लद्दाख/पौड़ी/गढ़वाल/देहरादून। उत्तराखंड पेपर लीक मामले ने प्रदेशभर में युवाओं का गुस्सा फाड़ दिया है। देहरादून से लेकर पहाड़ के छोटे कस्बों तक छात्र-युवा सड़कों पर उतर आए हैं। गुरुवार को पौड़ी में भी युवाओं ने कलेक्ट्रेट तक आक्रोश रैली निकाली और सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाज़ी की।
युवाओं का कहना है कि पहाड़ में वैसे ही रोजगार के साधन सीमित हैं। मेहनत करके प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों के साथ जब नकल माफिया करोड़ों का खेल करते हैं, तो उनका भरोसा टूट जाता है। सवाल उठाया गया कि परीक्षा के तुरंत बाद ही जब प्रश्नपत्र सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, तो पारदर्शिता कहां है?
हाकम सिंह जैसे लोगों का नाम लेकर युवाओं ने सीधे सिस्टम और सत्ता पर हमला बोला। आरोप है कि जेल जाने के बावजूद ऐसे लोग बार-बार बाहर आकर पेपर बेचने का काम शुरू कर देते हैं। इससे साफ है कि सरकार और प्रशासन मिलकर भी कोई सख्त निगरानी व्यवस्था नहीं कर पा रहे।
युवाओं का कहना है कि वे गांव-घर छोड़कर किराए पर रहकर सालों से तैयारी कर रहे हैं। परिवार कर्ज और बोझ उठाता है। लेकिन जब पता चलता है कि लाखों रुपये लेकर परीक्षा का पेपर पहले ही बिक चुका है, तो उनके सपनों का भविष्य वहीं खत्म हो जाता है।
वहीं, UKSSSC पेपर लीक प्रकरण में छात्र आंदोलन का दबाव असर दिखाने लगा है। लंबे विरोध-प्रदर्शनों के बीच सरकार ने पहली ठोस कार्रवाई करते हुए सेक्टर मजिस्ट्रेट केएन तिवारी को निलंबित कर दिया है। इसके साथ ही एक-दो दरोगाओं समेत कुछ पुलिस अधिकारियों को भी हटाया गया है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए अब इसकी जांच विशेष जांच दल (SIT) को सौंपी गई है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में और भी अधिकारियों पर गाज गिर सकती है। इस बीच, आंदोलनरत युवाओं ने साफ किया है कि केवल निलंबन से बात खत्म नहीं होगी। वे दोषियों की गिरफ्तारी और कड़ी सज़ा की मांग पर अड़े हैं।
लद्दाख में पद रिक्तियों और नौकरियों को लेकर जो आंदोलन उठ रहा है, वही गुस्सा अब उत्तराखंड में पेपर लीक कांड के जरिए सामने आ रहा है। साफ है कि Gen Z अब बीजेपी सरकार से सीधे भिड़ने को तैयार है और उसका संदेश है— अगर हमारे सपनों से खिलवाड़ हुआ तो हम सत्ता को चैन से बैठने नहीं देंगे।
इस पूरे मसले पर पंजाब केसरी रिपोर्ट कर रहा है-
लद्दाख के लेह शहर में बुधवार को जेन-जीन (Gen-Z) ने मोदी सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच संघर्ष हो गया। प्रदर्शनकारियों ने CRPF की एक गाड़ी को आग के हवाले भी कर दिया।
सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के समर्थन में छात्रों ने आवाज उठाई। सोनम वांगचुक पिछले कई महीनों से लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग कर रहे हैं, लेकिन केंद्र सरकार की ओर से इस पर अभी तक कोई ठोस कदम नहीं लिया गया है।

लद्दाख के पूर्ण राज्य और संवैधानिक सुरक्षा के लिए सैकड़ों छात्र सड़कों पर उतर आए हैं। अपनी मांगों पर अडिग रहने के लिए वे भूख हड़ताल भी कर रहे हैं। आज पूरे क्षेत्र में पूर्ण बंद का आह्वान किया गया है।
पत्रकार आदिल हसन सोनम वांगचुक के हवाले से लिखते हैं-
लद्दाख में जेन ज़ी’ रिवॉल्यूशन: सोनम वांगचुक
केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देने और संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने के लिए पर्यावरणविद और सामाजिक कार्यकर्ता बीते दो हफ़्तो से भूख हड़ताल पर हैं.
बुधवार को सोनम वांगचुक के समर्थन में बड़ी संख्या में लोग लेह की सड़कों पर उतर आए. कुछ युवाओं ने कथित तौर पर लेह हिल काउंसिल की इमारत पर पत्थरबाज़ी कर अपना आक्रोश ज़ाहिर किया.
पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े और लाठियां चलाईं, कुछ वीडियो में लेह शहर में कई वाहन जलते हुए दिख रहे हैं और कुछ झड़पें भी हुई हैं.
झड़प के दौरान प्रदर्शनकारियों ने लेह में मौजूद भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के ऑफ़िस को आग लगा दी. सोनम वांगचुक ने एक्स पर एक वीडियो संदेश जारी कर शांति की अपील की है.

उन्होंने कहा, “यहां कुछ लोग 35 दिन से अनशन कर रहे थे. कल उनमें से दो लोगों की तबीयत ख़राब हो गई और उन्हें बहुत गंभीर स्थिति में अस्पताल में भर्ती कराया गया. इससे लोगों में बहुत रोष है और आज पूरे लेह में बंद की घोषणा की गई. इस दौरान हज़ारों की संख्या में युवा सड़कों पर आ गए. यह एक तरह से ये ‘जेन ज़ी’ रिवॉल्यूशन था.”
“पांच सालों से वो (युवा) बेरोज़गार हैं. एक के बाद एक बहाना करके उन्हें नौकरियों से बाहर रखा जा रहा है और लद्दाख को भी संरक्षण नहीं दे रहे हैं. आज यहां कोई लोकतांत्रिक मंच नहीं है.” सोनम वांगचुक ने किसी भी परिस्थिति में युवाओं से हिंसा का रास्ता न अपनाने की अपील की है.
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