पड़ना था पुष्पराज जैन के यहां लेकिन छापा पड़ गया पीयूष जैन के यहां!

Ravish Kumar-

कानपुर के पीयूष जैन के यहाँ छापा और व्यापारी वर्ग से सवाल… इस दौर में कुछ घटनाओं को देखने समझने और लिखने बोलने से पहले थोड़ा ठहर जाना चाहिए। ज़रूरी नहीं कि आप सभी मसलों पर लिखे और उसी वक्त लिखें। अगर कानपुर में ऐसा हुआ है तो ग़ज़ब हुआ है। पहले चेक करना चाहिए कि कहीं गुजरात में कोई गुटखा लॉबी तो नहीं है जिसके लिए कानपुर की गुटखा लॉबी की कमर तोड़ी गई। फिर हर तरह की गुटखा लॉबी के ख़त्म होने की दुआ करनी चाहिए। गुटखा कानपुर वालों का हो या गुजरात वालों का होता तो ख़तरनाक ही है।

पत्रकार रोहिणी सिंह का यह सवाल भी गंभीर हैं । पीयूष जैन के यहाँ छापा पड़ गया जबकि पड़ना था पुष्पराज जैन के यहाँ ! जो भी है, 40 से अधिक बक्से में कैश निकला है वो भी तब जब नोटबंदी और जीएसटी के बाद कालाधन की समाप्ति का एलान कर दिया गया था। कोई इसका जवाब दे कि इस तादाद में काला धन पैदा करना कैसे संभव हो पा रहा है? इस पैसे का बाक़ी हिस्सा किस किस में बंटा है? इसकी जवाबदेही केंद्र सरकार पर है कि बताए कि जीएसटी के बाद इतना कैश कैसे पैदा हो रहा है?

पीयूष जैन को भी बताना चाहिए कि उनके इस पैसे से किस किस दल को सामाजिक और राजनीतिक लाभ हुआ है? ये भी अच्छी बात है कि पीयूष जैन के यहाँ से निकलें करोड़ों के कालाधन को जैन समाज ने इसे सामाजिक प्रतिष्ठा का विषय नहीं बनाया है। जैन समाज ने हमेशा से ईमानदार राजनीति को प्रश्रय दिया है। इस समाज के पैसे से कितने दल और नेताओं का खर्चा चला है हिसाब करना मुश्किल हो जाएगा। जैन समाज ने अपने धन से केवल स्कूल कॉलेज और मंदिर- धर्मशाला ही नहीं बनवाया है बल्कि राजनीति को भी पूँजी की ऊर्जा दी है।

कानपुर में व्यापारी मनीष गुप्ता की हत्या के बाद जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नौकरी और मुआवज़े का एलान किया तो शहर में वैश्य समाज की तरफ़ से पोस्टर लगा था और मुख्यमंत्री का आभार प्रकट किया गया था। मुझे पूरी उम्मीद है कि पीयूष जैन के यहाँ से निकलें काले धन के प्रति धनिक जैन समाज मोदी जी को आभार देने वाला पोस्टर लगाएगा। जैन समाज को आगे आकर मोदी जी का आभार प्रकट करना चाहिए। पोस्टर प्रकट करना चाहिए।

यूपी में व्यापारियों को अलग से रिझाने के लिए ख़ूब सम्मेलन हो रहे हैं। वैश्य समाज भाजपा से टिकट माँग रहा है तो बीजेपी के सांसद श्यामाचरण गुप्ता पूछ रहे हैं कि व्यापारियों के यहाँ ही छापे क्यों पड़ते हैं, जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों को यहाँ क्यों नहीं पड़ते। अक्तूबर महीने में चित्रकूट में व्यापारियों का एक सम्मेलन हुआ था उसमें बीजेपी सांसद ने यह सवाल किया था। पीयूष जैन के यहाँ पड़े छापे से मोदी जी ने अपने सांसद को जवाब दे दिया है। अब व्यापारियों की बारी है कि वे जवाब दें।

सवाल है कि उनके जिस पैसे से आज तक इस देश में जो राजनीति चली है वो कालाधन के खाते से था या ईमानदारी के खाते से था? क्योंकि जब मोदी जी को ईमानदार बनना होता है तब तो व्यापारी के यहाँ छापे पड़ जाते हैं तो व्यापारियों को भी बताना चाहिए। उन्हें भी ईमानदार बनने के लिए इसकी पोल खोल देनी चाहिए। एक सवाल और है। बीजेपी को सपोर्ट करने और विरोध करने वाले व्यापारियों के यहाँ छापे का। दोनों ग़लत है या केवल विरोधी दल के व्यापारी के यहाँ छापों को पड़ना सही है?


Satyendra PS-

पिछले 7 साल में देश का चप्पा चप्पा बेच डाला। बैंकों का हजारों करोड़ रुपये लेकर उद्योगपति विदेश में बस गए। ईमानदार कारोबारी रो रहे हैं, चाहे वह ठेले पर सब्जी बेचने वाले हों, या कार बनाने वाले। हर साल सरकारी कम्पनी बेचने और भाजपा आरएसएस मुख्यालय के लिए जमीन खरीदने, उन पर आलीशान बिल्डिंगे बनाने का लक्ष्य रखा जा रहा है। नेताओं के यहां करोड़ों की कारों के बेड़े आ रहे हैं। सिर्फ एयर इंडिया की संपत्ति में इक्विटी के लिए 62,000 करोड़ रुपये दिए गए हैं, जो महंगा पेट्रोल बेचकर जनता से कमाया गया है।

और इस आदमी को उत्तर प्रदेश के चुनाव के पहले 284 करोड़ रुपये की अनएकाउंटेड मनी में समाजवादी पार्टी का भ्रष्टाचार नजर आ रहा है। वह पार्टी, जो 5 साल से हर तरह की सत्ता से बाहर है। जिसके लोकसभा में दहाई अंकों में भी सांसद नहीं हैं, प्रदेश की सत्ता से इस कदर बाहर है कि 50 विधायक भी चुनाव नहीं जीते हैं।

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One comment on “पड़ना था पुष्पराज जैन के यहां लेकिन छापा पड़ गया पीयूष जैन के यहां!”

  • महेन्द्र'मनुज' says:

    अपने पाप विपक्ष के पाले में डाल देने का कार्य बखूबी कर रही है भाजपा।
    हमला करो, सुरक्षित रहो
    ********************
    इलेक्टोरल बाँड /पीएम केयर्स फँड पर छापा कब तक रोका जा सकेगा ?

    Reply

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