बस घोटाला : मीडिया क्यों नहीं बता रहा कि स्कैनिया का भारत में पार्टनर कौन था?

Girish Malviya-

बिग बिग ब्रेकिंग… यह जो शख्स आपको मोदी जी को गुलदस्ता देते नजर आ रहे हैं आप जानते हैं ये कौन हैं ? ये हैं SVLL के मालिक रूपचंद वैद. अब दिल थाम के पढ़िए ओर जान लीजिए कि यह रूपचंद जी जिस फर्म के मालिक रहे हैं वह स्वीडिश बस कम्पनी स्कैनिया की भारतीय पार्टनर रही है.

स्कैनिया के घोटाले से संबंधित जो खबरें आ रही हैं उसमें परिवहन मंत्री गडकरी पर निशाना साधा जा रहा है लेकिन हमारा मीडिया यह तो बता ही नहीं रहा है कि स्कैनिया का भारत में पार्टनर कौन था. यह सवाल तो मीडिया को सबसे पहले उठाना चाहिए था क्योंकि भारतीय पार्टनर के जरिए ही तो रिश्वत दी गई थी, ऐसा ही स्कैनिया के टॉप ऑफिशियल का कहना है.

दरअसल कोई इस पार्टनर का नाम डिस्क्लोज नहीं करेगा क्योंकि यह भी एक गुजराती उद्योगपति है. मीडिया में कोई मोदी जी पर सीधे उँगली उठाने की हिम्मत ही नहीं करता क्योंकि उसे यह स्पष्ट दिशा निर्देश है कि चाहे कुछ भी हो जाए मोदी की छवि को बिल्कुल साफ सुथरा बना कर रखना है.

अब इस फ़ोटो की कहानी जानने से पहले स्कैनिया की कहानी को संक्षिप्त में समझ लीजिए …. स्कैनिया बस एक सर्वसुविधायुक्त बस है, जैसी बहुत से प्रदेशों में वॉल्वो बस चल रही है. यह भी उतनी ही लग्जरी ओर उसी तरह की बस है लेकिन इसमें कस्टमाईजेशन और भी अधिक किये जा सकते हैं.

कुछ दिनों पूर्व तीन बड़े विदेशी मीडिया हाउस में एक रिपोर्ट प्रकाशित हुई. यह रिपोर्ट सबसे पहले स्वीडन के न्यूज़ चैनल SVT ने प्रकाशित की. इस रिपोर्ट में कहा गया है कि स्वीडिश मूल की कम्पनी स्कैनिया ने 2013 से 2016 तक भारत में सात राज्यों में कांट्रेक्ट हासिल करने के लिए रिश्वत दी.

स्कैनिया कंपनी के प्रवक्ता ने यह आरोप स्वीकार किया. उन्होंने बताया कि कम्पनी में इसकी जांच 2017 में शुरू की थी जिसमें सीनियर प्रबंधन समेत कई कर्मचारियों की गलती पाई गई. कंपनी के प्रवक्ता के मुताबिक, ‘इसमें रिश्वत देने, बिजनस पार्टनर के जरिए रिश्वत और गलत प्रतिनिधित्व के आरोप शामिल थे।’

स्कैनिया के CEO हेनरिक हेनरिकसन ने SVT को बताया, ‘हम नासमझ हो सकते हैं लेकिन हमने ऐसा किया। हम भारत में बड़ी सफलता हासिल करना चाहते थे लेकिन हमने जोखिम का सही आकलन नहीं किया।’ हेनरिकसन ने बताया कि भारत में गलती कुछ लोगों ने की थी जिन्होंने कंपनी छोड़ दी है और जितने बिजनस पार्टनर इससे जुड़े थे, उनके कॉन्ट्रैक्ट रद्द कर दिए गए हैं।

साफ है कि कोई विदेशी कम्पनी सीधे तो किसी को रिश्वत देगी नहीं. जिसने उसके साथ कोलोब्रेशन किया है उसके कहने पे ही रिश्वत दी जाएगी.

बस यही बात भारत का मीडिया दबा रहा है. अब सूरत की ट्रांसपोर्ट कम्पनी के बारे में जान लीजिए. इस तस्वीर में जो सज्जन मोदी जी को गुलदस्ता भेट कर रहे हैं वे हैं सिद्धि विनायक लॉजिस्टिक लिमिटेड (SVLL) के सूरत स्थित व्यवसायी रूप चंद बैद। अप्रैल 2014 में एक व्यापार से सम्बंधित प्रकाशन में छपी एक रिपोर्ट में इसे ‘देश की सबसे आगे बढ़ती हुई परिवहन कंपनियों में से एक’ बताया जा रहा था.

वर्ष 2014 में कंपनी ने अपना वार्षिक कारोबार कुल 1,500 करोड़ का किया था और 80 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर्ज की थी। 2013 की शुरुआत में ही एसवीएलएल ने घोषणा की कि वह अंतरराष्ट्रीय लक्जरी बस निर्माता कपनी ‘स्कैनिया’ के साथ समझौता कर रही है और इसके तहत वह अपनी बसों में इन-हाउस टॉयलेट और पैंट्री और शानदार सुविधाएँ जैसे पर्सनल एलसीडी स्क्रीन, यूएसबी कॉम्पैटिबिलिटी और सेनहाइज़र हेडफ़ोन साथ ही चार्ज करने के लिए मोबाइल/लैपटॉप पॉइंट्स और वाइफ़ाइ कनेक्शन उपलब्ध कराएगी।

आपको 2014 के आम चुनाव में नरेंद्र मोदी के प्रचार अभियान याद होंगे. दरअसल SVLL मोदीजी के लिए 3डी प्रोजेक्शन तकनीक से लैस विशेष वीडियो ट्रकों की आपूर्ति कर रहे थे। इसी कम्पनी के ट्रकों का उपयोग करते हुए, मोदी जी ने अपनी छवि के होलोग्राफ़िक अनुमानों के माध्यम से एक साथ कई स्थानों पर अभियान रैलियों को सम्बोधित कर दुनिया का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया था।

लेकिन 2015 आते आते कम्पनी का दम फूलने लगा ओर वह देश की एक बड़ी डिफॉल्टर कम्पनी बन गयी. ‘इंडिया टुडे’ द्वारा 2 फ़रवरी, 2015 को एक रिपोर्ट प्रकाशित की गई थी जिसमें बताया गया कि एसवीएलएल बैंक ऑफ़ महाराष्ट्र का सबसे बड़ा डिफ़ल्टर है। रिपोर्ट में आरोप लगाया गया कि बैंक के पास कई अनियमितताओं की जानकारी होने के बावजूद बैंक के वरिष्ठ प्रबंधन ने कंपनी के ऋण के खातों को एनपीए के रूप में टैग करने और कंपनी के प्रबंधन को स्वेच्छा से डिफ़ाल्टर घोषित होने से बचा लिया. (यह फोटो भी उसी रिपोर्ट से लिया गया है)

अब आपको शायद समझ आए कि वह बड़े बड़े मित्र उद्योगपति कौन हैं जिनके लोन राइट ऑफ कर दिए जाते हैं. 2015 में इंडिया टुडे ओर 2019 में अबीर दासगुप्ता ने न्यूज़ क्लिक में इस मामले को उठाया था. विस्तार से इस पूरे मामले को आप समझेंगे तो आप के हाथों से तोते उड़ जाएंगे.

दरअसल SVLL के मालिक रूपचंद वैद ने अपने पोलिटिकल कनेक्शन का भरपूर फायदा उठाया. जब बैंक ऑफ महाराष्ट्र ने चिठ्ठी लिखकर SVLL से अपने बकाया राशि के भुगतान की मांग की तो उन्होंने जवाब देते हुए कहा कि कि वह मोदी जी के 3डी अभियान के लिए अति विशिष्ट वाहनों की तैयारी में व्यस्त हैं जिन्हे नरेंद्रभाई मोदी और उनकी टीम इस्तेमाल करने वाली है.

2015 में इंडिया टुडे ने अपनी रिपोर्ट के आखिरी हिस्से में लिखा है- Sources within BoM told IndiaToday that “whenever bank officials communicated or met with SVLL management, they have been saying, we are not running away anywhere, we will return your money soon. In fact, SVLL’s senior officials always boost off of having political linkages with state’s ruling party and some senior leaders.”

साफ है कि दाल में काला नहीं है, पूरी दाल ही काली है…

मूल खबर-

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