‘रविवार दिल्ली’ का फरवरी अंक- ‘ब्रह्मास्त्र’! पढ़ें पूरी मैग्जीन

राष्ट्रीय हिंदी पत्रिका ‘रविवार दिल्ली’ का फरवरी अंक में कवर स्टोरी प्रियंका गांधी का राजनीति में आना है. इसे ‘ब्रह्मास्त्र’ शीर्षक से लीड स्टोरी के रूप में पब्लिश किया गया है. कवर पेज पर एक शानदार टिप्पणी है- ”निदा फाजली का एक शेर है, उसके दुश्मन हैं बहुत, आदमी अच्छा होगा! देश की सक्रिय राजनीति में कांग्रेस ने प्रियंका को क्या उतारा, उसके हजारों दुश्मन अचानक तैयार हो गए.” इस कवर स्टोरी को लिखा है वरिष्ठ पत्रकार किशोर कुमार मालवीय ने.

अखबार के मुख्य संपादक प्रमोद शर्मा की संपादकीय है- ‘क्या देश मोदी मुक्त होगा’. बीजेपी अभी तक कांग्रेस मुक्त भारत की बात करती थी लेकिन अब चर्चा उलटने लगी है और कहीं कहीं मोदी मुक्त देश की बात होने लगी हैं. इसी टापिक पर एक पठनीय संपादकीय है जिसमें मुख्य संपादक ने बताया है कि किस तरह ये देश मोदी मुक्त नहीं हो सकता.

शिखा ठाकुर ने भी प्रियंका गांधी के राजनीत में आने के बाद से उन पर लगातार नज़र रखा और इससे बने नए समीकरण को भाजपा नेताओं के बयानों के जरिए टटोलने की कोशिश की. उनने इस मैग्जीन में ‘प्रियंका पर भाजपा नेताओं के बिगड़े बोल’ शीर्षक से लिखा है. विजय दीक्षित ने भी प्रियंका के राजनीति में आने का विश्लेषण किया है.

संगम को इस मैग्जीन के लिए कवर किया है अमृतांशु मिश्रा ने. सवर्ण आरक्षण को लेकर प्रभाकर मिश्रा की कलम चली है जिसमें इसके सियासी से लेकर सामाजिक तक सभी पहलुओं को उजागर किया गया है. ममता बनर्जी ने राजनीत में जिस कदर इन दिनों सुर्खियां बटोरी हैं, उसके राजनीतिक मतलब को उजागर किया है सुशील राजेश ने, ”क्या ममता बंधन से घबराएंगे मोदी!” शीर्षक से..

‘कठिन है राजनीतिक उजालों की तलाश’ और ‘मोदी सांसद आदर्श गांव योजना हवा हवाई’ शीर्षकों से क्रमश: प्रमोद शर्मा और संदीप ठाकुर ने राजनीतिक के अलग-अलग पहलुओं की पड़ताल की है. प्रमोद शर्मा ने जहां यूपी की राजनीतिक परिस्थिति का गहनता से विश्लेषण कर राजनीति के उजले पक्ष के प्रति आशावादिता का सच जाना है, वहीं संदीप ठाकुर ने मोदी की एक बहुचर्चित योजना आदर्श ग्राम योजना का पोस्टमार्टम कर जमीन पर परिलक्षित स्थितियों को उकेरा है.

नीचे दिए लिंक पर क्लिक करें और ‘रविवार दिल्ली’ का आद्योपांत पाठ करें….

https://drive.google.com/open?id=1pO-N9CoaQN9ZtgnoptqyA5R34cU5RSIo

इस फरवरी अंक में ढेर सारे नियमित कालम तो हैं ही, इरा झा, प्रदीप पंडित, अजय कुमार जैसे वरिष्ठ पत्रकारों के अलग-अलग टापिक पर विश्लेषण भी हैं, जिसे आप एक साथ एक जगह पढ़ सकते हैं, सिर्फ भड़ास पर. उपर दिए लिंक पर क्लिक करें.

तीन पत्रकारों और दो इंस्पेक्टरों को निपटाने वाले आईपीएस की कहानी

तीन पत्रकारों और दो इंस्पेक्टरों को निपटाने वाले आईपीएस की कहानी…. नोएडा के एसएसपी वैभव कृष्ण बेहद इमानदार पुलिस अफसरों में गिने जाते हैं. उन्होंने तीन पत्रकारों और दो इंस्पेक्टरों को एक उगाही केस में रंगे हाथ पकड़ कर एक मिसाल कायम किया है. सुनिए वैभव कृष्ण की कहानी और उगाही में फंसे पत्रकारों-इंस्पेक्टरों के मामले का विवरण.

Bhadas4media ಅವರಿಂದ ಈ ದಿನದಂದು ಪೋಸ್ಟ್ ಮಾಡಲಾಗಿದೆ ಬುಧವಾರ, ಜನವರಿ 30, 2019
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