Connect with us

Hi, what are you looking for?

Local News Community

सियासत

पाकिस्तान से लेकर ट्रम्प तक सूत्र रखने वाली मीडिया को धनकड़ के इस्तीफे की भनक क्यों नहीं लगी?

रवीश कुमार-

झटका देने की राजनीति (politics of shock) के निशाने पर कौन हो सकता है? सेहत Double speak का हिस्सा लगता है। बिग बिरादर का कमाल है या कोई दूसरा उन्हें वॉच कर रहा है? 75 की उम्र से एक साल दूर हैं तो इतने कम समय के लिए अध्यक्ष क्यों बनेंगे? नड्डा और धनकड़ में UNPERSON कौन होगा? या दोनों अपनी सीट अदल-बदल करेंगे? सब इसी लाइन पर क्यों डिबेट कर रहे हैं?

इतना बड़ी ख़बर की भनक किसी को नहीं लगी? पार्टी कवर करते करते पत्रकार भी पार्टी हो गए हैं। जैसे कार्यकर्ता को पता नहीं चलता कि पार्टी में क्या हो रहा है वैसे ही कार्यकर्ता बन चुके पत्रकारों को अब पता नहीं चलता है कि पार्टी में क्या हो रहा है? उनका काम केवल कमांड का इंतज़ार करना है न कि कमांड पर नज़र रखना और रिपोर्ट करना।

संसद सत्र के पहले दिन का समय क्यों चुना गया है? बीजेपी को कब इस बात से फर्क पड़ा है कि संसद सत्र में विपक्षी दलों के मुद्दे क्या है?

प्रधानमंत्री का आपने 18 मिनट का वीडियो देखा? ख़बर तो यही चली थी कि मीडिया से बात करेंगे लेकिन जो वीडियो अपलोड किया गया है उसमें जब भी कैमरा लॉन्ग शॉट में जाता है मीडिया और पीएम की दूरी बहुत ज़्यादा लगती है। क्या मीडिया पास खड़ा नहीं था? आप फिर से उस वीडियो को देखिए। लगेगा कि मीडिया को इंडिया गेट पर खड़ा किया गया था!


गुरप्रीत गैरी वालिया-

देश के मीडिया के सूत्र… वैसे तो अपने देश का मीडिया ट्रम्प से लेकर पाकिस्तान तक सूत्र रखता है

किसी के घर में क्या बना होता है उसके भी सूत्र इनके पास होते है

आज देखिए देश में एक सबसे बड़ा इस्तीफ़ा हुआ और सरकार को कवर करने वाले किसी भी मीडिया वाले को जरा सी भी ख़बर नहीं थी

आज दो चीज़े साफ़ हो गई एक मीडिया के पास केवल वही सूत्र होते है जो सरकार इन्हें देना चाहती है दूसरा पत्रकार अब बस सरकार भरोसे है।


शेख शफ़ीक अंसारी-

“सूत्रों के हवाले से खबर” अब असल में सरकार की प्रेस रिलीज़ होती है।

धनकड़ साहब का इस्तीफ़ा आने से कुछ घंटे पहले तक न कोई मीडिया सवाल पूछ रहा था, न कोई रिपोर्टर भनक तक दे रहा था। लेकिन जैसे ही इशारा मिला, सभी चैनलों पर “स्वास्थ्य कारणों से इस्तीफ़ा” एक साथ चल पड़ा।

अब सवाल ये है:

  • क्या अचानक सेहत बिगड़ी?
  • या कोई सियासी ऑपरेशन हुआ?
  • लंच के लिए विपक्ष को बुलाने वाला उपराष्ट्रपति 4 घंटे में इस्तीफ़ा क्यों देता है?
  • और पत्रकार चुप क्यों हैं?

क्योंकि आज पत्रकार नहीं बचे — सरकार के वॉइसओवर आर्टिस्ट बच गए हैं। न पत्रकारिता बची है, न स्वतंत्रता — बस सूत्र बचे हैं। वो भी उन्हीं के, जिनसे सवाल पूछने चाहिए थे।

मूल खबर…

Pahad Ki Dada: Hill Mail Uttarakhand
CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

भड़ास लीगल टीम : Bhadas Legal Team

भड़ास मेल: [email protected]

Latest 100 भड़ास

विज्ञापन