इंदौर के प्रजातंत्र अखबार ने ग़ज़ब की क्रिएटिविटी दिखाई

सुप्रीम कोर्ट में गलती, दूसरी बार, एक ही मामले में

सुप्रीम कोर्ट में गलत, अस्पष्ट या द्विअर्थी संवाद बोलना साधारण नहीं है। सुप्रीम कोर्ट में जो बोला जाए उसपर स्पष्टीकरण देना पड़े – इससे बड़ी लापरवाही क्या हो सकती है। इसकी खबर ऐसी होनी चाहिए थी। पहली बार नहीं तो कम से कम दूसरी बार। इंदौर के प्रजातंत्र ने वह किया है जो बड़े अखबारों के छोटे-छोटे संपादक नहीं कर पाए। आप जानते हैं कि पहले “टाइपिंग की गलती” से गलत अर्थ निकल चुका है। इस खबर में उसकी भी चर्चा है।

भड़ास व्हाट्सअप ग्रुप- BWG-10

भड़ास का ऐसे करें भला- Donate

भड़ास वाट्सएप नंबर- 7678515849

One comment on “इंदौर के प्रजातंत्र अखबार ने ग़ज़ब की क्रिएटिविटी दिखाई”

Leave a Reply

Your email address will not be published.

*

code