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मोदीजी ने जिस सुभाष चंद्रा की प्रशंसा की थी, वो नटवरलाल निकला, 1,322 करोड़ की ऋण धोखाधड़ी का आरोप!

Two men in light vests exchange a document in a formal room with a wood-paneled wall behind them.

पुष्प रंजन-

अब मालूम नहीं, मोदीजी से क्या अनबन हुई, सुभाष चंद्रा के बुरे दिन शुरू हो गए. 13 अप्रैल 2017 को मोदी जी ने इनकी त्याग-तपस्या के लिए ताली बजाई थी. डॉ. चंद्रा ने 24 मार्च 2017 को घोषणा की थी कि हरियाणा से राज्यसभा के एक स्वतंत्र सदस्य के रूप में, हम अपने वेतन के तौर पर हर महीने केवल 1 रुपया लेंगे और बाकी बची हुई पूरी रकम प्रधानमंत्री राहत कोष (PM’s Relief Fund) में दान कर देंगे। ऐसे “त्यागी पुरुष” को इस बार ईडी ने धर दबोचा है.

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड से 1,322 करोड़ रुपये की कथित ऋण धोखाधड़ी के संबंध में मीडिया कारोबारी सुभाष चंद्रा के खिलाफ मनी लांड्रिंग का मामला दर्ज किया है। चंद्रा पर आरोप है कि उन्होंने लाइफ इंश्योरेंस कॉरपोरेशन हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड (LICHFL) से ऋण लेने के लिए अपनी कुल संपत्ति बढ़ा-चढ़ाकर दिखाई और बाद में ऋण चुकाने में चूक की। अधिकारियों ने बताया कि केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की प्राथमिकी का संज्ञान लेते हुए धनशोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत यह मामला दर्ज किया गया है।

चंद्रा की ओर से इस मामले में अभी प्रतिक्रिया नहीं मिली है। CBI ने इससे पहले LICHFL की शिकायत के आधार पर मामला दर्ज किया था। इसी के आधार पर ED ने मनीलांड्रिंग का मामला दर्ज किया है। CBI की प्राथमिकी में शामिल अपनी शिकायत में LICHFL ने आरोप लगाया कि चंद्रा ने दो ऋणों की मंजूरी और राशि जारी कराने के लिए अपनी कुल संपत्ति से जुड़े प्रमाणपत्र जमा किए थे। इन दोनों ऋणों की कुल राशि 980 करोड़ रुपये थी।

LICHFL ने अगस्त में दर्ज अपनी शिकायत में कहा था कि इन ऋणों के भुगतान में चूक के कारण उसे 1,322 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। LICHFL उन ऋणदाताओं में शामिल था, जिन्होंने राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (NCLAT) का रुख कर हाल में राष्ट्रीय कंपनी विधि अधिकरण (एनसीएलटी) की ओर से मंजूर उस पुनर्भुगतान योजना का विरोध किया था, जिसके तहत चंद्रा की निजी संपत्ति से करीब 22,006 करोड़ रुपये के दावों के मुकाबले लेनदारों को केवल लगभग 6.5 करोड़ रुपये ही मिल सकते हैं।

शिकायत में 500 करोड़ रुपये की उस ऋण सुविधा का जिक्र है, जो वसंत सागर प्रॉपर्टीज प्राइवेट लिमिटेड को दी गई थी। पैन इंडिया इंफ्रा प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड इस ऋण में सह-ऋणकर्ता थी। इसके अलावा, डिजिटल सब्सक्राइबर मैनेजमेंट एंड कंसल्टेंसी सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड को दी गई 480 करोड़ रुपये की ऋण सुविधा भी शिकायत का हिस्सा है, जिसमें स्पिरिट इंफ्रा पावर एंड मल्टी वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड सह-ऋणकर्ता थी।

ऋणदाता के अनुसार, चंद्रा ने अपनी कुल संपत्ति का जो प्रमाणपत्र जमा किया था, उसे डीजेएम एंड कंपनी ने 28 मार्च, 2018 को जारी किया था। इसमें उनकी कुल संपत्ति करीब 59,000 करोड़ रुपये बताई गई थी। LICHFL ने कहा कि डिजिटल ऋण सुविधा की मंजूरी आंशिक रूप से चंद्रा की ओर से जमा किए गए कुल संपत्ति के एक अन्य प्रमाणपत्र पर आधारित थी।

यह प्रमाणपत्र चार्टर्ड अकाउंटेंट कंपनी एमपीजे एंड कंपनी ने छह जुलाई, 2018 को जारी किया था। इसमें चंद्रा की कुल संपत्ति 40,562 करोड़ रुपये बताई गई थी। LICHFL के अनुसार, बाद में दोनों ऋणों के भुगतान में चूक हुई। CBI की शिकायत में कहा गया है कि दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता, 2016 के तहत बाद में हुई कार्यवाही के दौरान चंद्रा ने LICHFL को सौंपे गए प्रमाणपत्रों में बताई गई अपनी कुल संपत्ति से इनकार किया था।

प्राथमिकी के अनुसार, इन कार्यवाहियों के दौरान कारोबारी ने 2024 में अपनी कुल संपत्ति 31.79 करोड़ रुपये और 2017-18 में अधिकतम 40,000 करोड़ रुपये बताई थी। प्राथमिकी में आरोप लगाया गया है, “सुभाष चंद्रा ने ऋण लेने वाली कंपनियों वसंत सागर प्रॉपर्टीज प्राइवेट लिमिटेड, पैन इंडिया इंफ्राप्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड, डिजिटल सब्सक्राइबर मैनेजमेंट एंड कंसल्टेंसी सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड और स्पिरिट इंफ्रापावर एंड मल्टीवेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड तथा उनके अधिकारियों और निदेशकों के साथ मिलीभगत कर LICHFL को धोखा दिया और उससे इन कंपनियों को ऋण दिलवाया। इन कंपनियों ने बाद में ऋण की राशि का दुरुपयोग किया।”

प्राथमिकी में राज्यसभा के पूर्व सदस्य पर आरोप लगाया गया है कि उन्होंने अपनी कुल संपत्ति बढ़ा-चढ़ाकर दिखाने और LICHFL को मुख्य ऋण लेने वाली कंपनियों को धन जारी करने के लिए राजी करने के मकसद से फर्जी दस्तावेज तैयार किए थे।

वैसे, कमाल का कैरेक्टर है सुभाष चंद्रा. 10वीं के बाद आगे की पढ़ाई नहीं हो पाई. फिर एक दिन अचानक ख़बर मिली कि एस्सेल ग्रुप और ज़ी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड के चेयरमैन सुभाष चंद्रा (गोयल) को यूनिवर्सिटी ऑफ ईस्ट लंदन (UEL) से बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन में मानद डॉक्टरेट की उपाधि मिली है। यह उपाधि उन्हें साल 2013 में यूनिवर्सिटी के रॉयल डॉक बिजनेस स्कूल के दीक्षांत समारोह में नए व्यवसायों को शुरू करने और उन्हें सफल बनाने की उनकी क्षमता के सम्मान में प्रदान की गई थी। पैसा है, और आदमी रैकेटियर है, तो सबकुछ संभव है.

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