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सुख-दुख

उमेश उपाध्याय का यूं चले जाना : न सोना काम आएगा न चांदी आएगी, सजधज के जिस दिन मौत की शहजादी आएगी…

यशवंत सिंह-

उमेश उपाध्याय बड़े पत्रकार थे. बड़े मतलब पद पैसा प्रतिष्ठा पावर से बड़े. वे रिलायंस ग्रुप में प्रेसीडेंट थे. इस ग्रुप के मीडिया चैनल नेटवर्क18 के सर्वेसर्वा रहे. इसके अलावा वो कई बड़े चैनलों अखबारों में बड़े पदों पर रहे. सत्ता में उनकी अच्छी पैठ थी. सारा कुछ था उनके पास. लेकिन उन्हें नहीं पता था मौत उनका पीछा कर रही है. दबे पांव. वो अपने बड़े मकान को और ज्यादा बड़ा बना रहे थे. इसी को देखने के दौरान वह छत से गिर पड़े. सिर में गंभीर चोट लगी और चल बसे.

सबक ये है कि ज्यादा हाय हाय करने की जरूरत नहीं है. जीने खाने पर कमाइए और मस्त रहिए. कमाने बनाने फैलाने की हवस का अंत नहीं है. वरिष्ठ पत्रकार पुष्प रंजन, जो कि उमेश उपाध्याय जी के साथ जेएनयू में पढ़े हैं, उनकी पोस्ट देखें-

Pushp Ranjan-

हम सब सहपाठी थे जेएनयू के. वैचारिक रूप से दो ध्रुवों पर, लेकिन व्यवहार में कभी कोई फ़र्क़ नहीं आया. साउथ एक्स में ज़ी न्यूज़ की शुरुआत हुई. पहली पारी खेलते समय उमेश अपने दफ्तर ले आया था. फिर, कुछेक वर्षों के अन्तराल पर हम मिलते रहे. उसकी मुस्कराहट में संजीदगी झलकती थी.

टीवी इंडस्ट्री में सारे एंकर अग्रेसिव हों, ज़रूरी नहीं. उदाहरण के रूप में जो चंद चेहरे हो सकते हैं, या थे, उनमें डॉ. प्रणय रॉय, विनोद दुआ, रजत शर्मा और उमेश उपाध्याय को Acknowledge किया जाना चाहिए .

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के दिन उसकी 64 वीं वर्षगांठ थी. फोन पर मैंने बधाई दी, और मिलने का वादा था. लेकिन अब क्या? किसी कॉमन मित्र से खबर मिली कि दिल्ली के अपने मकान में विस्तारित निर्माण कार्य कराने के दौरान छत से गिर पड़ा था. सिर में लगी गंभीर चोट ने उमेश उपाध्याय की जीवन यात्रा रोक दी.

अलविदा उमेश उपाध्याय !


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1 Comment

1 Comment

  1. आचार्य विष्णु श्रीहरि

    September 3, 2024 at 4:10 pm

    कोई इस आदमी को करोड़पति कहता है तो कोई अरबपति। पर अथाह धन का मालिक तो यह आदमी था ही।उमेश उपाध्याय अंबानी के घर में पीआरओ भी थे। इनके बारे में विरोधाभाषी बातें सामने आ रही है। कोई कहता है कि प्रथम कोटि के पत्रकार थे। कोई अच्छा पत्रकार किसी व्यापारी के घर चाकरी कभी नहीं करेगा। सच क्या है?

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