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भड़ास 8वां स्थापना दिवस : यूट्यूब से लाखों रुपये कमाने का गुर सिखाएगा एक छात्र, प्रवेश मुफ्त

Yashwant Singh : बस दो चार दिन बाद जो आने वाला इतवार है, वह उन लोगों को एक समझ सीख लर्निंग प्रेरणा देगा जो मानते हैं कि वो काबिल हैं लेकिन उनके लिए इस तंत्र में पैसा नहीं है. चाहें आप मीडिया वाले हों या थिएटर वाले, चाहें आप पुलिस की नौकरी करते हों या किसी कारपोरेट कंपनी के मुलाजिम हों… आप सीईओ हों या एक्जीक्यूटिव…. आप जैसे हर उन साथियों को न्योता है जो चाहते हैं कि उनका एक भी पैसा न लगे लेकिन वे अपनी मेधा, समझ, क्रिएशन, मेहनत के बल पर लाखों रुपये कमा सकें.

Yashwant Singh : बस दो चार दिन बाद जो आने वाला इतवार है, वह उन लोगों को एक समझ सीख लर्निंग प्रेरणा देगा जो मानते हैं कि वो काबिल हैं लेकिन उनके लिए इस तंत्र में पैसा नहीं है. चाहें आप मीडिया वाले हों या थिएटर वाले, चाहें आप पुलिस की नौकरी करते हों या किसी कारपोरेट कंपनी के मुलाजिम हों… आप सीईओ हों या एक्जीक्यूटिव…. आप जैसे हर उन साथियों को न्योता है जो चाहते हैं कि उनका एक भी पैसा न लगे लेकिन वे अपनी मेधा, समझ, क्रिएशन, मेहनत के बल पर लाखों रुपये कमा सकें.

जी. ये काम एक छात्र कर रहा है. वह अब अपने घर से पैसे नहीं लेता. वह आईआईटी जैसी बड़ी महंगी पढ़ाई कर रहा है. वह अपने दम पर पढ़ाई करते हुए लाखों रुपये कमा रहा है. वो बालक, वो गुरु, वो होनहार 11 सितंबर को दिन में ठीक एक बजे से कांस्टीट्यूशन क्लब में अपना कोर्स शुरू कर देगा, प्रोजेक्टर पर. आप अगर कागज कलम लेकर नहीं आए, आपने पूरे कोर्स को मन में नहीं उतारा तो आप सच में बहुत कुछ मिस करेंगे.

ऐसा ही एक वर्कशाप मैंने 1100 रुपये लेकर किया था. उसी वर्कशाप को फ्री में भड़ास के आठवें बर्थडे पर एक सफल कामयाब आनलाइन कंटेंट क्रिएटर के जरिए बूझेंगे सीखेंगे सुनेंगे. उस अति प्रतिभाशाली युवक का नाम यहां नहीं लूंगा. वह दिल्ली के लिए रवाना होने की तैयारी में है. टिकट करा लिया है. उससे सीधे आप भड़ास के प्रोग्राम में रुबरु होंगे. तो हे मजीठिया की लड़ाई लड़ रहे भाइयों, अगर इस प्रोग्राम में नहीं आए तो समझिए आप एक बड़ा मौका मिस कर रहे हैं. ये भड़ास मेरा कभी नहीं था. मैं हमेशा क्लर्क रहा हूं. इस भड़ास को किसी चोर संपादक या किसी चोर अफसर या किसी चोर नेता से हमेशा दूर रखा क्योंकि भड़ास चलाने वास्ते ये जिद रही कि अगर चोरकटई करने का मन करेगा तो एक पीआर कंपनी खोल लूंगा. अब तो खोल ही सकता हूं क्योंकि भड़ास के कारण मेरा नाम ग्राम सब हो चुका है. लेकिन नहीं. भड़ास का मूल उद्देश्य डरे कमजोर सोर्स संसाधन विहीन हिंदी भाषियों को उठाना, आत्मविश्वास भरना और टाइट मनुष्य बनाना था, सो वही काम इसके जरिए चलेगा.

आप का आना प्रार्थनीय है. भीड़ ज्यादा मौके पर हो जाए तो आप दीवाल से सटकर खड़े होकर सुनें, गुनें. ये आपका कार्यक्रम है, ये आपके लिए मौका है. इस मौके पर ऐसे किसी शख्स को नहीं बुलाया जा रहा है जो सौदेबाज या दलाल या चोरकट या नेता हो. उम्मीद करता हूं आप लोगों तक मेरी बात पहुंच पा रही होगी. जै जै

भड़ास के एडिटर यशवंत सिंह की एफबी वॉल से.

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