आगरा | उत्तर प्रदेश के आगरा में पुलिस भर्ती के नाम ठगी का एक हैरतअंगेज कारनामा सामने आया है। आरोप है कि खुद को दैनिक भास्कर अखबार का संपादक बताने वाले हिमेश विथरिया और उनके सहयोगी ने ठेकेदार आशीष पाराशर से न सिर्फ 25 लाख रुपये ठग लिए बल्कि किराए पर दी गई दो गाड़ियां—एक स्कॉर्पियो और एक बोलेरो— भी वापस नहीं लौटाई।
इसे लेकर आशीष ने थाना मलपुरा पुलिस से शिकायत की। शिकायत के आधार पर पुलिस ने जांच शुरू की और 11 अप्रैल 2025 को भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धाराओं 316(2), 318(4), 115(2), 352, और 351(3) के तहत मुकदमा दर्ज किया है। पुलिस ने अपनी एफआईआर में हिमेश विथरिया, गजेंद्र शर्मा और रंजीत नामक व्यक्ति को आरोपी बनाया है।
भड़ास को मिले इनपुट के अनुसार, हिमेश विथरिया दैनिक भास्कर अखबार में बतौर ब्यूरो चीफ आगरा तैनात है। हालांकि दैनिक भास्कर ने इस ठगी की खबर प्रकाशित की है। लेकिन अखबार ने खबर में अपने ही अखबार का नाम प्रकाशित करने से बचाव किया है।
नीचे आगरा पुलिस द्वारा दर्ज की गई ठगी की एफआईआर के बाद दैनिक भास्कर में आरोपी की तस्वीर सहित पूरी खबर दी गई है, पढ़ें…
पीड़ित ने शिकायत में क्या कहा
प्रार्थी ठेकेदार आशीष पाराशर ने थाना मलपुरा को दी शिकायत में बताया कि हिमेश विथरिया ने पहले खुद को दैनिक भास्कर का संपादक बताया और बाद में ब्यूरो चीफ के रूप में अपनी पहचान दी। आशीष का आरोप है कि हिमेश और उनके सहयोगी ने पुलिस भर्ती में नौकरी दिलाने का झांसा देकर उनसे 25 लाख रुपये हड़प लिए। इसके अलावा, किराए पर दी गई स्कॉर्पियो और बोलेरो गाड़ियां भी वापस नहीं की। पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए मामले की जांच शुरू कर दी है।
बताया तो यह भी जाता है कि हिमेश विथरिया पर पुलिस अधिकारियों और राजनीतिक दलों के बड़े नेताओं के साथ मिलकर ठगी करने का आरोप है। सूत्रों के अनुसार, उसने कम समय में ही आगरा में अपनी पहचान बनाकर लोगों को अपने जाल में फंसाया। उसकी कार्यशैली और रसूख के दम पर वह ठगी की वारदातों को अंजाम देता रहा।
आरोपी पत्रकार पर पहले भी दर्ज हुए मुकदमे
हिमेश विथरिया का नाम इससे पहले भी कई आपराधिक मामलों में सामने आ चुका है। थाना जगनेर में उसके खिलाफ एक पत्रकार को धमकाने का मुकदमा दर्ज है। वहीं, सदर थाने में सत्ताधारी दल के एक नेता के साथ लेनदेन को लेकर भी मामला दर्ज है।
नीचे देखें एफआईआर और दैनिक भास्कर में प्रकाशित खबर…







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Note : इस मामले को लेकर हमने दैनिक भास्कर के संपादक अशोक निर्वाण से संपर्क किया लेकिन बात नहीं हो सकी। भास्कर की तरफ से कोई पक्ष आने पर उसे भी प्रकाशित किया जाएगा…


