आज की शब्दचर्चा का विषय है फ़्रांस के एक शहर का जिसे हिंदी में दो तरह से लिखा जाता है – कांस और कान। अंग्रेज़ी में इसकी स्पेलिंग है CANNES।
Cannes में हर साल एक अंतरराष्ट्रीय फ़िल्म महोत्सव आयोजित किया जाता है जिसे हिंदी मीडिया ‘ठीकठाक’ कवर करता है हालाँकि अधिकतर वेबसाइटों और अख़बारों में आपको महोत्सव में दिखाई जा रही फ़िल्मों की जानकारियाँ या समीक्षाएँ कम ही मिलेंगी। मिलेंगी तो बॉलिवुड अभिनेत्रियों की रेड कार्पिट पर खिंचवाई गई तस्वीरें। और इसमें ऐश्वर्या राय तो होंगी ही होंगी।
ख़ैर, हमें इन तस्वीरों से मतलब नहीं। हमें तो मतलब है इस शहर के नाम से जिसे दो तरह से लिखा जा रहा है। हिंदुस्तान, अमर उजाला, NDTV वग़ैरह उसे ‘कान’ लिख रहे हैं तो भास्कर, जागरण और नवभारत टाइम्स ‘कांस’।


अब आप जानना चाहेंगे कि इन दोनों में से सही कौनसा है। तो जवाब है – दोनों में से कोई नहीं।
‘कांस’ इसलिए ग़लत है कि Cannes में s साइलंट है। सो ‘कांस’ के सही होने का तो प्रश्न ही नहीं उठता। लेकिन कान भी सही नहीं है। क्योंकि फ़्रेंच में इसके दो उच्चारण हैं – कैन और कैन्अ । आम तौर पर उच्चारण है कैन लेकिन स्थानीय लोग कैन्अ बोलते हैं।

अंग्रेज़ी में भी इसके दो उच्चारण हैं कैन और कान। हिंदी मीडिया में जहाँ कुछ समझदार और पढ़े-लिखे संपादक और पत्रकार हैं/थे, उन्होंने ‘कान’ उच्चारण को अपना लिया है। और जहाँ के संपादक और पत्रकार पढ़ने-लिखने-सीखने में अधिक रुचि नहीं रखते, वे ‘कांस’ लिख रहे हैं।
जैसा कि मैंने पहले कहा, इसका फ़्रेंच उच्चारण कैन और स्थानीय उच्चारण कैन्अ है। कैन्अ लिखना हिंदी में संभव नहीं क्योंकि ऐसे शब्द लिखने की परंपरा और सुविधा हिंदी में नहीं है जहाँ अंत में अलग से ‘अ’ ध्वनि हो। इसलिए हमारे पास दो ही विकल्प बचते हैं – कैन और कान। वैसे तो कैन ही मूल उच्चारण के ज़्यादा क़रीब है लेकिन कान के पक्ष में बात यह है कि यह हिंदी मीडिया के अच्छे-ख़ासे हिस्से में लिखा जा रहा है।
कांस शत-प्रतिशत ग़लत है।
ये भी पढ़ें…



