नई दिल्ली – हाल ही में एक वायरल वीडियो ने सरकारी मीडिया की जवाबदेही और निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर जहाँ ‘हिंदुस्तान टाइम्स’ ने अपनी गलती स्वीकार कर संबंधित रिपोर्ट को सुधार दिया, वहीं सरकारी वित्तपोषण प्राप्त समाचार चैनल ‘डीडी न्यूज’ और उसके ऐंकर सुधीर चौधरी पर गलत जानकारी को बढ़ावा देने का आरोप लग रहा है।
‘PIB Fact Check’ ने एक वायरल झूठी खबर को खंडन करते हुए एक स्क्रीनशॉट साझा किया, जिसमें ‘हिंदुस्तान टाइम्स’ की एक रिपोर्ट और एक एक्स (पूर्व ट्विटर) अकाउंट की पोस्ट शामिल थी। हालांकि, इसी विषय पर सरकारी न्यूज चैनल ‘डीडी न्यूज लाइव’ के एंकर सुधीर चौधरी द्वारा प्रसारित एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें वही भ्रामक जानकारी दोहराई गई है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए यह सवाल उठने लगे हैं कि जब एक प्राइवेट मीडिया हाउस (हिंदुस्तान टाइम्स) ने अपनी गलती स्वीकार कर ली, तो फिर सरकारी मंच पर फैलाई गई ग़लत जानकारी को क्यों नजरअंदाज़ किया जा रहा है?
‘डीडी न्यूज हिंदी’ का पोस्ट अब तक मौजूद
अब तक ‘डीडी न्यूज हिंदी’ के आधिकारिक एक्स हैंडल से किया गया वह पोस्ट न तो डिलीट किया गया है, न ही उसमें कोई सुधार/फैक्ट चेक अपडेट जोड़ा गया है। ऐसे में सोशल मीडिया यूजर्स ‘PIB Fact Check’ की निष्पक्षता पर भी सवाल उठा रहे हैं।
फैक्ट चेकर मोहम्मद जुबेर ने इसे लेकर टिप्पणी की –
“Hello PIBFactCheck, आपने हिंदुस्तान टाइम्स और एक रैंडम एक्स अकाउंट को गलत ठहराकर मामला निपटा दिया, लेकिन सरकारी चैनल DD News के एंकर द्वारा फैलाए गए उसी झूठ पर चुप क्यों हैं?”
सरकारी मीडिया की विश्वसनीयता पर असर
इस विवाद ने एक बार फिर से यह बहस तेज कर दी है कि जब सरकारी चैनलों और उनके ऐंकरों से ही गलत सूचनाएं प्रसारित हों, तो उनकी जवाबदेही किसके प्रति और कैसी तय होगी? सुधीर चौधरी, जो पहले ही कई विवादास्पद कार्यक्रमों के लिए चर्चा में रह चुके हैं, एक सरकारी चैनल के मंच से ऐसी भ्रामक खबरें प्रस्तुत कर रहे हैं – यह सरकार की सूचना प्रणाली की पारदर्शिता पर भी सवाल खड़ा करता है।
अब आगे क्या?
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय और ‘डीडी न्यूज’ को इस मामले में स्पष्टता लानी होगी और यदि जरूरत हो तो सुधारात्मक कार्रवाई करनी होगी। साथ ही, ‘PIB Fact Check’ जैसी सरकारी फैक्ट चेक इकाइयों से अपेक्षा की जाती है कि वे तथ्यों की पुष्टि में निष्पक्षता और समग्रता बरतें – चाहे वह सरकारी संस्थान हो या निजी मीडिया।
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