सुश्री रितु भंडारी Ritu Bhandari जी,
आप अपने करियर में खूब आगे बढ़ें, सफलता की नई ऊँचाइयाँ प्राप्त करें और बड़ा नाम बनाएं, इससे किसी को कोई आपत्ति नहीं है। हम आपको शुभकामनाएँ देते हैं। मगर आपको उन पेशेवर और अनुबंधीय दायित्वों का सम्मान करना चाहिए जिन्हें आपने स्वयं स्वीकार किया था।
आप बिना निर्धारित नोटिस पीरियड पूरा किए संस्थान छोड़कर चली गईं। आपने नोटिस अवधि का पालन नहीं किया, जबकि उस अवधि तक का वेतन भी प्राप्त किया। कंपनी की ओर से आपसे कई बार संपर्क करने का प्रयास किया गया, आपको फोन किए गए, ईमेल भेजे गए, लेकिन उनका कोई उत्तर नहीं मिला।

आज आप सार्वजनिक रूप से कह रही हैं कि आप अपनी बात रखेंगी और चुप नहीं रहेंगी। हम इसका स्वागत करते हैं। आपको अपनी बात रखने का पूरा अधिकार है। लेकिन जब संस्थान आपकी बात सुनना चाहता था, तब आपने संवाद का कोई माध्यम नहीं अपनाया।
यदि आप वास्तव में पेशेवर नैतिकता और कार्यस्थल की मर्यादाओं में विश्वास रखती हैं, तो आपसे अपेक्षा है कि या तो अपने हस्ताक्षरित सेवा अनुबंध के अनुसार नोटिस पीरियड पूरा करें और विधिवत रिलीविंग प्रक्रिया पूरी करें, अथवा अनुबंध में निर्धारित शर्तों के अनुसार नोटिस अवधि के एवज में देय राशि तथा संस्थान को हुए नुकसान की भरपाई करें।
इसके विपरीत, बिना तथ्यों और दस्तावेज़ों के आधार पर, महिला होने के नाते से विक्टिम कार्ड खेलने से कुछ होने वाला नहीं है।
कंपनी अपने अधिकारों और उपलब्ध दस्तावेज़ों के आधार पर सक्षम न्यायालय के समक्ष उचित कानूनी कार्यवाही करने के लिए स्वतंत्र है और आवश्यक होने पर वह ऐसा करेगी भी।
यह विषय किसी व्यक्ति विशेष, महिला या पुरुष होने का नहीं है। यह विषय केवल अनुबंध, उत्तरदायित्व, पेशेवर आचरण और कानूनी दायित्वों का है। इसलिए इस पूरे मामले का निर्णय भावनाओं से नहीं, बल्कि तथ्यों, दस्तावेज़ों और कानून के आधार पर होगा।
आपको अपनी बात रखने का पूरा अधिकार है, और हमें भी सत्य तथ्यों को सार्वजनिक करने तथा अपने वैधानिक अधिकारों की रक्षा करने का पूरा अधिकार है।
— अतुल अग्रवाल
प्रबंध निदेशक एवं प्रधान संपादक
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