सहाफत अखबार में काम करने गए मोहम्मद इरफान के साथ क्या हुआ, जानिए उनके पत्र से

Media friends, aaj mai aap sabhi newspaper ke friends aur social media ke logo ko apna dard batana chahta hu ki maine print media ke circulation deptt. me taqreeban 15 saal diye jisme The hindu, Janmadhyam aur Inquilab jaise newspaper shamil hai. Maine ek august ko sahafat urdu daily join kiya tha. Aman abbas sb ne mujhe kai baar call karke bulaya tha aur kaha ki mere sahafat ka circulation incharge ban jaiye.

रिपोर्टरों का पैसा खा गया यह चैनल!

सेवा में,
सम्मानित चैनल हेड / सीनियर्स / रिपोर्ट्स / स्टाफ
नेशनल वायस चैनल

आप और हम लोगों ने नेशनल वायस न्यूज़ चैनल को बड़ी मेहनत से आगे बढ़ाया और कम समय में मेहनत के बलबूते पर आगे तक लेकर गए और उस मेहनत की मलाई किसी ओर को समर्पित की गई। हमने दिन रात मेहनत कर लगभग दो साल तक चैनल को अपने खून पसीने से सींचा मगर हमारे सीनियर्स, चैनल के उच्चाधिकारियों ने हमारी मेहनत की मलाई खूब अच्छे से खाया और अपना पेट भरा। साथ ही उनका भी भरा जो उनके चाटुकार थे। मैंने अपनी मेहनत से चैनल को खूब काम करके दिया। खुद भूखा रहा। मगर चैनल को भूखा नहीं रहने दिया। उसका पेट भरता रहा। अपने करियर को देखते हुए घर में झूठा दिलासा देता रहा कि मैं एक अच्छे चैनल में काम कर रहा हूँ। मुझे अच्छा मेहनताना मिलता है। दिल टूट गया जब मेरे पिताजी ने एक दिन कहा कि अपनी कमाई से कुछ घर भी लेकर आया कर। मगर उन्हें कहाँ पता था कि मेरी मेहनत की कमाई तो चैनल के बड़े लोगों में बंट रही है।

लखनऊ के ‘लाइव टुडे’ चैनल के मालिक और प्रबंधन की दादागिरी

हाल ही में लखनऊ में पैदा हुआ एक चैनल इस क्षेत्र के शुरुआती दौर के पत्रकारों के लिए एक अच्छा प्लेटफ़ार्म बनके उभरा, लेकिन चैनल के मालिक और प्रबंधन की दादागिरी यहां भी चरम पर है। अपने चैनल के माध्यम से दुनिया को नियम कानून याद दिलाने वाले गोमती नगर के लाइव टुडे चैनल ने खुद कितने नियम माने, ये यहां के कर्मियों से पूछा जाए तो बेहतर। यहां लेबर लॉ को तो ऐसे तोड़ा जाता है मानो ये कानून इनके बाप की बपौती है। यहां कर्मचारियों को कभी भी बिना किसी नोटिस के निकाल दिया जाता है। अगर कोई इसका विरोध करे तो उसको यहां की एचआर व्हाट्सएप्प मैसेज भेज कर उसकी औकात बताती है।

दैनिक जागरण ने मेरा पैसा नहीं दिया तो हाईकोर्ट जाऊंगा

पटना के बाढ़ अनुमंडल से दैनिक जागरण के पत्रकार सत्यनारायण चतुर्वेदी लिखते हैं-

मैं सत्यनारायण चतुर्वेदी दैनिक जागरण बिहार संस्करण के स्थापना व प्रकाशनकाल से बाढ़ अनुमण्डल से निष्ठा व ईमानदारी पूर्वक संवाद प्रेषण का कार्य करता रहा हूँ. नये सम्पादक जी के आने के कुछ ही महीने बाद वर्ष 2015 के अक्टूबर माह से अचानक मेरी खबरों के प्रकाशन पर रोक लगा दी गयी जो अब तक जारी है। इस बारे में मैंने रोक हटाने का निवेदन श्रीमान सम्पादक जी से किया, लेकिन कुछ नहीं हुआ।

रांची एक्सप्रेस अखबार में मीडियाकर्मियों का शोषण, स्टाफ चिंतिंत

रांची एक्सप्रेस का नया प्रबंधन अपने स्टाफ के साथ तानाशाही भरा रवैया अपना रहा है. यहां के स्टाफ को दो माह बाद सेलरी दिया जाना आम बात हो गयी है. दो माह बाद भी कुछ स्टाफ को सेलरी दी जाती है, कुछ को नहीं. शिकायत करने पर कोई सुनवाई नहीं होती है. स्टाफ को प्रबंधन द्वारा न तो कोई आईडी दिया गया है, न ही पीएफ की सुविधा. ऐसे में कई स्टाफ लेबर कोर्ट में जाने वाले हैं.

‘चक दे’ में काम कराते हैं लेकिन सेलरी नहीं देते

मेरा नाम रणजीत कौर है और मैंने ‘चक दे’ में 8 जून 2016 को ज्वाइन किया था, बतौर न्यूज़ एंकर इन पंजाबी. स्टार्टिंग में बड़ी बड़ी बातें की गयी थीं. पर था कुछ नहीं. नाईट ड्यूटी थी और सिक्योरिटी के नाम पर कुछ नहीं था. एक छोटी सी बिल्डिंग में इसका ऑफिस है, फरीदाबाद में. वहीं कॉल सेंटर चलते हैं. वहीं न्यूज़ चैनल भी है. इस चैनल का मालिक एनआरआई है.

80 प्रतिशत पत्रकारों को सेलरी से मतलब, सरोकार से नहीं

देश को जगाने वाले खुद अंधेरे में, कौन बोले उनके लिए…  जो देश को जगा रहे हैं उनकी भी कोई सुधि लेने वाला है सभी को उनसे बस समाचार चाहिए चोखा। मतलब सही और रोचक। देश की पूरी ईमानदारी पत्रकार से ही चाहिए। जो पत्रकार लिखता पढ़ता है वह सच्चा भी होता है। 80 प्रतिशत ऐसे पत्रकार है देश में। उन्हें बस अपनी सैलरी से ही मतलब है। समाचार वहीं लिखने का प्रयास करते है जिसमें सच्चाई होती है। हर मीडिया कंपनी में ऐसे लोग है तभी आप सच्चाई को समझ और जान पा रहे है।

महिला पत्रकार ने अपने स्टेट हेड पर लगाए कई गंभीर आरोप

छत्तीसगढ़ में चैनल और अखबार बने उगाही का जरिया… न्यूज चैनल /अखबारों के रिपोर्टर व पत्रकार हो रहे शोषण के शिकार… पत्रकार संगठनों की भूमिका पर भी उठे सवाल..

छत्तीसगढ़ में पत्रकारिता की आड़ में कैसा खेल, बिना वेतन जिलों में काम कर रहे पत्रकार

चैनल की माइक आईडी की लग रही बोली, वसूली और धमकी का चल रहा खेल, अनशन-शिकायतों का लगा अंबार, सोशल नेटवर्क का बेजोड़ इस्तेमाल, पीएमओ तक हो रही शिकायत

अमर उजाला में हो रहा शोषण, 5 दिन की सेलरी देकर 6 दिन काम ले रहे नए संपादक

प्रिय भड़ास,

यह सिर्फ शिकायती पत्र नहीं है। न ही किसी एक व्यक्ति की ओर से है। यह अमर उजाला के पीड़ित और शोषित कर्मचारियों की ओर से है। इस पत्र के जरिए नव नियुक्त संपादक महोदय की तानाशाही को उजागर किया जा रहा है। AUW यानि अमर उजाला वेबसाइट में इन दिनों कर्मचारियों का जमकर शोषण हो रहा है। इस पत्र के जरिए श्रम विभाग से गुहार है कि वह कर्मचारियों के साथ हो रहे अन्याय की पड़ताल करे।

मोदी राज में सूचना प्रसारण मंत्रालय के अधीन कार्यरत सैकड़ों मीडियाकर्मियों का जमकर किया जा रहा शोषण

सेवा में,

यशवंत सिंह
संपादक
भड़ास4मीडिया डॉट कॉम

विषयः- सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अधीन इलेक्ट्रॉनिक मीडिया मॉनिटरिंग सेन्टर के कर्मचारियों की दयनीय स्थिति से अवगत कराने के संबंध में प्रार्थना पत्र

मान्यवर,

हम इलेक्ट्रॉनिक मीडिया मॉनिटरिंग सेन्टर में, अनुबंधित कर्मचारी है। गत कई वर्षों से हमारी स्थिति काफी दयनीय बनी हुई है जिसकी ओर हम आपका ध्यान निम्न बिन्दुओं के माध्यम से आकर्षित कराना चाहते है। हमारे कार्यालय में कार्यरत सभी कर्मियों को तीन माह के अनुबंध पर रखा जाता है जबकि अन्य समतुल्य मीडिया संस्थानों (दूरदर्शन, राज्यसभा टी.वी. लोकसभा टी.वी. पीआईबी, डीएवीपी, आकाशवाणी) में, सभी अनुबंधित कर्मियों को कम से कम एक वर्ष से दो वर्ष के अनुबंध पर रखा जाता है। इसी तीन माह के छद्म अनुबंध की आड़ में, नियोक्ता की ओर से मिलने वाली अधिकांश आधारभूत सुविधाओं से हमें दूर रखा जाता है। 

‘ओके इंडिया’ न्यूज चैनल नहीं दे रहा अपने पत्रकारों को पैसा

‘ओके इण्डिया’ नामक न्यूज चैनल कर रहा पत्रकारों का शोषण. आठ महीनों से नहीं दिए न्यूज का पेमेंट. अपने आपको नेशनल न्यूज चैनल बताने वाला ओके इण्डिया न्यूज चैनल फरवरी से आनएयर   हो गया था और तभी से न्यूज पत्रकारों से ली जा रही थी. पहली मीटिंग में जोगिन्द्र दलाल जो मालिक हैं, ने 200 रूपये पर न्यूज की बात की थी परन्तु आज आठ महीनों से हरियाणा के स्ट्रिंगरों को एक भी पैसा नहीं दिया.

कई चैनलों के स्ट्रिंगर के घर नही जलेंगे दीपावली पर चूल्हे!

मीडिया की रीढ़ कहे जाने वाले स्ट्रिंगरों के घर दीपावली का जश्न फीका होने की आशंका है। मिली जानकारी अनुसार कई चैनल पहले से ही घाटे में हैं। उनके पास स्ट्रिंगर्स को देने लिए आश्वासन  के सिवाय कुछ नहीं है। इसमें कुछ चैनल ऐसे हैं जो मीडिया इंडस्ट्री में कई सालों से स्थापित है और कुछ हाल हीमें उभरे हैं। लेकिन सबसे खास बात यह कि सभी चैनल जनता के सामने अपने को सबसे आगे बताने काम करते हैं। कुछ चैनल उस कतार में शामिल हैं जो आज भी 90 रुपए से 150 रुपए ही भुगतान करते हैं। ऐसे में स्ट्रिंगर बड़ी मुश्किल से 3000 रुपए प्रति माह ही कमा पाता है।

मजीठिया मांगने पर ‘हिंदुस्तान’ अखबार ने दो और पत्रकारों को किया प्रताड़ित

लगता है खुद को देश के कानून और न्याय व्यवस्था से ऊपर समझ रहा है हिंदुस्तान अखबार प्रबंधन। शुक्रवार को एक साथ उत्तर प्रदेश और झारखण्ड से तीन कर्मचारियों को प्रताड़ना भरा लेटर भेज दिए गए। इन कर्मचारियों की गलती सिर्फ इतनी थी की बिड़ला खानदान की नवाबजादी शोभना भरतिया के स्वामित्व वाले हिन्दुस्तान मैनेजमेंट से उन्होंने मजीठिया वेज बोर्ड के अनुसार वेतन और अपना बकाया मांग लिया था।

मेरे पर आरोप लगाने वाले हमीरपुर के पत्रकार दोहरे और उन्हें समर्थन दे रहे पत्रकारों की असलियत जानिए : राजेश सोनी

आदरणीय भाई यशवंत जी,

विषय : मेरे खिलाफ साजिश रचकर भड़ास में खबर प्रकाशित करवाने के सम्बन्ध में

मैं आपके भड़ास4मीडिया का नियमित पाठक हूँ। आप बहुत अच्छा लिखते हैं, इसमें कोई संदेह नहीं है लेकिन भाई ये जो खबर आपने लगाई है, उसकी सत्यता को आपको जरूर जांचना चाहिए था। मैं आपकी कार्यशैली पर कोई प्रश्नचिन्ह नहीं लगा रहा हूँ लेकिन ऐसा लेख और किसी का आरोप प्रकाशित करने से पहले आपको एक बार इसकी सत्यता जरूर मालूम करना चाहिए था। इस लिंक https://www.bhadas4media.com/tv/10873-hindi-khabar-ke-reporter-ki-kahani की खबर मेरे बारे में प्रकाशित की गयी है।

‘हिंदी खबर’ के रिपोर्टर की दुःख भरी कहानी…

सेवा में
श्रीमान यशवंत सिंह जी
संपादक, भड़ास4 मीडिया।

विषय- हिंदी खबर के रिपोर्टर की दुःख भरी कहानी।

कई चैनलों में काम करने के बाद अतुल अग्रवाल ने अब हिंदी खबर में काम शुरू किया है। इस चैनल में पहली बार कई ब्यूरो बनाने की प्रथा की शुरुवात की गई है। चैनल अभी यूट्यूब पर ही चल रहा है, लेकिन यूपी के अधिकारियों पर दबाव बनाकर अपनी जरूरतों को पूरा करने का खेल शुरू कर दिया गया है। कभी यह बताया जाता है कि मुख्यमंत्री ने खबर चलने के बाद संज्ञान लिया और कार्यवाही कर दी मगर कहीं भी यह चैनल दिखाई नहीं दे रहा है।

सब कुछ ठीक नहीं चल रहा ‘हिंदी खबर’ चैनल में! पढ़िए, अंदर से आई एक चिट्ठी

आज से पाँच महीने पहले ‘हिंदी खबर’ चैनल की शुरुवात हुई. चैनल के असली मालिक संगम लाल बांग्लादेश की किसी कंपनी के कर्मचारी हैं और हिंदी खबर के फाइनेंसर थे. दूसरे असली मालिक मनीष अग्रवाल हैं जो कि ग़ज़िआबाद में एक व्यपारी हैं. तीसरे मालिक एंकर अतुल अग्रवाल हैं जिनने हिंदी खबर के सभी कर्मचारियों को बड़े बड़े सपने दिखाए. सभी लोगों ने दिलो जान से मेहनत करना शुरू कर दिया. चैनल तीन से चार महीने मे लांच हो गया. लेकिन अंदरखाने झूठ, फरेब और छल का राज बद से बदतर होता गया. गलत दबावों के आगे न झुकने वाली कई लड़कियों को हिंदी खबर से निकाल दिया गया. इस तरह की घटनाएं हिंदी खबर में रोज होने लगी. ऐसी ही एक घटना के कारण एक एफ.आई.आर. भी दर्ज हुई है.

भास्कर, जागरण, पत्रिका जैसे बड़े मीडिया समूहों की समग्र ‘नीच’ कथा पढ़िए

अब मैं उन बातों की भी जानकारी देने की कोशिश करूंगा जो अखबार के पन्नों तक नहीं पहुंचती हैं या जिन खबरों के कत्ल के कई कारण होते हैं। जैसे आपने कभी किसी अखबार में नहीं पढ़ा होगा कि एक वेज बोर्ड की अनुशंसाएं संसद स्वीकृत कर चुकी है, सुप्रीम कोर्ट लागू करने का आदेश दे चुका है लेकिन 11 नवंबर 2011 से वे ही अखबार इसे मानने से इंकार कर रहे हैं जो लोकतंत्र का चौथा स्तंभ होने का दावा करते थकते नहीं हैं। भास्कर से लेकर जागरण और पत्रिका समूह तक सभी दिग्गजों के यही हाल हैं। वेज बोर्ड की अनुशंसानुसार कर्मचारियों को पैसा न देना पड़े इसके लिए अखबार किस हद तक नीच हरकतों पर उतर आए हैं, नीच शब्द पर शुरुआती आपत्ति हो सकती है लेकिन यदि तथ्य निकाले जाएं तो शायद आप इससे भी बुरे शब्द इन अखबारों की शान में कहें।

कुमार अशोक की मौत और जिले की पत्रकारिता : अब भी न चेते तो बहुत देर हो जाएगी….

(स्वर्गीय कुमार अशोक : अब यादें ही शेष….)

कुमार अशोक का यूं चले जाना एक सबक है…. आज यह सूचना आई… ”चन्दौली मुगलसराय जनपद के वरिष्ठ पत्रकार हिंदी दैनिक हिन्दुस्तान के पूर्व प्रभारी व मुगलसराय मेल के प्रधान संपादक श्री कुमार अशोक जी का आज (बुधवार) भोर में वाराणसी स्थित चितईपुर के आदित्य अस्पताल में निधन हो गया। उनका पार्थिव शरीर प्रातः साढे सात बजे तक उनके रविनगर स्थित आवास पर पहुँच जायेगा। बताते चलें कि वे काफ़ी दिनों से किडनी के रोग से ग्रसित थे।” इन लाइनों पर पढ़ने के बाद मैं सन्न रह गया। की-बोर्ड पर उंगलियां नहीं चलीं।

भुखमरी के कगार पर कैनविज टाइम्स के पत्रकार

दुनिया की नंबर वन एमएलएम कंपनी बनने का दावा करने वाले ‘कैनविज समूह’ के अखबार ‘कैनविज टाइम्स’ के कर्मचारी भुखमरी के कगार पर आ खड़े हुए हैं। पत्रकारों के हालात ऐसे हो गए हैं कि किसी पास दफ्तर पहुंचने का किराया नहीं है तो कोई अपने घर का किराया देने में असमर्थ है। कैनविज प्रबंधन कान में तेल डाले बैठा है। उसका पत्रकारों के दयनीय हालातों से कोई वास्ता नहीं। चर्चा है सैलरी लटकाने का ‘खेल’ प्रबंधन छंटनी को अंजाम देने के लिए खेल रहा है।

भईया, इससे अच्छा तो मजदूरी कर लेते, कहाँ से फंस गए मीडिया में!

आज कुछ काम से प्रेस क्लब गया हुआ था, हमेशा की तरह प्रेस क्लब के बाहर और भीतर चहल पहल थी, गेट के ठीक सामने एक कथित संस्थापित टीवी चैनल का कैमरामैन उदास मुद्रा में था, आदत से लाचार होकर पहले तो मैंने उनसे अभिवादन कर कुशलक्षेप पूछा, फिर जो जवाब आया, उसे सुन सुन्न रह गया, और ऐसा पिछले कई महीनों से लगातार जारी है, एक लम्बा मई मीडिया में गुजर चुका वो शख्स बड़ी ईमानदारी के साथ मुझसे कह रहा था, कि, “योगेश जी, ऐसा है, अगर हमको पता रहता कि मीडिया में इतनी ऐसी तैसी करने के बाद भी पगार कि चिंता रहती है, परिवार और पेट कि चिंता रहती है, तो कभी-भी मीडिया में तो नहीं आता, भले हो गाँव में खेतीबाड़ी कर लेता, पर सच में मीडिया में आने कि गलती नहीं करता.”

दैनिक जागरण के मालिक और मैनेजर भगवान से नहीं डरते लेकिन जनता को भगवान के नाम पर डराते हैं, देखें तस्वीरें

ये तस्वीरें दैनिक जागरण लखनऊ कार्यालय के बाहर की हैं. इसे कहते हैं- ”पर उपदेश कुशल बहुतेरे” यानि जो लोग भगवान से ना डरते हुए अपने कर्मियों को उनका मजीठिया वेज बोर्ड वाला कानूनी, न्यायिक और संवैधानिक हक नहीं दे रहे हैं, वे ही लोग जनता को ईश्वर की नजर में होने का भय दिखाकर पेशाब न करने, कूड़ा न फेंकने की अघोषित हिदायत दे रहे हैं.

नेशनल दुनिया जयपुर में जनवरी से किसी को वेतन नहीं, मीडियाकर्मी परेशान

नेशनल दुनिया जयपुर से सूचना है कि यहां इस साल जनवरी से किसी को भी वेतन नहीं मिला है. खासकर मशीन विभाग के लोग बहुत परेशान हैं. पिछले माह की 26 तारीख को ही प्लांट को बन्द कर दिया गया. सभी कर्मचारी वेतन के लिये परेशान हो रहे हैं. प्रबन्धन की तरफ से कोई आश्वासन नहीं दिया जा रहा है. ऐसे में कर्मचारी क्या करें और कहां जायें, कुछ समझ नहीं आ रहा है. प्रोडक्शन डिपार्मटमेंट की टीम में सभी सदस्य बड़े परेशान हैं.

मीडियाकर्मियों का वेतन देखेंगे तो शर्म आ जाएगी सांसद महोदय

गिने चुने संपादकों से तुलना मत कीजिए, खुद को सेवक कब मानेंगे प्रभु!

गरीब सांसदों को वेतन में बढो़त्तरी चाहिए. लाखों रुपए जो बतौर वेतन भत्ते मिलते हैं, वे कम हैं. राज्य सभा में सपा सांसद नरेश अग्रवाल ने बुधवार को कहा कि मीडिया ट्रायल की वजह से संसद डरती है. उन्होंने  हवाला यह दिया कि संपादकों के वेतन का चौथाई भी मिल जाए, वही बहुत है. सही कहा नरेशजी ने. टीवी चैनल के गिने चुने पांच-सात संपादकों का पैकेज जरूर करोड़ों में है. परंतु जिस मीडिया से वह डरते हैं वहां के पत्रकारों का वेतन पांच-सात हजार मासिक तक का है. पत्रकार इस कदर जीवन यापन कर रहा है कि विपन्नता उसे गलत कामों की ओर मोड़ देती है, सांसदों को यह पता नहीं है क्या कि प्रिंट मीडिया के पत्रकारों की स्थिति कितनी शोचनीय है?

साधना न्यूज (एमपी-सीजी) के ठग संचालकों से बच कर रहिए, पढ़िए एक पीड़ित स्ट्रिंगर की दास्तान

संपादक
भड़ास4मीडिया
महोदय

मुझसे साधना न्यूज (मध्यप्रदेश छत्तीसगढ) के नाम पर 8 माह पूर्व विनोद राय के निजी खाते में 20 हजार रुपये ट्रांसफर कराए गए थे. इस रकम को खुद मैंने अपने खाते से भेजा था. परन्तु साधना न्यूज ने एक माह बाद ही किसी दूसरे को नियुक्त कर दिया. विनोद राय (इन्दौर, डायरेक्टर, साधना न्यूज) से रुपये वापस मांगने पर वे नये नये तरीके से टालते रहते हैं और आज कल करके कई प्रकार के बहाने से मुझे राशि लौटने से इनकार कर रहे हैं. मैं इसके लिए कई बार इन्दौर का चक्कर काट चुका हूं.

अमर उजाला वाले पत्रकार को न्यूज एजेंसी बना खूब कर रहे शोषण, सुनिए एक पीड़ित कर्मी की दास्तान

मीडिया संस्थान अमर उजाला में फुल टाइम कर्मचारियों को जबरन न्यूज़ एजेंसी का कर्मी बना कर उन्हें न्यूनतम वेतन लेने के दबाव बनाया जाता है. इसके लिए एक कॉन्ट्रैक्ट के तहत समय-सीमा निर्धारित करके दबावपूर्वक लिखवाया जाता है कि वे (कर्मचारी) संस्थान के स्थाई कर्मचारी न होकर एक न्यूज़ एजेंसी कर्मी के तौर पर कार्य करेंगे. लेकिन असलियत ये है कि न्यूज़ एजेंसी संचालक से एक स्थाई कर्मचारी वाला काम लिया जा रहा है. उसे न्यूनतम वेतन पर सुबह 10 बजे से लेकर रात के 10 बजे तक यानि 12 घंटे संस्थान के लिए कार्य करने को बाध्य किया जाता है.

‘दक्षिण मुंबई’ नामक अखबार की नीचता के खिलाफ युवा पत्रकार पहुंचा लेबर आफिस और पुलिस स्टेशन, पढ़ें शिकायती पत्र

मुंबई से एक अखबार निकलता है ‘दक्षिण मुंबई’ नाम से. इस अखबार में एक युवा पत्रकार ने पांच महीने तक काम किया. जब उसने सेलरी मांगी तो उसे बेइज्जत करके भगा दिया गया. इस अपमान से नाराज युवा पत्रकार ने लेबर आफिस में पूरे मामले की शिकायत की और भड़ास के पास पत्र भेजा. जब प्रबंधन को यह सब बात पता चली तो युवा पत्रकार को बुरी तरह धमकाया गया. इससे डरे युवा पत्रकार ने पुलिस स्टेशन जाकर शिकायत दर्ज कराई है.

धंधेबाज ‘समाचार प्लस’ चैनल : रिपोर्टरों को उगाही का टारगेट, पूरा न करने पर कइयों को हटाया

समाचार प्लस राजस्थान में सभी स्टिंगरों को दिया गया एक लाख से 2 लाख रुपये उगाही का लक्ष्य. नहीं देने वाले रिपोर्टरों को निकाला. 26 जनवरी यानि गणतंत्र दिवस के नाम पर उगाहने हैं लाखों रुपये. समाचार प्लस में मैं कई सालों से कार्य कर रहा था.  5 हजार रुपये मुझे मेरी मेहनत के मिलते थे. काम ज्यादा था, पैसे कम. लेकिन चैनल को कुछ और ही प्यारा था. समाचार प्लस राजस्थान टीम ने मुझे फ़ोन कर कहा-

पांच महीने बिना सेलरी काम कराया और बेइज्जत करके निकाल दिया

माननीय संपादक जी
भड़ास4मीडिया

सर

मेरा नाम श्याम दांगी  है और मैं मुंबई में पत्रकारिता से जुड़ा हूँ। सर नौकरी के दौरान मैं कुछ कठिनाईयों का सामना कर रहा हूँ जिसके लिए आपके मार्गदर्शन की आवश्यकता है। मैं पिछले पांच महीने से मुंबई से प्रकशित होने वाले  दैनिक अखबार दक्षिण मुंबई में बतौर सब एडिटर कार्यरत था। लेकिन मुझे इस दौरान कभी सैलरी नहीं मिली।

क्या प्रसार भारती और आकाशवाणी महानिदेशालय माननीय सर्वोच्च न्यायालय व संसद से भी बड़ी हो गई है!

आकाशवाणी के दोहरे मापदंड एवं हठधर्मिता के चलते लंबे समय से काम रहे आकस्मिक उद्घोषकों का नियमितिकरण नहीं किया जा रहा है। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट भी संविधान पीठ भी दस वर्षों या अधिक समय से कार्यरत संविदा कर्मियों की सेवाओं का नियमितिकरण एक मुश्त उपाय के तहत करने के निर्देश दे चुकी है। आकाशवाणी में आकस्मिक कलाकार/ कर्मचारी सन 1980 से अर्थात प्रसार भारती के लागू होने के वर्षों पहले से स्वीकृत एवं रिक्त पड़े पदों के स्थान पर आकस्मिक उद्घोषक/ कम्पीयर के रूप में काम कर रहे हैं।