नरेंद्र प्रताप-
दिल्ली पुलिस के खिलाफ इंकलाब का बिगुल फूंकने वाले Delhi Police के ACP मनस्वी वशिष्ठ को सस्पैंड कर दिया गया है. ACP मनस्वी ने कल दिल्ली पुलिस के खिलाफ 11 घंटे हुए प्रोटेस्ट को लीड किया था.
यहां तक तो ठीक था लेकिन ACP ने इस दौरान नेताओं की जुबान में वकीलों को “काले कोट वाले गुंडे” कहा था.
वकील का विरोध आज सड़कों पर आता उससे पहले ही दिल्ली पुलिस ने डेमेज कंट्रोल कर लिया है.
हर्ष कुमार-
प्रदर्शन करने वाले एसीपी को सस्पेंड किया
तीस हजारी कोर्ट परिसर में वकीलों द्वारा पुलिसकर्मियों पर किए गए हिंसक हमले, आला अधिकारियों के एकतरफा तबादलों और प्रदर्शन में शामिल एक सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी) के निलंबन से आहत दिल्ली पुलिस के जवानों ने पुलिस मुख्यालय (आईटीओ) के बाहर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। दिन-रात जनता की सुरक्षा में मुस्तैद रहने वाले जवानों ने शांतिपूर्ण ढंग से हाथों में तख्तियां लेकर अनुशासन के दायरे में अपनी आवाज बुलंद की। वर्दीधारी जवानों का कहना था कि ड्यूटी के दौरान वकीलों की उग्र भीड़ ने न केवल महिला अधिकारियों के साथ बदसलूकी व मारपीट की, बल्कि पुलिस वाहनों को भी आग के हवाले कर दिया। इसके बावजूद हमलावरों पर सख्त कार्रवाई करने के बजाय अपने ही अफसरों का ट्रांसफर करने और जवानों के हक में खड़े हुए एसीपी को ही निलंबित कर देने से पूरे महकमे का मनोबल बुरी तरह टूटा है।
प्रदर्शनकारी पुलिसकर्मियों ने साफ किया कि कोर्ट परिसर में पार्किंग को लेकर हुआ मामूली विवाद वकीलों की आक्रामकता की वजह से हिंसक टकराव में बदल गया था। इसके कई वीडियो भी सामने आए हैं, जिनमें वकील खुलेआम पुलिसकर्मियों को घेरकर पीटते और वाहनों में तोड़फोड़ करते दिख रहे हैं। यहां तक कि ड्यूटी पर तैनात निहत्थे जवानों को भी बेरहमी से पीटा गया। जवानों का आरोप है कि बिना किसी निष्पक्ष जांच के केवल वकीलों के एकतरफा दबाव में आकर अधिकारियों का तबादला किया गया और विरोध दर्ज कराने वाले एसीपी को सीधे सस्पेंड कर बलि का बकरा बना दिया गया। अपनी रक्षा करना, उपद्रवियों को रोकना और अपने सहकर्मियों के सम्मान के लिए शांतिपूर्ण बात रखना कोई अपराध नहीं है, लेकिन विभाग ने पुलिसकर्मियों की ही आवाज को दबाने की कोशिश की है।
मुख्यालय के बाहर घंटों चले इस ऐतिहासिक प्रदर्शन में पुलिसकर्मियों ने मांग की कि साथी पुलिसकर्मियों पर जानलेवा हमला करने वाले वकीलों की पहचान कर उन पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए, अफसरों के तबादले रोके जाएं और एसीपी का निलंबन आदेश तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाए। जवानों ने उपराज्यपाल और गृह मंत्रालय से न्याय की गुहार लगाते हुए कहा कि देश की सबसे अनुशासित पुलिस फोर्स को राजनीतिक और अदालती दबाव में झुकने पर मजबूर न किया जाए। वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा निष्पक्ष जांच, निलंबित एसीपी के मामले की समीक्षा और हर हाल में पुलिसकर्मियों की गरिमा व कानूनी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिखित आश्वासन के बाद ही जवानों ने अपना धरना समाप्त किया।
दिल्ली पुलिस में नाराजगी के बीच CP का बड़ा कदम, जवानों की शिकायतें सुनीं!
दिल्ली पुलिस मुख्यालय (PHQ) में 2 नवंबर 2026 को पुलिस कमिश्नर और वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में Sampark Sabha आयोजित की गई। इसमें अलग-अलग रैंक के पुलिसकर्मियों ने वर्दी के सम्मान, पुलिस फोर्स की गरिमा और अपनी सेवा से जुड़ी समस्याएं उठाईं।
पुलिस कमिश्नर ने जवानों की शिकायतें ध्यान से सुनीं और उचित कार्रवाई का भरोसा दिया। Promotion, MACP, Housing और अन्य सेवा संबंधी मुद्दों पर भी ध्यान देने की बात कही गई। पुलिस और वकीलों के बीच ड्यूटी के दौरान होने वाले विवादों को सुलझाने के लिए Bar Association और Bar Council के प्रतिनिधियों के साथ Joint Coordination Committee बनाने का फैसला भी हुआ।
-चिराग गोठी



