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सहारा मीडिया की बंदी और उत्तराखंड प्रेस क्लब के अध्यक्ष भूपेंद्र कंडारी का वक्त!

गुणानंद जखमोला-

पत्रकारिता का पेशा बहुत बेरहम है और समय बहुत बलवान…… आज जब देहरादून में प्रेस क्लब की कार्यकारिणी का शपथ ग्रहण समारोह था। सीएम धामी पदाधिकारियों को पत्रकारों के हितों के लिए जीने-मरने की कसमें खिला रहे थे।

प्रेस क्लब का पिछले साल यानी 2025 का अध्यक्ष भूपेंद्र कंडारी उस समय डीएलसी, फिर डीएम और फिर एसडीएम के चक्कर काट रहा था इंसाफ मांगने के लिए। सहारा अचानक बंद हो गया। कई महीनों का वेतन नहीं मिला।

क्लब या श्रमजीवी यूनियन का एक भी पत्रकार सहारा के साथियों साथ नहीं था। यह है बेरहम और थैंकलेस जॉब।

वो तो मैं हूं कि जो सहारा प्रबंधन से अकेला ही पिछले 10 साल से भिड़ा बैठा हू। मैंने भी डीएलसी से लेकर लेबर कोर्ट के सैकड़ों चक्कर काटे, और अब भी हाईकोर्ट में केस लड़ रहा हूं। लेकिन भूपेंद्र कंडारी ने कभी एक भी कॉल कर नहीं पूछा जबकि वो सहारा में मेरा साथी था और यूनियन का अध्यक्ष भी।

आज वही कंडारी बिल्कुल अकेला अपने और सहारा के अन्य पत्रकार साथियों के साथ लड़ रहा है। मुझे बेहद बुरा लग रहा है। काश, भूपेंद्र ने तब मुझे मोरल सपोर्ट दिया होता तो मैं उसके बगल में सबसे मजबूती से खड़ा होता। समय बहुत बलवान है।

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1 Comment

1 Comment

  1. Arun Srivastava

    January 11, 2026 at 9:40 pm

    जखमोला जी को बधाई। पर वे अकेले नहीं सब अपनी अपनी लड़ाई लड़ रहे हैं।

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