महेश झालानी-
जयपुर में वरिष्ठ आईएएस अधिकारी शिखर अग्रवाल प्रकरण और ‘अनंता’ रिसॉर्ट्स समूह को संचालित करने वाली कंपनी गोयल फैशन्स प्राइवेट लिमिटेड से जुड़ी परतें खुलने के बाद राजस्थान का रियल एस्टेट और प्रशासनिक अमला एक अभूतपूर्व भूचाल का सामना कर रहा है। इस विवाद ने न केवल नौकरशाही और बिल्डरों के बीच वर्षों से चल रही सांठगांठ की पोल खोल दी है, बल्कि राज्य के कई नामचीन रियल एस्टेट समूहों को सीधे दिवालियेपन के कगार पर लाकर खड़ा कर दिया है।
प्रशासनिक गलियारों और सूत्रों से मिल रही पुख्ता जानकारियों के अनुसार, अनंता समूह का संचालन करने वाली कंपनी गोयल फैशन्स प्राइवेट लिमिटेड में विभिन्न आला अफसरों का 200 करोड़ रुपये से अधिक का भारी-भरकम निवेश फंसा हुआ है। यह निवेश सस्ती दरों पर विला या कॉटेज का झांसा देकर और लीज-बैक के जरिए भारी सालाना रिटर्न के लालच में कराया गया था। मामला सिर्फ यहीं तक सीमित नहीं है, इसके अतिरिक्त जयपुर के एक अन्य बड़े और नामचीन बिल्डर के यहां विभिन्न नौकरशाहों और पुलिस अधिकारियों का 1000 करोड़ रुपये से ज्यादा का गुप्त और बेनामी फंड फंसा होने की खबरें हैं, जिसने पूरी ब्यूरोक्रेसी की नींद उड़ा रखी है।
शिखर अग्रवाल के मामले के तूल पकड़ने और प्रशासनिक कार्रवाई के बाद से अधिकारियों में अपनी काली कमाई को सुरक्षित निकालने की होड़ सी मच गई है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और आयकर विभाग की संभावित एंट्री के खौफ से दर्जनों अधिकारियों ने बिल्डरों पर अपना प्रिंसिपल अमाउंट और रिटर्न तुरंत लौटाने का भारी दबाव बनाना शुरू कर दिया है। लेकिन बिल्डरों के सामने इस समय अस्तित्व का संकट खड़ा हो गया है। रियल एस्टेट कारोबार का पूरा ढांचा लैंड बैंक, जमीनों की खरीद और अंडर-कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट्स पर टिका होता है, जहां नकदी हमेशा ब्लॉक रहती है।
यदि बिल्डर इस नाजुक वक्त में अफसरों का यह 1200 करोड़ से अधिक का फंड अचानक वापस लौटा देते हैं, तो उनके तमाम चालू प्रोजेक्ट एक झटके में ठप्प हो जाएंगे। इसी मजबूरी और आर्थिक तंगी के खौफ के चलते बड़े बिल्डरों के बीच भारी पैनिक और भय का माहौल बना हुआ है। जैसे-जैसे इस पूरे प्रकरण की कड़ियां जुड़ रही हैं, जयपुर के सबसे महंगे और प्रीमियम इलाकों में अफसरों द्वारा खड़ी की गई बेनामी संपत्तियों का कच्चा चिट्ठा बाहर आने लगा है। जयपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) में अहम पदों पर अपनी सेवाएं दे चुके एक रसूखदार पूर्व अधिकारी के पास मेन अजमेर रोड पर लगभग 4,000 वर्ग गज का एक विशाल कमर्शियल प्लॉट होने की बात सामने आई है, जिसकी मौजूदा बाजार कीमत 100 करोड़ रुपये से भी अधिक आंकी जा रही है।
इसके अलावा जेडीए आयुक्त रहे एक अधिकारी भी जवाहर सर्किल के पास स्थित अपनी जमीन से छुटकारा पाना चाहते है । इस जमीन की कीमत 120 करोड़ बताई जाती है । दलालो के बीच यह सौदा तेजी से मूवमेंट में है । सिर्फ अजमेर रोड ही नहीं, बल्कि कालवाड़ रोड, वैशाली नगर एक्सटेंशन और शहर के अन्य तेजी से विकसित हो रहे इलाकों में भी कई अन्य अधिकारियों के भारी बेनामी निवेश की जानकारियां धीरे-धीरे उजागर हो रही हैं। यदि इस मामले में आयकर विभाग और ईडी की एंट्री हो गई, तो कई बड़े अफसरों का पर्दाफाश होना तय माना जा रहा है।

