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पंजाब की भगवंत मान सरकार के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंचे पत्रकार!

नई दिल्ली। पंजाब के मुख्यमंत्री के आधिकारिक हेलीकॉप्टर के कथित दुरुपयोग से जुड़ी रिपोर्टिंग करना तीन पत्रकारों और एक आरटीआई एक्टिविस्ट को भारी पड़ गया है। इन सभी ने अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर को चुनौती देते हुए पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। आरोप है कि इन्होंने ‘भ्रामक और गलत जानकारी’ फैलाई।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, यह एफआईआर लॉ स्टूडेंट और आरटीआई एक्टिविस्ट माणिक गोयल की एक सोशल मीडिया पोस्ट से जुड़ी है। गोयल ने 8 दिसंबर को मुख्यमंत्री के जापान दौरे के दौरान उनके लिए आवंटित हेलीकॉप्टर की गतिविधियों पर सवाल उठाए थे।

इसी आरटीआई के आधार पर बठिंडा के पत्रकार मनिंदरजीत सिद्धू, मिंटू गुरसारिया और मनदीप सिंह ने इस मुद्दे पर खबरें कीं और सोशल मीडिया पर पोस्ट साझा कीं। इसके बाद उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कर दी गई।

एफआईआर में दावा किया गया है कि आईटी सेल ने कई फेसबुक पोस्ट चिन्हित की हैं, जिनमें मुख्यमंत्री भगवंत मान की विदेश यात्राओं के दौरान हेलीकॉप्टर के इस्तेमाल को लेकर ‘तोड़-मरोड़ कर, अप्रमाणित और तथ्यहीन’ दावे किए गए। जिन अकाउंट्स और पेजों का जिक्र एफआईआर में है, उनमें मिंटू गुरसारिया, गगन रामगढ़िया, हरमन फार्मर, मनदीप मक्कड़, गुरलाल एस. मान, स्नम्मू ढालीवाल, माणिक गोयल, अर्जन लाइव, दीप मांगली और लोक आवाज टीवी शामिल हैं।

गौर करने वाली बात यह है कि यह एफआईआर पुलिस इंस्पेक्टर सतबीर सिंह की शिकायत पर दर्ज की गई है और इसमें किसी निजी शिकायतकर्ता का उल्लेख नहीं है। मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धाराएं 353(1), 353(2) (झूठी या भ्रामक सूचना फैलाने से जुड़ी धाराएं) और 61(2) (आपराधिक साजिश) लगाई गई हैं।

इस कार्रवाई को लेकर प्रेस क्लब ऑफ इंडिया (PCI) ने कड़ा विरोध जताया है। प्रेस क्लब ने कहा है कि पंजाब पुलिस का यह कदम पत्रकारिता को दबाने की कोशिश है।

पीसीआई ने अपने बयान में कहा, “मुख्यमंत्री के आधिकारिक हेलीकॉप्टर के कथित दुरुपयोग पर रिपोर्टिंग करना पत्रकारों का काम है। अगर सरकार या पुलिस को तथ्यों पर आपत्ति है, तो उसके लिए सिविल कानून के तहत कई विकल्प मौजूद हैं। आपराधिक मुकदमे दर्ज करना समाधान नहीं है।”

प्रेस क्लब ने इसे संविधान के अनुच्छेद 19(1)(क) के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का उल्लंघन बताते हुए पंजाब सरकार और पुलिस से पत्रकारों के खिलाफ दर्ज एफआईआर तुरंत वापस लेने की मांग की है।

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