ब्रह्माकुमारी संगठन के पैसे से माउंट आबू में मीडिया चिंतन

ब्रह्माकुमारी संगठन हर वर्ष मीडिया पर अपनी पकड़ बनाए रखने के लिए देश भर से पत्रकारों को माउंट आबू में आमंत्रित करता है। जमकर सेवा सत्कार होती है। इस तरह मीडिया को अपने अपने पाले में पालने पोषने के और भी कई तरह के जतन देश में जारी हैं। पत्रकारों को ऐश कराकर अपनी बातें कहलवाने, प्रसारित कराने का ये वहीं तरीका है, जो प्रधानमंत्रियों, मुख्यमंत्रियों, राजनेताओं, अफसरशाहों आदि के साथ सरकारी पैसे पर आयोजित यात्राओं पर होता है।

तो इन दिनो ब्रह्माकुमारी संगठन के पैसे से पहाड़ों की सैर और मीडिया चिंतन दोनो एक साथ चल रहा है। नैतिकता का पाठ पढ़ाया जा रहा है। गौरतलब है कि ब्रह्माकुमारी संगठन को अपना मठ चलाने के लिए दुनिया भर से अकूत सहयोग राशि मिलती है। संगठन प्रतिवर्ष पत्रकारों की तरह डॉक्टरों, वकीलों, शिक्षकों आदि विविध वर्गों, समुदायों को अपने प्रायोजित पर्यटन से उपकृत करता रहता है। 

मीडिया सम्मेलन के दूसरे दिन मीडियाकर्मियों के खुले सत्र में भोपाल पत्रकार मधुकर द्विवेदी ने कहा कि गलाकाट व्यवसायिक प्रतिस्पर्द्धा के चलते जहां व्यवसायिक हितों वाले घरानों ने सैंकड़ों टीवी चैनल व समाचार पत्र बीते कुछ वर्षो में आरंभ किए। इसे देखते हुए मीडियाकर्मियो की नैतिक व व्यवसायिक जिम्मेवारी और भी बढ़ गई है।

मीडियाकर्मियों को सकारात्मक पत्रकारिता के प्रति रूझान को प्राथमिकता देने में और कारगर कदम उठाने चाहिए। मीडिया पर जब भी अंकुश लगाने का प्रयास किया गया। तब-तब इसके परिणाम प्रतिकूल आए हैं। जरूरत है कि मीडिया स्वविवेक के आधार पर खुद ही नियम बनाए व उसका जिम्मेवारी से पालन करे।

मध्यप्रदेश सरकार के पूर्व अतिरिक्त सूचना व जनसंपर्क निदेशक एके मिश्रा ने कहा कि वर्तमान चुनौतियों का सामना करने के लिए मीडिया स्वनियमन के माध्यम से आत्मनियमन के सिद्धांत पर खरे उतरने का प्रयास करें। वरिष्ठ पत्रकार प्रो. कमल दीक्षित ने कहा कि मूल्यों के बिना सकारात्मक व स्थाई विकास की उम्मीद रखना बेमानी होगा। आंधज्योति दैनिक साहित्य संपादक सीवीएल प्रसाद ने कहा कि मीडिया से लोगों की अपेक्षा बढ़ रही हैं।

मीडिया को भी समाचार प्रकाशन में मूल्य निर्घारित करने चाहिए। गोरखपुर प्रेस क्लब अध्यक्ष व जनसंदेश संपादक अशोक चौधरी, मध्यप्रदेश जनसंपर्क विभाग उपनिदेशिका उमा भार्गव ने विचार व्यक्त किए।

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Comments on “ब्रह्माकुमारी संगठन के पैसे से माउंट आबू में मीडिया चिंतन

  • Mahipal Singh says:

    As being a speaker ofone of the sessions of Brahmkumaris’ seminar of ‘PROMOTING YOGA & SPIRITUALITY :ROLE OF MEDIA’ and being a participant also,i totally disagree to the above article.Right now I am gonna share what I’ve experienced in their seminar.Me as a person who belongs to the media in this seminar experienced people and things like never before,I went to the Brahmkumari’s ashram on my own expenditure of traveling,but yes the seminar sessions were free of cost to me,but the whole reality comes in front of you when you attends its sessions. What I’ve learned after attending seminar is that,this whole brahmkumari organization works in the welfare of the society beyond any religion beyond any class which I don’t see in any other religious organizations. And more importantly women takes the charge in this organization which is quite rare to see.So it is not fair to be judgmental on things which you don’t even have proper knowledge of.So first let’s understand what’s this whole seminar which I’ve attended was all about,the seminar’s topic was ‘PROMOTING YOGA AND SPIRITUALITY:ROLE OF MEDICAL’ so the topic as itself says that the understanding the role of media in promoting yoga and spirituality and basically we’ve learn this only.So I respectfully disagrees to this article.
    Thank you 🙂

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  • मिथिलेश says:

    ब्रह्माकुमारी बहने बहोत अच्छी और चरित्रवान होती है उन्हें कोई भी अकूत संपत्ति नही देता है उनके अनुयायी स्वतः दान देते है किसी पर कोई दबाव नही होता है

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