धंधेबाज शाहरुख खान की मजबूरी समझिए….

Chandan Pandey : शाहरुख़ खान की शिकायत बेवजह हो रही है। मैं जिस गली में रहता हूँ उसमें अगर कोई गुंडा आ जाए और नए नियम बना दे तो शुरुआती विरोध के बाद मैं भी उसकी जी हुजूरी  में जाऊँगा ही जाऊँगा। गुंडों से डरना चाहिए। गुंडों के साथ सत्ता हमेशा रहती है। आप एक बार को गुंडे को हरा भी दें तो उसके साथ जो सत्ता है, जैसे भक्त पब्लिक, पुलिस, नेता-पनेता, वो आपको तड़पा देंगे, तड़पा तड़पा कर सजा देंगे। शाहरुख की गलती रत्ती भर भी नहीं है।

शाहरुख ने फिल्म कई वर्ष पहले शुरू की होगी। कितना पैसा खर्च किया होगा। पाकिस्तानी अदाकारा से फिल्म में काम कराया होगा। अब अचानक राज ठाकरे और अन्य गुंडे कहते हैं कि पाकिस्तानी लोगों द्वारा अभिनीत फ़िल्में वो प्रदर्शित ही नहीं होने देंगे। ऐसे में शाहरुख अगर विरोध करते हैं तो भक्त, फ्रॉड इंटरनेटिये, देशभक्ति के नाम पर उनकी फिल्मों का बहिष्कार करने लगेंगे। ऐसे में कोई शाहरुख करे भी तो क्या करे?

शाहरुख का जितना निवेश है उसका सहस्रान्स भी अगर साथियों का खर्चा हो तो ये लोग राज ठाकरे और अन्य गुंडों के पैर में गिर पड़ेंगे। साष्टांग। एक अकेले पड़ते जा रहे इंसान की मुसीबत समझिए। पिछली बार जब अक्लबंद भक्तों ने किसी मामूली बात पर शाहरुख की फिल्म का बहिष्कार किया था तब तो ये अक्लमंद यह नहीं सोचे कि जाएं, फिल्म देखें और बहिष्कार का बहिष्कार करें। नहीं। आज जब शाहरुख ने अपने बचाव का कदम उठाया है तो हर किसी को अपना स्वाभिमान दिख रहा है। वाह!

चंदन पांडेय की एफबी वॉल से.

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