मोहम्मद साहब को खुलेआम अपमानित करने वाले लखनऊ के अखबार पर सपा सरकार मेहरबान

अखिलेश सरकार मुसलमानों के प्रति कितना उदार भाव रखती है, यह ‘निष्पक्ष प्रतिदिन’ अखबार को देख कर समझा जा सकता है. यह वही अखबार है जिसने लखनऊ में सबसे पहले हिन्दू महासभा के अध्यक्ष कमलेश तिवारी का मोहम्मद साहब को लेकर दिया गया बयान छापा था जिसके बाद पूरे देश में हंगामा मच गया था. सैकड़ों मुस्लिम उलेमाओं ने कल सूचना विभाग में इस अखबार का घोषणा पत्र रद्द करने और इसके मालिक के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की मांग की.

अपनी इन्ही हरकतों के चलते पहले भी इस अखबार का घोषणापत्र रद्द किया जा चुका है. इस अखबार के मालिक जगदीश नारायण शुक्ल हैं जो कांग्रेस के नेता भी हैं और सीतापुर से चुनाव लड़ चुके हैं. मजे की बात यह है कि इनके जिस अखबार ने मोहम्मद साहब के खिलाफ बेहद शर्मनाक बयान को प्रकाशित किया है, उस अखबार को सूचना विभाग ने एक साल में करोड़ों का विज्ञापन दे दिया. कल सूचना विभाग पहुंचे लखनऊ के जाने माने उलेमाओं ने सूचना विभाग के अफसरों से जब सवाल किया कि इस कांग्रेसी नेता को क्या करोड़ों रुपया इसलिए दिए गए थे कि वो हजरत साहब की शान में गुस्ताख़ी करने की हिम्मत कर सकें, तो इस सवाल का जवाब किसी को देते नहीं बना और सबको सांप सूंघ गया. बहरहाल अब यह मामला बहुत तूल पकड़ गया है.

 

ज्ञात हो कि जगदीश नारायण जनहित याचिकाओं का खेल जमकर खेलते हैं. उनका कई तरह का कारोबार है. अफसर लोग शुक्ल जी की कलाबाजी से डलते कांपते हैं. इसी कारण उनका अखबार दिनोंदिन लाभ कमाने वाला होता गया. मुसलमानों की हितैषी कहे जाने वाली सपा सरकार अखबार के मुस्लिम विरोधी रवैये पर घनघोर चुप्पी साधे है. हजरत साहब के खिलाफ आपत्तिजनक बात लिखने के कारण जगदीश नारायण शुक्ल और उनके अखबार निष्पक्ष प्रतिदिन के खिलाफ भले ही अभी लोगों में गुस्सा है लेकिन क्या यह गुस्सा कोई निर्णायक मुकाम हासिल कर सकेगा, इसमें संदेह है. वजह है सरकार का शुक्ल को संरक्षण. 

हालांकि अखबार के खिलाफ जिस तरह से प्रदेश भर के मुस्लिम सड़कों पर उत्तर रहे हैं उसने पूरी सरकार को कंपकपी लग चुकी है. सपा को अगले चुनाव में मुस्लिम वोटों का सहारा है. मगर अब इस बात का जवाब किसी के पास नहीं है कि ऐसा अखबार जो पूरे मुस्लिम समाज की भावनायें आहत कर रहा हो, उसको करोड़ों का विज्ञापन क्यों दिया गया और अब जब एक खबर के कारण पूरे प्रदेश का माहौल बिगड़ रहा है तो उसको बख्शा क्यों जा रहा है?

अखबार में प्रकाशित मोहम्मद साहब को लेकर आपत्तिजनक बयान और उलेमाओं के प्रदर्शन की तस्वीर देखने के लिए नीचे क्लिक करें>



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