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सियासत

‘कर्ज़ लो घी पियो’ के दर्शन के समय आयकर विभाग न था!

JP Singh : चार्वाक दर्शन का मूल मंत्र है ‘कर्ज़ लो घी पियो’। नव उदारवाद या आर्थिक उदारीकरण का भी मूलमंत्र कमोवेश यही है। अब कर्ज़े पर आधारित विकासवाद में कर्ज़े पर कर्ज़ा, नए काम पर नए काम, देखने सुनने में बड़ा अच्छा लगता है। कहा भी जाता है 5 लाख या 50 लाख से काम शुरू किया था, आज 5 हज़ार करोड़ या 50 हज़ार करोड़ के टर्न ओवर की कम्पनी बन गयी है। लेकिन जैसे ही बैंकों के कर्ज़ों के एनपीए का मामला सामने आता है या फिर आयकर विभाग की वक्र दृष्टि उस कम्पनी पर पड़ जाती है तो उसके बाद अनंत उत्पीड़न, वसूली जेल से लेकर देश छोड़ने, लुक आउट नोटिस, प्रत्यर्पण से होते हुए आत्महत्या या हार्टअटैक से मौत तक मामला जा पहुंचता है।

दरअसल कर्ज़ा लो घी पियो के बीच आयकर, सरकार, बैंक वसूली तंत्र आ जाता है जिसकी परिकल्पना न तो चार्वाक ने की थी न ही नव उदारवाद के जनकों ने। इसी तरह के दुष्चक्र में फंसकर कर्नाटक के पूर्व सीएम एसएम कृष्णा के दामाद और कैफे कॉफी डे (सीसीडी) के फाउंडर वीजी सिद्धार्थ ने सुसाइड कर लिया। वे 29 जुलाई की रात से लापता थे और 31 जुलाई को तड़के उनका शव नेत्रावती नदी से मिला।

लापता होने से पहले सिद्धार्थ ने अपने कर्मचारियों को एक चिट्ठी लिखी थी। इस चिट्ठी में उन्होंने कहा कि वो हार गए हैं। इसके साथ ही आयकर विभाग के अधिकारियों द्वारा उत्पीड़न की बात लिखी है। आयकर विभाग ने ‘टैक्स अनियमितता’ के मामले में साल 2017 में वीजी सिद्धार्थ से जुड़े 20 जगहों पर छापेमारी की थी। यहीं से सिद्धार्थ की परेशानियां बढ़नी शुरू हो गईं।

जनवरी 2019 में आयकर विभाग ने इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी फर्म माइंडट्री के 74.9 लाख (665 करोड़ रुपये के) शेयर अटैच कर दिए थे। इन शेयरों में से 22.20 लाख शेयर सीसीडी के थे, जबकि 52.70 लाख शेयर इसके प्रमोटर सिद्धार्थ के थे। फरवरी 2019 में आयकर विभाग ने माइंडट्री के 74.9 लाख शेयर रिलीज कर दिए, लेकिन सीसीडी में सिद्धार्थ के 46.01 लाख शेयर अटैच कर दिए।

इस घटनाक्रम के बारे में सिद्धार्थ की चिट्ठी में लिखा है कि इनकम टैक्स के एक पूर्व डीजी ने भी हमारी ‘माइंडट्री’ डील को रोकने के लिए दो अलग-अलग मौकों पर हमारे शेयर अटैच किए। उसके बाद हमारे कॉफी डे शेयर्स को भी अटैच कर दिया गया, जबकि हमने अपना संशोधित बकाया फाइल कर दिया था। ये नाजायज था जिससे हमारे सामने पैसे की बड़ी किल्लत खड़ी हो गई।

मार्च 2019 में सिद्धार्थ ने सॉफ्टवेयर सर्विस कंपनी माइंडट्री लिमिटेड में अपनी 20.32 हिस्सेदारी 3200 करोड़ रुपये में एल एंड टी को बेच दी। इस डील ने सिद्धार्थ को सीसीडी की होल्डिंग कंपनी कॉफी डे एंटरप्राइजेज के कर्ज का एक हिस्सा चुकाने में मदद की। हालांकि, इसके बाद भी 31 मार्च 2019 को कॉफी डे एंटरप्राइजेज के ऊपर 3,323.8 रुपये का कर्ज था। ऐसे में कई रिपोर्ट्स आईं कि कैफे डे ग्रुप करीब 10,000 करोड़ रुपये की अपनी इक्विटी बेचने के लिए कोका-कोला के संपर्क में है।

कॉफी डे इंटरप्राइजेज का शेयर 154.05 रुपये पर आ गिरा। शेयर के इस भाव पर आते ही कंपनी का मार्केट कैप घटकर 3,254.33 करोड़ रह गया जबकि सोमवार को यह 4067.65 करोड़ रुपये था यानी एक झटके में निवेशकों के 813.32 करोड़ रुपये डूब गए।

दूसरी और वीजी सिद्धार्थ के एक पत्र में लगाए गए उत्पीड़न के आरोपों का इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने जवाब दिया है। कैफे कॉफी डे के खिलाफ जांच के मामले में कानून के मुताबिक ही काम किया गया। आईटी डिपार्टमेंट का कहना है कि सर्च या रेड के दौरान पुख्ता सबूत मिलने के बाद ही प्रोविजनल अटैचमेंट की गई थी। इस मामले में विभाग ने न्यायसंगत तरीके से ही कार्रवाई की थी।सिद्धार्थ को माइंडट्री के शेयरों को बेचने से 3,200 करोड़ रुपये मिले थे, लेकिन उन्होंने टैक्स के तौर पर महज 46 करोड़ रुपये ही चुकाए, जबकि मिनिमम ऑलटरनेट टैक्स के तहत 300 करोड़ रुपये की देनदारी बनती थी।


Girish Malviya : आज सुबह New India में एक इंटरप्रेन्योर की लाश दक्षिण कन्नड़ जिले के नेत्रवती नदी से बरामद की गयी जिनका नाम वी जी सिद्घार्थ बताया जा रहा है. वी जी सिद्धार्थ कैफे कॉफी डे के संस्थापक थे. सुना है कि इंटरप्रेन्योर ने खुदकुशी कर ली है. New India में रहने वाले लोग हैरान हैं कि उस आदमी ने क्यों कर ली खुदकुशी. आखिर जितनी उसकी देनदारी थी उससे कही अधिक उसकी संपत्ति की कीमत थी.

लेकिन New India में रहने वाले लोग भूल रहे हैं कि वो एक इंटरप्रेन्योर था. उसका एक सपना था जो कर्नाटक में चल रही राजनीतिक उठापटक की बलि चढ़ गया. जी हां, यह वही कर्नाटक की राजनीतिक उठापटक है जो पिछले दिनों देखने मे आई है और जिसमें आज येदियुरप्पा मुख्यमंत्री बन कर बैठ गए हैं.

कुछ लोग होते हैं जो अपने सपने के पीछे पागल होते हैं. शायद सिद्धार्थ उन्ही लोगो मे से एक थे. अपने सुसाइड लेटर में सिद्धार्थ लिख कर गए हैं कि उसकी कैफे कॉफी डे कंपनी को आय कर विभाग के पूर्व महानिदेशक के हाथों काफी उत्पीडऩ का सामना करना पड़ा था जिसने माइंडट्री की बिक्री के सौदे में अड़ंगा लगाने के लिए दो बार कंपनी के शेयरों को कुर्क किया था.

आयकर विभाग ने अपने एक बयान में माना है कि कर्नाटक के एक रसूखदार नेता के ठिकानों पर छापेमारी के दौरान कॉफी डे समूह द्वारा छिपाए गए वित्तीय लेनदेन का पता चला. अब इस रसूखदार नेता पर छापा मारने के लिए प्रेशर तो ऊपर केंद्र से ही आया होगा. आखिर अपनी सरकार बनवाने के लिए विधायको को जो खरीदना है!

सिद्धार्थ समझ गए थे कि अब इस जंजाल से मुक्त होना संभव नंहीं है. पिछले दिनों इंदौर में भी एक व्यापारी ने GST रेड से परेशान हो तीसरी मंजिल से छलाँग लगा कर आत्महत्या कर ली थी. इस देश मे सत्ताधारी दल के समर्थकों को यह शरफ़ हासिल है कि वो ऐसे व्यक्तियों को, उद्योगपतियों को, व्यापारियों को चोर बोल सकते हैं. आजकल तो चोरों को भीड़ द्वारा पीट पीट कर मार डालने का भी सिलसिला चल रहा है. तो इस मामले में ऐसे चोरों को तो आप भाग्यशाली ही समझिए. वैसे आप टेंशन मत लीजिए. New India में ऐसी छोटी मोटी बातें तो होती रहती हैं.

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