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छत्तीसगढ़

मुकेश चंद्राकर की हत्या कराने वाला ठेकेदार सुरेश भाजपा-कांग्रेस दोनों का सगा है, लूट के हिस्सेदार कभी नहीं चाहते सच बाहर आए!

सुरेश महापात्रा-

न तस्वीरों को देखकर हम जो भी अंदाज़ा लगाएंगे वह सही ही होगा, यह गलत है…

पत्रकार मुकेश चंद्राकर की हत्या करवाने वाले के साथ सोशल मीडिया पर भाजपा-कांग्रेस आपस में खेल रही हैं।

सच्चाई यही है कि सड़क निर्माण से जुड़े भ्रष्टाचार को उजागर करने की कीमत मुकेश चंद्राकर ने जान देकर चुकाई है।

ठेकेदार जो इन दो तस्वीरों में (ऊपर) दिखाई दे रहा है इनमें से पहली में वह प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज के साथ गुलदस्ता लेकर खड़ा है।

दूसरी तस्वीर में हत्यारा ठेकेदार सुरेश चंद्राकर भाजपा के बीजापुर के बड़े नेता जी वेंकट के साथ दिख रहा है। यह तो तय है कि ये दोनों तस्वीर उसकी हैसियत बता रही है।

कांग्रेस और भाजपा दोनों के साथ गलबहिया करता आरोपी, पत्रकार की हत्या क्यों करता है? यह बड़ा सवाल है।

भाजपा का आईटी सेल कांग्रेस के साथ जुड़े आरोपी की तस्वीरें पेश कर रहा है और कांग्रेस का आईटी सेल भाजपा नेताओं के रिश्तों को बताकर खुद को साफ करना चाहता है।

सच्चाई बिल्कुल इसके उलट है। मामला माओवादी प्रभावित इलाक़े में हो रहे भ्रष्टाचार और उसे दिए जा रहे राजनीतिक और प्रशासनिक संरक्षण का है। यह समझना होगा कि लूट के हिस्सेदार कभी नहीं चाहते कि लूट की सच्चाई बाहर आए।

माओवादियों के आधार क्षेत्र में होने वाले विकास कार्यों की सुरक्षा का जिम्मा जिले के पुलिस कप्तान पर होता है। कप्तान कितने मासूम हो सकते हैं यह हर कोई जानता समझता है।

सरकार को सगता है कप्तान पर बात आएगी तो सरकार पर भी छींटे पड़ेंगे। बीजापुर जिले में पूर्व कलेक्टर के दौर में सेवानिवृत्ति से पहले एक मामला सुर्खियों में रहा।

कभी विधायक विक्रम- सीएम भूपेश और कांग्रेस के करीबी अजय सिंह ने चुनाव से पहले पाला बदल लिया। वे भाजपा के साथ खड़े हो गए।

जिसके बाद भ्रष्टाचार के मामले को लेकर कलेक्टर के खिलाफ आवाज़ बुलंद करते रहे। ऑडियो सभी ने सुना है।

फिर क्या हुआ?

मुकेश के हत्यारे ठेकेदार ने एक एफ़आइआर दर्ज करवाई और रैली निकाली तो अजय सिंह को जेल दाखिल कर दिया गया।

दरअसल अजय सिंह के दबाव से कलेक्टर के तबादले का यह प्रतिफल था।

तबादला करने में राज्य सरकार यहां भी गलत थी सेवानिवृत्ति के चंद रोज पहले किसी अधिकारी का तबादला आदेश गलत था।

यही वजह थी कि कलेक्टर ने जादू किया और अजय सिंह को उसकी औक़ात दिखा दी गई। दरअसल छोटी जगहों की राजनीति को समझने के लिए बहुत से कारणों को एक क़तार में रखकर देखना होता है।

अब समझिए कि भाजपा नेता जी वेंकट के साथ सुरेश चंद्राकर की तस्वीर निश्चित तौर पर हालिया ही है।

यानि कल तक कांग्रेस के जेरे साये में भ्रष्टाचार का पर्याय रहा ठेकेदार सुरेश चंद्राकर अब भाजपा का प्यादा होने लगा।

यही वजह दिख रही है कि मौजूदा सिस्टम में वह उसी तरह प्रभावी हो चुका है जैसा पुराने सिस्टम में था।

अब हमें अभी भी विश्वास नहीं है कि पत्रकार मुकेश उसकी मौत के बाद न्याय मिल सकेगा…?

गृहमंत्री विजय शर्मा को चाहिए था कि वे पुलिस से सवाल करते कि इतने बड़े भ्रष्टाचार पर पुलिस ने कोई रिपोर्ट क्यों नहीं भेजी। जबकि पुलिस यह बता सकती थी कि उनके संरक्षण में बनाई जा रही सड़क पर थूक पालिश कर पैसा निकालकर लूटेरे बांट रहे हैं।

पर वे अपनी प्रेस कांफ्रेंस में जो बताते दिखे उससे लगा कि भ्रष्टाचार और हत्या का सारा मसला कांग्रेस से सिराहने फेंक कर मौत पर राजनीति कर लेंगे।

संवेदनशील सरकार की कार्रवाई के बाद पुलिस का पहला बयान ही ठेकेदार सुरेश को इस पूरे घटनाक्रम से बाहर निकालने का दिख रहा है।

पुलिस के बयान में यह कहा गया है कि “सुरेश चंद्राकर जगदलपुर में था जब उसे घटना की जानकारी दी गई।”

मुकेश की हत्या के मुख्य साजिशकर्ता के लिए छत्तीसगढ़ पुलिस का यह बयान क्या साबित करता है?

अभी भी मसला समझ नहीं आया है जो मैं कहना चाहता हूँ तो आप धन्य हैं।

मुकेश ने निश्चित तौर पर दुस्साहस किया भ्रष्टाचार पर अपना रूख स्पष्ट करने का। वह हमेशा कहता था कि दादा “सड़क का नक्सली विरोध करते हैं भुगतना अंदर बुनियादी सुविधाओं के अभाव में आम आदिवासियों को कष्ट में जीना पड़ता है।”

वह बेख़ौफ़ था क्योंकि जो अपनी मृत्यु की राख पर खड़ा होता है उसे मौत का भय नहीं रहता…

मुकेश ने संघर्ष से जीवन को हासिल किया और खुद पत्थर पर अंकुरित होकर हर पौधे की तरह पेड़ बनने का सपना बुन रहा था…

जड़ें मज़बूत करने के लिए जमीन की तलाश में जुटा था और पौधे से पेड़ बनने के इस ससफर पर कुल्हाड़ी चल गई…

हम कांग्रेस और भाजपा के खेल से बाहर निकलें तो समझ सकेंगे कि मुकेश के बहाने हमने बहुत कुछ उसी सेप्टिक टैंक में गाड़ दिया है… जहां से ईमानदार विकास पर सुरेश चंद्राकर जैसे दर्जनों भ्रष्टाचारी सिस्टम के साथ गलबहिया करते दिखाई दे रहे हैं।

लेखक बस्तर के वरिष्ठ पत्रकार हैं.

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