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छत्तीसगढ़

पत्रकारों का भारी विरोध, बैकफुट पर साय सरकार: ‘मीडिया सेंसरशिप’ का आदेश रोका

रायपुर- छत्तीसगढ़ सरकार को पत्रकारों के तीखे विरोध के बाद आखिरकार झुकना पड़ा है। सरकारी अस्पतालों में मीडिया कवरेज पर पाबंदी लगाने संबंधी विवादित आदेश पर अब रोक लगा दी गई है। रायपुर में 18 जून को प्रेस क्लब के बैनर तले पत्रकारों ने इस फैसले के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया और स्वास्थ्य विभाग के आदेश की प्रतियां जलाकर अपना आक्रोश जताया।

प्रदर्शन के कुछ घंटों बाद ही राज्य के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने वीडियो संदेश जारी कर आदेश को तत्काल प्रभाव से रद्द करने की घोषणा कर दी। उन्होंने कहा कि मीडिया लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है और उसकी भूमिका का सम्मान सरकार हमेशा करती रही है। मीडिया से चर्चा के बगैर कोई निर्णय नहीं लिया जाएगा।

हालांकि मंत्री की इस घोषणा के बावजूद यह साफ हो गया है कि सरकार अस्पतालों में मीडिया की गतिविधियों को नियंत्रित करने के लिये अब भी कोई न कोई ‘ड्राफ्ट नीति’ बनाने पर विचार कर रही है। मंत्री ने संकेत दिए कि स्वास्थ्य सचिव की विदेश यात्रा से वापसी के बाद मीडिया प्रतिनिधियों के साथ चर्चा कर कोई नया खाका तैयार किया जा सकता है।

प्रेस की स्वतंत्रता के लिहाज से यह पूरा मामला चिंताजनक बना हुआ है। पत्रकार इसे ‘काला कानून’ करार दे रहे हैं और मांग कर रहे हैं कि ऐसी किसी भी नीति की जरूरत नहीं है जो सूचना के प्रवाह को बाधित करे। सवाल ये भी उठ रहे हैं कि अगर सरकार को पारदर्शिता से कोई परहेज नहीं, तो फिर ऐसी ‘मीडिया मैनेजमेंट’ नीति की ज़रूरत क्यों पड़ रही है?

फिलहाल सरकार ने बैकफुट लेते हुए निर्देशों पर रोक जरूर लगा दी है, लेकिन असली परीक्षा तब होगी जब नई नीति के मसौदे पर बातचीत शुरू होगी।

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