सात सौ रुपये, हजार रुपये, ढाई हजार रुपये… ये है सेलरी… बदले में 50 लाख से अधिक की विज्ञापन की वसूली

दैनिक हिन्दुस्तान से जुड़े रामगढ जिला अन्तर्गत गोला संवाददाता मनोज मिश्रा ने हिंदुस्तान अखबार को अलविदा कह दिया है. श्री मिश्रा ने इस बाबत एक आवेदन प्रधान संपादक श्री शशिशेखर और झारखण्ड के वरीय संपादक श्री दिनेश मिश्र को प्रेषित किया है. मनोज ने कहा कि सन 2000 से हिन्दुस्तान से जुड़ा. पत्रकारिता में काफी उतार-चढ़ाव देखे. जिले के विभिन्न क्षेत्रों में कार्य करने वाले पत्रकारों का आज भी काफी शोषण किया जा रहा है. उन्हें अखबार प्रबंधन से सम्मानजनक पारिश्रमिक नहीं मिलता है. इस कारण पत्रकार आर्थिक तंगी से जूझते रहते हैं. सभी का परिवार है. खर्चे भी काफी हैं. पारिवारिक दायित्व होने और आर्थिक तंगी के कारण ही अखबार को अलविदा कह दिया.

हिन्दुस्तान रामगढ जिला कार्यालय में कार्यरत पत्रकार व्यास शर्मा ने कार्यालय जाना बंद कर दिया है क्योंकि श्री शर्मा को पिछले आठ महीनों से वेतन नहीं मिला. उन्हें सिर्फ आश्वासन ही मिलता रहा. कार्यालय के पुराने पत्रकार अशोक मेहता को एक हजार रूपया और राजकुमार सिंह को मात्र सात सौ वेतन मिलता है। इसके अलावा जिले के अन्य संवाददाताओ को मात्र 2500 रुपया वेतन दिया जाता है. कई को आज तक पैसा नहीं मिला. इस थोड़े से पैसे के एवज में साल भर में 50 लाख से अधिक विज्ञापन की वसूली करवाई जाती है.

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

मूल खबर :

आर्थिक तंगी से परेशान हिंदुस्तान अखबार के स्टिंगर मनोज मिश्र ने पत्रकारिता को गुडबाय कहा

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Comments on “सात सौ रुपये, हजार रुपये, ढाई हजार रुपये… ये है सेलरी… बदले में 50 लाख से अधिक की विज्ञापन की वसूली

  • purushottam apsnora says:

    ye kissa kewal yek akhabar ka nhi hai, sare akhabarou mai yhi shoshan hai, media ki gat buri hai, jo magarmachchha soprim court ko thaiga dikha de usake liye stinger to kuchh bhi nhi hain. sawal kewal stinger k shoshan tak nhi hai, media jo loktantra ka choutha stambh hai mai apane karmiyou k liye iansaf nhi hai to apane kartavy mai kitani imandari hogi?

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  • आनंद शर्मा शिमला। says:

    अगर दैनिक हिंदुस्तान का ये हाल है तो बाकियों का सहज अंदाजा लगाया जा सकता है। पत्रकारिता में लिखने पढ़ने वालों की जरूरत ही नहीं रह गई है। पत्रकारों की जगह ढूंढ ढूंढ कर ब्लैकमेलिए भर्ती किए जा रहे हैं, जो खुद भी कमाए और संस्थान को भी कमाकर दे।

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  • Pardeep Verma says:

    maaf karna dosto jada nahi janta … par ye keh skta hu k agar apne aap par bharosa hai to aap ka haq koi nahi rakh skta.. fir bhi agar apko lagta hai k aap ko aap ka haq nahi mill raha to punjab me apka swagat hai … Hum Chhote se hain par kisi ka haq nahi rakhte… Jai hind

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