशाप18 ने भी किताबें बेचना बंद कर दिया

Shailesh Bharatwasi : किताबों की ऑनलाइन बिक्री के लिए बुरी ख़बरों के आने का दौर अभी थमा नहीं है। इस साल के शुरुआत से अब तक 4 बड़ी ऑनलाइन दुकानों ने किताबें बेचना बंद कर दिया है। ईबे, स्नैपडील, बुकअड्डा से किताबों की आलमारियाँ तो ग़ायब हो ही गई थीं, इस साल धनतेरस के दिन से होमशॉप18 ने भी किताबें बेचना बंद कर दिया। हम पाठकों के पास फ्लिपकार्ट, इंफीबीम और अमेज़ॉन जैसे गिने-चुने विकल्प ही बचे रह गए हैं। जिस तेज़ गति से ऑनलाइन मंडियों से किताबों का हिस्सा छिन रहा है, उससे तो यही लगता है कि ये कुछ विकल्पों के भी खत्म होने में ज़्यादा वक़्त शेष नहीं है। विशेषरूप से हिंदी किताबों के पाठकों के लिए किताबों की इन ऑनलाइन दुकानों ने जिस तरह से उम्मीद की फ़सल बोयी थी, लगता है उनको भी बुरे वक़्त का पाला मारता जा रहा है।

किताबों की ऑनलाइन बिक्री के लिए बुरी ख़बरों के आने का दौर अभी थमा नहीं है। इस साल के शुरुआत से अब तक 4 बड़ी ऑनलाइन दुकानों ने किताबें बेचना बंद कर दिया है। ईबे, स्नैपडील, बुकअड्डा से किताबों की आलमारियाँ तो ग़ायब हो ही गई थीं, इस साल धनतेरस के दिन से होमशॉप18 ने भी किताबें बेचना बंद कर दिया। हम पाठकों के पास फ्लिपकार्ट, इंफीबीम और अमेज़ॉन जैसे गिने-चुने विकल्प ही बचे रह गए हैं। जिस तेज़ गति से ऑनलाइन मंडियों से किताबों का हिस्सा छिन रहा है, उससे तो यही लगता है कि ये कुछ विकल्पों के भी खत्म होने में ज़्यादा वक़्त शेष नहीं है। विशेषरूप से हिंदी किताबों के पाठकों के लिए किताबों की इन ऑनलाइन दुकानों ने जिस तरह से उम्मीद की फ़सल बोयी थी, लगता है उनको भी बुरे वक़्त का पाला मारता जा रहा है।

हिंदयुग्म प्रकाशन के सीईओ शैलष भारतवासी के फेसबुक वॉल से.

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