रवीश कुमार-
गोदी मीडिया को लेकर तेजस्वी यादव का यह भाषण (नीचे) सुना जाना चाहिए। क्या तेजस्वी यादव वाकई बिहार के अखबारों को लेकर बकायदा रैली में बताएंगे कि कौन सी खबर कहाँ है, कैसे छापी गई है? उन्हें ही नहीं, सारे नेताओं को यह काम करना चाहिए।
भारत जोड़ों यात्रा में राहुल गाँधी ने मीडिया का सवाल रखा लेकिन और विस्तार की ज़रूरत थी। मीडिया दरअसल क्या कर रहा है, इसके बारे में विस्तार से बताने का मौका शुरू करने के बाद भी राहुल गांधी चूक गए। फिर भी राहुल गाँधी के प्रेस कांफ्रेंस करने और प्रेस पर टिप्पणी करने से ही बहुत लोगों को पता चला। लोग सतर्क हुए। तेजस्वी अगर अपनी सभाओं में अख़बार और टीवी चैनलों के क्लिप लेकर जनता को बताते हैं तो यह सही और लोकतांत्रिक रास्ता होगा।
विपक्ष को इस पर बहुत काम करना चाहिए। जन अभियान चलना चाहिए, गाँव गांव में रोज़ नुक्कड़ सभा होनी चाहिए। रैलियों में अख़बार लेकर बताना चाहिए कि विपक्ष की ख़बरें कैसे छापी गई हैं। कैसे एक पेज पर बीजेपी की रैलियों की दस-दस ख़बरें होती हैं, विपक्ष की एक भी नहीं होती है। मंच पर छोटे बड़े जितने नेताओं के भाषण हो, सबसे कहा जाए कि वह गोदी मीडिया क्या है, इसके बारे में बताए, क्यों गोदी मीडिया आम जनता के हितों का हत्यारा है, उसके बारे में बताए।
उदाहरण के साथ भाषण दिया जाए और इसके लिए तैयारी की जाए।
इसी फेसबुक पेज पर कई साल से लिख रहा हूँ कि विपक्ष को जनता के बीच गोदी मीडिया के बारे में बताना होगा। मेरे बहुत सारे लेख मिल जाएंगे। इस काम में देर हो गई है लेकिन अब भी किया जा सकता है। विपक्ष अपने मंच को ऑडियो-वीडियो लैब में बदल सकता है। गोदी चैनलों के कार्यक्रमों और थंबनेल को दिखाया जाए, बताया जाए कि किस तरह के टॉपिक पर बहस होती है, आम जनता के कोई सवाल नहीं होते हैं, कैसे नफरत फैलाई जा रही है ताकि जनता बंटती जाए।
इसी के साथ यह भी बताया जाना चाहिए कि इसकी जगह पर क्या-क्या नहीं दिखाया गया। इसके पन्ने से केवल एक ही आदमी की आवाज़ सुनाई देती है। एक ही पार्टी का गुणगान सुनाई देता है। 11 साल हो गए सत्ता में, एक भी सवाल नहीं पूछा जाता है। गोदी मीडिया भ्रष्टाचार से जुड़ी ख़बरों की पड़ताल नहीं करता है। दो चार पत्रकार जनता के समर्थन से कुछ खोजी ख़बरें लाते भी हैं तो उन पर चुप्पी साध ली जाती है।
गोदी मीडिया ने इस लोकतंत्र को बंद कर दिया है। दुनिया के एक शानदार लोकतंत्र को डब्बा बना दिया है। लगता है कि किसी ने ऊपर से ढक्कन बंद कर दिया है। वक्त आ गया है कि ढक्कन को हटा दिया जाए। बिहार में आठ करोड़ लोगों से फार्म भरवाया जा रहा है, चार करोड़ लोगों से नागरिकता का प्रमाण पत्र मांगा जा रहा है, क्या यह मज़ाक नहीं है? इतने बड़े अभियान पर चुनाव आयोग से प्रेस कांफ्रेंस की मांग तक नहीं जा रही है?
विपक्ष ने अपने सारे सवाल लिखित तौर पर दे दिए हैं, अगर आयोग को प्रेस कांफ्रेंस नहीं करनी है, उन सवालों का क्रमवार जवाब क्यों नहीं प्रकाशित कर सकता है? क्या भारत का चुनाव आयोग भारत के लोकतंत्र और उसके भविष्य से ऊपर है? क्यों नहीं मीडिया यह सवाल जनता के बीच पहुंचाता है? महाराष्ट्र में वोटर लिस्ट को लेकर अभी तक न्यूज़लौंड्री की सुमेधा रिपोर्ट कर रही हैं, क्या इसकी चिंता बड़े अखबारों और चैनलों को नहीं करनी चाहिए? किसके फायदे के लिए लोकतंत्र की इस लूट को गोदी मीडिया छिपाता है?
गोदी मीडिया भारत के लोकतंत्र के हत्यारा है। इसने केवल विपक्ष को ग़ायब नहीं किया, जनता जब भी अपने सवालों के साथ विपक्ष में आती है, गोदी मीडिया जनता को भी ग़ायब कर देता है। गोदी मीडिया का एक ही एजेंडा है, मुसलमानों से नफ़रत कैसे करें, दिन रात इसकी ट्रेनिंग देना। इस पर बहस चलाना। सांप्रदायिकता आपके बच्चों को हत्यारा बनाती है। इसलिए सांप्रदायिकता से दूर रहना चाहिए मगर गोदी मीडिया ने इस घर-घर का आहार बना दिया है।
2014 से विपक्ष ने गोदी मीडिया को लेकर कई प्रयोग किए। कभी डिबेट कार्यक्रमों का बहिष्कार किया, कभी इसके प्रवक्ता जाने लगे, कभी दूरी बनाई, कभी नज़दीक गया लेकिन हुआ कुछ नहीं। गोदी मीडिया पर विपक्ष का बहिष्कार जारी है। उसके सवालों को प्रमुखता नहीं मिलती है। विपक्ष का बहिष्कार का मतलब केवल दूसरे पक्ष का बहिष्कार नहीं है, जनता का भी बहिष्कार है। कोई मीडिया जनता का बहिष्कार कर, उसके ख़िलाफ़ होकर मीडिया कैसे हो सकता है?
मोदी सरकार का सबसे बड़ा विकास गोदी मीडिया है। बाकी उसे विकास करने की ज़रूरत नहीं है। हर तरह का झूठ पहली हेडलाइन के रूप में छापा जा रहा है। कभी किसी दावे की जाँच नहीं होती है। यह कैसा मीडिया है जो चुनाव आयोग से एक प्रेस कांफ्रेंस की मांग या उम्मीद नहीं करता है। क्या लोगों को समझ आ रहा है कि यह सवाल तेजस्वी यादव का नहीं है, उसका है। अंत में उसकी कहानी छपनी बंद हो जाएगी। बंद। हो चुकी है।
तेजस्वी का वीडियो देखें…
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