मुसहरों का दुख देखा न गया तो इस लड़की ने कैमरे को बनाया हथियार (देखें डाक्यूमेंट्री)

Abhishek Prakash : नागिन डांस करने वाली लड़की से मिले हैं आप! बोले तो ‘बाबा टाइप लड़की’! ऐसी एक लड़की मिली मुझे। बेपरवाह कान में ईयरफोन लगाए ,मन किया तो जोर-जोर से गाने वाली एक मस्तमौला फ़क़ीरी अंदाज़ वाली लड़की। सच कहूं तो खाप-पंचायत की खोज इन जैसों के भय से ही पूर्व में संस्कृति के ठेकेदारों ने की होगी! पर आप इससे बात करिए।

इसके काम को देखिए तो लगेगा कि बनावट से कोसों दूर बदलाव की कहानी लिखने वाली यह नन्ही ‘pursuit of happiness’ की हीरोइन है। अच्छे खासे घर की खाई पी अघाई इक्कीसवीं सदी की ये पौध केवल हिप-हॉप पर ही विश्वास नहीं करती बल्कि अर्थपूर्ण काम भी करती है।

इस साल की बात है जब यह गांव के एक स्कूल में विवेकानंद जयंती कार्यक्रम में भाग लेने गई तो नेताओं की तरह आगे बैठने की चाहत के विपरीत इसने पीछे जाकर ‘मुसहर’ समुदाय के बीच बैठना पसंद किया। मुसहर यानी वही मूस (चूहा) पकड़ने वाली जाति! फिर क्या था हो गया झोल! उनकी दयनीय स्थिति देख वह परेशान हो उठी और सोचने लगी कि उसे कुछ करना है। और, बिना किसी पूर्वानुभव के उनके जीवन संघर्षो पर आधारित एक डॉक्यूमेंट्री बना डाली।

शिवा त्रिपाठी

कोई ज्ञान नहीं, मोबाईल छोड़ कोई इक्विपमेंट भी नही। लेकिन कुछ करने की और वर्तमान में जीने की इस ज़िद ने और उसके अंदर की मानवता तथा संवेदनशीलता ने उससे ये सब करा डाला! मज़ा तो तब आया जब एडिटिंग के लिए उसने छोटे से कस्बे के एक शादी का वीडियो बनाने वाले लड़के को ढूढ़ निकाला वो भी उसके खेत से! रात भर साथ बैठ कर खुद ही लगी रही और अपने जेब से खर्च भी किया।

सोचता हूं लड़कियों के फ़ोन, जीन्स, पढ़ने-लिखने और अपनी मनमाफ़िक जीवनसाथी चुनने वालों को ये सब देखकर कभी शर्म भी नहीं आती होगी क्या? खैर संकीर्ण और प्रतिक्रियावादी लोगों को छोड़ इस प्रगतिशील, सृजनशील लड़की Shiva Tripathi के इस मेहनत को थोड़ा अपना समय दीजिए। डाक्यूमेंट्री देखने के लिए नीचे दिए लिंक पर क्लिक करें :

https://www.youtube.com/watch?v=qdfOw6GhP0Q

यूपी पुलिस में डीएसपी अभिषेक प्रकाश की एफबी वॉल से.

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