ऋषि की तरह थे बजरंग शरण तिवारी, नेता या सत्ता से कभी कोई अपेक्षा नहीं की : वीर विक्रम बहादुर मिश्र

: वरिष्ठ पत्रकार बजरंग शरण तिवारी के निधन पर श्रद्धांजलि : उपजा व लखनऊ जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन ने आयोजित की श्रद्धाजलि सभा :  लखनऊ। आपातकाल में अहम भूमिका निभाने वाले राष्ट्रवादी विचारों से ओतप्रोत वयोवृद्ध पत्रकार बजरंग शरण तिवारी के निधन पर उपजा के प्रान्तीय कार्यालय में लखनऊ जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन द्वारा शनिवार को एक सभा का आयोजन कर दो मिनट का मौन धारण कर मृतात्मा के प्रति श्रद्धांजलि अर्पित की गई।  उल्लेखनीय है कि वयोवृद्ध पत्रकार बजरंग शरण तिवारी का गत् बुधवार को लखनऊ स्थित संजय गांधी स्नाकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान में देर शाम इलाज के दौरान निधन हो गया। वह 92 वर्ष के थे।

पी0टी0आई0 के ब्यूरो प्रमुख प्रमोद गोस्वामी ने तिवारी के निधन को पत्रकारिता जगत में अपूर्णनीय क्षति बताया और कहा कि मूल्यों और विचारों की पत्रकारिता करने वाले एक और सदस्य का जाना हम सब के लिए असहनीय है।  वरिष्ठ पत्रकार अजय कुमार ने पत्रकार बजरंग शरण तिवारी के दौर की पत्रकारिता के अतीत की यादें ताजा करते हुए तिवारी से जुडे अपने संस्मरण सुनाये। अजय कुमार ने बताया कि तिवारी आपातकाल के समय 26 जून 1975 को तरुण भारत समाचार पत्र में कार्यरत थे और वहीं से उन्हें जेल भेजा गया। पं. दीनदयाल उपाध्याय के साथ प्रसिद्ध पत्रिका राष्ट्रधर्म के संस्थापकों में से वे एक थे। इसी पत्रिका के संपादक के रूप में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी ने कार्य किया।

उपजा के प्रदेश उपाध्यक्ष सर्वेश कुमार सिंह ने बजरंग शरण तिवारी के प्रति श्रद्धांजलि व्यक्त करते हुए कहा कि बजरंग शरण तिवारी पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई के साथ आपातकाल में संघर्षरत रहे। उन्होंने तरुण भारत, राष्ट्रधर्म जैसी महत्वपूर्ण पत्रिकाओं के संस्थापकों में रहे, उन्होंने इन पत्रिकाओं में समय-समय पर संपादन व विशेष भूमिकाएं निभाई। शुरू से क्रांतिकारी स्वभाव के बजरंग शरण ने राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से जुड़कर देश के उत्थान में अहम योगदान दिया।

वरिष्ठ पत्रकार सुनील पावगी ने श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि तिवारी बचपन से ही क्रांतिकारी स्वभाव के थे । उन्होने बताया कि  स्व. बजरंग शरण कलाकुंज पत्रिका से भी लंबे समय तक जुड़े रहे। अपने युवावस्था से हिंदी भाषा के लिए कार्य करने वाले स्व. बजरंग राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से जुड़े रहे।

वरिष्ठ पत्रकार वीरविक्रम बहादुर मिश्र ने बजरंग शरण तिवारी को एक ऋषि की संज्ञा दी। उन्होने कहा कि अटलबिहारी बाजपेई जैसी शख्सियत के करीबी होने के बावजूद तिवारी ने उनसे या सत्ता से कोई अपेक्षा नही की।  पूर्व सूचना आयुक्त वीरेन्द्र सक्सेना ने बताया कि तिवारी अपने पीछे अपने दो पुत्र एडवोकेट कृष्ण कुमार तिवारी व वरिष्ठ पत्रकार प्रदुम्न तिवारी समेत भरापूरा परिवार छोड़ गए हैं। प्रद्युम्न तिवारी ने उनके साथ अमर उजाला में काम किया था।

उपजा की लखनऊ इकाई लखनऊ जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अरविन्द शुक्ला ने तिवारी के निधन पर गहरा दुखः व्यक्त करते हुए शोक संतप्त परिवार के प्रति अपनी संवेदनाए प्रकट की है और ईश्वर से प्रार्थना की है कि वह दुःख की इस घडी में परिजनों को सांन्त्वना प्रदान करे। इस मौके पर एल0जे0ए0 के महामंत्री के0के0वर्मा, उपाध्यक्ष सुशील सहाय, भरत सिंह, रत्नाकर मौर्य, कोषाध्यक्ष मंगल सिंह, मंत्री अनुराग त्रिपाठी, एस0बी0सिह, विकास श्रीवास्तव, सहित वरिष्ठ पत्रकार प्रभाकर शुक्ल, श्रीधर अग्निहोत्री , मुकेश श्रीवास्तव , उपजा के प्रदेश मंत्री  सुनील टी त्रिवेदी, पत्रकार तारकेश्वर मिश्र, शैलेन्द्र श्रीवास्तव, रीता त्रिवेदी सहित अनेको पत्रकारो ने  वरिष्ठ पत्रकार बजरंग शरण तिवारी के निधन पर गहरा दुखः व्यक्त किया और पुष्प श्रद्धांजलि अर्पित की।

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