अमित शाह तो प्रायश्चित की मुद्रा में आ गए!

Lal Bahadur Singh : “गोली मारो”, “भारत पाकिस्तान मैच” आदि बोलना ठीक नहीं था। शायद हार का यह भी कारण था। -अमित शाह

यदि यह महज बलि के बकरों की तलाश नहीं है, वरन serious realisation है तो क्या इसकी तार्किक परिणति NRC-NPR-CAA पर सरकार के tactical retreat में होगी?

क्योंकि मामला केवल कुछ बयानों का नहीं था (जिसमें अमित शाह का अपना शाहीन बाग़ को करंट लगाने वाला बयान भी शामिल था)।

ये बयान तो CAA-NRC-NPR के खिलाफ शाहीन बाग़ व देश के अन्य हिस्सों में उभरते आंदोलनों को बदनाम करने और उनके खिलाफ उन्माद भड़काने के पूरे पैकेज का ही हिस्सा और follow up थे।

Yusuf Kirmani : मगरूर शख्स के मुंह से….निकला… मुबारक… शाहीनबाग ने आज देश के गृहमंत्री अमित शाह को अपने बयान पर लीपापोती और झुकने पर मजबूर किया।

अमित शाह ने एक टीवी चैनल के कार्यक्रम में कहा कि गोली मारो और भारत पाकिस्तान मैच जैसे बयान गैर जरूरी थे। वो बयान नहीं दिए जाने चाहिए थे। हो सकता है कि भाजपा को पार्टी नेताओं के घृणास्पद बयानों का नुकसान हुआ हो। पार्टी ने इसीलिए उनसे खुद को दूर कर लिया है। लेकिन वो इस बात से मुकर गए कि शाहीनबाग में करंट लगने वाली बात उन्होंने वहाँ के संदर्भ में कही थी।

…अमित शाह ने यह भी कहा कि दिल्ली चुनाव को लेकर मेरा आकलन गलत साबित हुआ। वो शाहीनबाग में बैठे लोगों से मिलने और बात करने को तैयार हैं। वो सीएए-एनआरसी और एनपीआर पर भी बात करने को तैयार हैं। कोई भी गृह मंत्रालय से समय ले, तीन दिन में समय मिल जाएगा और मुलाकात हो जाएगी।

शाहीनबाग पर इस तरह का बयान पहली बार देश के सबसे मगरूर शख्स के मुंह से आया है। लेकिन रस्सी की ऐंठन अभी खत्म नहीं हुई है। क्योंकि जिन प्रवेश वर्मा, अनुराग ठाकुर, कपिल मिश्रा ने शाहीनबाग पर जो बेहूदे बयान दिए थे, वे उनके अपने बयान नहीं थे बल्कि उन बयानों को आरएसएस के मुखौटों ने इन सड़कछाप नेताओं से दिलवाया था।

इतनी बुरी तरह चुनाव हारने के बावजूद भाजपा के कुछ नेताओं के बेहूदा बयानों का सिलसिला जारी है। बहरहाल, आज का घटनाक्रम बता रहा है कि शाहीनबाग अब इस देश की सरकार को परेशान कर रहे हैं। …हमें अपने मुद्दे पर डटे रहना है। यकीनन हम जीत की तरफ बढ़ रहे हैं।

राजनीतिक चिंतक लाल बहादुर सिंह और पत्रकार युसूफ किरमानी की एफबी वॉल से.

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