पत्रकार जगेंद्र हत्याकांड पर मुख्यमंत्री अखिलेश को बोलना पड़ा- ‘किसी के साथ अन्याय नहीं होने देंगे’

उत्तर प्रदेश में पत्रकार को जलाकर मारने के मामले में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को बोलना पड़ गया. एक पत्रकार के सवाल पर उन्होंने कहा कि उनकी सरकार किसी के साथ अन्याय नहीं होने देगी. बहराइच में अखिलेश ने संवाददाताओं से बातचीत में आरोपी मंत्रियों राममूर्ति वर्मा और कैलाश चौरसिया के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं किये जाने सम्बन्धी सवाल पर कहा, ‘समाजवादी हमेशा अन्याय के खिलाफ लड़े हैं. मैं भरोसा दिला सकता हूं कि हम किसी के प्रति अन्याय नहीं होने देंगे.’

मुख्यमंत्री का यह बयान उनके चाचा और वरिष्ठ काबीना मंत्री शिवपाल सिंह यादव के उस दो टूक जवाब के बाद आया है जिसमें उन्होंने कहा था कि जांच पूरी हुए बगैर किसी भी मंत्री को नहीं हटाया जाएगा. प्रदेश के पिछड़ा वर्ग कल्याण राज्यमंत्री राममूर्ति वर्मा के खिलाफ गत नौ जून को शाहजहांपुर में एक पत्रकार को कथित तौर पर जलाकर मार डालने के आरोप में नामजद मुकदमा दर्ज है, जबकि बाल विकास एवं पुष्टाहार राज्यमंत्री कैलाश चौरसिया पर मिर्जापुर में सहायक सम्भागीय परिवहन अधिकारी से कथित मारपीट करने का इल्जाम लगा है.

पत्रकार को जलाकर मार डालने के आरोपी राज्यमंत्री राममूर्ति वर्मा को हटाये जाने की पुरजोर मांगों के बीच सरकार लोकनिर्माण मंत्री शिवपाल सिंह यादव ने सोमवार लखनऊ में कहा था कि ‘जांच पूरी हुए बगैर किसी मंत्री को नहीं हटाया जाएगा.’

यादव ने राज्यमंत्री को पद से ना हटाने के सरकार के निर्णय का बचाव करते हुए दलील दी थी कि पूर्व में भी मंत्रियों पर आरोप लगाये जा चुके हैं, लेकिन जांच में वे बेदाग साबित हुए. शाहजहांपुर में पत्रकार जगेन्द्र को जलाकर मार डालने के मामले में राज्यमंत्री वर्मा समेत छह अभियुक्तों के खिलाफ गत नौ जून को मुकदमा दर्ज किया गया था. पीड़ित परिवार और विभिन्न विपक्षी दल वर्मा को मंत्रिमण्डल से बर्खास्त करके गिरफ्तार करने की मांग कर रहे हैं,

परिवार का आरोप है कि जिले में अवैध खनन और अन्य भ्रष्टाचार के मामलों को उजागर करने पर राज्यमंत्री जगेन्द्र से नाराज थे, इसीलिये उन्होंने उसकी हत्या करवा दी. पत्रकार की हत्या के खिलाफ पत्रकार संगठनों के साथ-साथ राजनीतिक दलों तथा सामाजिक संगठनों ने भी जोरदार आवाज उठायी है. अमेरिकी पत्रकारों के एक संगठन ने भी इस मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है. मामले की सीबीआई जांच कराने की मांग को लेकर इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ में एक याचिका भी दायर की गयी है.



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