भाजपा-कांग्रेस पर सरकारी आतंक फैलाने के माया के आरोपों को हिन्दी अखबारों ने पहले पन्ने पर जगह नहीं दी

दि हिन्दू में पहले पन्ने पर

बसपा प्रमुख मायावती ने गुरुवार को एक ट्वीट कर मध्य प्रदेश की कांग्रेस व उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार पर सरकारी आतंक फैलाने का आरोप लगाया। यह खबर आज अंग्रेजी अखबार द हिन्दू में पहले पन्ने पर है लेकिन हिन्दी के किसी अखबार में पहले पन्ने पर तो नहीं दिखी। हिन्दू की खबर के मुताबिक मायावती ने यह आरोप एक बयान में लगाया है जबकि इंटरनेट पर उनका एक ट्वीट भी है। उन्होंने ट्वीट किया कि कांग्रेस की मध्य प्रदेश सरकार ने पूर्ववर्ती भाजपा की तरह गौहत्या के शक में मुसलमानों पर रासुका के तहत बर्बर कार्यवाही की। अब यूपी की भाजपा सरकार ने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के 14 छात्रों पर देशद्रोह का मुकदमा दर्ज करवाया है। उन्होंने कहा कि यह दोनों ही बातें सरकारी आतंक हैं, जिनकी घोर निंदा की जानी चाहिए। मायावती ने यह भी कहा है कि लोग खुद ही फैसला करें कि दोनों सरकारों में क्या फर्क है?

भाजपा के खिलाफ विपक्षी दलों का गठबंधन और उसपर प्रधानमंत्री का रंग-बिरंगा कटाक्ष छापने वाले अखबार अगर मायावती के जनहित के ऐसे बयान को महत्व नहीं दें तो यह किसी खबर का छूटना नहीं, राजनीति है। कहने की जरूरत नहीं है कि मायावती राजनीतिक कारणों से हमलावर हैं। मध्य प्रदेश की सरकार पर लगातार प्रहार करने वाली मायावती ने कांग्रेस तथा भाजपा के कृत्य को निंदनीय कहा है। मध्य प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बसपा के समर्थन से बनी है। इसके बाद भी मायावती लगातार कमलनाथ सरकार को कठघरे में खड़ा कर रही हैं। उन्होंने कांग्रेस और भाजपा की समान रूप से निन्दा की है और यह साधारण नहीं है। उसी तरह हिन्दी अखबारों में इसे प्रमुखता नहीं मिलना भी साधारण नहीं है। इंटरनेट पर हिन्दी में यह खबर है जरूर लेकिन हिन्दी अखबारों में पहले पन्ने पर नहीं है जबकि मुख्य रूप से दक्षिण भारत का अखबार माने जाने वाले हिन्दू ने इसे पहले पन्ने पर रखा है।

इंटरनेट पर दैनिक जागरण की इस खबर में यह भी लिखा है, इससे पहले कल मायावती ने कहा कि संसद के बजट सत्र के अंतिम दिन आयी राफेल विमान सौदे पर कैग की रिपोर्ट जनता की नजर में आधी-अधूरी है। उन्होंने ट्वीट किया, ”राफेल विमान सौदे पर बहु-प्रतीक्षित सीएजी रिपोर्ट जनता की नजर में आधी अधूरी। यह न तो सम्पूर्ण और न ही पूरी तरह से सही। भाजपा सरकार में क्यों संवैधानिक संस्थाये अपना काम पूरी ईमानदारी से नहीं कर पा रही हैं? देश चिन्तित है।” यह खबर आपको अपने अखबार में दिखी क्या?

तीन पत्रकारों और दो इंस्पेक्टरों को निपटाने वाले आईपीएस की कहानी

तीन पत्रकारों और दो इंस्पेक्टरों को निपटाने वाले आईपीएस की कहानी…. नोएडा के एसएसपी वैभव कृष्ण बेहद इमानदार पुलिस अफसरों में गिने जाते हैं. उन्होंने तीन पत्रकारों और दो इंस्पेक्टरों को एक उगाही केस में रंगे हाथ पकड़ कर एक मिसाल कायम किया है. सुनिए वैभव कृष्ण की कहानी और उगाही में फंसे पत्रकारों-इंस्पेक्टरों के मामले का विवरण.

Bhadas4media ಅವರಿಂದ ಈ ದಿನದಂದು ಪೋಸ್ಟ್ ಮಾಡಲಾಗಿದೆ ಬುಧವಾರ, ಜನವರಿ 30, 2019
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