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अमिताभ ने किसान चैनल से पैसे नहीं लिए तो करोड़ों रुपये कौन डकार गया?

Samarendra Singh : ‘किसान’ चैनल से पैसे नहीं लेकर अमिताभ बच्चन ने अपना मान बढ़ाया है. उनके जैसे किसी भी बड़े आदमी से इसी तरह के व्यवहार की उम्मीद की जाती है. अमिताभ बच्चन पहले से ही इतने ऊंचे मुकाम पर हैं कि वहां पहुंचना किसी फिल्मी सितारे के बस की बात नहीं. और आज इस फैसले से बिग बी का कद और अधिक बढ़ा है. अब यह पता चलना चाहिए कि बिग बी ने पैसे नहीं लिए तो लिंटास ने उनके नाम पर पैसे कैसे लिए?

<p>Samarendra Singh : 'किसान' चैनल से पैसे नहीं लेकर अमिताभ बच्चन ने अपना मान बढ़ाया है. उनके जैसे किसी भी बड़े आदमी से इसी तरह के व्यवहार की उम्मीद की जाती है. अमिताभ बच्चन पहले से ही इतने ऊंचे मुकाम पर हैं कि वहां पहुंचना किसी फिल्मी सितारे के बस की बात नहीं. और आज इस फैसले से बिग बी का कद और अधिक बढ़ा है. अब यह पता चलना चाहिए कि बिग बी ने पैसे नहीं लिए तो लिंटास ने उनके नाम पर पैसे कैसे लिए?</p>

Samarendra Singh : ‘किसान’ चैनल से पैसे नहीं लेकर अमिताभ बच्चन ने अपना मान बढ़ाया है. उनके जैसे किसी भी बड़े आदमी से इसी तरह के व्यवहार की उम्मीद की जाती है. अमिताभ बच्चन पहले से ही इतने ऊंचे मुकाम पर हैं कि वहां पहुंचना किसी फिल्मी सितारे के बस की बात नहीं. और आज इस फैसले से बिग बी का कद और अधिक बढ़ा है. अब यह पता चलना चाहिए कि बिग बी ने पैसे नहीं लिए तो लिंटास ने उनके नाम पर पैसे कैसे लिए?

अगर लिंटास और अमिताभ बच्चन के बीच रकम को लेकर कोई औपचारिक करार नहीं हुआ था तो दूरदर्शन ने इतनी बड़ी रकम, वो भी अमिताभ के खाते की रकम लिंटास को किस आधार पर दी? और लिंटास ने किस आधार पर यह राशि स्वीकार की? सवाल यह भी है कि वो दूरदर्शन जो कार्यक्रम बनाने वाली कंपनियों और छोटे प्रोड्यूसरों को एक-डेढ़ लाख रुपये के भुगतान में महीनों लगाता है… उस दूरदर्शन ने इतनी बड़ी रकम पहले ही कैसे जारी कर दी?

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अमिताभ बच्चन का योगदान एक कलाकार की हैसियत से बहुत बड़ा है. समाज और देश के व्यापक मायने होते हैं और सिनेमा इसी समाज और देश का हिस्सा है. भारतीय सिनेमा में अमिताभ का योगदान बहुत ज्यादा है. देश के असंख्य सपनों को उन्होंने विस्तार दिया है. यही वजह है कि हम अमिताभ से एक कलाकार से अधिक की उम्मीद करते हैं. यह उम्मीद करते हैं कि सिनेमा का यह महानायक सिनेमा से बाहर निकल कर कुछ अतिरिक्त योगदान देगा. अतिरिक्त की यह उम्मीद बहुत से लोगों को अमिताभ को लीजेंड मानने से मना करती है. यह उनकी सोच की व्यापकता है और ऐसा सोचने का उन्हें हक है. लेकिन जब देश में ज्यादातर अहम पदों पर बैठे लोग (नेता, अफसर और न्यायाधीश) अपनी तय भूमिका भी सही से नहीं निभा रहे हों वहां अमिताभ को हर बार उन्हीं अतिरिक्त उम्मीदों के आधार पर तोला जाए यह सही नहीं है. वैसे हमारे तोलने और नहीं तोलने से कोई लीजेंड आम नहीं हो जाएगा. अमिताभ बतौर कलाकार एक लीजेंड हैं और रहेंगे. वहां तक पहुंचने में दूसरे अभिनेताओं को जमाना लगेगा.

आखिर में. यह देश किसी तरह मैनेज हो रहा है. अब देखिये मानसून सत्र चल रहा है और संसद मैनेज हो रही है. न्यायाधीश मैनेज हो रहे हैं. गौर से देखिये तो कितना कुछ मैनेज हो रहा है. लगता है सबकुछ मैनेज ही हो रहा है…

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एनडीटीवी में काम कर चुके तेजतर्रार पत्रकार समरेंद्र सिंह के फेसबुक वॉल से.

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