CBI ने ‘अपनी’ ही रिपोर्ट को फर्जी पाया पर 11 साल से न पता लगा पा रही कि फर्जीवाड़ा किया किसने!

सीबीआई ने संभवत पहली बार अपनी ही रिपोर्ट के फर्जी होने की एफआईआर दर्ज की। लेकिन 11 साल बाद भी वह पता ही नहीं लगा पा रही यह फर्जीवाड़ा किया किसने? दरअसल मामला मुलायम सिंह यादव, अखिलेश यादव और उनके परिवार के सदस्यों के खिलाफ सीबीआई द्वारा दर्ज आय से अधिक संपत्ति का है।

2009 में कुछ मीडिया संस्थानों में खबर आई कि सीबीआई ने यादव परिवार के खिलाफ आरोपों में कोई तथ्य नहीं पाए और सुप्रीम कोर्ट में चल रहे मुकदमे को बंद करने की गुजारिश की। लेकिन सीबीआई ने इस तरह की कोई रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में दाखिल ही नहीं की थी।

इसलिए 16 मार्च 2009 को अज्ञात लोगों के खिलाफ सीबीआई ने स्वतःस्फूर्त एफआईआर (नंबर RC/DST/2009/S/0001) दर्ज की। सभी संबंधित सीबीआई अफसरों और खबर छापने या दिखाने वाले पत्रकारों, संपादकों से बात की।

साढ़े तीन साल तक चली छानबीन के बाद सीबीआई ने 29 दिसंबर 2012 को विशेष सीबीआई कोर्ट के सामने फाइनल रिपोर्ट दाखिल की। इस रिपोर्ट में साफ तौर पर माना कि डीआईजी तिलोत्तमा वर्मा के दस्तखत से बनाई गई 14 पेज की क्लोजर रिपोर्ट फर्जी थी। साथ ही यह भी कहा कि यह नहीं पता लगा पाई यह फर्जी रिपोर्ट बनाई किसने।

अधिकतर संपादकों ने अपने बयान में कहा कोई अज्ञात व्यक्ति उनके दफ्तर में एक सादे लिफाफे में यह रिपोर्ट दे गया था। चूंकि सीबीआई का लेटर हेड था, डीआईजी के हस्ताक्षर थे और मोहर भी, इसलिए उन्होंने इसे विश्वसनीय माना। इसलिए खबर लिखी और दिखाई गई।

आठ साल से तारीख पर तारीख

परेशानी यह भी है कि जांच अधिकारी के बयान के बिना यह केस बंद नहीं हो सकता। पिछले आठ साल से इस केस में तारीख पर तारीख लगती जा रही है, लेकिन सीबीआई के जांच अधिकारी अदालत के सामने पेश नहीं हो रहे। कभी गांव चले जाते हैं तो कभी उनकी तबीयत खराब हो जाती है। इस बीच कई जांच अधिकारी या तो स्थानांतरित हो गए या फिर रिटायर। दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट में अगली तारीख 27 फरवरी है।

इसलिए लग रहा है डर

सीबीआई के एक पूर्व अधिकारी का कहना है कि जांच अधिकारी इसलिए कोर्ट के सामने पेश नहीं हो रहे क्योंकि उन्हें बताना पड़ेगा फर्जी रिपोर्ट किसने बनाई और यह फर्जीवाड़ा करने वालों को वह क्यों नहीं पकड़ पा रहे हैं।

फर्जी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में भी

मजे की बात यह है पिछले वर्ष 8 अप्रैल को मुलायम सिंह यादव ने इसी फर्जी क्लोजर रिपोर्ट को सुप्रीम कोर्ट में दाखिल कर आय से अधिक संपत्ति का केस खारिज किए जाने का आग्रह किया है क्योंकि उनके खिलाफ सीबीआई के पास कोई सबूत है ही नहीं।

इसलिए दबी रही खबर

सीबीआई ने अपनी रिपोर्ट विशेष सीबीआई अदालत में जमा की थी। इसलिए यह अभी तक सामने नहीं आई थी। चूंकि यह एक आपराधिक मामला था इसलिए इसके दस्तावेज किसी तीसरे व्यक्ति को नहीं दिए जा सकते। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर इनकी प्रमाणित प्रति आय से अधिक संपत्ति केस के शिकायतकर्ता विश्वनाथ चतुर्वेदी को हाल ही में दी गई।

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